18/04/2026
*AWGP- LITERATURE GURUDEV*
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्!
*युग निर्माण सत्-संकल्प की दिशा-धारा*
हम आस्तिकता और कर्तव्यपरायणता को मानव जीवन का धर्म कर्तव्य मानेंगे।
ईश्वर में आस्था रखे बिना हमारी दुष्प्रवृत्तियां बिना नकेल के ऊंट की तरह, बिना लगाम के घोड़े की तरह, बिना नाथ के बैल की तरह, बिना अंकुश के हाथी की तरह, उच्छृंखलता अनीति और उद्दण्डता की ओर द्रुतगति से दौड़ने लगती हैं। पानी को ऊंचा चढ़ाने के लिए अनेक प्रयत्न करने पड़ते हैं पर नीचे की ओर तो वह बिना किसी प्रयास के ही बहने लगता है। मन की गति भी पानी के समान है, उसे सत्मार्ग पर चलाना हो तो अत्यधिक श्रमसाध्य साधन प्रयत्न करने पड़ते हैं, पर कुमार्ग की ओर तो वह सहज ही सरपट दौड़ने लगता है।
आस्तिकता मन को कुमार्ग पर दौड़ने से रोकने के लिए सबसे बड़ा अंकुश सिद्ध होता है।
पाप को छिपा लेने और राजदण्ड से बचे रहने की अगणित तरकीबें मनुष्य ने ढूंढ़ निकाली हैं। यों अदालत पुलिस, जेल, कचहरी सब कुछ व्यवस्था अपराधों के लिए मौजूद है, पर उनसे बचे रहकर अनीति बरतते रहने की जितनी कुशलता मनुष्य को प्राप्त है उसकी तुलना में राजदण्ड के सारे साधन तुच्छ मालूम पड़ते हैं।
*क्रमशः* *........*
-LITERATUREGURUDEV .
https://www.awgp.org/en/literature/akhandjyoti/1940/February/v2.6
https://www.youtube.com/
सर्वोत्तम तीर्थ - सर्वोत्तम तीर्थ - February 1940 - FebruaryNone