नटराज योग संस्थान

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नटराज योग संस्थान Yoga, Meditation, Power Yoga, Weight loss , Yoga Therapy , Panchkarma &Naturopathy Treatment

13/02/2026
प्रकृति में अनेक ऐसी जड़ी-बूटियाँ पाई जाती हैं, जिनके औषधीय गुणों के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। ये पौधे खेतों, खाली...
09/02/2026

प्रकृति में अनेक ऐसी जड़ी-बूटियाँ पाई जाती हैं, जिनके औषधीय गुणों के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। ये पौधे खेतों, खाली ज़मीनों और रास्तों के किनारे आसानी से उग जाते हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में हम इन्हें साधारण घास समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं।

गोरखमुंडी (Sphaeranthus indicus) भी ऐसा ही एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा है। इसका गुलाबी रंग का गोल फूल इसकी मुख्य पहचान है। इसके फूल, पत्तियाँ, जड़ और तना आयुर्वेद में उपयोगी माने जाते हैं। इसका स्वाद कड़वा और तीखा होता है, लेकिन इसमें मौजूद एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण इसे कई स्वास्थ्य समस्याओं के उपचार में अत्यंत प्रभावी बनाते हैं।

🌿 गोरखमुंडी के औषधीय उपयोग जानिए —

■ सर्दी-खांसी में उपयोगी :-
सर्दी, खांसी और जुकाम की समस्या में गोरखमुंडी बेहद कारगर मानी जाती है। गोरखमुंडी के गोल फूल को अदरक, तुलसी और काली मिर्च के साथ पानी में उबालकर दिन में दो बार सेवन करने से सर्दी-खांसी में राहत मिलती है और शरीर को आराम मिलता है।

■ आंखों की रोशनी बढ़ाने में सहायक :-
आंखों के लिए गोरखमुंडी को वरदान माना जाता है। इसके पत्तों में ऐसे विशेष गुण पाए जाते हैं, जो आंखों की रोशनी बढ़ाने में मदद करते हैं। गोरखमुंडी के पत्तों का रस निकालकर आधे गिलास पानी में मिलाकर सेवन करने से आंखें स्वस्थ रहती हैं।

■ यौन दुर्बलता दूर करें :-
यौन दुर्बलता को दूर करने के लिए भी यह पौधा बखूबी जाना जाता है। यौन दुर्बलता से बचने के लिए इसे गाय के दूध में गोरखमुंडी की जड़ का चूर्ण मिलाकर पीना काफी कारगर है। रोजाना सुबह-शाम 2 से 5 ग्राम चूर्ण यौन शक्ति को मजबूत बनाने के साथ ही यौन से जुड़ी कई अन्य समस्याओं से भी निजात दिलाता है।

■ किडनी के लिए लाभकारी :-
गोरखमुंडी किडनी से जुड़ी बीमारियों में सहायक है। इसमें शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने की क्षमता होती है। इसके लिए दो कप पानी में गोरखमुंडी की जड़ और फूल को उबालें। जब पानी आधा रह जाए, तो छानकर सेवन करें। इससे किडनी से संबंधित समस्याओं में लाभ मिलता है।

■ कुष्ट रोग में फायदेमंद :-
कुष्ट रोग एक प्रकार का चर्म रोग है, यह रोग बैक्टीरिया के जरिए फैलता है। गोरखमुंडी का सेवन कुष्ट रोग के लक्षणों को दूर करता है। इस रोग में सबसे उपयोगी इसका पाउडर माना जाता है। यह रोग होने पर नीम की छाल के पाउडर के साथ गोरखमुंडी के पाउडर का एक साथ सेवन करें। इससे समस्या कम हो सकती है।

■ हृदय के लिए लाभकारी :-
गोरखमुंडी में मौजूद औषधीय तत्व हृदय की धड़कन को मजबूत करने और कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद करते हैं। इसके पंचांग (जड़, तना और फूल) का काढ़ा बनाकर सेवन करने से हृदय संबंधी समस्याओं में राहत मिलती है।

■ यूरिन इन्फेक्शन में राहत :-
गोरखमुंडी मूत्र से जुड़ी समस्याओं जैसे पेशाब में जलन और रुकावट को दूर करने में सहायक है। इसके लिए गोरखमुंडी के पत्तों की चटनी बनाकर सेवन करने से यूरिन इन्फेक्शन और मूत्र संबंधी समस्याओं में आराम मिलता है।

■ शुगर लेवल नियंत्रित करने में मददगार :-
गोरखमुंडी शुगर लेवल को नियंत्रित करने में भी प्रभावी मानी जाती है। इसकी जड़ का चूर्ण बनाकर गर्म पानी के साथ सेवन करने से रक्त शर्करा संतुलित रहती है और शुगर बढ़ने की संभावना कम होती है।

✨ सावधानियाँ —

1) गोरखमुंडी का सेवन निर्धारित मात्रा में ही करें, अधिक सेवन से पेट दर्द या दस्त हो सकता हैं।

2) यदि आप गर्भवती, स्तनपान करा रही महिला या किसी गंभीर बीमारी के मरीज हैं, तो इसका उपयोग करने से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लें।

#गोरखमुंडी

🌼🌱बबूल की फली 🌱 🌱माउथकैंसर हड्डियों को बज्र बनाता है टूटी हुई हड्डियों को जोड़ने के लिए गठिया (अर्थराइटिस )जोड़ों का दर्...
21/01/2026

🌼🌱बबूल की फली 🌱 🌱माउथकैंसर हड्डियों को बज्र बनाता है टूटी हुई हड्डियों को जोड़ने के लिए गठिया

(अर्थराइटिस )जोड़ों का दर्द सूजन बवासीर पाचनतंत्र कमजोरी और शुगर को भी कंट्रोल करने में बहुत अच्छा काम करता है लिकोरिया को 48 घंटे में कंट्रोल करें

♦️ माउथ #कैंसर में प्रयोग. बबूल का फल और नीम का फल
समान मात्रा में लेकर लौंग इलायची डालकर पानी में गर्म करके गलाला करना चाहिए मुंह में गिरा कर घाव को धोना चाहिए दिन में तीन-चार बार करना चाहिए 48 घंटे में आपको राहत पता चल जाएगा

इसमें उत्तम कोटि का कैल्शियम पाया जाता है बबूल के फल के कई औषधीय फायदे हैं जो आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा में उपयोग किए जाते हैं।

👉👉यहाँ कुछ प्रमुख फायदे दिए गए हैं:

➡️1. बवासीर (पाइल्स) में राहत*: बबूल के फल का उपयोग बवासीर के इलाज में किया जाता है। इसके फल का चूर्ण या काढ़ा बनाकर सेवन करने से बवासीर के लक्षणों में राहत मिलती है।

➡️2. पाचन तंत्र की समस्याएं*: बबूल के फल में फाइबर की अच्छी मात्रा होती है, जो पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करता है। यह कब्ज, दस्त, और पेट दर्द जैसी समस्याओं में राहत प्रदान कर सकता है।

➡️3. मधुमेह नियंत्रण*: बबूल के फल में रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने वाले गुण होते हैं। इसका सेवन मधुमेह रोगियों के लिए लाभदायक हो सकता है।

➡️4. त्वचा संबंधी समस्याएं*: बबूल के फल का उपयोग त्वचा संबंधी समस्याओं जैसे कि एक्जिमा, मुंहासे, और घावों के इलाज में किया जा सकता है। इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीबैक्टीरियल गुण त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

➡️5. मुंह के स्वास्थ्य में सुधार*: बबूल के फल का उपयोग मुंह के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है। इसके एंटीबैक्टीरियल गुण मुंह में बैक्टीरिया की वृद्धि को रोकने में मदद करते हैं और दांतों और मसूड़ों को स्वस्थ रखने में सहायक होते हैं।

➡️6. प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करना*: बबूल के फल में विटामिन सी और अन्य एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में मदद करते हैं और शरीर को विभिन्न संक्रमणों से बचाते हैं।

➡️7. महिलाओं के स्वास्थ्य में लाभ*: बबूल के फल का उपयोग महिलाओं में मासिक धर्म संबंधी समस्याओं और श्वेत प्रदर जैसी समस्याओं के इलाज में किया जा सकता है।

👉👉👉 सेवन करने की विधि....

🌱🌱बबूल के फल को छाया में सुखाकर पाउडर बनाकर भी सेवन कर सकते हैं
और ताजा का काढ़ा बनाकर भी सेवन कर सकते हैं
लिकोरिया में ताजा फल को पीसकर मिश्री मिलाकर शर्बत बनाकर पीना चाहिए श्वेत प्रदर नष्ट हो जाता है
विशेष जानकारी के लिए लिंक फॉलो करें ।।।

 #दंडी_संन्यासी  : भारतीय संस्कृति का चलता-फिरता उपनिषद #भारतीय सनातन  #संस्कृति में संन्यास केवल त्याग नहीं, बल्कि सर्व...
20/12/2025

#दंडी_संन्यासी : भारतीय संस्कृति का चलता-फिरता उपनिषद
#भारतीय सनातन #संस्कृति में संन्यास केवल त्याग नहीं, बल्कि सर्वोच्च चेतना की साधना है। इसी संन्यास परंपरा का एक अत्यंत तेजस्वी, अनुशासित और शास्त्रनिष्ठ स्वरूप है — #दंडी संन्यासी।

दंडी का अर्थ
‘दंडी’ शब्द का शास्त्रीय अर्थ
संस्कृत में दण्ड का अर्थ केवल लकड़ी नहीं, बल्कि—
दण्डः = नियम, संयम, अनुशासन, आत्मनियंत्रण

अतः दंडी का तात्पर्य है—

जिसका जीवन पूर्णतः अनुशासन और आत्मसंयम से संचालित हो।
संस्कृत में दण्ड केवल लकड़ी नहीं, बल्कि
संयम, नियम और आत्मानुशासन का प्रतीक है।

जो संन्यासी अपने काय, वाक् और मन को पूर्णतः अनुशासित कर लेता है, वही दंडी कहलाता है, भारतीय संस्कृति में संन्यास केवल जीवन का त्याग नहीं, बल्कि धर्म, ज्ञान और लोककल्याण का सर्वोच्च आदर्श है। इसी संन्यास परंपरा में दंडी संन्यासी एक विशिष्ट, अनुशासित और अत्यंत गंभीर संन्यास परंपरा के वाहक हैं। दंडी संन्यासी वह हैं जो एक, दो, तीन या चार दंड (दण्ड) धारण कर जीवन को वेदांतमय साधना में समर्पित कर देते हैं।

दंडी संन्यासियों की परंपरा विशेषतः शंकराचार्य परंपरा, वैष्णव दंडी संन्यास और स्मार्त परंपरा से जुड़ी हुई है।

शास्त्रीय प्रमाण
वेदों और उपनिषदों में संन्यास की अवधारणा

ऋग्वेद से ही संन्यास के बीज मिलते हैं—

“केशिनो दीर्घकेशा…”
(ऋग्वेद 10.136)

उपनिषदों में दंडी संन्यास की स्पष्ट भूमिका है—

जाबाल उपनिषद्

“यदा वैराग्यं जायते तदा दण्डं गृह्णीयात्”
(जब वैराग्य उत्पन्न हो, तब दंड धारण करे।)

नारद परिव्राजकोपनिषद्

यह ग्रंथ दंडी संन्यासियों के—

आचार

व्रत

भिक्षा

मौन

ब्रह्मज्ञान
—का विस्तृत विधान करता है।

जाबाल उपनिषद् कहता है —

“यदा वैराग्यं जायते तदा दण्डं गृह्णीयात्”
(जब वैराग्य उत्पन्न हो, तभी दण्ड धारण करे)

नारद परिव्राजकोपनिषद् में दंडी संन्यासी के
आचार

भिक्षा

मौन

ब्रह्मज्ञान
—का स्पष्ट विधान है।

#भागवत_पुराण (11वाँ स्कंध) में ऐसे संन्यासी को परमहंस की अवस्था कहा गया है।

#आदि_शंकराचार्य और दंडी परंपरा

आदि शंकराचार्य ने दशनामी संन्यास परंपरा की स्थापना कर दंडी संन्यास को व्यवस्थित स्वरूप दिया।
आदि शंकराचार्य ने दशनामी संन्यास परंपरा की स्थापना की—

तीर्थ

आश्रम

गिरी

पुरी

भारती

सरस्वती आदि

चारों पीठों के संन्यासी आज भी—

#वेद

#उपनिषद

#ब्रह्मसूत्र

#गीता
के अद्वैत दर्शन का प्रचार करते हैं।

“ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या”
यह दंडी संन्यासी का केवल वाक्य नहीं, जीवन है।
दंडी संन्यास कैसे आरंभ होता है?

यह कोई भावावेश नहीं, बल्कि कठोर साधना का परिणाम है—

1️⃣ ब्रह्मचर्य और वैराग्य
2️⃣ गुरु के सान्निध्य में वेदांत अध्ययन
3️⃣ वीरजा होम द्वारा संन्यास दीक्षा
4️⃣ एक, तीन या चार दण्ड का ग्रहण
(काय-वाक्-मन-आत्मसंयम के प्रतीक)

दंडी संन्यास कैसे प्रारंभ होता है?

दंडी संन्यास कोई अचानक लिया गया निर्णय नहीं होता। इसके चरण—

1. ब्रहमचर्य और वैराग्य

दीर्घकालीन संयम और अध्ययन।

2. गुरु-दीक्षा

योग्य गुरु से—

वेद

उपनिषद

ब्रह्मसूत्र

गीता
का अध्ययन।

3. वीरजा होम

संन्यास दीक्षा का अग्निकर्म।

4. दण्ड ग्रहण

एक, तीन या चार दंड—

काय

वाक्

मन

आत्मा
के प्रतीक।

ब्रह्ममुहूर्त जागरण

जप-तप-स्वाध्याय

अल्प भिक्षा

पदयात्रा

मौन और ध्यान

“भिक्षामात्रेण तुष्येत्” — मनुस्मृति

उनका जीवन स्वयं एक शिक्षा होता है।

समाज में भूमिका

✔️ धर्म और संस्कृति के रक्षक
✔️ शास्त्रों के शिक्षक
✔️ समाज को नीति देने वाले मार्गदर्शक
✔️ कुप्रथाओं के विरुद्ध शांत क्रांति

राजा हो या सामान्य जन —
दंडी संन्यासी सबको धर्म की कसौटी दिखाते हैं।

भारतीय संस्कृति में योगदान

मठ परंपरा

गुरुकुल व्यवस्था

संस्कृत संरक्षण

अद्वैत दर्शन

लोकजागरण

दंडी संन्यासी न बोलकर भी बहुत कुछ कह जाते हैं।

उपसंहार

दंडी संन्यासी भारत की आत्मा के मौन प्रहरी हैं।
वे बताते हैं कि—

त्याग से ही समाज में मर्यादा जीवित रहती है।

जब तक भारत में दंडी संन्यासी हैं,
तब तक भारत केवल देश नहीं —
धर्म और चेतना की जीवित परंपरा है।
आधुनिक युग में दंडी संन्यासी

आज भी—चार शंकराचार्य पीठ

वैष्णव दंडी संन्यास
—भारतीय आध्यात्मिक चेतना को जीवित रखे हुए हैं।
वे न मीडिया के लिए जीते हैं,
न सत्ता के लिए—
वे सत्य के लिए जीते हैं।

लेखक : हर्षराज दुबे


#सिद्धरूदामठ #धर्माचिंतन #गुरुकुल #सनातन #काशी #प्रयागराज

नज़र लगना (Evil Eye): क्या यह सिर्फ अंधविश्वास है या मानव सभ्यता का सबसे पुराना रहस्य? लगभग हर इंसान ने अपने जीवन में कभ...
17/12/2025

नज़र लगना (Evil Eye): क्या यह सिर्फ अंधविश्वास है या मानव सभ्यता का सबसे पुराना रहस्य?

लगभग हर इंसान ने अपने जीवन में कभी न कभी यह वाक्य सुना है "नज़र लग गई है"। कभी बच्चे के बीमार पड़ने पर,कभी अचानक सफलता के बाद आई परेशानी पर,तो कभी बिना किसी स्पष्ट कारण के बिगड़ते हालात पर। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह विश्वास सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है बल्कि दुनिया की लगभग हर सभ्यता में अलग‑अलग नामों और प्रतीकों के साथ मौजूद है।
तो सवाल उठता है अगर नज़र लगना सिर्फ भ्रम है तो यह विचार पूरी दुनिया में एक जैसा कैसे फैल गया?

दुनिया भर में नज़र का एक ही विचार
भारत:- नज़र लगना
तुर्की:- Nazar Boncuğu
ग्रीस:- Mati
इटली:- Malocchio
अरब देश:- Al‑Ayn
मेक्सिको:- Mal de Ojo
हज़ारों साल पहले जब ये सभ्यताएँ आपस में जुड़ी भी नहीं थीं,तब भी "बुरी नज़र" का विचार मौजूद था। यह संयोग है या मानव अनुभव का कोई गहरा सच?

विज्ञान क्या कहता है?
आधुनिक विज्ञान नज़र लगने को भौतिक शक्ति के रूप में स्वीकार नहीं करता,लेकिन यह इसे पूरी तरह नकारता भी नहीं है।
1. मनोवैज्ञानिक प्रभाव (Psychosomatic Effect)
जब किसी व्यक्ति को लगता है कि उस पर बुरी नज़र लगी है:
* तनाव बढ़ जाता है
* डर और चिंता पैदा होती है
* शरीर में वास्तविक लक्षण दिखने लगते हैं (सिर दर्द,थकान,घबराहट)
दिमाग का यह असर इतना शक्तिशाली होता है कि काल्पनिक कारण भी वास्तविक बीमारी पैदा कर सकता है।
2. सामाजिक ईर्ष्या का सिद्धांत (Social Jealousy Theory)
प्राचीन समाजों में जो व्यक्ति:
* ज्यादा सुंदर होता
* ज्यादा सफल होता
* ज्यादा खुश दिखाई देता
वह दूसरों की ईर्ष्या का केंद्र बनता था। धीरे‑धीरे यह धारणा बनी कि ईर्ष्यापूर्ण नज़र नुकसान पहुँचा सकती है।
3. पुष्टि पूर्वाग्रह (Confirmation Bias)
अगर किसी की तारीफ़ के बाद कुछ गलत हो जाए तो दिमाग तुरंत कारण ढूंढता है: "नज़र लग गई"। लेकिन जब तारीफ़ के बाद कुछ अच्छा ही होता है तो हम उसे सामान्य मान लेते हैं। यही चयनात्मक याददाश्त इस विश्वास को मजबूत करती है।

फिर भी सवाल बाकी है: हर सभ्यता में एक जैसा विश्वास क्यों?
यहाँ विज्ञान के पास भी पूरा जवाब नहीं है,लेकिन कुछ गहरे मनोवैज्ञानिक और मानव‑वैज्ञानिक सिद्धांत सामने आते हैं।
1. आँख: सबसे शक्तिशाली मानव संकेत
आँखें:
* भावनाएँ व्यक्त करती हैं
* ईर्ष्या,लालच,गुस्सा साफ दिखाती हैं
प्राचीन इंसान मानता था कि आँखें केवल देखने का माध्यम नहीं बल्कि प्रभाव डालने का साधन हैं।
2. सामूहिक अवचेतन (Collective Unconscious)
मनोवैज्ञानिक कार्ल युंग के अनुसार कुछ डर और प्रतीक मानव अवचेतन में साझा होते हैं। नज़र लगना शायद मानव इतिहास में बार‑बार हुए अनुभवों से जन्मा एक साझा डर है।
3. ऊर्जा का सिद्धांत (विज्ञान इसे सिद्ध नहीं करता)
कई आध्यात्मिक परंपराएँ मानती हैं कि:
* हर इंसान का एक ऊर्जा क्षेत्र होता है
* तीव्र नकारात्मक भावना उस संतुलन को बिगाड़ सकती है
इसका कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है लेकिन ध्यान,योग और प्रार्थना के प्रभाव आज भी पूरी तरह समझे नहीं गए हैं।

टोटके और प्रतीक हर जगह क्यों?
* भारत: काला धागा,नींबू‑मिर्च
* तुर्की: नीली आँख
* अरब: आयतें
* यूरोप: लाल धागा
विज्ञान इन्हें Placebo Effect मानता है। लेकिन प्लेसीबो का असर कई बार वास्तविक और मापने योग्य होता है।

निष्कर्ष: विज्ञान बनाम मानव अनुभव
नज़र लगना शायद कोई अलौकिक शक्ति नहीं है लेकिन एक शक्तिशाली मनो‑सामाजिक प्रभाव जरूर है और यही वजह है कि जो चीज़ विज्ञान से साबित नहीं,वह हमेशा झूठ हो यह ज़रूरी नहीं। नज़र लगना विज्ञान और आस्था के बीच खड़ा वह रहस्य है जो हमें याद दिलाता है कि मानव मन अभी भी पूरी तरह समझा नहीं गया है।
शायद नज़र लगना बाहर से नहीं अंदर से शुरू होता है। डर,ईर्ष्या और विश्वास के ज़रिए और जब तक इंसान भावनाएँ महसूस करता रहेगा,यह रहस्य जीवित रहेगा।

10/12/2025

“Inner energy, outer peaceful”

08/12/2025

Yesterday Dr. Sanjay Malpani Vice President of Yogasana Bharat and President of Asian Yogasana arrived in Ranchi for the Geeta Maitri Milan programme. All of us from the Yogas Jharkhand Yogasana Sports Association had the privilege of meeting him and receiving his blessings.
As per Dr. Malpani Sir’s demand , a yoga demonstration was presented by the children, in which Arya, Prahlad Bhagat, Prashant Singh, Rahul Ranjan Chaitali Mukherjee, Puja Singh, and Shankar Rana were prominently present.”





ॐ का रहस्य : ब्रह्मांड की पहली ध्वनिमन को नियंत्रण में रखकर किए गए शब्द-उच्चारण को मंत्र कहा जाता है। मंत्र-विज्ञान हमार...
29/11/2025

ॐ का रहस्य : ब्रह्मांड की पहली ध्वनि

मन को नियंत्रण में रखकर किए गए शब्द-उच्चारण को मंत्र कहा जाता है। मंत्र-विज्ञान हमारे तन और मन दोनों को प्रभावित करता है, इसलिए कहा गया है— “जैसा मन, वैसा तन।”
मन को शांत और स्थिर रखने का सबसे सरल साधन है— ॐ का जप।

ॐ – तीन अक्षरों का विराट ब्रह्मांड

ॐ तीन ध्वनियों से बना है— अ, उ, म।

अ – सृजन, व्यापकता और उपासना का प्रतीक।

उ – बुद्धि, नियम, सूक्ष्मता और संचालन का संकेत।

म – अनंतता, ज्ञान, पालन और स्थिरता का रूप।

इन तीनों का सम्मिलित अर्थ है— परम सत्ता का सम्पूर्ण रूप, इसलिए इसे सभी मंत्रों का बीज मंत्र कहा गया है।

ब्रह्मांड की पहली ध्वनि

पुराण कहते हैं कि सृष्टि के प्रारंभ में जो पहली अनाहत ध्वनि गूंजी वह थी— ॐ।
यह ध्वनि किसी टकराव से नहीं बनी, बल्कि स्वयं ब्रह्मांड की गति और ऊर्जा से उत्पन्न हुई।
ध्यान की गहन अवस्था में साधक आज भी इस अनहद नाद को सुनते हैं और इसे परम शांति का स्रोत बताते हैं।

आध्यात्मिक रहस्य

ओम् का जप मन को शुद्ध करता है।

व्यक्ति को परमात्मा के निकट लाता है।

साधना में स्थिरता, मौन और अंतरात्मा की जागृति बढ़ाता है।

ईश्वर की अनुभूति हेतु यह सबसे सरल मार्ग माना गया है।

इसलिए हर मंत्र की शुरुआत ॐ से होती है—
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमो भगवते वासुदेवाय, आदि।

---

ॐ के वैज्ञानिक लाभ

मंत्र का उच्चारण केवल धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि वैज्ञानिक कंपन है।
ओम् का उच्चारण शरीर के विभिन्न हिस्सों— जीभ, तालू, कंठ, फेफड़ों और नाभि— में कंपन पैदा करता है, जो सीधे ग्रंथियों और चक्रों को सक्रिय करता है।

प्रमुख लाभ :

1. तनाव दूर करता है, शरीर पूरी तरह रिलैक्स होता है।

2. घबराहट और अधीरता कुछ ही मिनटों में गायब होती है।

3. शरीर में फैले विषाक्त तत्वों का संतुलन बनाता है।

4. हृदय और रक्तसंचार को नियमित करता है।

5. पाचन शक्ति तेज होती है।

6. शरीर में युवावस्था जैसी ऊर्जा लौट आती है।

7. थकान दूर होती है।

8. अनिद्रा का श्रेष्ठ उपचार— नींद आने तक मन ही मन इसका जप करें।

9. कुछ प्राणायाम के साथ करने पर फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है।

---

वास्तु और मानसिक ऊर्जा पर प्रभाव

वास्तुविद मानते हैं कि घर में अक्सर जप किया जाए तो

नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है,

वातावरण शांत होता है,

मनोवैज्ञानिक तनाव हटता है।

प्रिय शब्दों से सकारात्मक हार्मोन बनते हैं,
अप्रिय शब्दों से विषैले रसायन।
इसलिए ॐ की शांत लय मन, मस्तिष्क और हृदय पर अमृत की तरह काम करती है।

---

108 बार जप क्यों?

कम से कम 108 बार ॐ का उच्चारण करने से—

शरीर तनावमुक्त हो जाता है

ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है

प्रकृति के साथ तालमेल बनता है

परिस्थितियों का पूर्वानुमान करने की क्षमता बढ़ती है

व्यवहार में शालीनता और धैर्य आता है

निराशा, उदासी और आत्महत्या जैसे विचार दूर होते हैं

बच्चों में पढ़ाई का मन न लगे या स्मरण शक्ति कमजोर हो—
नियमित ओम् जप से अद्भुत लाभ मिलता है।

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उच्चारण की सही विधि

प्रातः स्नान के बाद शांत वातावरण में बैठें।

मुद्रा : पद्मासन, अर्धपद्मासन, सुखासन या वज्रासन।

जितनी बार समय मिले— 5, 7, 10 या 21 बार।

पहले “ओ——” को लंबा खींचें, अंत में “म्” हल्की गूंज की तरह।

जप माला से भी कर सकते हैं।

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निष्कर्ष

ॐ केवल एक मंत्र नहीं — यह आत्मा का संगीत है, ब्रह्मांड की धड़कन है।
यह वह ध्वनि है जो हमें प्रकृति, ऊर्जा, चेतना और ईश्वर से जोड़ती है।
जो इसे नियमित करता है, उसके जीवन में शांति, स्थिरता, स्फूर्ति और दिव्यता स्वयं उतर आती है।

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#ॐ






















भारत में Avacado की जितनी मार्केटिंग होती है अगर उतनी मार्केटिंग "आंवला" की हो जाए तो भारत सुपरहेल्थी हो जाएगा।पोषक तत्व...
07/11/2025

भारत में Avacado की जितनी मार्केटिंग होती है अगर उतनी मार्केटिंग "आंवला" की हो जाए तो भारत सुपरहेल्थी हो जाएगा।

पोषक तत्वों के मामले में एक आवंला बाकी फलों से बहुत बेहतर है।

1 आंवला= 10 सेब के बराबर है
1 आंवला= 17 अनार के बराबर है
1 आंवला= 12 संतरा के बराबर है

आवंला हर फल का बाप है,आंवले में नींबू से 10 गुना ज्यादा विटामिन सी होता है।

इसलिए आंवले को अपने डाइट में शामिल करें और स्वास्थ्य रहें।
आंवला सुपर फूड है जो बहुत आसानी से मिल जाता है।
गांव में तो फ्री में भी मिल जाता है वो भी चाहे जितना बिल्कुल किसी के भी पेड़ से तोड़ लो।
अगर आंवला और मोरिंगा जैसे हमारे देशी सुपरफूड्स की ब्रांडिंग Avacado जितनी ज़ोरदार हो जाए, तो भारत का आम आदमी विदेशी सप्लीमेंट्स के बिना ही सुपरहेल्दी हो सकता है

सर्दियाँ Indian super diet का super season है. Fresh हल्दी, आमला, चुकंदर, गाजर, पालक, साग, बाथू, सोया, सिंघारा, maximum गुणों से भरपूर सब्जियां और kitchen में काम करने का मन भी 😊

हालांकि पारंपरिक रूप से इसका प्रयोग विभिन्न उत्पादों में किया जाता है, लेकिन इसके रस से "आंवला साइडर" नामक एक नवीन किण्वित पेय विकसित किया गया है, जिसमें लगभग 4% अल्कोहल की मात्रा होती है

बहुत बढिया, आँवला सच में प्रकृति का अनमोल उपहार है। इसमें विटामिन सी भरपूर मात्रा में होता है, जो इम्यूनिटी बढ़ाता है और त्वचा को निखारता है। हर दिन आँवला खाने से सेहत भी चमके, और जवानी भी बरकरार रहे, बाल मजबूत और आंखें तेज होंगी।
आर्य प्रह्लाद भगत घरेलू नुस्खे

01/11/2025

What is Ayurveda ? क्या है आयुर्वेद

Specialize in healing and wellness with the Advance Level Yoga Therapist Course. Get certified as a YCB Yoga Therapist b...
31/10/2025

Specialize in healing and wellness with the Advance Level Yoga Therapist Course. Get certified as a YCB Yoga Therapist by the Ministry of AYUSH, Govt. of India, along with an Advance Certificate Course in Yoga by YCB ( PrCB :- INO Surya Foundation) and NATRAJ YOG SANSTHAN This dual certification prepares you to work in healthcare, wellness centers, and therapy-based yoga programs with professional recognition.

Registration Start :- 7808475779
Last Date 18 Sep. 2025
Course Start :- 20 September 2025

Address

Ranchi Road
Area

Opening Hours

Monday 6am - 5pm
Tuesday 6am - 5pm
Wednesday 6am - 5pm
Thursday 6am - 5pm
Friday 6am - 5pm
Saturday 6am - 5pm

Telephone

7808475779

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