17/04/2018
*सफेद दाग का 100% आयुर्वेदिक इलाज*
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*सफेद दाग (leucoderma)*
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इस रोग में त्वचा का प्राकृतिक रंग बदल जाता है और वहां सफेदी आ जाती है। सफेदी के कारण इसे शिवत्र भी कहते हैं। इस रोग को हिन्दी में ‘श्वेत कुष्ठ’ अथवा ‘सफेद कोढ़’ के नामों से भी जाना जाता है, परंतु कुछ चिकित्सक इसे ‘कोढ़” न मानकर एक अलग ही रोग मानते हैं। शरीर के किसी भी हिस्से पर त्वचा का रंग में बदलाव होकर धीरे-धीरे यह रोग फैलता जाता है और एक समय ऐसा आता है, जब लगभग सारा शरीर ही सफेद हो जाता है। शरीर के विभिन्न भागों (चेहरा, होंठ, टांग, हाथ) पर पहले छोटे-छोटे सफेद दाग या सफेद चकत्ते पड़ जाते हैं, परंतु बाद में वे धीरे-धीरे फैलते जाते हैं | यह रोग संक्रामक नहीं होता और न ही इसके होने पर दर्द होता है। मेडिकल टर्म में इस समस्या को vitiligo के नाम से जाना जाता है | दरअसल त्वचा के बाहरी स्तर में मेलेनिन नामक रंजक द्रव्य रहता है, जो त्वचा को प्राकृतिक रंग देता है। विभिन्न कारणों से (जो आगे चलकर हम बतायेंगे ) इसके ठीक से काम न करने से सफेद दाग उत्पन्न होते है |
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ये सफेद दाग कभी-कभी तो अपने आकार में सिमटकर ही रह जाते हैं और कभी-कभी शरीर पर अत्यधिक फैल जाते हैं। एलोपैथिक चिकित्सा में इसको चेक करने के लिए रोगी के सफेद दागों वाली त्वचा को चुटकी से ऊपर उठाकर मांस से अलग करके उसमें सुई चुभोकर देखते हैं यदि उसमें रक्त निकल आए तो चिकित्सा योग्य समझा जाता है और यदि पानी जैसा तरल निकले तो-‘असाध्य’ यानि “लाइलाज” मान लिया जाता है | (घर पर इस टेस्ट को ना आजमायें क्योंकि यह परीक्षण केवल एक प्रशिक्षित डॉक्टर द्वारा ही किया जाता है |
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सफेद दाग कोई ऐसा रोग नहीं जो एक से दूसरे को लग जाए। पीड़ित रोगी की संतान भी सफेद दाग से ग्रस्त हो, ऐसा जरुरी नहीं होता।
🧐 *सफेद दाग के कारण* 🧐
आयुर्वेद चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार श्वेत कुष्ठ की उत्पति प्रकृति विरुद्ध खाना खाने से , खाने में अनियमितता, बासी, दूषित सड़े-गले मांस के खाने से होती है।
वैसे ज्यादातर विशेषज्ञों का मत यह है की सफेद दाग होने के प्रमुख कारणों में त्वचा में मेलानोसाइट्स सेल्स द्वारा उत्पादित मेलेनिन की कमी ही होता है |
*श्वेत कुष्ठ कोई प्राणघातक रोग नहीं, लेकिन इन सफेद दागों से चेहरे की सुंदरता नष्ट हो जाने के कारण सभी इस रोग से भयभीत रहते हैं।*
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*सफेद दाग के लक्षण*
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इस रोग के लक्षणों में शुरू में हाथों, कोहनी, चेहरे, टखने, पैर, कमर आदि स्थानों पर सफेद दाग उभर कर धीरे-धीरे सारे शरीर में फैलते हैं तथा इन दागों में कोई पीड़ा नहीं होती है।
👉🏼 *पथ्य➖अपथ्य* 👈🏼
🔷नमक रहित गेहूं, बाजरा, ज्वार, जौ की रोटी, जौ का दलिया, पुराना चावल, मूंग, मसूर की दाल भोजन में खाएं।
🔶खट्टी चीजें जैस इमली, खटाई, नीबू, संतरा, आम, अंगूर, टमाटर, आंवला, अमरुद, आलूबुखारा, अचार, दही, लस्सी, मिर्च, मैदा, उड़द दाल न खाएं। इन चीजो का सफेद दाग में परहेज रखें |
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*अधिक जानकारी के लिए सम्पर्क करे:-*
Guruji Ayurvedic hospital Behror
NH:-8
Mob no. 8502033919/ 9992203919