01/03/2026
मधुमेह रेटिनोपैथी टाइप 1 या 2 मधुमेह की एक गंभीर, अक्सर लक्षणहीन नेत्र संबंधी जटिलता है, जो उच्च रक्त शर्करा द्वारा रेटिना की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुँचाने के कारण होती है। यह हल्के, गैर-प्रसारित रक्त वाहिका रिसाव से गंभीर, प्रसारित अवस्थाओं तक बढ़ती है, जिसमें नई, असामान्य रक्त वाहिकाओं का विकास होता है, जिससे धुंधली दृष्टि, फ्लोटर्स और संभावित अंधापन हो सकता है। उपचार में रक्त शर्करा का सख्त नियंत्रण, लेजर थेरेपी या इंजेक्शन शामिल हैं।
डायबिटिक रेटिनोपैथी के प्रमुख पहलू
लक्षण: शुरुआती चरणों में अक्सर कोई लक्षण नहीं होते हैं। जैसे-जैसे यह बीमारी बढ़ती है, लक्षणों में धुंधली दृष्टि, दृष्टि में उतार-चढ़ाव, काले धब्बे/तैरते हुए दृश्य, छल्ले या चमकती रोशनी शामिल हो सकते हैं।
कारण: लंबे समय तक और ठीक से नियंत्रित न किया गया उच्च रक्त शर्करा रेटिना में मौजूद छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है।
चरण:
हल्का/मध्यम गैर-प्रसारकारी: छोटी रक्त वाहिकाओं में उभार और रिसाव विकसित होते हैं।
गंभीर गैर-प्रसारक: रक्त वाहिकाएं अवरुद्ध हो जाती हैं, जिससे रेटिना को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है।
प्रोलिफेरेटिव डायबिटिक रेटिनोपैथी (पीडीआर): यह एक उन्नत अवस्था है जिसमें नई, नाजुक रक्त वाहिकाएं विकसित होती हैं, जिनसे रक्तस्राव हो सकता है और दृष्टि में गंभीर हानि हो सकती है।
जोखिम कारक: मधुमेह (टाइप 1 या 2) से पीड़ित कोई भी व्यक्ति जोखिम में है; मधुमेह की लंबी अवधि, उच्च रक्तचाप, धूम्रपान और गर्भावस्था के साथ जोखिम बढ़ जाता है।
इलाज:
प्रबंधन: रक्त शर्करा और रक्तचाप पर सख्त नियंत्रण।
चिकित्सा प्रक्रियाएं: रक्त वाहिकाओं की वृद्धि को रोकने के लिए इंजेक्शन (एंटी-वीईजीएफ), रिसाव वाली रक्त वाहिकाओं को सील करने के लिए लेजर उपचार, या आंख से रक्त निकालने के लिए विट्रेक्टोमी।