Swami Vivekananda Clinic, Prayagraj

Swami Vivekananda Clinic, Prayagraj Health and Medical Clinic

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15/10/2020

आपके प्रयागराज में स्वामी विवेकानंद क्लिनिक पे करवाएं फ्री मेडिकल चेकअप।
लास्ट कुछ रजिस्ट्रेशन शेष।
7355635385 पे अपना नाम और उम्र व्हाट्सएप करके करवाएं तुरंत रजिस्ट्रेशन।

सरसो का तेल- पीला अमृतसरसों का तेल इन्युनिटी बढ़ाने से लेकर दिल को स्वस्थ्य रखने के साथ-साथ देता ये लाभ।हम सभी के घरों म...
11/10/2020

सरसो का तेल- पीला अमृत

सरसों का तेल इन्युनिटी बढ़ाने से लेकर दिल को स्वस्थ्य रखने के साथ-साथ देता ये लाभ।

हम सभी के घरों में सब्जी बनाने सरसों के तेल का इस्तेमाल मुख्य रूप से किया जाता है. कुछ जगहों पर इसे कड़वा तेल के नाम से भी जाना जाता है. सरसों का तेल जितना खाने को स्वादिष्ट बनाता है उतना ही स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद हैं. ऐसा कहना गलत नहीं होगा कि ये एक औषधि है. क्योंकि जब कहीं दर्द हो या फिर चोट लग जाए सबसे पहले लोग सरसों के तेल का इस्तेमाल करते हैं. इसके अलावा सरसों का तेज इस्तेमाल करने से इम्युनिटी बढ़ती है. इसमें मोनोसैचुरेटेड फैटी एसिड होता है, जोकि शरीर में कोलेस्ट्रोल का संतुलन बनाए रखने में मदद करता है. सरसों के तेल में अल्फा-लिनोलेनिक एसिड होता है, जोकि हमारी दिल संबंधित स्वास्थ्य को बेहतर करता है।

1- दाद-खुजली से बचाव
सरसों के तेल में एंटीबैक्टिरियल और एंटीफंगल तत्व होते हैं और यह डाइजेस्टिव तत्व होतें हैं, जो कि हानिकारक संक्रमण से बचाता है. इसमें ओमेगा 3, ओमेगा 5 फैटी एसिड और विटामिन ई होता है, जो शरीर को पोषण देता है और इम्युन सिस्टम को मजबूत करता है।

2- साइनस और खांसी-सर्दी से बचाव
सरसों के तेल की तीखे तत्व इसे जमाव और अवरुद्ध साइनस को साफ करने में उपयोगी बनाती है. लहसुन लौंग के साथ गर्म सरसों के तेल से पैरों और छाती के तलवों पर मालिश करने से खांसी और सर्दी से राहत मिल सकती है।

3- लाल रक्त कोशिका की मजबूती
सरसों का तेल प्लाज्मा, सेल लिपिड और सेल झिल्ली के घटकों के रूप में कई बायोलॉजिकल फंक्शन के लिए हमारे शरीर द्वारा जरूरी वसा का एक प्रमुख स्रोत है. सरसों का तेल कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है और लाल रक्त कोशिका की झिल्ली संरचना में सुधार करता है।

4- दिल संबंधित बीमारियों से सुरक्षा
रिसर्च से पता चला है कि सरसों के तेल के सेवन से दिली की धड़कनों में सुधार, हृदयाघात और एनजाइना में कमी देखी गई है. हृदय संबंधी विकार वाले लोगों के लिए सरसों का तेल एक स्वस्थ विकल्प माना जाता है।

5- जोड़ों के दर्द और अर्थराइटिस से राहत
नियमित रूप से सरसों के तेल से मालिश करने से मांसपेशियों और जोड़ों को दर्द से राहत मिलती है. सरसों के तेल में मौजूद ओमेगा 3 गठिया के कारण होने वाली कठोरता और दर्द को कम करने में मदद करता है. यह ट्राइग्लिसराइड्स, रक्तचाप और

11/10/2020

स्वामी विवेकानंद और बंदर

स्वामी विवेकानंद बनारस में थे। वहीं किसी दिन वह मां दुर्गा के मंदिर के पास से निकल रहे थे कि तभी बंदरों ने उन्हें घेर लिया। वे नजदीक आने लगे और डराने लगे। बंदर उनके हाथ में रखा प्रसाद भी छीनने लगे। स्वामी जी खुद को बचाने के लिए भागने लगे। पर बंदर तो पीछे ही पड़ गए थे, वे उन्हें दौड़ाने लगे। पास खड़े एक वृद्ध संन्यासी यह सब देख रहे थे। उन्होंने स्वामी जी को रोककर कहा, "रुको! डरो मत, उनका सामना करो।"

इस वाक्य में न जाने कैसा जादू था कि यह सुनकर स्वामी जी तुरंत पलटे और बंदरों की तरफ बढ़ने लगे। उनके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा कि उनके ऐसा करते ही सभी बंदर तुरंत भाग गए।

इस घटना का स्वामी जी ने कई बार जिक्र किया। वह कहते थे कि बंदरों से डरकर मैं चुप रह जाता, तो शायद जीवन मे जो बाद में कठनाई आईं, उसे संभालते और खुद को बचाते हुए ही मैं अपना जीवन गुजार देता। कठनाई भी बंदरों के तरह होती है, जब तुम अपना अभय रूप दिखाकर खड़े होके उनका सामना करने के लिए तैयार होते हो, वो तुरंत भाग जाती हैं।

वह वृद्ध सन्यासी रामकृष्ण परमहंस जी ही थे (यह घटना रामकृष्ण परमहंस जी के मृत्यु के पश्चात हुई थी), जो संन्यासी के रूप में मुझे अभय का संदेश देकर चले गए। तभी से यह मंत्र मिला कि कभी डरकर भागो मत, पलटो और सामना करो। इस तरह बनारस के बंदर ने स्वामी व‌‌िवेकानंद जी को बड़ा ज्ञान द‌िया।

उच्च रक्तचाप, मधुमेह, दमा इत्यदि बीमारी आपके प्रतिरोधक क्षमता को कम करते हैं। जो कि इस कोरोनाकाल मे काफ़ी खतरनाक हो सकता ...
04/10/2020

उच्च रक्तचाप, मधुमेह, दमा इत्यदि बीमारी आपके प्रतिरोधक क्षमता को कम करते हैं। जो कि इस कोरोनाकाल मे काफ़ी खतरनाक हो सकता है।

अगर आप को अपने सम्पूर्ण शरीर का मेडिकल चेकअप कराना है तो हमारे क्लीनिक 'स्वामी विवेकानंद क्लीनिक' झूँसी पुलिया के बगल, चेतनपुरी कॉलोनी, झूँसी, प्रयागराज में संपर्क कर सकते हैं।

03/10/2020

परमहँस से स्वामी विवेकानंद की प्रथम भेंट

जो खामोशी थी रात्रि के मध्य प्रहर में,

शून्य विचार और गुप अंधेरे की चुभन में,

उनका अर्थ मैंने कभी नही जाना ।।

प्रतिबिम्ब न था फिर भी था एक आईना,

स्वयं का था व्योम,

या विचारों का था गुम हो जाना,

उनका अर्थ मैंने नही जाना ।।

न ब्रह्म की थी खोज,

न था प्रसन्न होने का बोझ,

फिर भी उसका मुझे बुलाना,

उनका अर्थ मैने कभी नही जाना ।।

न थी चेतना बुद्ध जैसी,

भक्ति भी नही थी परमहंस की,

मुझको मुझसे ही निकाल के मेरे अंदर घुस जाना,

उन सभी बातों अर्थ मैने कभी नही जाना ।।

विवेकानंद जब पहली बार परमहंस से मिले, उनके पास अनंत प्रश्न थे, पैर से लेके माथे तक उनमें केवल प्रश्न ही प्रश्न भरे थे। वो तीन दिन से सोये नही थे, उनका जीना उन्ही के प्रश्नों ने दूभर कर रख्खा था। उनको मालूम था अगर उन्हें इन प्रश्नों से मुक्ति नही मिलेगी तो वो पागल हो जाएंगे। उनकी उत्तर की तलाश उनके अंदर और प्रश्न भरे जा रही थी।

विवेकानंद जब पहली बार परमहंस से मिले, उनके पास अनंत प्रश्न थे, परमहंस ये समझ गए। वो विवेकानंद को देखते ही समझ गए कि वो ताजे पानी की नदी से लगा हुआ गंदे पानी वाला तालाब हैं। ये सत्य के बगल में तो पहुच गयें हैं, पर इनके अंदर की गंदगी उस सत्य को इनके अंदर आने ही नही दे रही है। इनके अंदर के गंदे पानी को निकालने के लिए नदी और तालाब के बीच की मिट्टी को खोद के फेक देना पड़ेगा।

परमहँस का चरण काली माँ का ही चरण था, उसपे महाकाल शिव का स्पर्श था। परमहँस ने विवेकानंद की छाती पे अपने पैर से धक्का दिया, धक्का तेज न था पर कारगर था, विवेकानंद बेहोश गए, वो मिट्टी निकल गई। नदी का ताजा जल, तालाब के गंदे जल को निकालने लगा। जब विवेकानंद को होश आया, तो उनके समस्त प्रश्न जा चुके थे, बह चुके थे। उनके पास कोई उत्तर भी न था, पर प्रश्न भी था। बस था उनसे गुजरता हुआ नदी के ताजे पानी जैसा अनुभव। उन अनुभवों का अर्थ विवेकानंद नही जान पाए।

इसीलिए संध्या को जब उनके एक मित्र ने उनसे पूछा "नरेंद्र तुम्हारे प्रश्नों का तुम्हे उत्तर मिला?"

विवेकानन्द ने उत्तर दिया "अब कोई प्रश्न न बचा मेरे पास, वो प्रश्न बिना किसी उत्तर के ही चले गए, पर मुझे कुछ मिला है, पता नही क्या पर काफी कुछ मिला है और जो मुझे मिला है उनका अर्थ मैंने नही जाना"

जय जवान, जय किसान- लाल बहादुर शास्त्री
02/10/2020

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- लाल बहादुर शास्त्री

“It is health that is real wealth and not pieces of gold and silver.”~Mahtma Gandhi
02/10/2020

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