Astrologer Shashi Kant Dubey

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काल भी अधीन है, साधना में लीन हैं,वो हर मोह से परे कैलाश पर आसीन हैं !…
17/02/2026

काल भी अधीन है, साधना में लीन हैं,
वो हर मोह से परे कैलाश पर आसीन हैं !

ना कोई ताज, ना कोई सिंहासन,,♥️🚩 फिर भी देवों के देव हैं महादेव...
16/02/2026

ना कोई ताज, ना कोई सिंहासन,,♥️🚩
फिर भी देवों के देव हैं महादेव...

08/02/2026
श्री राम, जय राम, जय जय राम.
30/01/2026

श्री राम, जय राम, जय जय राम.

⸻🌼 बसंत पंचमी: ऋतुओं की मुस्कान और ज्ञान की आराधना 🌼भारत की संस्कृति केवल पर्वों का समूह नहीं, बल्कि प्रकृति, जीवन और चे...
23/01/2026



🌼 बसंत पंचमी: ऋतुओं की मुस्कान और ज्ञान की आराधना 🌼

भारत की संस्कृति केवल पर्वों का समूह नहीं, बल्कि प्रकृति, जीवन और चेतना के साथ संवाद का माध्यम है। इन्हीं संवादों में एक मधुर, उजास-भरा पर्व है — बसंत पंचमी। यह दिन केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत नहीं देता, बल्कि मनुष्य के भीतर सुप्त चेतना, सृजन और ज्ञान के जागरण का भी प्रतीक है।



🌾 बसंत ऋतु का आगमन

बसंत पंचमी माघ शुक्ल पंचमी को मनाई जाती है। इस दिन शीत ऋतु धीरे-धीरे विदा लेने लगती है और धरती पर बसंत ऋतु के कोमल चरण पड़ते हैं। खेतों में सरसों पीले फूलों से लहलहाने लगती है, आम के वृक्षों पर बौर आने लगता है, कोयल की कूक वातावरण को मधुर बना देती है और प्रकृति मानो स्वयं पीले वस्त्र धारण कर लेती है।

भारतीय काव्य परंपरा में बसंत को ऋतुराज कहा गया है — क्योंकि यह ऋतु जीवन में उत्साह, प्रेम और उल्लास का संचार करती है।



📜 बसंत पंचमी का पौराणिक महत्व

🕉️ माँ सरस्वती का अवतरण
पौराणिक मान्यता के अनुसार, सृष्टि की रचना के समय जब ब्रह्मा जी ने संसार की रचना की, तब उन्हें लगा कि यह संसार नीरव और निष्प्राण है। तब उन्होंने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे माँ सरस्वती प्रकट हुईं।

माँ सरस्वती के हाथों में वीणा, पुस्तक और माला हैं — जो ज्ञान, संगीत और साधना के प्रतीक हैं। बसंत पंचमी को ही माँ सरस्वती का अवतरण दिवस माना जाता है, इसलिए यह पर्व विद्या, बुद्धि और विवेक की आराधना का दिन है।



🎓 शिक्षा और साधना का पर्व

इस दिन विशेष रूप से:
• बच्चों की विद्यारंभ परंपरा होती है
• छात्र-छात्राएँ, शिक्षक और कलाकार माँ सरस्वती की पूजा करते हैं
• लेखन, संगीत, नृत्य और कला से जुड़े लोग इसे अत्यंत पवित्र मानते हैं

मान्यता है कि इस दिन आरंभ किया गया अध्ययन और सृजन कार्य विशेष फलदायी होता है।



💛 पीले रंग का आध्यात्मिक रहस्य

बसंत पंचमी पर पीले वस्त्र पहनने और पीले व्यंजन बनाने की परंपरा है।
पीला रंग दर्शाता है:
• ज्ञान का प्रकाश
• सकारात्मक ऊर्जा
• आशा और नवचेतना
• सात्त्विकता

इसी कारण लोग केसरिया खीर, बेसन के लड्डू, पीले चावल आदि का भोग लगाते हैं।



🎶 बसंत पंचमी और भारतीय कला

बसंत पंचमी भारतीय संगीत और साहित्य के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
• शास्त्रीय संगीत में बसंत राग
• भक्तिकाल में बसंत के पद
• कालिदास, जयदेव और सूरदास की रचनाओं में बसंत का सुंदर चित्रण

यह पर्व कलाकारों के लिए प्रेरणा का उत्सव है।



🪁 लोक परंपराएँ और सामाजिक रंग

भारत के विभिन्न क्षेत्रों में बसंत पंचमी अलग-अलग रूपों में मनाई जाती है:
• उत्तर भारत में पतंग उड़ाने की परंपरा
• पंजाब और हरियाणा में खेतों में उत्सव
• बंगाल में सरस्वती पूजा का विशेष आयोजन
• राजस्थान में लोकगीत और नृत्य

यह पर्व समाज को जोड़ने वाला, उल्लास और सामूहिकता का संदेश देता है।



🌸 आध्यात्मिक संदेश

बसंत पंचमी हमें सिखाती है कि:
• जैसे प्रकृति हर वर्ष पुनः खिलती है, वैसे ही मनुष्य को भी अपने भीतर नए विचार और संस्कार विकसित करने चाहिए
• अज्ञान की शीत ऋतु को त्यागकर ज्ञान के बसंत का स्वागत करना चाहिए
• जीवन में संतुलन, सौंदर्य और साधना आवश्यक है



🌼 उपसंहार

बसंत पंचमी केवल एक तिथि नहीं, बल्कि जीवन में नवचेतना का उत्सव है। यह पर्व हमें ज्ञान, कला, प्रकृति और आत्मा—चारों से जोड़ता है। जब हम माँ सरस्वती की आराधना करते हैं, तब वास्तव में हम अपने भीतर छिपी हुई बुद्धि और विवेक को प्रणाम करते हैं।

बसंत पंचमी का यह पावन पर्व हम सभी के जीवन में ज्ञान, सौंदर्य और सकारात्मकता का बसंत लेकर आए। 🌼🙏

माँ सरस्वती की कृपा से जीवन में ज्ञान, बुद्धि और विवेक का वास हो।वसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏
23/01/2026

माँ सरस्वती की कृपा से जीवन में ज्ञान, बुद्धि और विवेक का वास हो।

वसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏

“माँ काली की शरण में आया मन, स्वयं मौन में समाधि पा लेता है।” ाँ_काली
18/01/2026

“माँ काली की शरण में आया मन, स्वयं मौन में समाधि पा लेता है।”

ाँ_काली

🌑 आज मौनी अमावस्या 🌑आज का दिन मौन, संयम और आत्मचिंतन का है।मौनी अमावस्या पर मौन व्रत रखने, गंगा स्नान, दान-पुण्य और जप-त...
18/01/2026

🌑 आज मौनी अमावस्या 🌑

आज का दिन मौन, संयम और आत्मचिंतन का है।
मौनी अमावस्या पर मौन व्रत रखने, गंगा स्नान, दान-पुण्य और जप-तप का विशेष महत्व बताया गया है।
माना जाता है कि आज किए गए पुण्य कर्म कई गुना फल देते हैं और मन को शांति व सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

आइए आज के दिन
✨ मन की अशुद्धियाँ त्यागें
✨ मौन के माध्यम से आत्मा की आवाज़ सुनें
✨ और ईश्वर की कृपा प्राप्त करें।

आप सभी को मौनी अमावस्या की हार्दिक शुभकामनाएँ 🌼

🙏 हर हर गंगे 🙏

#मौनीअमावस्या

#सनातनधर्म
#पुण्यदिवस
#आध्यात्म

हर्ष, उल्लास एवं उमंग के महापर्व  #लोहड़ी की हार्दिक शुभकामनाएं।यह पर्व आप सभी के जीवन में आरोग्यता, खुशहाली, शांति और स...
13/01/2026

हर्ष, उल्लास एवं उमंग के महापर्व #लोहड़ी की हार्दिक शुभकामनाएं।

यह पर्व आप सभी के जीवन में आरोग्यता, खुशहाली, शांति और समृद्धि लेकर आए।


#लोहड़ी

षट्तिला एकादशी के दिन भगवान विष्णु की बैकुण्ठ स्वरुप में पूजा-अर्चना की जाती है। षटतिला एकादशी पर तिल का विशेष महत्व बता...
12/01/2026

षट्तिला एकादशी के दिन भगवान विष्णु की बैकुण्ठ स्वरुप में पूजा-अर्चना की जाती है। षटतिला एकादशी पर तिल का विशेष महत्व बताया गया है।

इस दिन तिलों का प्रयोग परम फलदायी माना गया है, षटतिला एकादशी के दिन 6 प्रकार से तिलों का उपयोग किया जाता है।

षटतिला एकादशी के दिन तिल का 6 प्रकार, स्नान, उबटन, आहुति, तर्पण, दान और सेवन से पापों का नाश होता है। तिलों के इस उपयोग के कारण ही इस एकादशी को षटतिला एकादशी कहा जाता है।

14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति के साथ षटतिला एकादशी भी है, 23 साल बाद मकर संक्रांति पर एकादशी का संयोग बना है।

इस दिन चावल, काली उड़द दाल, तिल और गुड़ का दान किया जा सकता है, पंचांग अनुसार माघ कृष्ण पक्ष की एकादशी 14 जनवरी की शाम 5 बजकर 52 मिनट पर समाप्त हो रही है।

नए साल पर माता लक्ष्मी सभी लोगों पर अपनी कृपा बनाएं रखें जय मां लक्ष्मी Happy New Year
01/01/2026

नए साल पर माता लक्ष्मी सभी लोगों पर अपनी कृपा बनाएं रखें

जय मां लक्ष्मी
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