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AWGP- LITERATURE GURUDEVॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्!*तनाव प्रबंध के सूत्र...
28/11/2025

AWGP- LITERATURE GURUDEV
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्!
*तनाव प्रबंध के सूत्र*

तनावजन्य नकारात्मक एवं निषेधात्मक विचारों से शरीर की प्रतिरक्षात्मक प्रणाली पर भी विपरीत असर पड़ता है। तनाव की अवधि में WBC (श्वेत रुधिर कणिकाएँ) की सहज सक्रियता कम हो जाती है। ये कणिकाएँ शरीर की रोगों से रक्षा करती हैं तथा शरीर को स्वस्थ एवं निरोग बनाये रखने में अहम् भूमिका निभाती हैं, परन्तु तनाव इस प्रतिरक्षात्मक प्रणाली की मुस्तैदी को कम कर रोगों को प्रवेश करने का अवसर प्रदान करता है। नकारात्मक विचार मस्तिष्क में एण्डार्फीन हार्मोन को घटा देता है जबकि सकारात्मक सोच इसमें अभिवृद्धि करती है। यह हार्मोन प्रतिरक्षा प्रणाली को पुष्ट एवं सुदृढ़ बनाता है जिससे शरीर स्वस्थ एवं प्रसन्न रहता है।
तनाव से मन में कई प्रकार के मनोविकार अपना स्थायी आवास बना लेते हैं। डब्ल्यू. आर. लोवलो ने अपने शोध ग्रन्थ ‘स्ट्रेस एण्ड हेल्थ’ में इस विषय में अनेक अनुसंधान-अन्वेषण के निष्कर्षों का उल्लेख किया है। इनके अनुसार तनाव से चिड़चिड़ापन पैदा हो जाता है। ऐसे व्यक्ति बातों-बातों में चिड़चिड़ा उठते हैं। इनका मानसिक असंतुलन लगभग गड़बड़ा जाता है, परिणामस्वरूप नींद न आना, हताशा-निराशा कल्पनाओं में खोए रहना, डरना आदि मनोरोगों का प्रादुर्भाव होता है। ऐसे लोगों में निर्णय करने की क्षमता नहीं होती है। और यह सही भी है क्योंकि निर्णय तो शान्त मस्तिष्क एवं स्थिर भाव-विचारों की स्थिति में लिया जाता है। इनको मेहनत एवं श्रम के अनुरूप परिणाम नहीं मिलता। इनका अधिकतर समय, श्रम एवं चिंतन व्यर्थ के कार्यों में नियोजित होता है। इस कारण ऐसे लोगों को सदैव असफलता का मुँह देखना पड़ता है जिससे इनका आत्मविश्वास डिगा हुआ होता है।

*क्रमशः* *........*
-LITERATUREGURUDEV .
https://www.awgp.org/en/literature/book/Super_Science_of_Gayatri/v2
https://oshoganga.blogspot.com/2013/04/blog-post_19.html

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भूमिका - भूमिका - गायत्री महाविज्ञान - Gayatri MahavigyanNone

AWGP- LITERATURE GURUDEVॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्!*तनाव प्रबंध के सूत्र...
27/11/2025

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ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्!
*तनाव प्रबंध के सूत्र*

तनाव मन से उत्पन्न होता है अतः तनाव से मन प्रभावित होता है। यह प्रभाव अन्तःस्रावी ग्रन्थियों में भी हलचल उत्पन्न करता है। आधुनिक साइको एण्ड्रोक्राइनो-लॉजी के अनुसार मन और अन्तःस्रावी ग्रन्थियों के बीच अंतर्संबंध होता है। हालाँकि इस संदर्भ में स्पष्ट प्रतिपादन नहीं हो सका है, परन्तु यह सुनिश्चित तथ्य है कि मन अन्तःस्रावी ग्रन्थियों को सूक्ष्म रूप से प्रभावित करता है। तनाव के दौरान पिट्यूटरी, थाइराइड, पीनियल एवं एड्रीनल ग्रन्थियाँ अतिक्रियाशील हो उठती हैं। एड्रेलीन ग्रन्थि से उत्पन्न एड्रेनेलीन हार्मोन को तो तनाव हार्मोन कहा जाता है। क्योंकि तनाव के हल्के झोंके से इसका स्राव आरम्भ हो जाता है। तनाव से ACTH (एड्रीनोकार्टिकल हार्मोन या कार्टीसोल) का स्तर एकाएक बढ़ जाता है। कार्टीसोल सोचने-विचारने की प्रक्रिया को तीव्र कर देता है परन्तु इसकी अधिकता एवं स्थायित्व अत्यन्त हानिकारक होता है। मिसौरी यूनिवर्सिटी के एक अनुसंधान से ज्ञात हुआ है कि एक फुटबाल खिलाड़ी में फुटबाल खेलने के पश्चात् कार्टीसोल के स्तर में वृद्धि हो जाती है जो कई घण्टों के बाद अपने सामान्य स्तर में आता है। मानसिक तनाव से भी कार्टीसोल की मात्रा इतनी बढ़ जाती है कि इसे सामान्य स्तर में आने के लिए कई दिन लग जाते हैं।

*क्रमशः* *........*
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AWGP- LITERATURE GURUDEVॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्!*तनाव प्रबंध के सूत्र...
25/11/2025

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ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्!
*तनाव प्रबंध के सूत्र*

तनाव मनःस्थिति से उपजा विकार है। मनःस्थिति एवं परिस्थिति के बीच असंतुलन एवं असामंजस्य के कारण तनाव उत्पन्न होता है। तनाव एक द्वन्द्व है जो मन एवं भावनाओं में गहरी दरार पैदा करता है। तनाव अन्य अनेक मनोविकारों का प्रवेश द्वार है। उससे मन अशान्त, भावना अस्थिर एवं शरीर अस्वस्थ अनुभव करते हैं। ऐसी स्थिति में हमारी कार्यक्षमता प्रभावित होती है और हमारी शारीरिक व मानसिक विकास यात्रा में व्यवधान आता है। इससे बचने का एकमात्र उपाय है परिस्थिति के साथ तालमेल रखना जिससे तनाव रूपी मनोविकार को हटाया-मिटाया जा सके।
परिस्थिति को अस्वीकार न करने पर तनाव पैदा होता है और यह तनाव कई प्रकार का होता है। पारिवारिक तनाव, आर्थिक तनाव, आफिस का तनाव, रोजगार का तनाव, सामाजिक तनाव, तनाव के विभिन्न स्वरूप हैं। मनोनुकूल परिस्थिति-परिवेश के अभाव में व्यक्ति उद्विग्न, अशान्त एवं तनावग्रस्त हो उठता है। इसमें केवल एक व्यक्ति प्रभावित होता है, परन्तु यह सीमा जब व्यक्ति को लाँघकर परिवार में पहुँच जाती है तो परिवार तनावग्रस्त हो जाता है। पारिवारिक तनाव से परिवार के आपसी संवेदनशील रिश्तों में दरार एवं दरकन पैदा हो जाती है। जिससे छोटी-छोटी बातों को प्रतिष्ठ का प्रश्न बनाकर कलह एवं कहासुनी जैसी उलझनें खड़ी कर दी जाती हैं। सुन्दर व सुरम्य पारिवारिक वातावरण व्यंग्य और तानों का दंगल बन जाता है।

*क्रमशः* *........*
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AWGP- LITERATURE GURUDEVॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्!*अपनी नींद में ध्‍यान...
24/11/2025

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ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्!
*अपनी नींद में ध्‍यान कैसे करें*

# # # **नींद को ध्यान बनाना:**
1. **संवेदनशीलता और जागरूकता:**
- ओशो का विचार है कि ध्यान और नींद दोनों को एक ही समय पर अनुभव करना कठिन है क्योंकि दोनों की अवस्थाएँ भिन्न होती हैं। ध्यान की स्थिति में, आपको पूरी तरह से जागरूक और सतर्क रहना होता है, जबकि नींद की अवस्था में चेतना कम हो जाती है।
2. **नींद में ध्यान की स्थिति:**
- यदि ध्यान करते समय आप नींद में चले जाते हैं, तो यह संकेत हो सकता है कि आपकी ऊर्जा या सतर्कता में कमी है। ध्यान की प्रक्रिया के दौरान सो जाना असामान्य नहीं है, लेकिन यह ध्यान की गहराई या मानसिक स्थिति की पहचान भी हो सकती है।
3. **घबराहट और जागरूकता:**
- नींद के दौरान घबराहट एक सामान्य प्रतिक्रिया हो सकती है, जब आप महसूस करते हैं कि आप ध्यान की अवस्था से बाहर निकल गए हैं। इस स्थिति को संतुलित करने के लिए, आपको ध्यान के अभ्यास को धीरे-धीरे और नियमित रूप से बढ़ाना होगा।
# # # **निष्कर्ष:**
नींद को ध्यान में परिवर्तित करना संभव नहीं है, लेकिन आप अपनी जागरूकता को बढ़ाकर और ध्यान की प्रक्रिया को सुधारकर नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं। ध्यान के अभ्यास के लिए नियमितता, धैर्य, और सही तकनीकें महत्वपूर्ण होती हैं। यदि ध्यान के दौरान नींद आ जाती है, तो यह ध्यान के अभ्यास में सुधार की आवश्यकता का संकेत हो सकता है।

*क्रमशः* *........*
पुस्तक का नाम -अंतर्जगत के झरोखे
-LITERATUREGURUDEV .
https://www.awgp.org/en/literature/book/Super_Science_of_Gayatri/v2
https://oshoganga.blogspot.com/2013/04/blog-post_19.html

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AWGP- LITERATURE GURUDEVॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्!*अपनी नींद में ध्‍यान...
23/11/2025

AWGP- LITERATURE GURUDEV
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्!
*अपनी नींद में ध्‍यान कैसे करें*

ध्यान और नींद दोनों ही एक विशिष्ट अवस्था की प्राप्ति हैं, लेकिन ये दो अलग-अलग स्थितियाँ हैं।
# # # **ध्यान और नींद:**
1. **ध्यान की प्रक्रिया:**
- ध्यान की अवस्था में व्यक्ति पूरी तरह से जागरूक और उपस्थित होता है। यह मानसिक और शारीरिक शांति की स्थिति है, जिसमें व्यक्ति अपनी संवेदनाओं और विचारों पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित करता है।
2. **नींद की अवस्था:**
- नींद में व्यक्ति की चेतना और जागरूकता कम हो जाती है। यह एक विश्राम की अवस्था है, जिसमें शरीर और मन की पुनःपूर्ति होती है, और व्यक्ति सामान्यतः बाहरी जगत से अविचलित रहता है।

*क्रमशः* *........*
पुस्तक का नाम -अंतर्जगत के झरोखे
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https://www.awgp.org/en/literature/book/Super_Science_of_Gayatri/v2
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23/11/2025

Have you ever trusted someone against all odds and been rewarded for it? Do you believe true wisdom can come from pain or failure? Have you ever wondered one timeless truth — Human life is precious, but its real worth shines only when guided by wisdom, compassion, duty, and faith. The real essence of life and righteousness. and Wisdom is the light that saves it.

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*Ojas- vedic bites- The Precious Gift of Life**Live---Sunday--8am.(IST)**Live----Saturday--6.30pm.(PST)*🔔Please subscrib...
23/11/2025

*Ojas- vedic bites- The Precious Gift of Life*

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