Vanavasi Kalyana, Karnataka

Vanavasi Kalyana, Karnataka Indian Social Welfare Organization Details of the hostels:

1. Rukmini Balika Nilaya
Opp. Ishwar Temple,
Kulagi Road
Dandeli - 581325
Uttara Kannada District.

Ph: 08284-233863

2. Vitthala Vanavasi Vidyarthi Nilaya
Ambikanagar,
Haliyala Taulk - 581363
Uttara Kannada District
Ph: 08284-258006

3. Ratnakara Vanavasi Vidyarthi Nilaya
Opp. UK Blood Bank
Baggona Road
Kumata –
Uttara Kannada District
Ph: 08386-224528

4. Srirama Vanavasi Vidyarthi Nilaya
Chipageri, Via Shirasi
Uttara Kannada District
Ph: 08301-290066

5. Kumararama Vanavasi Vidyarthi Nilaya
18th Ward, Kanakadasa Layout
Gundlupete – 571111
Chamarajanagar District
Ph: 9141462778 (Mahesha)

6. Vanavasi Kalyana Vidyarthi Nilaya
EWS 28, Duryodhana Nilaya
KHB 1st phase, 2nd Cross
Kuvempu Nagar
Mysore - 570023
Ph: 9449264729 (Anand)

7. Shishukendra/Baalawadis at Kalabhavi, Joida, Dandeli, and many more places

8. Community development centers

26 दिसंबर वनवासी कल्याण आश्रम की स्थापना: एक प्रेरणादायक यात्रावनवासी कल्याण आश्रम की स्थापना वनयोगी बालासाहब देशपांडे ज...
26/12/2024

26 दिसंबर वनवासी कल्याण आश्रम की स्थापना: एक प्रेरणादायक यात्रा

वनवासी कल्याण आश्रम की स्थापना वनयोगी बालासाहब देशपांडे जी द्वारा 26 दिसंबर 1952 को छत्तीसगढ़ (तत्कालीन मध्य प्रदेश) के जशपुर में, जनजाति बच्चों के लिए एक छात्रावास खोलकर की गई थी। 1978 में इस संगठन के कार्यों को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार दिया गया। आज, अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम से जुड़ी प्रांतीय इकाइयों के माध्यम से देशभर में 16,624 स्थानों पर 21,829 सेवा प्रकल्प संचालित किए जा रहे हैं।

**स्थापना की पृष्ठभूमि**
देश की स्वतंत्रता के बाद, मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री पंडित रवीशंकर शुक्ल प्रदेश के दौरे के दौरान जशपुर रियासत पहुंचे। वहां उन्हें विदेशी ईसाइयों के प्रभाव के चलते "रवि शुक्ला वापस जाओ" और देशविरोधी नारों का सामना करना पड़ा। इस चुनौतीपूर्ण समय में, बालासाहब देशपांडे को रणनीति के तहत इस क्षेत्र में कार्य करने के लिए भेजा गया। उनके अदम्य साहस और दृढ़ निश्चय के परिणामस्वरूप, आज वनवासी क्षेत्रों में सेवा कार्य करने वाला सबसे बड़ा संगठन खड़ा है।

**विकास और उद्देश्य**
प्रतिकूल परिस्थितियों में शुरू हुए इस संगठन ने बालासाहब देशपांडे जी की प्रेरणा से जनजाति समाज की धर्म-संस्कृति, परंपरा, और रीति-रिवाजों के संरक्षण के साथ उनके सर्वांगीण विकास के लिए कार्य किया। यह संगठन आज देशभर में जनजाति हित में समर्पित होकर सेवाएं दे रहा है।

**आज की प्रासंगिकता**
72 वर्षों की इस यात्रा के बाद, हमें अपने कार्यों का पुनर्मूल्यांकन करते हुए बालासाहब जी के आदर्शों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ना चाहिए। स्वतंत्रता के समय जनजाति समाज जिन समस्याओं का सामना कर रहा था, वे आज भी बनी हुई हैं। उन्हें दिग्भ्रमित करने के षड्यंत्र अभी भी जारी हैं। बालासाहब कहते थे कि देशविरोधी तत्व सेवा के नाम पर वनवासी समाज की धर्म, संस्कृति और परंपरा को नष्ट कर उनका धर्मांतरण कर रहे हैं। यह षड्यंत्र जनजाति संस्कृति के लिए गंभीर खतरा है।

आज, जनजाति समाज वनवासी कल्याण आश्रम को अपना संगठन मानते हुए स्वाभिमान के साथ खड़ा है। वे अपनी धर्म-संस्कृति को बचाने के लिए खुद नेतृत्व कर रहे हैं। बालासाहब जी के विचार और योगदान हमें प्रेरणा देते हैं कि हम इस यात्रा को और आगे ले जाएं।

– मृत्युंजय सिंह

22/12/2024
भारत को महाशक्ति बनाने के लिए जनजाति ज्ञान का विकास आवश्यकराष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू नई दिल्ली  28 - अध्यक्ष श्रीमती द्रौ...
29/11/2022

भारत को महाशक्ति बनाने के लिए जनजाति ज्ञान का विकास आवश्यक

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

नई दिल्ली 28 - अध्यक्ष श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि भारत को ज्ञान की महाशक्ति बनाने के लिए जनजाति ज्ञान को भारतीय परंपरा से जोड़ने और जनजाति समाज से संबंधित ज्ञान को बढ़ावा देने और विकसित करने की आवश्यकता है।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग द्वारा आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में बोल रही थे। इस मौके पर आयोग के अध्यक्ष श्री हर्ष चौहान उपस्थित थे। कार्यक्रम के प्रारंभ में जनजाति क्रांतिकारियों के जीवन पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया गया।

इस अवसर पर बोलते हुए, राष्ट्रपति जी ने आगे कहा कि भारत के दस करोड़ से अधिक जनजातीय सदस्यों तक विकास के लाभों को पहुंचाने की हमारे सामने चुनौती है। लेकिन ऐसा करते हुए इस जनजातियों की सांस्कृतिक अस्मिता और पहचान को बनाए रखने की भी जरूरत है।

इस देश की प्रगति तभी संभव है जब हमारे देश के युवा इसके गौरवशाली इतिहास को समझें। ऐसे में जनजाति वीरों के योगदान पर आधारित पुस्तक का प्रकाशन गौरव का विषय है। राष्ट्रपति ने यह भी उम्मीद जताई कि इस पुस्तक के माध्यम से जनजाति समुदाय द्वारा आजादी के लिए किए गए बलिदानों की कहानी दुनिया के सामने लाने में मदद मिलेगी।

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) जनजातियों के अधिकारों की रक्षा के लिए स्थापित एक संवैधानिक निकाय है। इस संस्था की ओर से पिछले तीन माह से देश भर के विभिन्न विश्वविद्यालयों में 'जनजाति नायकों का स्वतंत्रता संग्राम में योगदान ' पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। ये कार्यक्रम देश भर के 104 विश्वविद्यालयों में सफलतापूर्वक संपन्न हुए। इन कार्यक्रमों में 50 हजार जनजाति छात्र, करीब 1500 जनजाति प्राध्यापक शामिल हुए।

इन कार्यक्रमों के अलावा, स्वतंत्रता संग्राम में योगदान देने वाले जनजाति क्रांतिकारियों की एक प्रदर्शनी भी आयोजित की गई थी। इन सभी गतिविधियों के लिए सहयोगी संस्था के रूप में अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम कार्य कर रहा था। इन सभी कार्यक्रमों का आज राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदीताई मुर्मू की उपस्थिति में नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में समापन हुआ। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, प्रोफेसरों, छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सहभाग लिया।

Glad to be part of this program !!!
28/11/2022

Glad to be part of this program !!!

12/09/2022

Ganpati Mahotsav

Hanumanth Wadi - Gram Dalli Tulasi Puja
16/05/2022

Hanumanth Wadi - Gram Dalli Tulasi Puja

21/11/2021

Distribution of blankets @ Ramanagara  by VKK  karyakarthas Ramanagara.
20/11/2021

Distribution of blankets @ Ramanagara by VKK karyakarthas Ramanagara.

Tailoring Center at Gudulpete
15/11/2021

Tailoring Center at Gudulpete

Address

Vanavasi Kalyana, "Vanasri”, #1435/36, 2nd Cross, 5th A Main, D Block, 2nd Stage, Rajajinagar
Bangalore
560010

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