Raj Homeo Seva Clinic PrayagRaj

Raj Homeo Seva Clinic PrayagRaj Dr. Rajkumar Kushwaha--
--We cure our patients through best medicines.

जन्म और जीवन परिचयपूरा नाम: Samuel Hahnemannजन्म: 10 अप्रैल 1755जन्म स्थान: Meissen, जर्मनीमृत्यु: 2 जुलाई 1843, Parisआध...
10/04/2026

जन्म और जीवन परिचय
पूरा नाम: Samuel Hahnemann
जन्म: 10 अप्रैल 1755
जन्म स्थान: Meissen, जर्मनी
मृत्यु: 2 जुलाई 1843, Paris
आधुनिक होम्योपैथी के संस्थापक
दुनिया भर में आज भी लाखों लोग उनकी पद्धति से इलाज कराते हैं
भारत में होम्योपैथी बहुत लोकप्रिय है।
✅ सैमुअल हैनीमैन ने चिकित्सा जगत को एक नई दिशा दी, जिसमें प्राकृतिक, सुरक्षित और व्यक्तिगत उपचार पर जोर दिया गया।
Mo 094526 92671
पता 1- राज होमियो सेवा क्लीनिक बीदा बाजार आसेपुर प्रयागराज

सफलता एक दिन में प्राप्त नहीं होती है, लेकिन निरंतर प्रयास करने से एक दिन जरूर प्राप्त होती है। इसी तरह, कोई बीमारी या स...
15/03/2026

सफलता एक दिन में प्राप्त नहीं होती है, लेकिन निरंतर प्रयास करने से एक दिन जरूर प्राप्त होती है। इसी तरह, कोई बीमारी या समस्या मनुष्य के जीवन में एक दिन में हल नहीं होती है, लेकिन एक न एक दिन उसका समाधान जरूर निकल जाता है।:
डॉ राजकुमार, BHMS 1-- राज होम्यो सेवा क्लीनिक जी टी रोड बीदा बाजार आसेपुर प्रयागराज
2-कुशवाहा होम्योपैथिक क्लीनिक, सैदाबाद न्यू पुलिस चौकी स्टेशन रोड प्रयागराज प्रयागराज।

12/03/2026

कुशवाहा होम्योपैथिक क्लीनिक की एक झलक 10 मार्च 2026 opening date 🌹🌹🥰🥰🥰 near station road,police chauki, saidabad Prayagraj #सैदाबाद

आज हमारे लिए अत्यंत हर्ष और गर्व का दिन है।कुशवाहा होम्योपैथिक क्लीनिक का शुभ उद्घाटन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।ईश्वर की कृ...
11/03/2026

आज हमारे लिए अत्यंत हर्ष और गर्व का दिन है।
कुशवाहा होम्योपैथिक क्लीनिक का शुभ उद्घाटन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
ईश्वर की कृपा, गुरुजनों के आशीर्वाद और आप सभी के सहयोग से यह एक नई शुरुआत है। हमारा प्रयास रहेगा कि होम्योपैथी चिकित्सा के माध्यम से हर मरीज को सुरक्षित, सरल और प्रभावी उपचार प्रदान कर सकें।
उद्घाटन समारोह में पधारकर माननीय अमरनाथ मौर्या पूर्व प्रत्याशी सांसद फूलपुर लोकसभा , माननीय सुधीर मौर्या ब्लॉक प्रमुख मऊआइमा, डॉ तीर्थराज कुशवाहा, डॉ राजकुमार कुशवाहा, डॉ अभ्युदय मौर्य, डॉ पूजा मौर्य, पुष्पा कुशवाहा सहायक अध्यापक बिहार सरकार , डॉ पंकज कुशवाहा गंगा मेमोरियल हॉस्पिटल सरायइनायत आशीर्वाद और शुभकामनाएँ देने वाले सभी सम्मानित , श्रीमान नीरज कुशवाहा A K infradream city, पुष्पेन्द्र कुशवाहा सहायक अध्यापक, जिला पंचायत सदस्य जितेंद्र पासी,भावी जिला पंचायत प्रत्याशी अरूण विश्वास, डॉ परमानंद मौर्या,अमित यादव, मुलायम यादव , हैदर अली, अमरेश बबलू,आदि अतिथियों, मित्रों और शुभचिंतकों का हृदय से धन्यवाद।
आप सभी का स्नेह और सहयोग इसी प्रकार बना रहे।
– डॉ. राज कुमार कुशवाहा
कुशवाहा होम्योपैथिक क्लीनिक नियर पुलिस चौकी सैदाबाद स्टेशन रोड प्रयागराज

28/2/2026स्वास्थ महोत्सव शिविर साहू सिनेमा कैंपस पडरौना कुशीनगर में हमारे सीनियर डॉ विवेक मिश्रा, और डॉ आलोक दुबे सर का ...
02/03/2026

28/2/2026स्वास्थ महोत्सव शिविर साहू सिनेमा कैंपस पडरौना कुशीनगर में हमारे सीनियर डॉ विवेक मिश्रा, और डॉ आलोक दुबे सर का स्वागत करने का सौभाग्य मिला आज10 साल बाद मिलना हुआ वो पुराने दिन कॉलेज की यादें एक बार ताजा हो गया , वो पानी टंकी का पे आना सर लोगो से मिलना एक बहाना, वो जुब्बा सहनी पार्क में जाना वही से मिठनपुरा चौराहे पे चाय की चुस्की लेना और सारी मीटिंग की डील होना फिर इमली चौक पे निकलना फिर अगले दिन मुजफ्फरपुर कॉलेज में सर गुड मॉर्निंग विश करना , वो भी क्या दिन कॉलेज टाइम अपने आप में बहुत इंट्रेस्टिंग था।

Mucosal cyst lips treatment
15/02/2026

Mucosal cyst lips treatment

यदि किसी को स्टोन की समस्या हो तो संपर्क करे ।राज होमियो सेवा क्लीनिक बीदा बाजार प्रयागराज Mo 094526 92671 आज हम आपको कि...
06/02/2026

यदि किसी को स्टोन की समस्या हो तो संपर्क करे ।
राज होमियो सेवा क्लीनिक बीदा बाजार प्रयागराज
Mo 094526 92671
आज हम आपको किडनी स्टोन पथरी की पुरी बायोग्राफी बताते है।
जानिए कैसे बनती है गुर्दे में पथरी (Know Kidney Stone)
किडनी स्टोन, (जिसे गुर्दे की पथरी, नेफ्रोलिथियासिस या यूरोलिथियासिस भी कहा जाता है) मूत्रतंत्र की एक ऐसी स्थिति है जिसमें गुर्दे के अन्दर (खनिज व लवणों का जमाव) छोटेे-छोटे पथरों का निर्माण होता है। गुर्दे में एक समय में एक या एक से अधिक पथरी हो सकती हैं। अक्सर, पथरी तब बनती है जब मूत्र गाढ़ा हो जाता है, जिससे खनिज क्रिस्टलीकृत हो जाते हैं और एक साथ चिपक जाते हैं। हालांकि सामान्यतः छोटी-छोटी पथरियां बिना किसी तकलीफ के मूत्रमार्ग के जरिए शरीर से बाहर निकल जाती हैं, क्योंकि यह एक स्वतः प्रक्रिया है, लेकिन बड़ा आकार लेने पर पथरियां गुर्दे से बाहर नहीं निकल सकती। वैसे आपका आहार, शरीर का अतिरिक्त वजन, कुछ चिकित्सीय स्थितियां और कुछ पूरक दवाएं किडनी स्टोन के कई कारणों में से एक है। पथरी आपके मूत्र पथ के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकती हैं, जैसे - आपके गुर्दे से लेकर आपके मूत्राशय तक। इससे मूत्रांग के आसपास असहनीय पीड़ा होती है। यह स्थिति आमतौर पर बड़ों के साथ-साथ बच्चों में भी देखने को मिल रही है। प्रदूषित खान-पान के कारण हर तीसरा और चैथा व्यक्ति पथरी रोग से पीड़ित है।

गुर्दे की पथरी के प्रकार (Kind of Kidney Stones)
Calcium Stone (80%)

कैल्शियम स्टोन, किडनी स्टोन का सबसे साधारण प्रकार है। यह किडनी स्टोन कैल्शियम, ऑक्सलेट या फॉस्फोरस जैसे कैमिकल के मेल से बनता है। जो व्यक्ति कम पानी पीते हैं या ऑक्सलेट और फॉस्फोरस वाला आहार ज्यादा लेते हैं। उन्हें इसकी समस्या अधिक होती है। 80 प्रतिशत लोग इसी किडनी स्टोन के शिकार हैं।

जोखिम कारक

कैल्शियम या विटामिन डी आहार अनुपूरक खाद्य पदार्थ - ऑक्सालेट्स में बहुत अधिक एवोकैडो, खजूर, अंगूर, कीवी, संतरा, रसभरी, पालक और टमाटर

Struvite Stone (10%)

स्ट्रुवाइट स्टोन पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में सबसे अधिक पाया है। जो महिलाएं मूत्र पथ संक्रमण से जूझ रहीं होती है, ऐसी महिलाओं में यह स्टोन होने की आशंका सबसे ज्यादा होती है। यह किडनी स्टोन होने का मतलब होता है कि अब मूत्र पथ संक्रमण काफी आगे बढ़ चुका है और इस वजह से किडनी संक्रमित हो चुकी है। इस किडनी स्टोन की वजह से पेशाब से जुड़ी समस्याएँ बढ़ने लगती है। इस स्टोन से छुटकारा पाने के लिए सबसे पहले संभावित संक्रमण से छुटकारा पाना बहुत जरूरी होता है।

जोखिम कारक

मैग्नीशियम, अमोनियम और फॉस्फेट से बना जोखिम कारक मूत्र पथ के संक्रमण प्रोटीस मिराबिलिस, क्लेबसिएला निमोनिया एंटरोबैक्टर, और स्यूडोमोनास एरुगिनोसा

Uric Acid Stone (9%)

यूरिक एसिड किडनी स्टोन महिलाओं की तुलना में पुरुषों में अधिक पाया जाता है। इस प्रकार का स्टोन तब बनता है, जब पेशाब में यूरिक एसिड की मात्रा अधिक हो जाए। प्युरिन युक्त आहार लेने की वजह से यूरिक एसिड स्टोन की समस्या सबसे अधिक होती है। प्यूरिन एक बेरंग पदार्थ होता है जो कि पशु प्रोटीन में सबसे ज्यादा पाया जाता है। जो व्यक्ति अधिक मात्रा में मांसाहार लेते हैं, उन्हें यूरिक एसिड स्टोन होने की आशंका सबसे ज्यादा होती है।

जोखिम कारक

दस्त और गठिया

Cystine Stone (1%)

सिस्टाइन स्टोन महिलाओं और पुरुषों दोनों में हो सकता है। यह स्टोन एक वंशानुगत रोग है जो कि सिस्टाइन के किडनी से मूत्र में रिसाव की वजह से होता है। बाकी किडनी स्टोन के मुकाबले यह किडनी स्टोन काफी दुर्लभ होता है। सिस्टाइन एक गैर - जरूरी अमीनो एसिड है जो कि प्रोटीन बनाने और अन्य चयापचय कार्यों के लिए महत्वपूर्ण होता है। यह बीटा - केराटिन में पाया जाता है। यह नाखून, त्वचा और बालों में मिलने वाला एक मुख्य प्रोटीन है। सिस्टाइन, कोलेजन बनाने के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है।

जोखिम कारक

दुर्लभ विकार जिसे सिस्टिनुरिया कहा जाता है

गुर्दे की पथरी का आकार, रंग एवं स्थिति

गुर्दे की पथरी का आकार भी होता है। जैसे बारहसिंहे की तरह दिखने वाली पथरी, लम्बी, गोल, चपटी, त्रिकोण, चतुर्भुजी, कांटेदार, चिकनी, छोटी, बड़ी एवं बहुत बड़ी आदि आकार होते हैं। पथरी के रंग उसके प्रकार पर निर्भर करते हैं। कौन सी बीमारी में किस प्रकार एवं रंग की पथरी बनती है। पथरी की स्थिति क्या है, जैसे पथरी गुर्दे के किस भाग में बनी है।

पथरी बनने के जोखिम व कारक

कुछ बीमारियों, दवाओं, गलत आहार की आदतों से पथरी बनने की संभावना बढ़ जाती है जैसे- मूत्र में कैल्शियम या ऑक्सालेट की अत्यधिक मात्रा। आहार में कम कैल्शियम, उच्च मात्रा में ऑक्सालेट्स वाले आहार, पशु प्रोटीन ज्यादा मात्रा में या आहार में ज्यादा मात्रा में सोडियम का सेवन जैसे कारक। कम पानी पीने से और तरल पदार्थ की कमी से निर्जलीकरण होने पर। कैल्शियम, विटामिन डी और विटामिन सी की अत्यधिक खुराक लेने पर। मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा, गाउट, हाइपरथायरायडिज्म से पीड़ित लोगों में या जिनकी गैस्ट्रिक बाईपास या बैरियाट्रिक सर्जरी हुई है उन लोगों में पथरी होने की शिकायत अधिक होती है।

वंशानुगत कारक

सिस्टीन जैसे कुछ पत्थर परिवार के सदस्यों में पाए जाते हैं जो आनुवंशिक विकारों के बारे में बताते हैं।

बार-बार पथरी का होना

यदि किसी को पहले से गुर्दे की पथरी की शिकायत रही है, तो भविष्य में फिर से पथरी होने का खतरा अधिक होता है, खासकर पुरुषों में। 10 - 30 फीसदी पुरुष अगले 5 साल में फिर से पथरी का शिकार हो सकते हैं।

बचाव

1. पालक:- वैसे तो पालक आयरन का बेहतरीन सोर्स है और ढेर सारे विटामिन्स और मिनरल्स से भी भरपूर होता है लेकिन किडनी में स्टोन की समस्या होने पर पालक खाने से बचना चाहिए। इसका कारण ये है कि पालक में ऑक्सलेट होता है जो खून में मौजूद कैल्शियम से खुद को बांध लेता है और किडनी उसे फिल्टर नहीं कर पाती और वह यूरिन के रास्ते शरीर से बाहर नहीं निकल पाता है जिससे किडनी में स्टोन बनता है।

2. जिन चीजों में ऑक्सलेट अधिक होता है:-

पालक के अलावा चुकंदर, भिंडी, बीजयुक्त सब्जियां, शकरकंद, चाय, अखरोट, मूंगफली, बादाम, बटर, ब्लूबेरी, चॉकलेट जैसे फूड्स में भी ऑक्सलेट की मात्रा अधिक होती है। विटामिन सी की अत्यधिक खुराक से बचें क्योंकि विटामिन सी से ऑक्सलेट उत्पन्न होता है जिसके फलस्वरूप मूत्र में बड़ी मात्रा में ऑक्सालेट की मात्रा बढ़ सकती है। अगर किसी मरीज को किडनी में स्टोन की समस्या है तो उसे ऑक्सलेट वाली चीजें बिल्कुल न खाने या सीमित मात्रा में ही खाने की सलाह दी जाती है।

3. चिकन, मछली अंडा:-

रेड मीट, चिकन, पोल्ट्री, फिश और अंडा- ये कुछ ऐसे फूड्स हैं जिसमें ऐनिमल प्रोटीन की मात्रा सबसे अधिक होती है और इन चीजों का अधिक सेवन करने से शरीर में यूरिक एसिड का उत्पादन अधिक होता है। चूंकि प्रोटीन हमारे शरीर के लिए बेहद जरूरी है इसलिए एनिमल प्रोटीन की जगह पौधों व डेयरी उत्पाद से प्राप्त प्रोटीन का सेवन करना चाहिए जैसे- टोफू, कीन्वा, चिया सीड्स, दूध, दही, पनीर आदि।

4. कम से कम नमक:-

नमक में सोडियम होता है और सोडियम की अधिक मात्रा यूरिन में कैल्शियम को जमाने का काम करती है। लिहाजा खाने में ऊपर से नमक डालने से परहेज करें। इसके अलावा चिप्स, फ्रोजेन फूड, प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ जैसे कि हॉट डॉग, चटनी, ड्राई सूप, अचार इत्यादि कम-से-कम खाएं क्योंकि इनमें नमक अधिक मात्रा में होता है।

5. कोला या सॉफ्ट ड्रिंक:-

कोला में फॉस्फेट नाम का केमिकल अधिक होता है जिसकी वजह से किडनी में स्टोन बनने की आशंका रहती है। लिहाजा बहुत अधिक चीनी या शुगर सिरप वाले प्रोसेस्ड फूड और ड्रिंक्स का सेवन न करें। सिर्फ नमक ही नहीं बहुत अधिक चीनी- जैसे सुक्रोज और फ्रक्टोज भी किडनी स्टोन के खतरे को बढ़ाती है।

रोकथाम के तरीकों में हाइड्रेटेड रहना (प्रति दिन अपने शारीरिक भार के अनुसार या मूत्र को हल्का और साफ रखने के लिए पर्याप्त पानी) और कम नमक, पशु प्रोटीन और ऑक्सालेट युक्त खाद्य पदार्थ (जैसे नट्स, चाय, चॉकलेट और सोया) वाले आहार का पालन करना शामिल है।

कैल्शियम से भरपूर आहार बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है, लेकिन कैल्शियम की खुराक का उपयोग सावधानी से करना चाहिए। लगभग 50 प्रतिशत मामलों में गुर्दे की पथरी दोबारा हो जाती है, इसलिए रोकथाम ही सर्वोत्तम उपाय है।

लक्षण

यह पथरियों के आकार और उनके स्थान पर निर्भर करता है। पथरी की वजह से जो सबसे आम लक्षण उभरते हैं वो है पेट या उसके निचले हिस्से में दर्द का होना जो कमर तक बढ़ सकता है। पथरी निकलते समय दर्द का होना सबसे आम है। इसमें गंभीर कष्टदायी दर्द की लहरें भी उठतीं हैं जिसे वृक्क शूल कहा जाता है। पेशाब करने में कठिनाई, मूत्र में रक्त का आना या उल्टी होना, संक्रमण होने पर बुखार और ठंड लगना, पसलियों के नीचे, बाजू और पीठ में गंभीर, तेज दर्द जो पेट के निचले हिस्से और कमर तक फैलता है। दर्द जो लहरों में आता है और तीव्रता में उतार-चढ़ाव होता है। लगातार पेशाब करने की आवश्यकता होना, सामान्य से अधिक बार पेशाब आना या कम मात्रा में पेशाब आना है। मूत्र से रेत जैसे कठोर कण निकल सकते हैं। पथरी मूत्र के रास्ते में फंस सकती है जिससे पेशाब करने में बाधा उत्पन्न होती है और दर्द होता है। गुर्दे में अगर पथरी बहुत छोटी है तो वे रुकावट पैदा नहीं करती हैं, इस कारण पथरी का कोई लक्षण नहीं दिखता है।

निदान

गुर्दे की पथरी का निदान अल्ट्रासोनोग्राफी या सीटी स्कैन द्वारा किया जाता है।
पथरी किस प्रकार का है यह जानने के लिए, कैल्शियम, ऑक्सालेट, यूरिक एसिड और साइट्रेट का 24 घंटे का मूत्र आंकलन आवश्यक होता है। मूत्र में संक्रमण है या नहीं या मूत्र अम्लीय अथवा क्षारीय है, यह देखने के लिए मूत्र की जाँच उपयोगी है।

05/02/2026
18/01/2026

कोट WHITE हो या BLACK, दोनों ही लोगो की जिंदगी बचाने की काबिलियत रखते हैं।
DrRaj Kumar Kushwaha

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