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Self realization (आत्म-साक्षात्कार) का अर्थ है स्वयं के सच्चे स्वरूप, आत्मा या अपनी वास्तविक क्षमता को पहचानना। यह केवल बौद्धिक ज्ञान नहीं, बल्कि एक गहरा प्रत्यक्ष अनुभव है कि आप केवल शरीर या मन नहीं, बल्कि एक शुद्ध ऊर्जा या आत्मा हैं।

एकांत मूर्ख के लिए कैदखाना है,और ज्ञानी के लिए स्वर्ग।क्योंकि जब मनुष्य अकेला होता है, तब उसे अपने ही विचारों का सामना क...
18/04/2026

एकांत मूर्ख के लिए कैदखाना है,
और ज्ञानी के लिए स्वर्ग।

क्योंकि जब मनुष्य अकेला होता है, तब उसे अपने ही विचारों का सामना करना पड़ता है। मूर्ख व्यक्ति के लिए यह बहुत कठिन होता है, क्योंकि उसके भीतर अशांति, डर और उलझन भरी होती है।

इसलिए वह हमेशा भीड़, शोर और बाहरी चीज़ों में खुद को उलझाए रखना चाहता है। लेकिन एक ज्ञानी व्यक्ति के लिए एकांत अमृत के समान होता है।

एकांत में वह स्वयं को, अपने मन को और अपने वास्तविक स्वरूप को गहराई से देख पाता है।

वहीं से शांति, समझ और आत्मज्ञान का जन्म होता है।
सच तो यह है कि जिस व्यक्ति को अपने साथ रहना अच्छा लगने

लगे, वह जीवन के सबसे बड़े रहस्य को समझने लगता है।
एकांत से मत भागो,

क्योंकि वहीं तुम्हारा असली परिचय तुम्हारे सामने आता है।

17/04/2026

लोग हमेशा पूछते हैं, जीवन का उद्देश्य क्या है?

‘मैं’ का भाव ही भ्रम की शुरुआत है।जब मन में ‘मैं’ का अहंकार उत्पन्न होता है, तभी से अलगाव और भ्रम शुरू हो जाता है। यही अ...
17/04/2026

‘मैं’ का भाव ही भ्रम की शुरुआत है।
जब मन में ‘मैं’ का अहंकार उत्पन्न होता है, तभी से अलगाव और भ्रम शुरू हो जाता है। यही अहंकार धीरे-धीरे बुद्धि को जन्म देता है और फिर मनुष्य स्वयं को शरीर, विचार और पहचान से जोड़ लेता है।

लेकिन सत्य इससे कहीं गहरा है।
ब्रह्म से अहंकार और अहंकार से बुद्धि उत्पन्न होती है, परंतु ब्रह्म का अनुभव केवल बुद्धि से नहीं किया जा सकता।

जब ‘मैं’ का भाव शांत हो जाता है, तब मन भी शांत हो जाता है। उसी मौन में सत्य का अनुभव होता है — वही वास्तविक शांति और आत्मज्ञान है। 🌼

👉 इसलिए सत्य को जानने के लिए बाहर भटकने की आवश्यकता नहीं, केवल अपने भीतर के अहंकार को शांत करना ही पर्याप्त है।
#आत्मज्ञान #अहंकार #ब्रह्म #आध्यात्मिकता #ध्यान

अध्यात्मिक जागरण की पहचान:अध्यात्मिक रूप से जागृत व्यक्ति की पहचान उसके बाहरी रूप से नहीं, बल्कि उसके विचारों और जीवन जी...
17/04/2026

अध्यात्मिक जागरण की पहचान:

अध्यात्मिक रूप से जागृत व्यक्ति की पहचान उसके बाहरी रूप से नहीं, बल्कि उसके विचारों और जीवन जीने के तरीके से होती है!




17/04/2026

महावीर मंदिर पटना।

17/04/2026

महावीर मंदिर दर्शन पटना! 🙏

16/04/2026

सत्य की शक्ति, सत्य हमेशा शक्तिशाली होता है लेकिन उसकी शक्ति शोर में नहीं शांति में छिपी होती है!

सबसे बड़ी क्रांति बाहर नहीं, भीतर होती है।हम अक्सर सोचते हैं कि दुनिया बदल जाए तो हमारा जीवन बेहतर हो जाएगा।लेकिन सच्चाई...
16/04/2026

सबसे बड़ी क्रांति बाहर नहीं, भीतर होती है।
हम अक्सर सोचते हैं कि दुनिया बदल जाए तो हमारा जीवन बेहतर हो जाएगा।

लेकिन सच्चाई यह है कि जब तक हमारा मन वैसा ही रहता है, तब तक बाहरी बदलाव भी हमें सच्ची शांति नहीं दे पाते।
जब इंसान अपने विचारों, भय, इच्छाओं और प्रतिक्रियाओं को

समझना शुरू करता है, तभी असली परिवर्तन जन्म लेता है।
जिसने स्वयं को देख लिया, समझ लिया — उसके लिए जीवन का पूरा दृष्टिकोण बदल जाता है।
यही आत्म-जागरूकता सच्ची स्वतंत्रता की शुरुआत है।

“अपने ‘मैं’ की खोज करो — बाकी सब...
16/04/2026

“अपने ‘मैं’ की खोज करो — बाकी सब...




हम जीवन में हर काम करते हुए अक्सर यह मान लेते हैं कि “मैं ही सब कुछ कर रहा हूँ।”यही कर्तापन का भाव हमें कर्मों और उनके फ...
15/04/2026

हम जीवन में हर काम करते हुए अक्सर यह मान लेते हैं कि “मैं ही सब कुछ कर रहा हूँ।”

यही कर्तापन का भाव हमें कर्मों और उनके फलों के बंधन में बाँध देता है।

जब तक मन में यह अहंकार रहता है कि मैं कर्ता हूँ, तब तक हमें अपने कर्मों के परिणाम भी भोगने पड़ते हैं। लेकिन जिस क्षण मनुष्य यह समझ लेता है कि वह केवल एक माध्यम है और साक्षी है, उसी क्षण कर्म उसे बाँध नहीं पाते।

सच्ची मुक्ति बाहर कुछ छोड़ने में नहीं, बल्कि अपने भीतर के कर्तापन को छोड़ने में है।

जब “मैं करता हूँ” का भाव समाप्त हो जाता है, तब जीवन सहज और मुक्त हो जाता है। ✨

15/04/2026

जागरूकता आग की तरह है 🔥
जो मन के सारे प्रोग्राम को जला देती है!

हम अक्सर जिस “मैं” को अपनी पहचान समझते हैं,वह वास्तव में हमारे अपने विचार नहीं होते।बचपन से ही समाज, परिवार, शिक्षा और प...
15/04/2026

हम अक्सर जिस “मैं” को अपनी पहचान समझते हैं,
वह वास्तव में हमारे अपने विचार नहीं होते।

बचपन से ही समाज, परिवार, शिक्षा और परंपराएँ
धीरे-धीरे हमारे मन को प्रोग्राम कर देती हैं।

इस तरह हमारा मन स्वाभाविक नहीं, बल्कि कृत्रिम बन जाता है।
लेकिन एक रास्ता है — जागरूकता।

जब हम अपने विचारों को देखने लगते हैं,
जब हम सचेत होकर अपने भीतर झांकते हैं,

तब धीरे-धीरे यह कृत्रिम प्रोग्राम टूटने लगता है।
जागरूकता की रोशनी में मन की परतें हटने लगती हैं

और तब पहली बार हम अपने सच्चे स्वरूप को महसूस करते हैं। ✨
याद रखिए:
जागरूकता ही वह आग है 🔥
जो मन के सारे कृत्रिम प्रोग्राम को जला देती है।

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854315

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