Tutu Baba

Tutu Baba विद्यां ददाति विनयं,
विनयाद् याति पात?

29/12/2025

ब्राह्मणों पर ये आरोप तो लगा दिया जाता है कि उन्होंने दलितों और स्त्रियों को वेद नही पढ़ाये। पर पिछले 70 वर्षों से तो प्रेस युग के आने से वेद आदि ग्रन्थ बाजार में सबके लिए उपलब्ध हैं। फिर कितने स्त्री और दलितों ने बाजार से वेद खरीदकर पढ़ लिए? और इतना ही नहीं, वेद आदि ग्रन्थ तो पिछले कुछ वर्षों से इंटरनेट पर pdf के रूप में भी मुफ्त में उपलब्ध हैं। तो कितने दलितों और स्त्रियों ने डाउनलोड करके वेद पढ़ लिए? और यदि अब भी नहीं पढ़े तो इसमें किसकी गलती है? और जिसने पढ़ लिए उसने उनसे कुछ आध्यात्मिक लाभ भी लिया या केवल छिद्रान्वेषण की दृष्टि से ही पढ़े? या ज़ाकिर नाईक की तरह स्वयं भी भ्रमित होकर दूसरों को भी भ्रमित ही किया?

11/12/2025
शंका - एक बालक पैदा होने पर  गर्भ से रोता हुआ क्यों बाहर आता है? उसे तो जन्म लेने की प्रसन्नता होनी चाहिए? समाधान - चिकि...
10/12/2025

शंका - एक बालक पैदा होने पर गर्भ से रोता हुआ क्यों बाहर आता है? उसे तो जन्म लेने की प्रसन्नता होनी चाहिए?

समाधान - चिकित्सा विज्ञान के अनुसार रोने से फेफड़े खुलते है और वह सुप्त अवस्था से जागृत अवस्था में प्रवेश कर जाता है। गर्भ नाल के छेदन के पश्चात वह स्वतन्त्र जीवन जीने के लायक हो जाता है।

जबकि दार्शनिक व्याख्या के अनुसार वह रोता इसलिए है क्योंकि उसे फिर से एक बार जन्म लेना पड़ा। 9 मास तक माता के गर्भ में उलटी लटकी आत्मा, मूत्र, रक्त आदि में सनी हुई, घोर अन्धकार से ग्रसित होती हैं। वह हर समय ईश्वर से प्रार्थना करती है कि उसे उसे दुःख से मुक्ति दिलाये। पर जब उसका जन्म होता है तो उसे यह ज्ञान होता है कि उसकी मुक्ति नहीं हुई। उसने तो फिर से जन्म ले लिया। उसे फिर से आवागमन के चक्कर में आना पड़ा। ऐसा इसलिए क्योंकि उसके कर्म ऐसे नहीं थे जिससे उसकी मुक्ति हो। ऐसा इसलिए क्योंकि वह मोक्ष मार्ग का पथिक तो बना पर अपने लक्ष्य तक नहीं पहुँचा। अब उसे फिर से शैशव, जवानी, बुढ़ापा देखना पड़ेगा। उसे सर्दी-गर्मी, भूख-प्यास, व्याधि, मोह, क्रोध, स्वजनों का बिछड़ना आदि देखने पड़ेंगे। उसे फिर पिछले अच्छे-बुरे कर्मों का फल भोगना पड़ेगा। उसे फिर से सांसारिक जीव बनकर मुक्ति की प्रतीक्षा चिरकाल तक करनी पड़ेगी। यह स्मृति होते ही उसका इस जगत में जन्म लेते ही रोना शुरू हो जाता हैं। यह बोध होते ही उसे अपने पूर्व कर्मों में रह गई क्षीणता का स्मरण हो जाता है। यह बोध होते ही उसे आत्मग्लानि का अनुभव होने लगता है। इसलिए उसका नया जीवन रोने से आरम्भ होता है।

जो यह कहते है कि मनुष्य खाली हाथ आता है और खाली हाथ जायेगा। वह सांसारिक पदार्थों के उपलक्ष में तो सही हो सकता है पर दार्शनिक विचार से देखे तो मनुष्य अपने साथ पूर्व जन्मों में किये गए कर्मों के फल लेकर आता है और इस जन्म में अनेकों को भोगता भी हैं। और इस जन्म में किये गए कर्मों में से अनेकों के फल भोगने के लिए अगले जन्म में भी साथ ले जाता हैं। इसलिए मनुष्य कभी खाली हाथ तो नहीं आता।

इसलिए हे मनुष्यों! पवित्र आत्मा के जन्म के रोने से सीख लो। यह जन्म तो हो गया। पर अभी और कितने जन्मों तक माता के गर्भ का अन्धकार देखोगे? कितने जन्मों तक यह आवागमन के चक्र् में फंसे रहोगे? कितने जन्मों तक मोक्ष के चरम सुख का आनंद भोगने ने से दूर रहोगे।
सत्कर्म करते हुए योग मार्ग का पथिक बने और दुःखों छूटकर मोक्ष के अधिकारी बने।

🪷

09/12/2025

🌼 म्लेच्छों से अन्न भक्षण का प्रायश्चित्त 🌼

👉 म्लेच्छों (यथा मुस्लिम ईसाई आदि) के पर्व में अनेक लोग शुभकामनाएँ देते हुए दिखाई देते हैं | संभव है कि वे इन विधर्मियों के साथ इन दिनों में सहभोज भी करते होंगे | ये कृत्य शास्त्रविरुद्ध होने के कारण किसी भी हिंदू के लिए निन्दनीय है |

हमारा यह शरीर अन्न के द्वारा ही बनता है, इसलिए बहुत विचारपूर्वक अन्न की शुद्धि का निर्णय करना चाहिए | विधर्मियों के अन्न भक्षण से भोक्ता उसके अनेक जन्मों के संचित पाप का भागी होता है |

"इस समय सर्वत्र अधर्म बढ रहा है व लोग अपने स्वधर्म से च्युत हो रहे हैं, इसलिए अपने स्वबान्धवों के घर भोजन भी स्वधर्मनिष्ठ हिंदुओं के लिए पतित करने वाला ही है |"

जो म्लेच्छ द्वारा पकाया हुआ,छुया हुआ अथवा उसके द्वारा दिया गया अन्न भक्षण करता है तो उसे प्रायश्चित्त हेतु पूर्ण कृच्छ्र व्रत करना चाहिए | व्रत के पश्चात् द्विज अपना यज्ञोपवीत संस्कार पुनः करवाने पर ही शुद्ध होता है |

म्लैच्छैर्गतानां चौरैर्वा कान्तारे वा प्रवासिनाम् |
भक्षयाभक्ष्यविशुद्ध्यर्थं तेषां वक्ष्यामि निष्कृतिम् ||
पुनः प्राप्य स्वदेशं च वर्णानामनुपूर्वशः |
कृच्छ्रस्यान्ते ब्राह्मणस्तु पुनः संस्कारमर्हति ||
पादोनान्ते क्षत्रियश्च अर्धान्ते वैश्य एव च |
पादं कृत्वा यथा शूद्रो दानं दत्वा विशुध्यति ||
----- अग्निपुराण अध्याय- 170

( नोट - श्लोक में ब्राम्हण क्षत्रिय वैश्य शुद्र की उपमा किसी परिवार विशेष में जन्म लेने विषयक नही, कर्म विषयक है)

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संसार और मोक्ष का वर्णन  है, उनको यदि कोई सच्चे मायनों में समझ जाय, यदि किसी को यह मालूम हो जाय कि ये बन्ध और मोक्ष तो क...
08/12/2025

संसार और मोक्ष का वर्णन है, उनको यदि कोई सच्चे मायनों में समझ जाय, यदि किसी को यह मालूम हो जाय कि ये बन्ध और मोक्ष तो केवल अविवेक की खसकीली बुनियाद पर चिनकर खड़े कर दिये गये हैं तब फिर बन्ध किसका? और मोक्ष किसका? इत्यादि कुशंकाओं का समाधान साधक के हृदय में स्वयमेव हो जाता है - वह जान जाता है। इन प्रश्नों को जिसने हल नहीं किया वह बद्ध है। जिसने इन प्रश्नों का हल कर दिया वह मुक्त ही है।
इस कूटस्थ तत्व को संक्षेप में यों समझना चाहिये कि जब वृत्तियाँ उदय हो जाती हैं, तब यह तत्व वृत्तियों का साक्षी होकर, जब तक वृत्तियाँ उत्पन्न नहीं होतीं तब तक यह तत्व वृत्ति के प्रागभाव का साक्षी बन कर, आत्मजिज्ञासा जब किसी को हो जाय तब यह तत्व उसी का साक्षी रह कर, उससे पहले 'मैं अज्ञानी हूँ' ऐसे अज्ञान के साक्षी के रूप में, यह तत्व रहा करता है। (इसीलिये ही भगवान् ने भी कहा है - न तो ऐसा ही है कि मैं किसी कालमें नहीं था तू नहीं था अथवा ये राजालोग नहीं थे और न ऐसा ही है कि इससे आगे हम सब नहीं रहेंगे।। गीता २/१२।। क्योंकि - असत् वस्तुकी तो सत्ता नहीं है और सत् का अभाव नहीं है। इस प्रकार इन दोनोंका तत्त्व तत्त्वज्ञानी पुरुषोंद्वारा देखा गया है।।२/१६।।) वह साक्षी कूटस्थ तत्व इस असत्य जगत् का आलम्बन है, इससे इसे 'सत्य' कहते हैं। सम्पूर्ण जड़ पदार्थों का प्रकाशक होने से इस तत्वको 'चिद्रूप' मानते हैं। (सब कर परम प्रकाशक जोई। राम अनादि अवधपति सोई।।) सदा ही प्रेमका स्थान होने से इस साक्षी तत्त्वको 'आनन्दरूप' समझते हैं। यह कूटस्थ तत्व सभी अर्थों का साधक है, और सभी से सम्बद्ध है, इससे उसे 'सम्पूर्ण' भी कह देते हैं। यह कूटस्थ तत्व 'जीव' और 'ईश्वर' आदि की कल्पना से बहुत ऊपर रहता है। यह तो एक स्वयंप्रकाश केवल तथा कल्याणस्वरूप तत्व है।
#मोक्ष

07/12/2025

Today My Birthday 🎉🎂

*_धर्मेंद्र नहीं रहे, 89 साल की उम्र में हुआ बॉलीवुड के ही-मैन का निधन🥲_*_गुलाब है जो सुगन्धित सार से महकता है__ऊँचा इंस...
24/11/2025

*_धर्मेंद्र नहीं रहे, 89 साल की उम्र में हुआ बॉलीवुड के ही-मैन का निधन🥲_*

_गुलाब है जो सुगन्धित सार से महकता है_
_ऊँचा इंसान अपने किरदार से महकता है_

_नमन है 💐🙏_
*_ॐ शांति 💐💐_*
*_नहीं रहे बॉलीवुड के 'हीमैन' धर्मेंद्र_*
_◆ 89 साल की उम्र में ली अंतिम सांस_
Dharmendra Deol |

15/11/2025

Radha Radha

# ❤️

07/11/2025

बस अब यही रास्ता बच गया है 😁😁

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