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28/06/2020

कौन कहता है कि आयुर्वेद में कोई साईड इफ़ेक्ट नहीं है

अभी दवाई बाजार में आई भी नहीं और कई लोग खुजली व जलन से मरे जा रहे हैं
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11/04/2020

सप्तधातु को शुद्ध रखा जाए तो कोई भी बिमारी आप के पास नही आ सकती ।

आज जानते इन के बारे में ।

सप्तधातु किसे कहते हैं –
जिससे शरीर का निर्माण या धारण होता है, इसी कारण से इन्हें ‘धातु’ कहा जाता है धा अर्थात = धारण करना। हैं -सप्‍त धातुओं का शरीर में बहुत महत्‍व है।

आयुर्वेद के मौलिक सिद्धान्‍तों के अनुसार –
【1】रस धातु
यह शरीरकी मूल धातु है। सुन्दरता इसी से आती है। रस धातु का निर्माण मुख्य रूप से उस आहार रस के द्वारा होता है, जो जाठराग्रि के द्वारा परिपक्क हुए आहार का परिणाम होता है।
【2】रक्‍त धातु
रक्त कोशिकाओं एवं इनके परिसंचरण (circulation) का नाम रक्त धातु है। सुश्रुतसंहिता और चरक सहिंता के मुताबिक रक्त धातु की कमी होने पर शरीर की त्वचा , रंगहीन, खरखरी, मोटी, फटी हुई एवं कांतिहीन हो जाती है।
【3】मांस धातु
शरीर में सबसे ज्यादा हिस्सा मांस धातु का होता है और यह शरीर की स्थिरता, मजबूती, दृढ़ता और स्थिति के लिए महत्त्वपूर्ण होता है। मांस धातु के द्वारा शरीर के आकार निर्माण में सहायता प्राप्त होती है।
【4】मेद धातु
मेद धातु शरीर में स्त्रेह एवं स्वेद उत्पन्न् करता है, शरीर को दृढ़ता प्रदान करता है तथा शरीर की हड्डियों व अस्थियों को पुष्ट कर ताकत प्रदान करता है।
【5】अस्थि धातु
शरीर में यदि हड्डियां न हों तो सम्पूर्ण शरीर एक लचीला मांस पिण्ड बनकर ही रह जायेगा, शरीर को अस्थियों के द्वारा ही शक्ति, दृढ़ता और आधार प्राप्त होता है। अस्थि पंजर ही शरीर का मजबूत ढाँचा तैयार करता है। जिससे मानव आकृति का निर्माण होता है।
【6】मज्जा धातु
मज्जा शरीर के विभिन्न अवयवों को पोषण प्रदान करती है।यह विशेष रूप से शुक्र धातु (वीर्य) का पोषण, शरीर का स्त्रेहन तथा शरीर में बल सम्पादन का कार्य करता है।
【7】शुक्र धातु
जिस प्रकार दूध में घी और गन्ने में गुड़ व्याप्त रहता है, उसी प्रकार शरीर में शुक्र व्याप्त रहता है।
शुक्र सम्पूर्ण शरीर में व्याप्त रहता है तथा शरीर को बल, पौरुष, वीर्य प्रदान करता है।
इसके लिए कहा गया है,
सप्‍त धातुयें वात आदि दोषों और रोगों से कुपित होंतीं हैं। शरीर में वात, पित्त, कफ
में से जिस दोष की कमी या अधिकता होती है, उसके अनुसार सप्‍त धातुयें रोग-बीमारियां अथवा शारीरिक विकृति उत्‍पन्‍न करती हैं।

यह पोस्ट सिर्फ 23+ आयु के मर्दों के लिए है। जिंदगी का लुतफ उठाने वाले हर मर्द के लिए लाभकारी पोस्ट....ताकत बढ़ाएं जोश जव...
22/12/2019

यह पोस्ट सिर्फ 23+ आयु के मर्दों के लिए है। जिंदगी का लुतफ उठाने वाले हर मर्द के लिए लाभकारी पोस्ट....
ताकत बढ़ाएं जोश जवानी वापिस पाएं, मर्दाना और मानसिक नामर्दी के शिकार पुरषों को मेरा नायाब तोहफा।
बुजुर्गो ने कहा है की यदि पानी की भरी बोतल को उल्टा किया जाए तो पानी बड़ी जल्दी निकल जाता है, लेकिन शहद की भरी बोतल को उल्टा किया जाए तो वह बहुत देर में निकलेगा। ठीक यही हालात शीघ्रपतन का है। जिस व्यक्ति का वीर्य पतला होता है, वह स्त्री की तनिक सी हरकत से भी जल्दी रखलित हो जाता है। ठीक उसी प्रकार जिस व्यक्ति का वीर्य शहद के बराबर गाड़ा हो वह अत्यधिक देर तक स्त्री के साथ प्रसंग कर सकता हैै...

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26/11/2019

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15/11/2019

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10/11/2019

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गठिया का इलाज़ संभव है नीरज अरोड़ाएलेक्ट्रोहोमियोपैथी चिकित्सक
26/05/2018

गठिया का इलाज़ संभव है

नीरज अरोड़ा
एलेक्ट्रोहोमियोपैथी चिकित्सक

13/02/2018

आयुर्वेद क्या है
आयुर्वेद (आयु + वेद = आयुर्वेद) विश्व की प्राचीनतम चिकित्सा प्रणालियों में से एक है। यह [[ऋग्वेद]] का उपवेद है। यह विज्ञान, कला और दर्शन का मिश्रण है। ‘आयुर्वेद’ नाम का अर्थ है, ‘जीवन का ज्ञान’ और यही संक्षेप में आयुर्वेद का सार है।
हिताहितं सुखं दुःखमायुस्तस्य हिताहितम्।
मानं च तच्च यत्रोक्तमायुर्वेदः स उच्यते॥ -(चरक संहिता १/४०)
(अर्थात जिस ग्रंथ में - हित आयु (जीवन के अनुकूल), अहित आयु' (जीवन के प्रतिकूल), सुख आयु (स्वस्थ जीवन), एवं दुःखआयु (रोग अवस्था) - इनका वर्णन हो उसे आयुर्वेद कहते हैं।)
आयुर्वेद और आयुर्विज्ञान दोनों ही चिकित्साशास्त्र हैं परन्तु व्यवहार में चिकित्साशास्त्र के प्राचीन भारतीय ढंग को आयुर्वेद कहते हैं और ऐलोपैथिक प्रणाली (जनता की भाषा में "डाक्टरी') को आयुर्विज्ञान का नाम दिया जाता है।
आयुर्वेद का परिभाषा एवं व्याख्या
आयुर्वेद विश्व में विद्यमान वह साहित्य है, जिसके अध्ययन पश्चात हम अपने ही जीवन शैली का विश्लेषण कर सकते है।
(1) आयुर्वेदयति बोधयति इति आयुर्वेदः।
अर्थात जो शास्त्र (विज्ञान) आयु (जीवन) का ज्ञान कराता है उसे आयुर्वेद कहते हैं।
(2) स्वस्थ व्यक्ति एवं आतुर (रोगी) के लिए उत्तम मार्ग बताने वाला विज्ञान को आयुर्वेद कहते हैं।
(3) अर्थात जिस शास्त्र में आयु शाखा (उम्र का विभाजन), आयु विद्या, आयुसूत्र, आयु ज्ञान, आयु लक्षण (प्राण होने के चिन्ह), आयु तंत्र (शारीरिक रचना शारीरिक क्रियाएं) - इन सम्पूर्ण विषयों की जानकारी मिलती है वह आयुर्वेद है।

13/02/2018

इस मौसम में हल्दी का उपयोग ज्यादा करे |

दुनिया का सबसे जबरदस्त एंटी-बायोटिक है जो हर घर में हर वक्त उपलब्ध है |

10/11/2017

“Nature Is More Powerful Than Man-made Science”

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