Priti Hospital

Priti Hospital We believe in putting our best efforts and healing with a human touch.

02/01/2026

The Perfect Gut-Healthy Morning Routine
1. Should wake up early (Before 7 AM) because our gut is most active in the morning.
2. Drink warm lemon water or other drinks as mentioned below because it stimulates bile production, hydrates intestines for smoother bowel movements and alkalizes the body, reducing gut inflammation.
3. Do gentle exercise /yoga/brisk walking for gut motility.
4. Eat a fiber-rich breakfast, within 1 Hour of waking. For breakfast we can have overnight oats with chia seeds & berries, scrambled eggs with sautéed spinach, smoothie with banana, flaxseeds & almond butter.
5. Should practice deep breathing before eating because stress triggers gut-brain axis dysfunction, leading to indigestion.
6. Take a Probiotic or Gut-Healing supplements for gut health.
7. Avoid drinking Coffee on an empty stomach.

For a healthy gut in the morning, we should try the below mentioned drink choices to hydrate and kickstart our digestive system gently before breakfast.
Hydrating & Stimulating:-
Warm Lemon Water: Hydrates, stimulates bile production, and helps balance stomach pH.
Ginger Tea: Aids digestion, reduces nausea, and helps with bloating.
Fennel Water/Tea: Relaxes intestinal muscles, reduces gas, and soothes acidity.
Jeera (Cumin) Water: Boosts enzyme activity and improves food breakdown.
Soothing & Anti-Inflammatory
Aloe Vera Juice: Helps calm gastrointestinal inflammation and improves regularity.
Herbal Teas (Peppermint, Chamomile): Soothe the digestive tract and ease discomfort.
Probiotic & Fiber-Rich:-
Buttermilk (Chaas): Rich in probiotics, supports digestion, and can be flavored with cumin.
Kefir/Kombucha: Fermented drinks packed with probiotics for gut balance.
Green Smoothie: Blend leafy greens (spinach, kale) with fruit and a liquid for fiber and nutrients.
Ayurvedic Options:-
Apple Cider Vinegar Tonic: Mix 1 tbsp in warm water to help break down food.
Triphala Water: An Ayurvedic blend that acts as a gentle detoxifier and aids bowel regularity.
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01/01/2026

2026 में प्रीति अस्पताल बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ, मरीज-केंद्रित, भरोसेमंद और तकनीक-संचालित स्वास्थ्य सेवाएँ देने के लिए संकल्पबद्ध हैं, जिससे हर नागरिक को बेहतर और सुलभ उपचार मिल सके। प्रीति अस्पताल परिवार आप सब से गुजारिश करता है कि आप सब का स्नेह, साथ और आशीर्वाद, २०२५ की तरह बना रहे। #प्रीतिअस्पताल #प्रीतिहॉस्पिटलइलाहाबाद #प्रीतिहॉस्पिटलप्रयागराज #प्रीति_हॉस्पिटल #संकल्प #उद्देश्य

31/12/2025

आपको स्वस्थ एवं खुशहाल नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं। नया साल आपके जीवन में स्वास्थ्य और समृद्धि का तोहफा लेकर आए। आपका 2026 मंगलमय और सुखद हो, सभी को स्वास्थ्य और खुशियों की शुभकामनाएँ।

31/12/2025

प्रिय वर्ष २०२५, आपके साथ मरीजों की सेवा के कई अनुभव रहे। हम भविष्य के लिए कृतसंकल्प हैं। अलविदा २०२५! हमने कई जिंदगियों को बचाया, कई चेहरों पर मुस्कान लाई। अब नए साल में और बेहतर करने का संकल्प है।🙏 #प्रीतिअस्पताल #प्रीतिहॉस्पिटलइलाहाबाद #प्रीतिहॉस्पिटलप्रयागराज #प्रीति_हॉस्पिटल #अलविदा #बाय२०२५ #अलविदा२०२५

31/12/2025

अस्पताल चुनते समय इन बातों का ध्यान रखें (Key Factors to Consider):
डॉक्टर की विशेषज्ञता (Doctor's Expertise): सुनिश्चित करें कि सर्जन उस विशेष प्रकार की सर्जरी में अनुभवी हों जो आपको करानी है (जैसे हिप रिप्लेसमेंट, लैप्रोस्कोपिक सर्जरी)।
अस्पताल का अनुभव (Hospital's Experience): देखें कि अस्पताल उस सर्जरी को कितनी बार करता है और उसकी सफलता दर क्या है।
विशेषज्ञों की उपलब्धता (Availability of Specialists): देखें कि क्या न्यूरोलॉजी, कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी जैसे सुपर-स्पेशलिस्ट 24/7 उपलब्ध हैं।
तकनीक और उपकरण (Technology & Equipment): अस्पताल नवीनतम और आवश्यक उपकरणों से लैस होना चाहिए।
नर्सिंग और स्टाफ (Nursing & Staff): प्रशिक्षित और अनुभवी नर्सें, खासकर सर्जरी-विशिष्ट नर्सें, बहुत महत्वपूर्ण हैं।
आपातकालीन तैयारी (Emergency Preparedness): देखें कि उनका इमरजेंसी डिपार्टमेंट (ED) कितना सक्षम है और एम्बुलेंस सेवा कैसी है।
अस्पताल का वातावरण (Hospital Environment): साफ-सफाई, सुविधाओं (कैंटीन, फार्मेसी, लॉबी), और कर्मचारियों के व्यवहार पर ध्यान दें।
सुपर-स्पेशलिटी फोकस (Super-Specialty Focus): कुछ अस्पताल किसी खास क्षेत्र में बेहतर होते हैं।
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29/12/2025

यदि आपको या आपके बच्चे को सिरदर्द के इनमें से कोई भी लक्षण हैं, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें:
अचानक, नया और गंभीर सिरदर्द।
बुखार, सांस लेने में तकलीफ, गर्दन में अकड़न या त्वचा पर चकत्ते के साथ सिरदर्द।
सिर में चोट लगने या दुर्घटना के बाद होने वाला सिरदर्द।
55 वर्ष की आयु के बाद एक नए प्रकार का सिरदर्द होना।
यदि आपके सिरदर्द के साथ तंत्रिका संबंधी लक्षण भी दिखाई देते हैं, जैसे कि:
कमजोरी।
चक्कर आना।
अचानक संतुलन बिगड़ जाना या गिर जाना।
सुन्नपन या झुनझुनी।
पक्षाघात।
बोलने में कठिनाई।
मानसिक भ्रम।
दौरे।
व्यक्तित्व में परिवर्तन/अनुचित व्यवहार।
दृष्टि में परिवर्तन (धुंधली दृष्टि, दोहरी दृष्टि या अंधे धब्बे)।
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28/12/2025

HRT क्या है और कैसे काम करती है?
क्या है: यह एक दवा है जो रजोनिवृत्ति के दौरान हार्मोन के स्तर को फिर से भरने में मदद करती है, जिससे लक्षणों से राहत मिलती है और हड्डियों के स्वास्थ्य में भी मदद मिल सकती है।
कैसे काम करती है: यह शरीर को वो एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन देती है जो रजोनिवृत्ति के कारण कम हो जाते हैं, जिससे हार्मोनल असंतुलन ठीक होता है।
HRT के प्रकार:-
केवल एस्ट्रोजन थेरेपी: उन महिलाओं के लिए जिन्हें हिस्टेरेक्टॉमी हो चुकी है।
संयुक्त हार्मोन थेरेपी: अगर गर्भाशय मौजूद है, तो एस्ट्रोजन के साथ प्रोजेस्टिन भी दी जाती है, ताकि गर्भाशय कैंसर का खतरा कम हो सके।
स्थानीय एस्ट्रोजन: केवल योनि के सूखेपन के लिए, जो वैजाइनल रिंग, टैबलेट या क्रीम के रूप में होती है।
फायदे:-
हॉट फ्लैशेज़ और रात में पसीने से राहत।
योनि के सूखेपन और यौन इच्छा में कमी को ठीक करना।
ऑस्टियोपोरोसिस और फ्रैक्चर के जोखिम को कम करना।
जोखिम और विचार:-
HRT के फायदे और जोखिम होते हैं, और यह हर किसी के लिए सही नहीं है।
कुछ जोखिमों में रक्त के थक्के, स्ट्रोक और कुछ प्रकार के कैंसर का थोड़ा बढ़ा हुआ जोखिम शामिल हो सकता है, खासकर कुछ खास तरह की थेरेपी और लंबे समय तक इस्तेमाल से।
डॉक्टर आपकी उम्र, स्वास्थ्य इतिहास और जोखिमों के आधार पर सबसे अच्छा विकल्प चुनने में मदद करेंगे। #प्रीतिअस्पताल #प्रीतिअस्पतालप्रयागराज #प्रीतिअस्पतालइलाहाबाद

28/12/2025

अच्छी नींद पाने के लिए कभी-कभी रूटीन में सिर्फ़ कुछ छोटे-मोटे बदलाव करने की ज़रूरत होती है। दूसरी बार, किसी व्यक्ति को नींद बेहतर बनाने के तरीकों को प्राथमिकता देने की ज़रूरत हो सकती है। नींद की क्वालिटी और क्वांटिटी बेहतर बनाने के कुछ तरीके:
नियमित रहें: हर दिन एक ही समय पर सोने और जागने से शरीर में एक लय बनती है, जिससे सोना आसान हो सकता है और जागने पर ताज़गी महसूस होती है।
हर दिन फिजिकली एक्टिव रहें: फिजिकल एक्टिविटी नींद की क्वालिटी में सुधार कर सकती है और क्रोनिक इंसोम्निया वाले लोगों की मदद कर सकती है।
कैफीन और निकोटीन से बचें: इन स्टिमुलेंट्स से बचें - खासकर सोने से कुछ घंटे पहले - क्योंकि दोनों को खून से निकलने में कई घंटे या उससे ज़्यादा समय लग सकता है, जिससे नींद में दिक्कत हो सकती है।
आवाज़ और रोशनी को कम करें: ईयरप्लग, व्हाइट नॉइज़ मशीन और कमरे को अंधेरा करने वाले पर्दे या खिड़की के कवर का इस्तेमाल करने से मदद मिल सकती है।
सोने से कम से कम 2 घंटे पहले टीवी, स्मार्टफोन और टैबलेट बंद कर दें: ये डिवाइस जो नीली रोशनी छोड़ते हैं, वह मेलाटोनिन को कम कर सकती है, जो नींद के लिए ज़रूरी हार्मोन है।
आरामदायक विकल्प आज़माएँ: स्क्रीन देखने के बजाय, गर्म पानी से नहाने, किताब पढ़ने या मेडिटेशन करने की कोशिश करें। #प्रीति #प्रीतिअस्पताल #प्रीतिअस्पतालप्रयागराज #प्रीतिअस्पतालइलाहाबाद

26/12/2025

हर तीसरे भारतीय को फैटी लीवर है, जो टाइप 2 डायबिटीज और अन्य मेटाबॉलिक विकारों से पहले होता है। 23-35 वर्ष की आयु के युवाओं में लीवर की बीमारी को लेकर चिंता बढ़ रही है। शराब से संबंधित लीवर की बीमारी, नॉन अल्कोहल फैटी लीवर, हेपेटाइटिस और सिरोसिस जैसी कई स्थितियाँ लीवर को नुकसान पहुँचा रही हैं। इससे युवाओं में मृत्यु दर और रुग्णता दर में वृद्धि हुई है। इन घातक लीवर स्थितियों की समय पर जाँच और प्रबंधन, परिणाम को बेहतर बनाने और लीवर की बीमारी से जूझ रहे युवाओं के जीवन को बचाने की कुंजी है। हम प्रीति अस्पताल में २७ दिसंबर २०२५ को दोपहर 2 से 3.30 बजे के बीच एबॉट इंडिया लिमिटेड के सौजन्य से लीवर की बीमारी के लिए एक स्क्रीनिंग कैंप आयोजित कर रहे हैं, जिसमें लीवर का मुफ़्त फ़ाइब्रो स्कैन और डॉ. ए. के. गुप्ता द्वारा मुफ़्त परामर्श शामिल है। जो व्यक्ति अपने जिगर (लीवर) के लिए चिंतित हैं और उस के स्वास्थ को जानने के इच्छुक हैं कृपया आकर निशुल्क फाइब्रोस्कैन जांच कराएं।🙏

26/12/2025

डॉक्टर (सर्जन) कैसे चुनें (How to Choose a Doctor/Surgeon):
1. अनुभव और विशेषज्ञता (Experience & Specialization): पता करें कि सर्जन ने आपकी जैसी सर्जरी कितनी बार की है। उनकी प्रैक्टिस कितनी पुरानी है और वे आपकी विशेष स्थिति के लिए कितने अनुभवी हैं।
2. संचार (Communication): ऐसा डॉक्टर चुनें जो आपकी भाषा बोलता हो, आपकी बात धैर्य से सुनता हो, और आपको सभी विकल्प (सर्जिकल और गैर-सर्जिकल) समझाता हो। आपको उनसे खुलकर बात करने में सहज महसूस होना चाहिए।
3. सिफारिशें (Recommendations): अपने दोस्तों, परिवार या अन्य विश्वसनीय स्रोतों से डॉक्टर के बारे में पूछें।
4. दूसरा विचार (Second Opinion): एक गैर-आपातकालीन सर्जरी से पहले किसी और सर्जन से राय लेना एक अच्छा विचार है, ताकि आप पूरी तरह सूचित होकर निर्णय ले सकें।
अस्पताल कैसे चुनें (How to Choose a Hospital):
5. प्रतिष्ठा और गुणवत्ता (Reputation & Quality): एक प्रतिष्ठित अस्पताल चुनें जहाँ आपकी सर्जरी के लिए अच्छी देखभाल और कम जटिलताएँ (complications) होती हों। जाँचें कि क्या अस्पताल को स्थानीय या राष्ट्रीय स्तर पर अच्छी रेटिंग मिली है।
6. सुविधाएँ और टीम (Facilities & Team): सुनिश्चित करें कि अस्पताल में आपकी ज़रूरत के अनुसार आधुनिक उपकरण और प्रशिक्षित स्टाफ हो। सर्जन जिस टीम के साथ काम करता है, वह भी महत्वपूर्ण है।
7. स्थान (Location): अस्पताल की लोकेशन देखें; दुर्घटना या आपात स्थिति में वहाँ पहुँचना कितना आसान है, यह भी मायने रखता है।
8. सर्जरी की संख्या (Volume of Surgeries): देखें कि उस अस्पताल में आपकी जैसी प्रक्रियाओं का कितना अनुभव है। ज़्यादा प्रक्रियाओं का मतलब है कि टीम उस काम से परिचित है। #प्रीतिअस्पताल #प्रीति_हॉस्पिटल #प्रीतिहॉस्पिटलइलाहाबाद #प्रीतिहॉस्पिटलप्रयागराज #डॉक्टर #अस्पताल #हॉस्पिटल #हेल्थ #हेल्थकेयर

24/12/2025

"इस क्रिसमस पर, हम आपके और आपके परिवार के लिए उत्तम स्वास्थ्य, सुख और शांति की कामना करते हैं। हमारी प्रार्थनाएँ आपके साथ हैं। मैरी क्रिसमस!"

24/12/2025

भारत में कमर दर्द (लो बैक पेन) बहुत आम है, जो अक्सर मांसपेशियों में खिंचाव, गलत तरीके से वजन उठाने, लंबे समय तक बैठने या खड़े रहने, मोटापे, या व्यायाम की कमी के कारण होता है, और इसके लक्षणों में दर्द, जकड़न, उठने-बैठने में दिक्कत शामिल है; राहत के लिए आराम, फिजियोथेरेपी, योग, और घरेलू उपाय किए जा सकते हैं, लेकिन गंभीर या लगातार दर्द के लिए डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है, क्योंकि यह गठिया, डिस्क समस्या या अन्य गंभीर स्थितियों का संकेत हो सकता है।
कमर दर्द के कारण:
मांसपेशियों में खिंचाव: अचानक हिलने-डुलने, भारी वजन उठाने, या गलत मुद्रा के कारण।
गलत मुद्रा: लंबे समय तक झुककर या बैठकर काम करना।
मोटापा: शरीर का अतिरिक्त वजन पीठ पर दबाव डालता है।
व्यायाम की कमी: पेट और पीठ की मांसपेशियां कमजोर होना।
डिस्क की समस्या: हर्नियेटेड डिस्क या डिस्क का उभार।
गठिया: जोड़ों में सूजन।
ऑस्टियोपोरोसिस: हड्डियों का कमजोर होना।
अन्य कारण: चोट, तनाव, अवसाद, और कुछ बीमारियाँ जैसे कैंसर।
लक्षण:
पीठ के निचले हिस्से में दर्द, खिंचाव या जकड़न।
उठने, बैठने, झुकने और चलने में परेशानी।
पैरों में सुन्नपन या कमजोरी (गंभीर मामलों में)।
राहत और इलाज:
आराम: कुछ समय के लिए आराम करें, लेकिन ज्यादा देर तक बिस्तर पर न रहें।
सही मुद्रा: बैठने और खड़े होने के लिए सहारा देने वाली कुर्सी का उपयोग करें।
व्यायाम: हल्की स्ट्रेचिंग और व्यायाम, जैसे योग (मार्जरीआसन, बालासन)।
घरेलू उपाय: दादी के नुस्खे डॉक्टर की सलाह से।
फिजियोथेरेपी: मांसपेशियों को मजबूत करने और लचीलापन बढ़ाने के लिए।
दवाएं: दर्द निवारक दवाएं (डॉक्टर की सलाह पर)।
अन्य उपचार: मालिश, एक्यूपंक्चर।
कब डॉक्टर को दिखाएं:
दर्द बहुत तेज हो और आराम करने से ठीक न हो।
पेशाब या मल त्यागने में समस्या हो।
पैरों में कमजोरी या सुन्नपन हो।
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