18/04/2026
एकांत मूर्ख के लिए कैदखाना है,
और ज्ञानी के लिए स्वर्ग।
क्योंकि जब मनुष्य अकेला होता है, तब उसे अपने ही विचारों का सामना करना पड़ता है। मूर्ख व्यक्ति के लिए यह बहुत कठिन होता है, क्योंकि उसके भीतर अशांति, डर और उलझन भरी होती है।
इसलिए वह हमेशा भीड़, शोर और बाहरी चीज़ों में खुद को उलझाए रखना चाहता है। लेकिन एक ज्ञानी व्यक्ति के लिए एकांत अमृत के समान होता है।
एकांत में वह स्वयं को, अपने मन को और अपने वास्तविक स्वरूप को गहराई से देख पाता है।
वहीं से शांति, समझ और आत्मज्ञान का जन्म होता है।
सच तो यह है कि जिस व्यक्ति को अपने साथ रहना अच्छा लगने
लगे, वह जीवन के सबसे बड़े रहस्य को समझने लगता है।
एकांत से मत भागो,
क्योंकि वहीं तुम्हारा असली परिचय तुम्हारे सामने आता है।