01/06/2026
*AWGP- LITERATURE GURUDEV*
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्!
*युग निर्माण सत्-संकल्प की दिशा-धारा*
*चारों ओर मधुरता, स्वच्छता, सादगी एवं सज्जनता का वातावरण उत्पन्न करेंगे।*
अर्थ (विस्तार से):
हमारे कार्यों और व्यवहार से एक सकारात्मक, शुद्ध और सज्जन वातावरण बनना चाहिए।
अनुकरण की प्रक्रिया:
रोज़ किसी से भी मिलें, तो उनका स्वागत मुस्कान और सौम्यता से करें।
अपने घर और कार्यस्थल को स्वच्छ रखें।
सादगी में ही सुंदरता है, यह समझें और उसी के अनुसार अपना जीवन जीएं।
सज्जनता से व्यवहार करें और किसी को भी आहत न करें।
सामान्य स्थिति में व्यक्ति वातावरण से प्रभावित होता है, पर अन्तरंग श्रेष्ठता का विकास होने पर वह वातावरण को प्रभावित करने लगता है। ऊपर जिन गुणों का उल्लेख किया गया है वे सभ्य समाज की रचना के लिए आवश्यक हैं। जिस व्यक्ति में वह विकसित होते हैं उसके व्यक्तित्व में जादू जैसा प्रभाव आ जाता है। हर व्यक्ति उसके सान्निध्य में रहना पसंद करता है तथा स्नेह सम्मान एवं सहयोग देना चाहता है।
*क्रमशः* *........*
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