Kapil clinic पहाड़ियां दी हट्टी

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Kapil clinic पहाड़ियां दी हट्टी Complete Solution for all type of disese. specially for piles , jaundice, hair fall, skin and all types stomach disease with ayurvedic medicine

10/05/2026

अगर आपमें ये लक्षण हैं...​1. हाथों का कांपना (शुगर लेवल कम होना):​घरेलू उपाय: तुरंत ग्लूकोज का पानी या एक चम्मच चीनी/शहद...
16/03/2026

अगर आपमें ये लक्षण हैं...
​1. हाथों का कांपना (शुगर लेवल कम होना):
​घरेलू उपाय: तुरंत ग्लूकोज का पानी या एक चम्मच चीनी/शहद दें। लंबे समय के लिए नियमित भोजन और फलों का सेवन करें।

​2. हमेशा थकान रहना (नींद का बार-बार टूटना):
​घरेलू उपाय: नियमित सोने का समय बनाएं। सोने से पहले गर्म दूध में अश्वगंधा मिलाकर पिएं। कैफीन और स्क्रीन से बचें

​3. जलने की गंध आना (दिमागी नस की दिक्कत):
​घरेलू उपाय: यह गंभीर हो सकता है। प्राथमिक रूप से अनुलोम-विलोम प्राणायाम करें। डॉक्टर से ज़रूर मिलें।

​4. मुँह का कड़वा स्वाद (एसिड रिफ्लक्स):
​घरेलू उपाय: खाने के तुरंत बाद न सोएं, थोड़ा टहलें। अदरक या तुलसी के पत्तों का सेवन करें।

​5. आँखों के आगे धुन-धुन (नज़र में बदलाव):
​घरेलू उपाय: ठंडे पानी से आँखें धोएं। नियमित रूप से आँखों के व्यायाम करें। विटामिन A युक्त आहार (गाजर, पपीता) लें।

​6. रात को पैर में बेचैनी (आयरन की कमी):
​घरेलू उपाय: रात को गुनगुने पानी में सेंधा नमक डालकर पैर धोएं। पालक, चुकंदर और अनार का रस पिएं

​7. दांत पीसना (ब्रक्सिज्म) (स्ट्रेस या चिंता):
​घरेलू उपाय: ध्यान (Meditation) करें और गहरी साँस लेने का अभ्यास करें। गर्म दूध पिएं।

​8. उंगलियों का सुन्न होना (नसों पर दबाव):
​घरेलू उपाय: प्रभावित जगह पर गर्म और ठंडी सिंकाई करें। रोज़ाना थोड़ी हल्की कसरत करें।

​9. रात को अचानक पसीना (हार्मोनल बदलाव):
​घरेलू उपाय: नियमित रूप से व्यायाम करें और स्वस्थ खान-पान रखें।

​10. जल्दी बाल सफेद होना (विटामिन B की कमी):
​घरेलू उपाय: दूध, दही, अंडे और हरे पत्तेदार सब्जियां खाएं। विटामिन B सप्लीमेंट्स डॉक्टर से पूछकर लें।

​11. कान में दिल की आवाज़ (हाई ब्लड प्रेशर):
​घरेलू उपाय: नमक कम खाएं। नियमित व्यायाम करें।

​12. सोते समय नस चढ़ना (मैग्नीशियम की कमी):
​घरेलू उपाय: पर्याप्त पानी पिएं। बादाम, कद्दू के बीज, और केले खाएं।

​13. सिर में खुजली (फंगल इन्फेक्शन):
​घरेलू उपाय: नारियल तेल में नींबू मिलाकर लगाएं। नीम के पानी से बाल धोएं।

​14. पलक फड़कना (खनिज संतुलन बिगड़ना):
​घरेलू उपाय: आँखों को आराम दें। खान-पान में कैल्शियम और मैग्नीशियम युक्त आहार शामिल करें।

​15. हाथ-पैर हमेशा ठंडे रहना (थायराइड की समस्या):
​घरेलू उपाय: नियमित व्यायाम करें। अदरक का सेवन बढ़ाएं। थायराइड की जाँच कराएं।

​16. आसान शब्द भूल जाना (विटामिन B12 की कमी):
​घरेलू उपाय: दूध, पनीर और मांस-मछली (यदि खाते हों) का सेवन करें। B12 सप्लीमेंट्स डॉक्टर से पूछकर लें।

​17. मुँह से बदबू आना (पेट या लीवर की दिक्कत):
​घरेलू उपाय: इलायची या लौंग चबाएं। पर्याप्त पानी पिएं। त्रिफला चूर्ण का सेवन करें।

​18. बाल झडाना (स्ट्रेस या खराब खान-पान):
​घरेलू उपाय: नारियल तेल से मालिश करें। संतुलित और पौष्टिक भोजन करें।

​19. सूखी त्वचा (पानी की कमी या हार्मोन):
​घरेलू उपाय: रोज़ाना कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं। एलोवेरा जेल या नारियल तेल लगाएं।

​20. पेट फूलना (पाचन खराब होना):
​घरेलू उपाय: भोजन के बाद थोड़ा टहलें। सौंफ और अजवाइन का पानी पिएं।


090419 57604

09/11/2025

04/11/2025

03/11/2025
27/08/2025

“वोटचोर” सुनते ही अंधभक्तों के कान खड़े हो जाते हैं…🤣

21/07/2025

क्या आप गुदा रोग बवासीर (Piles),भगंदर(Fistula) और फिशर(Fissure) से परेसान है???
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■जो लोग गुदा मार्ग की बीमारी जैसे बवासीर ,भगंदर एवं फिसर से परेशान है.
■गुदा मार्ग में खुजली और जलन होती है.
■गुदा मार्ग से खून आता है.
■गुदा मार्ग में दर्द बहुत रहता हो.

■बवासीर , भगंदर और फिशर का आयुर्वेदिक क्षार सूत्र पद्धति द्वारा बिना किसी जटिल सर्जरी के सफल इलाज होता है.

■क्षार सूत्र प्रक्रिया कराने के 30 मिनट बाद आप घर जा सकते हैं.

■क्षार सूत्र प्रक्रिया में ना किसी प्रकार का दर्द होता है ना ब्लड आता है.

■क्षार सूत्र प्रक्रिया कराने के बाद बवासीर (Piles) ,भगंदर (fistula) और फिशर(Fissure)आदि गुदा रोगों के फिर से होने की संभावना लगभग शून्य होती है

●हमारे यहां इन सभी गुदा मार्ग की बीमारियो का इलाज आयुर्वेदिक क्षार सूत्र और लेजर द्वारा कुशल चिकित्सकों द्वारा किया जाता है।

●जो इन परेशानियों से परेसान है वो एक बार आकर जरूर मिले..

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--------: रोजमेरी एसेंशियल ऑयल :---------              ( उपयोगिता और प्रयोग )       रोजमेरी एसेंशियल ऑयल (Rosemary Essen...
03/07/2025

--------: रोजमेरी एसेंशियल ऑयल :---------
( उपयोगिता और प्रयोग )
रोजमेरी एसेंशियल ऑयल (Rosemary Essential Oil) एक प्रसिद्ध औषधीय तेल है जो रोजमेरी पौधे (Rosmarinus officinalis) की पत्तियों से निकाला जाता है। यह तेल आयुर्वेद, यूनानी, और आधुनिक अरोमाथेरेपी में अत्यंत उपयोगी माना जाता है।
1- मुख्य उपयोगिताएँ ------
(1) स्नायु एवं मानसिक शक्ति बढ़ाने में ------
* याददाश्त बढ़ाने, एकाग्रता सुधारने और मानसिक थकान को दूर करने में सहायक।
* विद्यार्थियों और मानसिक कार्य करने वालों के लिए विशेष उपयोगी।
(2) बालों की देखभाल में ------
* बालों का झड़ना रोकता है।
* स्कैल्प को उत्तेजित कर नए बाल उगाने में सहायता करता है।
* डैंड्रफ कम करता है।
(3) त्वचा संबंधी समस्याओं में ------
* त्वचा को टोन करता है और मुंहासों को कम करता है।
* एंटीसेप्टिक गुणों के कारण संक्रमण से सुरक्षा करता है।
(4) मांसपेशियों एवं जोड़ों के दर्द में ------
* एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होने के कारण जोड़ों व मांसपेशियों के दर्द में राहत देता है।
(5) सांस संबंधी लाभ -------
* सर्दी, खांसी, जुकाम, ब्रोंकाइटिस आदि में उपयोगी।
* भाप में मिलाकर सूंघने से बलगम ढीला करता है।
2- प्रयोग विधियाँ ------
(1) अरोमाथेरेपी में ------
* डिफ्यूज़र में 3–5 बूंदें डालें।
* मानसिक तनाव, थकान, और उदासी दूर करने में सहायक।
(2) बालों के लिए -----
* नारियल या बादाम तेल में 4–5 बूंदें मिलाकर स्कैल्प पर मालिश करें।
* सप्ताह में 2–3 बार प्रयोग करें।
(3) त्वचा के लिए ------
* एलोवेरा जेल या कैरियर ऑयल में मिलाकर चेहरे पर लगाएं।
* सीधे न लगाएं, त्वचा पर जलन हो सकती है।
(4) मालिश के लिए ------
* सरसों, नारियल या तिल तेल में मिलाकर जोड़ों या पीठ पर मालिश करें।
(5) स्टीम इनहेलेशन ------
* गर्म पानी में 2–3 बूंदें डालें, सिर पर तौलिया रखकर भाप लें।
3- सावधानियाँ ------
(1) इसे कभी भी सीधे त्वचा या बालों पर न लगाएं। हमेशा कैरियर ऑयल में मिलाकर प्रयोग करें।
(2) गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली महिलाएं, और छोटे बच्चों पर उपयोग से पहले चिकित्सकीय परामर्श लें।
(3) आँखों और मुँह में न जाने दें।

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---------: एडोमेट्रियोसिस में, पिचु-उपनाह उपचार :-------       एंडोमेट्रियोसिस एक जटिल स्त्री रोग है,  जिसमें गर्भाशय की...
03/07/2025

---------: एडोमेट्रियोसिस में, पिचु-उपनाह उपचार :-------
एंडोमेट्रियोसिस एक जटिल स्त्री रोग है, जिसमें गर्भाशय की अंदरूनी परत (एंडोमेट्रियम) की ऊत्तकें गर्भाशय के बाहर—जैसे डिंबग्रंथि, अंडवाहिनी या श्रोणि गुहा—में बढ़ने लगती हैं, जिससे तीव्र दर्द, अनियमित मासिक धर्म, बांझपन व सूजन आदि लक्षण उत्पन्न होते हैं।
आयुर्वेद में इसे " वन्ध्यत्व हेतुक योनिविकार " और " वात-कफज योनिशूलय " की श्रेणियों में रखा जाता है।
1- एंडोमेट्रियोसिस में पिचु व उपनाह चिकित्सा ------
योनि पिचु (Yoni Pichu)
(1) उद्देश्य -------
* गर्भाशय की शुद्धि, वात-कफ शमन।
* दर्द व सूजन नियंत्रण।
* योनिकांठ, गर्भाशय की नसों में पौष्टिकता।
(2) सामग्री ---------
* सुपर्णिका तैल (स्त्रीजनन संस्थान हेतु विशेष तैल)।
* या बालान तैल (गर्भाशय व योनिशूल में लाभकारी)।
* रुई (स्वच्छ व कोमल)।
* गुनगुना जल।
(3) विधि -------
* रात्रि में सोने से पहले, सुपर्णिका तैल को थोड़ा गुनगुना करें।
* रुई में तैल भिगोकर निचोड़ें, ताकि वह टपके नहीं।
* उसे योनिमार्ग में धीरे-से प्रवेश कराएं (2–3 cm तक)।
* 3–4 घंटे तक रखें या पूरी रात।
* सुबह गुनगुने पानी से स्नान करें।
* 21 दिन तक रोज, फिर 7 दिन विराम। इस चक्र को 2–3 बार दोहराएं।
2- अधोवस्ति उपनाह (Lower Abdomen Upanaha)
(1) उद्देश्य -------
* श्रोणि क्षेत्र में रुके रक्त, कफ व वात का निवारण।
* सूजन, मासिक पीड़ा में आराम।
(2) सामग्री ------
* रसनादि चूर्ण या अरिष्टक चूर्ण या गोक्षुर + गुडुचि + अरंडी मूल।
* सुपर्णिका तैल या माष तैल।
* जौ या गेंहूं का आटा (संयोजन हेतु)।
* एरण्ड पत्र (बांधने के लिए)।
* गरम पट्टी या ऊन का कपड़ा
(3) विधि ------
* चूर्ण + तैल + आटा मिलाकर गाढ़ा लेप बना लें।
* हल्का गरम करके, नाभि के नीचे अधोवस्ति क्षेत्र पर लगाएं।
* ऊपर से एरण्ड पत्र या कपड़ा रखें।
* हल्की पट्टी से बांधें।
* 3–4 घंटे तक रखें या रातभर।
* दिन में एक बार, 21 दिन तक प्रयोग करें।
3- पूरक उपाय (With Pichu & Upanaha)
उपचार/ औषधि या विधि -----
(1) औषध सेवन/ अशोकघन वटी, सुपर्णिका वटी, राजःप्रवर्तिनी वटी (चक्रानुसार)
(2) क्वाथ या काढ़ा/ दशमूल क्वाथ + अशोक + लोध्र।
(3) वास्ति (बस्ती)/ स्नेहबस्ती – सुपर्णिका तैल (पंचकर्म वैद्य देखरेख में)।
(4) योग/ सुप्तबद्धकोणासन, मंडूकासन, पवनमुक्तासन।
(5) पथ्य आहार/ तिक्त-काशाय रस, त्रिकटु युक्त भोजन, तेल मुक्त, लघु सुपाच्य आहार।
4- सावधानी --------
(1) पिचु, मासिक धर्म के दिनों में न करें।
(2) संक्रमण, जलन, या अज्ञात योनि रोगों में पिचु न डालें।
(3) उपनाह, यदि बहुत गर्म हो, तो त्वचा जल सकती है — पहले हाथ पर परीक्षण करें।
(4) औषधि चयन हेतु, वैद्य की सलाह अवश्य लें।

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अच्छा "स्वास्थ" ही आपका असली "धन" है। बाकी सब बाद में ......आप अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें!! फाइबर युक्त आहार लें, खूब ...
01/07/2025

अच्छा "स्वास्थ" ही आपका असली "धन" है।
बाकी सब बाद में ......

आप अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें!! फाइबर युक्त आहार लें, खूब पानी पीएं, चीनी नमक और फूड ऑयल का संतुलित मात्रा में उपयोग करें।

एसिडिक फूड जैसे - चाय बिस्कुट नमकीन, फास्ट फूड और मिठाईयां को अपनी डाइट से कम करें।

एल्कलाइन जैसे - ताजे फल और हरी सब्जियों को अपनी डाइट में शामिल करें तथा रोजाना कम से कम 10,000 कदम जरूर चलें।

थोड़ा सा बदलाव आपके जीवन में बड़ी खुशी लेकर आएगा और अलग पहचान भी दिलाएगा 🎉🎉

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