Chandrawati hospital

Chandrawati hospital Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from Chandrawati hospital, Hospital, Agra Road, Shantipuram Colony, Aligarh.

20/10/2025

महालक्ष्मी नमस्तुभ्यं, नमस्तुभ्यं सुरेश्र्वरी ।
हरिप्रिये नमस्तुभ्यं, नमस्तुभ्यं दयानिधे ।।

शुभम करोति कल्याणम,
अरोग्यम धन संपदा,
शत्रु-बुद्धि विनाशायः,
दीपःज्योति नमोस्तुते !

सुख,शान्ति एवम समृद्धि की मंगलमयी कामनाओं के साथ
आप एव आप के परिवार-जनों को दीपावली की हार्दिक मंगल-कामनाएं ।
*।।दीपावली ।।*
की
*।।हार्दिक शुभकामनाएं।।*

🕉🚩

Wish the divine lights of Diwali bring peace, prosperity, health, and love to your life.

All the lights of the world cannot be compared to the to the beauty of the enlightened inner soul. Be healthy, happy and prosperous.

Happy Diwali

Dr KAJAL SINGH
Dr Y K SINGH

*श्रीजनी गर्भ संस्कार ऐंड ऐंटिनेटल केयर*
Shrijani Garbhsanskar & Antenatal Care
Chandrawati hospital Chandrawati hospital
*www.shrijanigarbhsanskar.com*

डॉ. प्रसून वार्ष्णेयMBBS, MS (ENT)(नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ)📍 उपलब्ध स्थान – चंद्रवती हॉस्पिटल , शांति पुरम कालोनी, अल...
19/09/2025

डॉ. प्रसून वार्ष्णेय
MBBS, MS (ENT)
(नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ)

📍 उपलब्ध स्थान – चंद्रवती हॉस्पिटल , शांति पुरम कालोनी, अलीगढ़।
🕑 समय – दोपहर 2:00 बजे से 4:00 बजे तक
परामर्श शुल्क – ₹500

📞 अपॉइंटमेंट हेतु कॉल करें: 73514 73510
(सुबह 10:00 से 12:00 बजे तक कॉल कर अपना अपाइंटमेंट अवश्य ले लें)

विशेषज्ञता
✔ कान के परदे के छेद का ऑपरेशन
✔ नाक की हड्डी बढ़ने का ऑपरेशन
✔ साइनस की समस्या
✔ लंबे समय से छींक आना
✔ गले की किसी भी प्रकार की गांठ
✔ लार ग्रंथि में पथरी

Shrijani Garbhsanskar & Antenatal Care Chandrawati hospital  इस वर्ष लामाज़ (Lamaze) सुरक्षित और आत्मविश्वासी प्रसव को स...
22/08/2025

Shrijani Garbhsanskar & Antenatal Care
Chandrawati hospital
इस वर्ष लामाज़ (Lamaze) सुरक्षित और आत्मविश्वासी प्रसव को साक्ष्य-आधारित शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ाने की अपनी 65वीं वर्षगाँठ मना रहा है। इस वैश्विक Lamaze Certified Childbirth Educators (LCCE) समुदाय का हिस्सा होने पर मुझे गर्व है। मेरी व्यक्तिगत यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव वर्ष 2018 में आया, जब मैं एक Lamaze Certified Childbirth Educator (LCCE) बनी।

एक आयुर्वेद चिकित्सक होने के नाते मुझे पहले से ही वेदों के गर्भसंस्कार संबंधी ज्ञान-जो आयुर्वेद में प्रसव-पूर्व एवं प्रसव-परांत समग्र दृष्टिकोण है-का लाभ मिला। इसी प्रेरणा से, मैंने अपनी पहली गर्भावस्था शिक्षा कक्षा (pregnancy care session) 2009 में आयोजित की, उस समय जब मैं अभी भी सीख रही थी और मेरे पास औपचारिक LAMAZE प्रमाणन नहीं था।

मेरी औपचारिक लामाज़ यात्रा 2017 में हैदराबाद के Healthy Mother Wellness & Care में आयोजित Educators Workshop से शुरू हुई, और 2018 में मैंने प्रथम प्रयास में ही गर्व के साथ LCCE प्रमाणन प्राप्त किया। हालाँकि मैं पहले से ही आयुर्वेद स्त्रीरोग विशेषज्ञ और गर्भ संस्कार परामर्श दाता के रूप में कार्यरत थी, लेकिन लामाज़ ने मुझे केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि मान्यता और आत्मविश्वास भी दिया, जिससे माताओं और परिवारों के लिए मेरी एडवोकेसी पक्ष समर्थन की भावना और मजबूत हुई।

इन वर्षों में मैंने यह सीखा है कि प्रसव का अनुभव हर परिवार के लिए अलग होता है, लेकिन हर माँ का सबसे बड़ा अधिकार है-जानकारीपूर्ण निर्णय लेने का अवसर।

आज मैं दृढ़ विश्वास के साथ कहती हूँ कि सही ज्ञान, सम्मानजनक स्वास्थ्यसेवा और सहयोगी वातावरण प्रसव को केवल एक जैविक घटना न बनाकर, बल्कि माँ और शिशु दोनों के लिए एक सुरक्षित, गरिमामय और सशक्त अनुभव बना सकते हैं।
हर फर्टिलिटी जर्नी, हर प्रेगनेंसी केयर और हर स्वस्थ प्रसव प्रबंधन…
मेरे लिए सिर्फ एक मेडिकल प्रोसेस नहीं, बल्कि
मरीज़ के साथ जुड़ाव और सेवा का नया अनुभव है,
और संवेदनशीलता की पाठशाला है,
जो मेरी चिकित्सकीय पहचान को और मजबूत करता है
और मुझे हर दिन और बेहतर बनने की प्रेरणा देता है। 💫

🤰💖 मां बनने की यात्रा में साथ होना, मेरे लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है।



इस वैश्विक LCCE समुदाय का हिस्सा होने पर गर्व है!

धन्यवाद और 65वीं वर्षगाँठ की हार्दिक शुभकामनाएँ

मेरी मार्गदर्शिका Vijaya Krishnan मैम को हृदय से आभार

डॉ काजल सिंह
www.shrijanigarbhsanskar.com

20/08/2025


21 August 2025
Pushya Nakshatra

Reference of Swarnaprashan:
सुवर्णप्राशनं हि एतत् मेधाग्नि बल वर्धनम् । आयुष्यं मंगलं पुण्यं वृष्यं ग्रहापहम् ॥

मासात् परम मेधावी व्याधिभिर्न च दृश्यते । षड्भि मासेः श्रुतधर सुवर्ण प्राशनात् भवेत् ॥ (काश्यप संहिता. सूत्रस्थानम् 18/4-5)
💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧
*21 August 2025- अपने बच्चों को स्वर्ण प्राशन अवश्य दें*
*स्वर्ण प्राशन* है ----
*बच्चों के उज्जवल भविष्य निर्माण में आयुर्वेद का वरदान*।
बच्चों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी बढ़ाने में लाभदायक

जन्म के छ महीने से 16 वर्ष तक की आयु के बच्चो के लिए।
🔸आयुर्वेद के ऋषि मुनियों द्वारा वर्णित अद्भुत योग जो बच्चो की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढाता है साथ ही सर्वांगीण विकास करता है।
🔸बच्चो में सुनने,समझने,बोलने आदि शक्तियों का विकास करता है।
🔸बच्चो को सर्दी,झुखाम,मोसमी बीमारियों से बचाता है।
🔸बच्चों की पाचन क्रिया को सम्यक करने में सहायक।
🔸एंटीबायोटिक्स से होने वाले दुष्परिणाम से भी बचाता है।
🔸बच्चो की स्मरण शक्ति तथा बुद्धि के विकास को गति प्रदान करता है।
🔸बच्चे को श्रुत्धर (सुनकर याद रखने वाला) बनाता है।
🔸शुद्ध स्वर्ण के साथ गोघृत, शहद, अश्वगंधा, ब्राह्मी, वचा, गिलोय, शंखपुष्पी आदि जैसी अद्भुत औषधियों से निर्मित होती है।

*चिकित्सकीय परामर्श लेकर स्वर्ण प्राशन शुरू कराएं*।
Consult your Ayurvedic Physician to know the dose required for your child .

डॉ काजल सिंह

Swarnaprashan Drops
available at
Drug Shop
Chandrawati hospital
Agra road,Vikas Nagar, Aligarh

www.shrijanigarbhsanskar.com
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♦️♦️♦️रैबीज ♦️♦️♦️    विस्तृत जानकारी  रेबीज का नाम आपने सुना ही होगा। ✔️यह उष्ण रक्त जानवरों के काटने से होने वाली एक ब...
17/08/2025

♦️♦️♦️रैबीज ♦️♦️♦️
विस्तृत जानकारी

रेबीज का नाम आपने सुना ही होगा।
✔️यह उष्ण रक्त जानवरों के काटने से होने वाली एक बीमारी है जिसके होने पर मृत्यु की सम्भावना लगभग 100% है।
भारत में हर साल 1 करोड़ 70 लाख लोगों को जानवरों (कुत्ते, बिल्ली, गीदड़, लोमड़ी, भेड़िया, चमगादड़ आदि) के द्वारा काटा जाता है और लगभग 18 से 20 हजार लोगों को रेबीज की बीमारी हो कर उनकी मृत्यु हो जाती है। इसमें सबसे ज्यादा अफ़सोसजनक बात ये है कि इन सभी मौतों को रोका जा सकता है लेकिन ये रुक नहीं पा रही हैं।

✔️इससे कैसे बचा जा सकता है?
इसके लिये सबसे पहले हम रेबीज के बारे में थोड़ी सी बेसिक जानकारी हासिल करेंगे।

सबसे पहले तो यही कि रेबीज क्या है?

यह एक वायरल इन्फेक्शन जनित रोग है जो♦️ Lyssavirus ♦️नामक एक वायरस से होता है। यह वायरस ♦️संक्रमित जानवरों की लार में ♦️पाया जाता है। इन जानवरों, विशेषकर कुत्ते के द्वारा काटने या खरोंच मारने पर यह वायरस उसकी लार के द्वारा व्यक्ति के शरीर में प्रविष्ट कर जाता है। अब इसके बाद अगर समय रहते इसका मुकम्मल इलाज न किया जाये तो यह शर्तिया मृत्यु का कारण बनता है। भारत में 95% केस संक्रमित कुत्ते के काटने से होते हैं।

इस संक्रमण की विशेषता होती है कि यह काटे जाने के बाद जब हमारे शरीर में प्रवेश करता है तो यह हमारे ♦️रक्त में नहीं जाता बल्कि तंत्रिकाओं के माध्यम से केंद्रीय तंत्रिका तंत्र यानी मस्तिष्क तक पहुँचता है।♦️ काटे गये अंग से केंद्रीय तंत्रिका तंत्र तक इसके पहुँचने की गति बहुत ही कम होती है और टांग या हाथ पर काटने के बाद मस्तिष्क तक पहुंचने में इसे लगभग 20 से अधिक दिन लग जाते हैं। हाँ अगर पीड़ित व्यक्ति बच्चा है या फिर चेहरे, सर या गर्दन पर काटा है तो 4 से 7 दिन में भी पहुँच सकता है। सामान्यतः काटने के बाद मस्तिष्क तक पहुंच कर बीमारी होने में 1 से 3 महीने लगते हैं। कुछ दुर्लभ केसों में 1 वर्ष भी लग जाता है। यह निर्भर करता है कि कहाँ पर काटा है (चेहरा या हाथ-पैर), कितना बड़ा घाव है, कितना वायरस अंदर गया है और व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर।

♦️लेकिन एक बार यह मस्तिष्क तक पहुंच गया तो इसके लक्षण शुरू हो जाते हैं। फिर इसका कोई इलाज नहीं है♦️।

✔️तो इसके लक्षण क्या हैं?

सबसे पहले तो प्रारंभिक लक्षण आएंगे।
➕बुखार, थकान, काटे गये स्थान पर जलन, सनसनाहट, खुजली आदि।
➕फिर इसका उग्र यानी Furious रूप आयेगा। जिसमें पानी से डर लगना, हवा से डर लगना, रोशनी से डर लगना, घबराहट, भ्रम, चिल्लाना, अत्यधिक लार बनना आदि होने लगेंगे।
➕फिर मांसपेशियों में कमजोरी और उसके बाद पक्षाघात यानी लकवा आना शुरू हो जायेगा। अंत में मृत्यु।

✔️इलाज क्या है?
♦️बीमारी होने के बाद कोई मुकम्मल इलाज नहीं है♦️।
निदान सामान्यतः लक्षणों के आधार पर किया जाता है।

✔️तो इससे बचाव कैसे करें?

यह सबसे जरूरी बात है जो हम सबको पता होनी चाहिये।

अगर आपको कुत्ते या किसी जानवर ने काट लिया है तो सबसे पहले आप अपने घाव को नल चला कर पानी और साबुन के साथ लगातार 15 से 20 मिनट तक धोयें। 15 मिनट से कम नहीं। इससे ज्यादातर वायरस धुल कर निकल जायेगा। यह स्टेप बहुत महत्वपूर्ण है। इसको बिलकुल भी इग्नोर न करें। धो कर इसपर कोई एंटीसेप्टिक जैसे povidone iodine लगाएं।

घाव पर पट्टी बिलकुल भी न करें। इसको खुला रखें। अगर बहुत बड़ा घाव है तो स्वास्थ्य कर्मी ढीले टांके लगा सकता है।

घाव को जलाएं नहीं।

घाव पर कोई घरेलु टोटके जैसे मिर्च आदि नही बाँधने चाहिये। यह नुकसान ही करेगा।

टेटनस का टीका लगवाएं।

डॉक्टर की सलाह से एंटीबायोटिक्स का कोर्स शुरू करें।

अब बारी आती है PEP यानी post exopsure prophylaxix यानी वायरस के संपर्क में आने के बाद दिये जाने वाले बचाव की।
♦️किसी भी वैक्सीन से बचाव योग्य बीमारी के लिये वैक्सीन हम उस बीमारी के सम्पर्क से पहले दी जाती है ताकि हमारा शरीर पहले ही उसके विरुद्ध एंटीबॉडीज बना ले। लेकिन रेबीज में हम यह सम्पर्क के बाद देते हैं।
♦️क्यों? क्योंकि इस केस में संपर्क में आने के बाद बीमारी शुरू होने बीच का समय काफ़ी लम्बा होता है। इस दौरान वैक्सीन का कोर्स करवा कर हम इस बीमारी के खतरे को लगभग 99.9% तक खत्म कर सकते हैं।

✔️किसी भी जानवर के काटे के घाव के लिये विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा 3 Exposure Categories बनायी गयी हैं:

सबसे पहले Category I : इसमें आता है छूना या चाटना। त्वचा बिलकुल दुरुस्त है। कोई खरोंच तक नहीं है। इसमें कुछ भी इलाज या बचाव करने की आवश्यकता नहीं है।

फिर है Category II : इसमें खरोंच है लेकिन खून नहीं निकला है। इस केस में वैक्सीन का पूरा कोर्स जरूरी है।

फिर है Category III : इसमें जानवर द्वारा काटा गया है, खून निकला है, घाव बना है। इसमें वैक्सीन के पूरे कोर्स के साथ RIG (Rabies Immunoglobulin) घाव के अंदर लगवाना जरूरी है।

✔️वैक्सीन कैसे देते हैं?
वैक्सीन या तो हम IM यानी कंधे की deltoid मांसपेशी में दे सकते हैं या फिर ID यानी त्वचा की परतों के बीच में दे सकते हैं। ध्यान रहे कि जिस तरीके से पहली डोज़ दी गयी है उसी तरीके से बाकी डोज़ भी दी जायें। जिस ब्रांड की और प्रकार की वैक्सीन पहली डोज़ में दी गयी है उसी से पूरा कोर्स किया जाये।

मान लें आपने आज यानी 04.07.2025 को पहली डोज़ मांसपेशी में लगवायी है तो आपका शेड्यूल बनेगा :-

Day 0 : पहली डोज 04.07.2025
Day 3 : दूसरी डोज 07.07.2025
Day 7 : तीसरी डोज 11.07.2025
Day 14 : चौथी डोज 18.07.2025
Day 28 : पाँचवीं डोज 01.08.2025

अगर आप ID यानी त्वचा की परतों के बीच लगवा रहे हैं तो आपका शेड्यूल बनेगा :-

Day 0 : पहली डोज 04.07.2025
Day 3 : दूसरी डोज 07.07.2025
Day 7 : तीसरी डोज 11.07.2025
Day 28 : चौथी डोज 01.08.2025

यानी ID शेड्यूल में आपको 4 ही डोज़ लेनी हैं।

यह शेड्यूल Category II और Category III घावों के लिये है। साथ ही Category III घावों के लिये RIG Rabies Immunoglobulin भी घाव के अंदर और उसके आसपास इंजेक्शन द्वारा दिया जाता है।

अगर आप जानवर द्वारा काटे जाने के बाद उपरोक्त सभी स्टेप्स को फॉलो करते हुए डॉक्टर या स्वास्थ्य केंद्र से वैक्सीन व RIG की सही व समय पर पूरी खुराक लेते हैं तो आपको रेबीज होने की सम्भावना लगभग नगण्य हो जाती है।
ध्यान रहे कि काटे जाने के बाद तुरंत घाव को चलते पानी में साबुन व पानी से धोकर जितना जल्दी हो सके वैक्सीन का कोर्स शुरू कर लें।

✔️अब बात कुछ गलत धारणाओं पर कर लेते हैं।

♦️एक धारणा है कि अगर खून नहीं निकला तो कोई खतरा नहीं है। जबकि सच्चाई यह है कि खरोंच से भी वायरस फैल सकता है अगर लार का संपर्क हुआ हो तो। पंजा मारने से रेबीज नहीं होगा लेकिन अगर दाँत लगा है तो चाहे खून आया है या नहीं, वैक्सीन जरूर लगवाएं। अगर आपको सन्देह है कि पंजा लगा है या दाँत तो उसे दाँत मान कर वैक्सीन लगवाएं। अगर पंजे के साथ लार का सम्पर्क है तो भी वैक्सीन लगवाएं।

♦️दूसरी धारणा है कि पालतू कुत्ते के काटने से कुछ नहीं होता। सच्चाई यह है कि पालतू जानवर के काटने के बाद भी रेबीज के केस मिले हैं। इसलिये हर काटने को गंभीर मानें।

♦️कुछ लोग सोचते हैं कि झाड़-फूंक और देसी इलाज से रेबीज ठीक हो जाएगा। जबकि सच्चाई यह है कि एक बार लक्षण आने पर कोई इलाज संभव नहीं है।

♦️एक गलत धारणा है रेबीज वैक्सीन से कमजोरी होती है या गंभीर साइड इफेक्ट्स होते हैं। सच्चाई यह है एंटी रेबीज वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है। मौत और जिंदगी के बीच में यह एकमात्र दीवार है।

♦️एक चीज का और ध्यान रखें। WHO और भारत की राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण गाइडलाइन्स के अनुसार काटने या खरोंचने वाला जानवर अगर पालतू हो, वैक्सीनेटेड हो, 10 दिनों से अधिक समय तक जीवित हो और स्वस्थ दिखाई दे रहा हो तो उस स्थिति में Post-Exposure Prophylaxis (PEP) यानी वैक्सीन की जरूरत नहीं होती। लेकिन हमें इसके लिये 10 दिन इंतज़ार नहीं करना है। पहले दिन ही वैक्सीन व जरूरत हो तो RIG का कोर्स शुरू कर दें। तीन डोज़ 0,3 और 7 दिन वाली तो जरूर लें। अगर 14वें या 28वें दिन तक जानवर जीवित और स्वस्थ है तो फिर आप बंद कर सकते हैं।

✔️RIG यानी immunoglobulin पहली डोज़ के साथ day 0 पर एक ही बार दी जाती है। उस समय उपलब्ध न हो तो पहली डोज़ के बाद 7 दिन होने से पहले ही लगवा लें। 7 दिन के बाद लगवाने की जरूरत नहीं है।

♦️याद रखें। रेबीज एक 100 % जानलेवा रोग है लेकिन इसे 100% रोका भी जा सकता है। किसी भी प्रकार की लापरवाही घातक हो सकती है। ♦️

अपना व अपने स्नेहीजनों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए सचेत रहें और समय रहते चिकित्सकीय सहायता अवश्य लें।

आशा है कि यह जानकारी आपको स्वास्थ्य- सजगता प्रदान करने में सहायक होगी
🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿
धन्यवाद

डॉ वाई के सिंह
चंद्रवती हास्पिटल
आगरा रोड
अलीगढ़

(www.shrijanigarbhsanskar.com)
Shrijani Garbhsanskar & Antenatal Care

Certificate of Participation (Global)WORLD BREASTFEEDING WEEK 2025By WABA - WORLD ALLIANCE FOR BREASTFEEDING ASSOCIATION...
16/08/2025

Certificate of Participation (Global)
WORLD BREASTFEEDING WEEK 2025

By WABA - WORLD ALLIANCE FOR BREASTFEEDING ASSOCIATIONS

a continuous yearly activity since 2018.


DR KAJAL SINGH
Shrijani Garbhsanskar & Antenatal Care
Chandrawati hospital

16/08/2025
सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं..🇮🇳व राष्ट्रप्रेम की भावना में सर्वस्व न्यौछावर करने वाले वीरों को नमन ..🙏🙏...
14/08/2025

सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं..🇮🇳
व राष्ट्रप्रेम की भावना में सर्वस्व न्यौछावर करने वाले वीरों को नमन ..🙏🙏
जय भारत। 🇮🇳🙏
जय भारती ।🇮🇳🙏

डॉ.वाई.के.सिंह,
डॉ.काजल सिंह,

Chandrawati hospital
Shrijani Garbhsanskar & Antenatal Care

#स्वतंत्रभारत

09/08/2025

🙏💮रक्षाबंधन की शुभकामनाएं और बधाई। 🙏💮
Happy Rakshabandhan

RakshaSutra shloka

येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:।
तेन त्वां अभिबन्धामि रक्षे मा चल मा चल।

"I tie you with the same Raksha thread which tied the most powerful, the king of courage, the king of demons, Bali. O Raksha (Raksha Sutra), please don't move and keep fixed throughout the year."

जिस रक्षासूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बाँधा गया था, उसी सूत्र से मैं तुझे बाँधती हूँ। हे रक्षे (राखी)! तुम अडिग रहना (तू अपने संकल्प से कभी भी विचलित न हो।)यह डोर तुम्हारी रक्षा करेगी |

A small piece of Thread has more Power then Everything.... As it is the bond of Love and prayers of wellness
That's RAKHI..
May the Almighty bless this wonderful bond between Every brother and sister ....

HAPPY

Regards
Shrijani Garbhsanskar
Shrijani Garbhsanskar & Antenatal Care Shrijani Garbhsanskar & Antenatal Care
Chandrawati hospital Chandrawati hospital

Aligarh

Thank you Hindustan Times for the Medical Excellence Award Honouring Dr Y K SINGH CHANDRAWATI HOSPITAL, ALIGARH
01/08/2025

Thank you Hindustan Times for the Medical Excellence Award
Honouring Dr Y K SINGH CHANDRAWATI HOSPITAL, ALIGARH

☀️☀️☀️☀️☀️☀️☀️☀️   in      *अलीगढ़* ---- *दूसरे और चौथे शनिवार*  *चंद्रावती हॉस्पिटल* में धरमशिला नारायणा के  ⛔विशेषज्ञ ...
26/07/2025

☀️☀️☀️☀️☀️☀️☀️☀️ in
*अलीगढ़* ---- *दूसरे और चौथे शनिवार*
*चंद्रावती हॉस्पिटल* में धरमशिला नारायणा के
⛔विशेषज्ञ - कार्डियोथोरेसिक वैस्कुलर सर्जन ⛔
🩺 *डॉ अमित बाथला जी* 🩺
अपनी सेवाएं प्रदान करने जा रहे हैं।
♦️ यह सुविधा *हृदय रोग* ,
♦️ *रक्त धमनियों (नलियों) में ब्लाकेज या रुकावट से ग्रस्त* ,
♦️ *फेफड़ों के रोग* ,
♦️ *फेफड़े या हृदय की झिल्ली में सूजन* ,
*इनफैक्शन* या
♦️ *छाती की गम्भीर चोट* आदि
जटिलताओं से परेशान रोगियों के लिए विशेष लाभकारी है ।
साथ ही
♦️ *बढ़कर उभरी हुई वैरिकोज वेन की समस्या के रोगियों का विशिष्ट इलाज* व
♦️ *डायलासिस के लिए फिस्टुला बनाने की प्रक्रिया के लिए भी*
♦️ *परामर्श* व
♦️ *शल्य चिकित्सा* सेवाएं उपलब्ध होंगी ।
सम्बंधित मरीज़ *प्रत्येक माह के दूसरे और चौथे शनिवार सुबह 11:00 बजे से दोपहर 1:00* तक विशेषज्ञ *डॉ अमित बाथला* जी से परामर्श ले सकते हैं ।

पहले से➕♦️ रजिस्ट्रेशन कवाने के लिए चंद्रवती हास्पिटल संपर्क सूत्र ☎️ *7351473510* पर जानकारी कर सकते हैं । ♦️➕

अलीगढ़ जनपद व आस-पास के इलाकों के हृदय,धमनी व फेफड़े से सम्बंधित रोगियों के लिए यह सुविधा बहुत उपयोगी रहेगी और बड़े शहरों में उपलब्ध चिकित्सा सेवाएं अब सहज रूप से अलीगढ़ में उपलब्ध हो सकेंगी।

☀️ *डॉ वाई के सिंह*
*चंद्रवती हास्पिटल*
*शांति पुरम कालोनी* ,
*आगरा रोड विकास नगर*
*अलीगढ़*

Address

Agra Road, Shantipuram Colony
Aligarh
202001

Telephone

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