27/04/2022
डिप्रेशन एक बहुत कॉमन मानसिक बीमारी है और पिछले कुछ सालों में डिप्रेशन और एंग्जायटी डिसऑर्डर्स (घबराहट ) छोटे बच्चों में काफी बढे हैं । बच्चे क्यूंकि अपनी भावनाओं को पूर्ण रूप से व्यक्त नहीं कर पाते जिसकी वजह से इसको पहचानने में समय लगता है और इसका असर उनके मानसिक विकास पर पड़ता है। कभी कभी उदास होना,काम में मन न लगना किसी को भी हो सकता है , लेकिन जब बच्चा ज्यादातर उदास रहे /किसी से बात न करना चाहे /काम को ध्यान लगा कर न कर पाए/ अपने दोस्तों के साथ खेलना पसंद न करे , जिसका असर रोजमर्रा के जीवन व पढाई पर भी पड़े तो वो अवसाद या डिप्रेशन की स्तिथि हो सकती है । २०१९ में बंगलुरु के NIMHANS द्वारा किये गए एक शोध में पाया गया की हर ५ में से १ किशोर बच्चा डिप्रेशन से प्रभावित है। बच्चों में डिप्रेशन या एंग्जायटी डिसऑर्डर के लक्षणों में : उदासी , दोस्तों के साथ खेल में मन न लगना , पढ़ाई में ध्यान न लगा पाना , स्कूल जाने से कतराना , निराश होना, हर समय थकान लगना , व्यवहार में बदलाव ( गुस्सा ,चिड़चिड़ापन , रोना ), नींद न आना ,भूख कम होना हो सकते हैं। बच्चों में डिप्रेशन के मुख्य कारण परिवार व स्कूल से जुड़े हो सकते हैं। परिवार से संबंधित कारणों में : एकल परिवार, दोनों अभिभावकों का कामकाजी होना , छोटे भाई या बहन का जन्म होना, अभिभावकों का परस्पर व बच्चों के साथ व्यवहार , परिवार में किसी करीबी की मृत्यु, टीवी /मोबाइल का अत्यधिक उपयोग । स्कूल व शिक्षा से संबंधित कारणों में : पढ़ाई में अच्छा न कर पाना , स्कूली प्रदर्शन से अभिभावकों का संतुष्ट ना होना , स्कूल में साथ के बच्चों व शिक्षक का व्यवहार अच्छा ना होना , कम्पटीशन में अच्छा ना कर पाना , स्कूल में अंग्रेजी बोलने का दबाव।
अगर बच्चों में उपरोक्त लक्षण दिखें तो क्या करें : डिप्रेशन से बच्चे को निकालने के लिए ये जरूरी है की अभिभावक व अध्यापक एक टीम की तरह काम करें। घर पर वातावरण स्वस्थ रखें , प्यार से बात कर कारण जानने की कोशिश करें , किसी काम के लिए जबरदस्ती न करें , स्कूल में अच्छा परफॉर्म न करने बच्चे को परेशान न करें अवसाद के समय में मानसिक स्तिथि अस्थिर रहती है , रिकवर करने के लिए समय दें , पौष्टिक खाना व ताज़े फल और सब्जियां रोज के खाने में शामिल करें। बच्चे के अध्यापक से भी बच्चे की मानसिक स्तिथि की चर्चा करें ,जिससे स्कूल में अध्यापक उनकी मदद कर सकें। टीचर बच्चे से प्यार से बात करें ,काम पूरा या पढाई में ध्यान न लग पाने पर सजा (मानसिक व शारीरिक ) न दें इससे बच्चे का आत्मविश्वास ओर कम हो जाता है और वो स्कूल आने में भी परेशानी करने लगते हैं , स्कूल में काम करने में इन बच्चों को ज्यादा समय दें व इनकी सहायता करें ,क्लास के अन्य बच्चों को भी अवसादग्रस्त बच्चे से अच्छा व्यवहार करने के लिए प्रेरित करें। डॉक्टर से परामर्श लेने व साइकोलॉजिकल कॉउंसलिंग कराने से न झिझकें। बच्चे मानसिक रूप से अत्यधिक कोमल होते हैं डिप्रेशन की स्तिथि में उन्हें प्यार व सपोर्ट दें।
DR SEEMA MAHESHWARI ( CONSULTANT NEUROLOGIST ),RAJLATA GUT,LIVER AND NEURO CLINIC ,STADIUM ROAD, BAREILLY.