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चलते समय एड़ी में दर्द या चुभन का मुख्य कारण?प्लांटर फेशिआइटिस (तलवे के ऊतकों में सूजन) या हील स्पर होता है। इसके अलावा,...
23/05/2026

चलते समय एड़ी में दर्द या चुभन का मुख्य कारण?

प्लांटर फेशिआइटिस (तलवे के ऊतकों में सूजन) या हील स्पर होता है। इसके अलावा, खराब जूते, बहुत देर तक खड़े रहना,

मोटापा या विटामिन (D) और कैल्शियम की कमी भी इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं।
एड़ी में चुभन या दर्द होने के पीछे कई चिकित्सा और जीवनशैली से जुड़े कारण होते हैं:
प्रमुख कारणप्लांटर फेशिआइटिस (Plantar Fasciitis):
यह एड़ी के दर्द का सबसे सामान्य कारण है। जब एड़ी से लेकर पंजों तक के टिशू (Plantarfashia) में सूजन आ जाती है, तो सुबह सोकर उठने के बाद पहले कदम पर या चलते समय तेज चुभन महसूस होती है।
हील स्पर (Heel Spur): प्लांटर फेशिआइटिस की समस्या लंबे समय तक रहने पर एड़ी की हड्डी के नीचे एक अतिरिक्त हड्डी (कैल्शियम का जमाव) बढ़ जाती है, जो चुभन का कारण बनती है।
एच्लीस टेंडोनाइटिस (Achilles Tendinitis): पिंडली की मांसपेशियों को एड़ी की हड्डी से जोड़ने वाले टिशू में सूजन आ जाने से एड़ी के पीछे की तरफ दर्द और अकड़न होती है।विटामिन और पोषक तत्वों की कमी: शरीर में विटामिन D और कैल्शियम की कमी होने से हड्डियां और मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे चलने पर एड़ी में दर्द होता है।
अन्य कारण:
गलत जूते:
बिना कुशन वाले या बहुत सख्त सोल (Sole) वाले जूते पहनने से पैर की हड्डियों पर दबाव पड़ता है।
मोटापा: शरीर का अधिक वजन एड़ी के टिश्यू और हड्डियों पर अतिरिक्त दबाव डालता है, जिससे दर्द की समस्या बढ़ जाती है

सपाट पैर (Flat Feet): पैरों का आकार सही न होने या तलवे में कम झुकाव होने के कारण चाल प्रभावित होती है और एड़ी पर ज्यादा खिंचाव पड़ता है।
लंबे समय तक खड़े रहना:
कठोर कंक्रीट या टाइल्स के फर्श पर लगातार घंटों खड़े रहने से एड़ी के पैड (Fat pad) पर दबाव पड़ता है।
बचाव और राहत के उपाय:
सपोर्टिव जूते पहनें: हमेशा अच्छे आर्च सपोर्ट (Arch Support) और कुशन वाले जूते पहनें।
बर्फ से सिकाई: दर्द होने पर एड़ी के नीचे बर्फ की थैली से 10-15 मिनट सिकाई करें।
स्ट्रेचिंग करें: सुबह बिस्तर से उठने से पहले पैरों के पंजों और एड़ी की स्ट्रेचिंग करें।
आराम करें: ज्यादा देर तक खड़े रहने या भारी वजन उठाने से बचें।यदि दर्द कुछ दिनों में कम न हो और सामान्य उपायों से राहत न मिले, तो किसी नजदीकी हड्डी रोग विशेषज्ञ (Orthopedist) या फिजियोथेरेपिस्ट से संपर्क करें।

गर्मियों में ऑर्थोपेडिक (हड्डियों और जोड़ों) से संबंधित समस्याएं बढ़ जाती हैं, जैसे मोच, फ्रैक्चर और जोड़ों में दर्द। इन...
28/04/2026

गर्मियों में ऑर्थोपेडिक (हड्डियों और जोड़ों) से संबंधित समस्याएं बढ़ जाती हैं, जैसे मोच, फ्रैक्चर और जोड़ों में दर्द।
इन समस्याओं से बचाव के लिए जागरूकता बहुत ज़रूरी है।

गर्मी के मौसम में ऑर्थो स्वास्थ्य के लिए टिप्स:
उचित जूते पहनें: गतिविधि (जैसे चलना या दौड़ना) के अनुसार आरामदायक और सहायक जूते पहनें, जो पैर को सहारा दें।
व्यायाम और वार्म-अप: किसी भी तरह की शारीरिक गतिविधि से पहले वार्म-अप करें और नियमित व्यायाम करें।
सही मुद्रा (Posture): चलते-फिरते या बैठते समय सही मुद्रा अपनाएं।
वजन नियंत्रण: स्वस्थ वजन बनाए रखें ताकि जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।
चोट को नज़रअंदाज़ न करें: दर्द या मोच होने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।

गर्मियों में आम ऑर्थो समस्याएं और बचाव:
मोच और फ्रैक्चर: गर्मी में लोग ज्यादा सक्रिय होते हैं, जिससे गिरने या चोट लगने (जैसे टखने में मोच) का खतरा बढ़ जाता है।
जोड़ों का दर्द (Joint Pain): अचानक गर्मी और निर्जलीकरण (Dehydration) जोड़ों की अकड़न को बढ़ा सकते हैं।
हाइड्रेशन (Hydration): शरीर में पानी की कमी से मांसपेशियों में ऐंठन (Muscle cramps) हो सकती है, इसलिए पर्याप्त पानी पिएं।
योग का अभ्यास भी मांसपेशियों की ताकत को सुधारने और चोटों से बचाव में मददगार हो सकता है।


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19/04/2026

रोड़ एक्सीडेंट में घायल व्यक्ति की मदद कैसे करें?सड़क दुर्घटना होने पर क्या करना चाहिए ?रोड़ एक्सीडेंट में प्राथमिक उपचार क्या करें और कैसे करें-डॉ विनीत कुमार रंजन

ट्रॉमा या दुर्घटना प्रबंधन का अर्थ गंभीर चोटों (जैसे वाहन दुर्घटना, गिरने, या फ्रैक्चर) के तुरंत बाद की जाने वाली चिकित्सा सहायता है, जिसका उद्देश्य जान बचाना और जटिलताओं को कम करना है।
यहाँ ट्रॉमा एक्सीडेंट मैनेजमेंट के मुख्य चरण दिए गए हैं:
1. प्राथमिक उपचार (First Aid) - दुर्घटना स्थल पर
सुरक्षा सुनिश्चित करें (Ensure Safety): खुद को और पीड़ित को अतिरिक्त खतरे (जैसे यातायात या आग) से बचाएं।

रक्तस्राव रोकें (Stop Bleeding): खून बहने वाली जगह पर साफ कपड़े से सीधा दबाव (direct pressure) डालें।

सांस और चेतना की जांच करें: देखें कि पीड़ित सांस ले रहा है या नहीं।
हिलें-डुलें नहीं: यदि गर्दन या रीढ़ की हड्डी में चोट का संदेह हो, तो व्यक्ति को न हिलाएं, क्योंकि इससे लकवा हो सकता है।

एम्बुलेंस बुलाएं: तुरंत 102 या 108 पर आपातकालीन नंबर पर कॉल करें।
2. अस्पताल में ट्रॉमा प्रबंधन (Hospital Trauma Management)
अस्पताल में एक विशेषज्ञ टीम (Trauma Team) द्वारा तत्काल कार्रवाई की जाती है:
स्थिरीकरण (Stabilization): सबसे पहले मरीज की हालत को स्थिर किया जाता है, जैसे सांस नली साफ करना और ब्लीडिंग रोकना।

जांच (Evaluation): CT स्कैन, X-ray, और अल्ट्रासाउंड के माध्यम से आंतरिक चोटों का पता लगाया जाता है।

ट्रॉमा सर्जरी (Trauma Surgery): यदि आवश्यक हो, तो गंभीर आंतरिक अंगों की चोटों या टूटी हड्डियों के लिए तत्काल सर्जरी की जाती है।

गहन देखभाल (ICU Care): बहुत गंभीर मामलों में, मरीज को जीवन रक्षक प्रणालियों के साथ ICU में रखा जाता है।
3. मनोवैज्ञानिक आघात प्रबंधन (Psychological Trauma Management)
शारीरिक चोट के साथ-साथ मानसिक सदमा भी हो सकता है:
बातचीत करें: पीड़ित को शांत रखने की कोशिश करें।
काउंसलिंग: यदि घटना के बाद डर, घबराहट या बुरे सपने जैसे लक्षण बने रहें, तो विशेषज्ञ की मदद लें।

क्या न करें?
घायल व्यक्ति को जबरदस्ती उठाने या बैठाने की कोशिश न करें।
जब तक विशेषज्ञ न कहें, उसे कुछ भी खाने या पीने को न दें।

12/04/2026

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Jehanabad Road Arwal
Arwal
804401

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