02/01/2026
बृहस्पति ग्रहों में पूजनीय है, ग्रहों के राजा सूर्य देवगुरु बृहस्पति को बहुत सम्मान देते है। मंत्री पद गुरु को दिया है।
बृहस्पति को समझना है तो आप अपने देने की नियत देखिए आप समझ जाएंगे गुरु क्या है । हर जगह हाथ फैलाना , मुफ्त, ये बृहस्पति के कमजोर होने से होता है।
तनिक अपना बाल्यकाल याद करें अगर आप अपने शिक्षकों के आंखों के तारे रहते थे यही तो गुरु की शुभता का सूचक है। बृहस्पती जो ग्रह है ये बहुत भारी ग्रह है , इसके कारण समृद्धि , भारी शरीर , मोटापा, सबसे बड़ा लिवर इसका ही कारक है । बृहस्पती भारी व्यक्तित्व बनाते है। बृहस्पति में अहंकार तो नहीं है पर वह इतना चाहता है कि मैने कुछ किया है तो मेरा नाम तो हो।
शास्त्रों में गुरु के गजब के फल बताएं है ,शास्त्र भिक्षु को भी गुरु से जोड़ते है । एक आचार्य लिखते है गुरु दशम में हो उसको भिक्षु बनना पड़ता है ,खुद का होने के बाद भी मांगना पड़ता है। अर्थात इसका ज्ञान,पैसा या जो भी हो जो इससे लेगा फिर इसको देने में तड़पा देगा । बृहस्पति सबसे प्रसन्न होता है वैदिक ग्रंथों को पढ़ने से , ज्ञान बांटने से और मंदिर जाने से । लेकिन बृहस्पति को जो सबसे प्रिय है वह है बुर्जुगों,साधु , बाबा,इनके साथ महफिल में बैठना इन्हें प्रिय है। जैसे बुध के उपाय सबसे जल्दी फल दिखाते हैं मेरे अनुभव में गुरु समय लेता है। गुरु ऑक्सीजन है , ये खत्म तो सब खत्म । अगर किसी व्यक्ति का चरित्र कोई दृढ़ करें रहता है उसको गिरने से बचाता है तो वह है सिर्फ गुरु। गुरु का तत्व जब तक जीवित है तब तक न्याय में भरोसा रहेगा । आपको जानकार हैरानी होगी स्वतंत्र भारत की पत्रिका में भी षष्ठ स्थान में गुरु है ,देश की न्यायिक व्यवस्था या आम आदमी को न्याय, उसका केस की सुनवाई में कितना समय लगता है आप परिचित ही है । और आप यकीन नहीं करेंगे भारत में मनुष्यों की न्याय प्रणाली से कई अधिक भगवान के न्याय पर विश्वास करते है कारण षष्ठ गुरु।
कलयुग में बृहस्पति कमजोर हो गया है । गुरु जो ग्रह है ये लड़ाई झगड़ा नहीं करता । जब ये मंगल या केतु से संबंध बनाए तो ये भगवान परशुराम जैसा हो जाता है जो शास्त्र और शस्त्र दोनों में पारंगत कर देता है। परन्तु इसकी खासियत है ज्ञान से शत्रु को चरणों में ला देना। जैसे गुरु षष्ठ में होगा तो उसके शत्रु ही उससे सीखेंगे फिर इसपर हमला कर देंगे । एक जातक की बैडमिंटन की एकेडमी थी उसने जिस शिष्य को खड़ा किया बाद में उसने ही जातक का तिरस्कार करके अपनी एकेडमी खोल दी और जातक का काम ढ़ीला कर दिया।
गुरु दूसरे में हो कर्ज बोझ बना देता है। गुरु अष्टम में हो साधु का ऋण होता है। गुरु सबसे कमजोर तीसरे भाव में होता है परन्तु ये तीर्थ करवाता है व्यक्ति भजन सुनता है।
बृहस्पति का एक तत्व है वह राजा के निकट रहने का । सूर्य को प्रिय है ना गुरु । इस वजह से जिस भी जातक का गुरु खराब हो वह मंत्री कभी नहीं बन पाता उसे ऐसे काम मिलेंगे ही नहीं जहां सलाहकार का रोल हो। राज्य कृपा अर्थात सरकारी नौकरी के लिए बृहस्पति भी जरूरी ग्रह है। बृहस्पति के बहुत रहस्य है चतुर्थ में बैठने से जातक की मां की उपासना इसको बचाए चाहे ये खुद बदमाश हो , तृतीय गुरु की भार्या की उपासना इसके काम बनाए । गुरु का कार्य ही है खुद जलकर उजाला देना।
जिस चिकित्सक के लग्न ,दशम ,अष्टम स्थान को गुरु मजबूती से प्रभावित करे वह बहुत अच्छी दवाई देकर रोगमुक्त कर देता है। जब भी आप बहुत गहरा ज्ञान लेना चाहेंगे आपके वजन में अंतर कर देगा ये गुरु का ही फल है। ये विचित्र बात बता रहा हूं आपने सुना होगा गुरु सहज होता है परन्तु बृहस्पति को झुकना नहीं आता। इस वजह से कई बारी उसको अहंकार से भी जोड़ते है जितना अच्छा बृहस्पति होगा वह कभी ये नहीं कहेगा मैं ये हूं , मैं वह हूं , उसके ज्ञान से उसका परिचय हो जाता है । बृहस्पती को मीठा बहुत पसंद है। बीमारी देने में आएं तो लिवर खराब कर दे। इतना मोटापा दे कि शरीर की रगड़ाई करवा दे। साइनस भी यही देता है। सुजन भी यही देता है । ये जो भंडारे ,लंगर ,ऐसे शुभ अवसर में अन्न की सेवा करना ,खाना परोसना ये इसको पसंद है। ये नफरत किसी ग्रह से नहीं करता , ये शुक्राचार्य के टोली के शनि देव को भी अपने साथ युति,दृष्टि करने से कुंडली मजबूत कर देता है। परन्तु इसको परेशानी है चोरी से , अन्याय से ,धर्म के विघटन से । गुरु जिस साधु , तपस्वी, संत का बहुत बलवान होगा उसको काम , कामुक्ता,उसका शुक्र उसे कभी परेशान नहीं कर पाता। वरना साधुओं को काम को दबाना,कामदेव को शांत करना कठिन होता है इस वजह से बहुत से फर्जी बाबा को काम अपने जाल में फंसाकर जेल में डाल देता है जिन्हें डिजिटल साधु कहते है (गुरु +शुक्र+ राहु )।।
कलयुग में सबसे पीड़ित ग्रह बृहस्पति है इसलिए गुरु मिलना काफी कठिन होता है। सोशल मीडिया राहु है ,जब इसमें गुरु का प्रभाव आ जाएं आप पाएंगे इंटरनेट में सब गुरु मिलेंगे।
गुरु के साथ नवम भाव खराब हो तो
( पानी पियो छान कर , गुरु बनाओ जान कर ) ।।
सबसे कठिन है बृहस्पति होना, जहां आशाएं सिर्फ उस गुरु से हो भार सारा उस गुरु पर हो परन्तु उसको कौनसी शक्ति आगे बड़ा रही है वह भगवान ही जानता है। इसलिए गुरु वह दीपक है जो खुद जलकर दूसरों को उजाला देता है।
इंटरनेट में गुरु ढूंढना बहुत भारी गलती है। लोग गुरु को ऐसा समझते है जैसे गुरु तत्व बाजार पर मिल जाएगा, काश हमारा भी कोई होता है,विद्वान कहते है आपको खुद गुरु ढूंढता है, आप उसको नहीं ।।बृहस्पति भाग्य है, fortuna है, इसको बढ़ाना है तो दैनिक मंदिर दर्शन से अच्छा क्या होगा।
प्रस्तुत चित्र गुरु +मंगल+केतु का परिचय है।
Post credit- Divinity of parashari jyotish