Ayurvedic Physician Dr sms Ahmed

Ayurvedic Physician Dr sms Ahmed DR SYED SHAHABUDDIN AHMAD
(MD) AYURVEDIC MEDICINE
general physician and HIJAMA THERAPIST 'Panchkerma THERAPIST . contacts for online proscription

गाढ़ा खून दिल की सबसे बड़ी परेशानियों में से एक कारण बन सकता है।खून गाढ़ा होने से ब्लड फ्लो रुकता है और क्लॉट बनने का खत...
04/11/2025

गाढ़ा खून दिल की सबसे बड़ी परेशानियों में से एक कारण बन सकता है।

खून गाढ़ा होने से ब्लड फ्लो रुकता है और क्लॉट बनने का खतरा बढ़ जाता है।

इससे Heart Attack, Stroke और BP जैसी समस्याएँ सामने आती हैं।

Ayurveda कहता है कि रक्त की शुद्धि और प्रवाह जीवन के लिए ज़रूरी है।

Natural तरीकों से Blood thin किया जा सकता है।

Diet, Hydration, Spices और Lifestyle बदलाव से फर्क पड़ता है।
लहसुन, हल्दी, फाइबर और योग बहुत प्रभावी हैं।

आज से शुरू करें small steps और दिल को सुरक्षित रखें।

Q1: गाढ़ा खून होने के लक्षण क्या हैं?

थकान, चक्कर, सिरदर्द, सांस फूलना, हाथ-पैर भारी महसूस होना।

Q2: क्या गाढ़ा खून Heart Attack का कारण बनता है?

हाँ, इससे ब्लड क्लॉट बन सकता है और Heart Attack या Stroke का खतरा बढ़ता है।

Q3: कौन सा फ़ूड खून पतला करता है?

लहसुन, हल्दी, मेथी, चुकंदर, नारियल पानी, हरी सब्जियाँ।

Q4: क्या रोज Workout ज़रूरी है?

हाँ, रोज 30 मिनट की Walk या Yoga करने से Blood Flow सुधरता है।

Q5: क्या पानी कम पीने से खून गाढ़ा होता है?

हाँ, dehydration thick blood का बड़ा कारण है।

इस तरह की हेल्थ से जुड़ी जानकारी के लिए हमें फॉलो और शेयर करें !

स्वस्थ रहे, स्वस्थ रखे
आयुर्वेद अपनाए निरोग जीवन जिए।🙋‍♂

डॉक्टर शैयद शहाबुद्दीन अहमद
BAMS, MD (आर्युवेदिक मेडिसीन)
आयुर्वेद एक्सपर्ट एवं सागर आर्युवेदिक हॉस्पिटल के संस्थापक
भागलपुर,बिहार
मोबाइल नंबर 8294779982
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
Diabetes Reversal Expert

(Tonsils) से राहत ! गले की ये छोटी ग्रंथियां क्यों हो जाती हैं बड़ी परेशानी? #गले के दोनों ओर स्थित दो छोटी-छोटी लिम्फ न...
02/11/2025

(Tonsils) से राहत ! गले की ये छोटी ग्रंथियां क्यों हो जाती हैं बड़ी परेशानी?

#गले के दोनों ओर स्थित दो छोटी-छोटी लिम्फ नोड्स जिन्हें 'Tonsils' (टॉन्सिल्स) कहते हैं, हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली का एक हिस्सा हैं। ये हमारे शरीर में मुंह और नाक के रास्ते आने वाले कीटाणुओं को रोकती हैं। पर जब ये स्वयं ही संक्रमण की चपेट में आ जाती हैं, तो इसे ही टॉन्सिलाइटिस या आयुर्वेद में तुण्डिकेरी कहा जाता है।

#आयुर्वेद के अनुसार, टॉन्सिल्स की सूजन मुख्यतः कफ और पित्त दोष की विकृति के कारण होती है। जब शरीर में "आम" (टॉक्सिन) बढ़ जाता है और पाचन अग्नि मंद पड़ जाती है, तो गले की ग्रंथियों में सूजन, दर्द और संक्रमण हो सकता है। इसे आयुर्वेद में "मुख रोगों" की श्रेणी में रखा गया है।

#टॉन्सिलाइटिस के लक्षणः

✓गले में खराश या तेज दर्द

✓निगलने में कठिनाई

✓बुखार और सिरदर्द

✓गले में सूजन और लालिमा

✓बदबूदार सांस

✓बच्चों में चिड़चिड़ापन और खाना न खाना

#टॉन्सिल्स होने के कारणः

✓ठंडे, तले हुए और भारी भोजन का सेवन

✓ठंडी हवा या बर्फ़ के सीधे संपर्क में आना

✓दिन में सोना और कफ को बढ़ाने वाली आदतें

✓पाचन शक्ति की कमजोरी

✓दूषित जल या भोजन

#टॉन्सिल्स से बचाव के लिए उपायः

1. गुनगुने पानी का नियमित सेवन करें

2. ठंडी चीजें (आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक्स) से परहेज करें

3. गर्म पानी से गरारे करें

4. सुबह-शाम तुलसी, मुलेठी, पिप्पली, अदरक की चाय पिएं

5. भोजन पचने योग्य, हल्का और गर्म खाएं

6. गर्म सूप, खिचड़ी, सब्जी का उबला पानी

7. बच्चों को बार-बार पानी बदल कर पीने से रोकें

#योग और प्राणायाम का महत्त्वः

✓सिंहासन (Lion Pose): गले की मांसपेशियों को मजबूत करता है

✓उज्जयी प्राणायामः गले की सफाई और ऊर्जा संचार में सहायक

✓जल नेतिः नाक और गले की सफाई के लिए उत्तम क्रिया

#घरेलू_और_आयुर्वेदिक_उपचारः

1. हल्दी और नमक से गरारेः गुनगुने पानी में आधा चम्मच हल्दी और एक चुटकी सेंधा नमक मिलाकर दिन में 2-3 बार गरारे करें।
फायदाः सूजन कम होती है और संक्रमण मरता है।

2. तुलसी और अदरक की चायः 7-8 तुलसी की पत्तियाँ और अदरक का छोटा टुकड़ा पानी में उबालकर उसमें शहद मिलाएं।
फायदाः रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है, गले को राहत मिलती है।

3. मुलेठी पाउडरः मुलेठी का चूर्ण शहद के साथ मिलाकर चाटें।
फायदा: गले की खराश, जलन और दर्द में राहत।

4. अजवायन का काढ़ाः अजवायन, काली मिर्च और हल्दी को पानी
में उबालें और छानकर पिएं।
फायदा: गले के संक्रमण को दूर करता है और कफ कम करता है।

5 . त्रिफला का सेवनः रात को त्रिफला चूर्ण गर्म पानी के साथ लें।
फायदाः शरीर से विषाक्तता को निकालता है, पाचन सुधारता है।

#आयुर्वेदिक_औषधियाँः

कंचनार गुग्गुलु - गले की ग्रंथियों की सूजन के लिए
सप्तांग घृत - संक्रमण और सूजन के लिए
तुण्डिकेरी रस - विशेष रूप से टॉन्सिल्स की चिकित्सा में उपयोगी
सप्तविंशति गुग्गुलु - कफ-पित्त नाशक
सितोपलादी चूर्ण, त्रिकटु चूर्ण आदि।
टॉन्सिल्स की समस्या सामान्य है लेकिन यदि समय रहते सही देखभाल न की जाए, तो यह पुरानी हो सकती है। आयुर्वेद में इसके लिए अनेक सरल और प्रभावी उपचार उपलब्ध हैं। नियमित दिनचर्या, संतुलित आहार, योग, और घरेलू नुस्खों से टॉन्सिल्स को रोका और ठीक किया जा सकता है।

यदि लक्षण गंभीर हों या बार-बार टॉन्सिल्स हो रहे हों, तो किसी योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

इस तरह की हेल्थ से जुड़ी जानकारी के लिए हमें फॉलो और शेयर करें !

स्वस्थ रहे, स्वस्थ रखे
आयुर्वेद अपनाए निरोग जीवन जिए।🙋‍♂

डॉक्टर शैयद शहाबुद्दीन अहमद
BAMS, MD (आर्युवेदिक मेडिसीन)
आयुर्वेद एक्सपर्ट एवं सागर आर्युवेदिक हॉस्पिटल के संस्थापक
भागलपुर,बिहार
मोबाइल नंबर 8294779982
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
Diabetes Reversal Expert

बच्चेदानी में कैंसर होने पर नजर आते हैं ये 6 शुरुआती लक्षण, 90 फीसदी महिलाएं साधारण समझकर करती हैं इग्नोरUterine Cancer ...
09/06/2024

बच्चेदानी में कैंसर होने पर नजर आते हैं ये 6 शुरुआती लक्षण,

90 फीसदी महिलाएं साधारण समझकर करती हैं इग्नोर

Uterine Cancer Symptoms: बच्चेदानी में कैंसर होने पर शरीर में कुछ लक्षण नजर आते हैं। आइए, जानते हैं इसके बारे में विस्तार से –

गर्भाशय या बच्चेदानी महिलाओं की प्रजनन प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह वो स्थान है, जहां गर्भधारण के बाद भ्रूण का विकास होता है। ऐसे में, हर महिला के लिए बच्चेदानी का स्वस्थ होना बहुत जरूरी है। लेकिन गलत खानपान, खराब लाइफस्टाइल और तनाव के कारण आजकल महिलाओं में गर्भाशय से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। बच्चेदानी में गांठ, सिस्ट, इन्फेक्शन जैसी समस्याएं होने पर गर्भधारण करने में परेशानी हो सकती है। आजकल महिलाओं में बच्चेदानी के कैंसर के मामले काफी तेजी से बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में महिलाओं की सबसे ज्यादा मौत यूटरस कैंसर के कारण होती है।

बच्चेदानी के कैंसर को एंडोमेट्रियल कैंसर (Endometrial Cancer) व यूटेराइन कैंसर (Uterine Cancer) के नाम से भी जाना जाता है। यह तब होता है जब एंडोमेट्रियम (गर्भाशय की अंदरूनी परत) की कोशिकाएं असामान्य रूप से विभाजित और बढ़ने लगती हैं। ये कोशिकाएं ट्यूमर का रूप ले लेती हैं, जो आगे चलकर कैंसर का रूप ले लेता है। एक्सपर्ट्स की मानें तो बच्चेदानी में कैंसर होने पर शरीर में इसके कई शुरुआती लक्षण देखने को मिलते हैं, जिन्हें समय रहते पहचान लेने पर इलाज संभव हो सकता है। आज इस लेख में हम आपको बच्चेदानी में कैंसर के लक्षणों (Uterine Cancer Symptoms In Hindi) के बारे में बताने जा रहे हैं।

पेट के निचले हिस्से में दर्द

पेट के निचले हिस्से में दर्द और ऐंठन होना बच्चेदानी में कैंसर का संकेत हो सकता है। इसके अलावा, महिलाओं को श्रोणि में ऐंठन का अनुभव भी हो सकता। अगर आपको बार-बार इस तरह की परेशानी महसूस हो रही है, तो आपको तुरंत डॉक्टर के पास जाकर एक्सअपना चेकअप करवाना चाहिए।

ब्लीडिंग या स्पॉटिंग होना

अगर आपको पीरियड्स के अलावा अन्य दिनों में ब्लीडिंग होती है या महीने में कई बार ब्लीडिंग या स्पॉटिंग होती है, तो इन लक्षणों को भूलकर भी नजरअंदाज न करें। ये बच्चेदानी में कैंसर का लक्षण हो सकता है। अगर आपको लंबे समय से इस तरह के लक्षण दिख रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर से मिलकर जांच करवाएं।

ज्यादा दिनों तक पीरियड रहना

अगर आपके पीरियड्स सामान्य से अधिक दिनों तक चलते हैं, तो यह बच्चेदानी में कैंसर होने का संकेत हो सकता है। इसके अलावा, आपको पीरियड्स के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव की परेशानी भी हो सकती है। ऐसी स्थिति में आपको तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।

बार-बार पेशाब आना
बच्चेदानी में कैंसर होने पर आपको बार-बार पेशाब आने की समस्या हो सकती है। कुछ महिलाओं को पेशाब के दौरान दर्द और जलन जैसी समस्याओं का अनुभव भी हो सकता है। अगर आपको इस तरह के लक्षण दिख रहे हैं, तो आपको तुरंत डॉक्टर से मिलकर जांच करवानी चाहिए।

मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग या डिस्चार्ज होना
मेनोपॉज के बाद महिलाओं में व्हाइट डिस्चार्ज या वेजाइनल ब्लीडिंग की समस्या होना भी बच्चेदानी के कैंसर का लक्षण हो सकता है। अगर आपको मेनोपॉज के बाद इस तरह के लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाकर अपना चेकअप करवाएं ताकि आपका समय पर इलाज किया जा सके।

शारीरिक संबंध बनाते समय दर्द होना

बच्चेदानी में कैंसर होने पर महिला को शारीरिक संबंध बनाते समय बहुत ज्यादा दर्द जैसी परेशानी का अनुभव हो सकता है। अगर आपको अपने पार्टनर के साथ यौन संबंध बनाने के दौरान दर्द या असहजता महसूस हो, तो ऐसे में आपको अपने आयुर्वेदिक एक्सपर्ट से सलाह लेनी चाहिए।

घरेलू उपाय

अदरक

अदरक का नियमित मात्रा में सेवन करने से कई बीमारियों के इलाज में बेहद कारगर है। यह पेट के कैंसर के इलाज में काफी कारगर माना जाता है। इसके गुणों के कारण यह गर्भाशय और कई अन्य प्रकार के कैंसर की रोकथाम में भी कारगर माना जाता है।

हल्दी
पहले से ही कई भारतीय व्यंजनों में एक मुख्य मसाला, कच्चे रूप में एक जड़ी बूटी के रूप में हल्दी और पाउडर के रूप में एक मसाले के रूप में, दुनिया भर में नई चमत्कार जड़ी बूटी के रूप में जाना जाता है। भारत में सदियों से इसका उपयोग पारंपरिक औषधि के रूप में किया जाता रहा है। यह एक बहुत ही प्रभावी एंटी-इंफ्लेमेटरी एजेंट माना जाता है। इस प्रकार यह कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकने में बहुत प्रभावी है।

कैमेलिया साइनेंसिस प्लांट से ग्रीन टी
ग्रीन टी को कई प्रकार के कैंसर के इलाज में, वजन घटाने में सहायता करने और विषहरण की सुविधा के लिए प्रभावी माना जाता है। कैमेलिया साइनेंसिस संयंत्र से हरी चाय की नियमित खपत शरीर के भीतर कैंसर कोशिकाओं के विकास से लड़ने के लिए जानी जाती है। इस प्रकार यह गर्भाशय के कैंसर के उपचार में भी बहुत प्रभावी है।

अश्वगंधा
इस जड़ी बूटी का उपयोग न केवल आयुर्वेद में किया जाता है, बल्कि होम्योपैथी द्वारा अर्क के लिए एक पारंपरिक दवा के रूप में भी अपनाया गया है। अश्वगंधा एक एडाप्टोजेन है, जिसका अर्थ है कि यह शरीर की जरूरतों के अनुकूल हो सकता है। फिर आवश्यक क्षेत्रों को सहायता प्रदान करने के लिए परिवर्तन कर सकते हैं। यह कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकने में भी बहुत अच्छा है।

लहसुन
यह मसाला कई प्रकार के कैंसर के लिए अच्छा माना जाता है क्योंकि इसमें एलिसिन होता है। यह सूजन संबंधी बीमारियों के सबसे अच्छे उपचारकों में से एक माना जाता है। इसमें अन्य प्रकार के फाइटोकेमिकल्स भी होते हैं और इस प्रकार शरीर को विषाक्त पदार्थों को निकालने में मदद करता है। यह कैंसर कोशिकाओं से लड़ने में बहुत प्रभावी है और शरीर के भीतर कैंसर के विकास को रोक सकता है।

डॉक्टर शैयद शहाबुद्दीन अहमद
एम डी (आर्युवेदिक मेडिसीन)
आयुर्वेद एक्सपर्ट एवं सागर आर्युवेदिक हॉस्पिटल के संस्थापक
भागलपुर,बिहार
मोबाइल नंबर 8294779982
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
Diabetes Reversal Expert

सरसाें क्‍यों हो रही बदनाम! अमेरिका-यूरोप में सरसों तेल पर बैन, किसान बेचैनअमेरिका-यूरोप में सरसों तेल पर बैन लगा है तो ...
19/03/2024

सरसाें क्‍यों हो रही बदनाम! अमेरिका-यूरोप में सरसों तेल पर बैन, किसान बेचैन
अमेरिका-यूरोप में सरसों तेल पर बैन लगा है तो वहीं देश की खाद्य तेल इंपोर्ट पॉलिसी ने भारतीय सरसों किसानों को बैचेन किया है. आइए इस कड़ी में जानते हैं तेल के खेल की ये पूरी कहानी, जिसमें सरसों के हिस्‍से बदनामी आई है और भारतीय सरसों किसानों के हिस्‍से परेशानी आई हैं.

किस वजह से अमेरिका-यूरोप में सरसों तेल पर बैन
अमेरिका और यूरोप के कुछ देशों में सरसों तेल के खाद्य प्रयोग पर बीते सालों में बैन लगाया है. असल में 1950 के दशक में किए गए एक शोध में सरसों के तेल में इरुसिक एसिड और ग्‍लूकोसाइनोलेट्स पाया गया था, जो इसके स्‍वाद में तेजी का प्रमुख गुण है. बीते कुछ सालों में हुए चूहों पर किए एक शोध में ये पाया गया है कि ये दोनों की तत्‍वों की अधिकता की वजह से चूहों में दिल की बीमारियां हो सकती हैं. हालांकि मुनष्‍य पर इसका क्‍या प्रभाव होगा, इस पर अभी स्‍पष्‍टता नहीं है, लेकिन अमेरिका के शीर्ष खाद्य संंस्‍थान FDA ने सरसों के तेल पर बैन लगा दिया है, जिसके तहत सरसों के तेल का त्‍वचा पर बाहरी प्रयोग तो किया जा सकता है, लेकिन सरसों तेल का प्रयोग खाद्य तेल के तौर पर प्रतिबंधित किया गया है. इसी तरह कनाड़ा समेत यूरोप के कई देशों में सरसों के तेल पर बैन लगाया गया है. हालांकि अभी कम इरुसिक एसिड वाले सरसों के बीज को मंंजूरी दिलाने के प्रयास जारी हैं.

सरसों के साथ साजिश की तरफ इशारा कर रही ये बातें
FDA की तरफ से सरसों के तेल पर बैन का फैसला कई तरह के सवाल खड़ा करती हैं, जिसमें कुछ बातें सरसों के साथ किसी साजिश का कर रही है. असल में अमेरिका समेत यूरोप के देशों में सरसों के तेल का प्रयोग कुकिंंग में नहीं किया जाता है,जबकि अमेरिका समेत यूरोपियन यूनियन के देशों की मुख्‍य फसल सरसों है और ना ही ये देश किसी देश से सरसों का इंपोर्ट करते हैं. मतलब, साफ है कि अमेरिका और यूरोप के देशों और निवासियों का सरसों के तेल से कोई संबंध नहीं है. ऐसे में सरसों के तेल पर बैन लगाने के फैसले की मंशा को शक की नजर से देखना लाजिमी बनता है.

तेल का खेल... ये शब्‍द बीते दशकों में बेहद ही लोकप्रिय हुआ था, जिसका सीधे-शाब्‍दिक मायने खाड़ी देशों की पेट्रो पॉलिटिक्‍स और डिप्‍लोमेसी थी, लेकिन बीते कुछ सालों में तेल का खेल अपनी परिभाषा बदलने में सफल रहा है. बीते दशक में तेल के खेल के सीधे-शाब्‍दिक मायने पॉम-सोयाबीन, कैनोला ऑयल पॉलिटिक्‍स और डिप्‍लोमेसी में बदलते ह अमेरिका-यूरोप में सरसों तेल पर बैन लगा है तो वहीं देश की खाद्य तेल इंपोर्ट पॉलिसी ने भारतीय सरसों किसानों को बैचेन किया है. आइए इस कड़ी में जानते हैं तेल के खेल की ये पूरी कहानी, जिसमें सरसों के हिस्‍से बदनामी आई है और भारतीय सरसों किसानों के हिस्‍से परेशानी आई हैं.

सरसों के साथ साजिश की तरफ इशारा कर रही ये बातें
FDA की तरफ से सरसों के तेल पर बैन का फैसला कई तरह के सवाल खड़ा करती हैं, जिसमें कुछ बातें सरसों के साथ किसी साजिश का कर रही है. असल में अमेरिका समेत यूरोप के देशों में सरसों के तेल का प्रयोग कुकिंंग में नहीं किया जाता है,जबकि अमेरिका समेत यूरोपियन यूनियन के देशों की मुख्‍य फसल सरसों है और ना ही ये देश किसी देश से सरसों का इंपोर्ट करते हैं. मतलब, साफ है कि अमेरिका और यूरोप के देशों और निवासियों का सरसों के तेल से कोई संबंध नहीं है. ऐसे में सरसों के तेल पर बैन लगाने के फैसले की मंशा को शक की नजर से देखना लाजिमी बनता है.

बीते दशकों में सरसों के प्रयोग से ड्राप्‍सी बीमारी होने का झूठ फैलाया गया. जिसके बाद सरसों तेल भारत में ही बदनाम हो गया. उसकी बिक्री पर विपरीत (ऑपरेशन ग्‍लोडन फ्लो की कहानी )असर पड़ा. इस वजह से कई सरसों मिलें बंद हुई, किसानों के कम दाम मिले और सरसों का रकबा कम हुआ.
अमेरिका में सोयाबीन की खेती होती है और दुनियाभर में सोयाबीन के तेल की खपत बढ़ाने की नीतियां अमेरिका की रही हैं. अमेरिकी की नीतियां उनके उत्‍पादन के खपत के आधार पर बनती है.

सरसों तेल का प्रयोग भारत में प्राचीन समय से हो रहा है. उत्‍तर भारत से लेकर पूर्वोत्‍तर तक सरसों तेल का प्रयोग बड़ी मात्रा में करते हैं. पूर्व में हुई कई रिसर्च ये स्‍पष्‍ट कर चुकी हैं कि सरसों में कैंसर से लड़ने वाले गुण मौजूद हैं. वहीं मौजूदा वक्‍त में भारत अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए खाद्य तेल इंपोर्ट करता है. ऐसे में अगर अमेरिका और यूरोप की तरफ से सरसाें के तेल पर जो बैन लगाया गया है, उसका भारत के किसानों पर कुछ असर नहीं पड़ेगा, क्‍योंकि भारत से सरसों एक्‍सपोर्ट नहीं होता है, लेकिन जिस तरीके से अमेरिका और यूरोप में प्रयोग ना होने के बाद भी सरसों तेल के प्रयाेग पर बैन लगाया है. ऐसे में जरूरी है कि भारतीय कृषि वैज्ञानिक आगे आएं और सरसों के खिलाफ जो इंटरनेशल माहौल बनता हुआ दिख रहा है उसका खंडन करें.

भारत के लिए चिंता क्‍या है
भारत के कई राज्‍यों में पारंपरिक तौर पर सरसों तेल का प्रयोग खाना बनाने के लिए होता है, जिसे शुद्ध तेल के तौर पर रेखांकित किया जाता है. कोरोना काल के बाद सरसों के तेल ने एक बार विश्‍वसनीयता पाई है, लेकिन ग्‍लोबल होती दुनिया में जिस तरीके से भारतीय आम जन के बीच अमेरिकी स्‍टैंडर्ड की स्‍वीकार्यता बढ़ी है. अमेरिका की मुख्‍य तिलहनी फसल सोयाबीन ने अपनी पैठ बनाई है, उससे इस बात को नाकारा नहीं जा सकता है कि अमेरिका और यूरोप के देशों में लगाया गया सरसों तेल पर बैन आने वाले दिनों में आम भारतीय के मन में कई तरह के शक और सवालों को जन्‍म देगा. ऐसे में जरूरी है कि इस पर स्‍पष्‍टता के लिए कोशिशें की जाएं.

डॉक्टर शैयद शहाबुद्दीन अहमद
एम डी (आर्युवेदिक मेडिसीन)
आयुर्वेद एक्सपर्ट एवं सागर आर्युवेदिक हॉस्पिटल के संस्थापक
भागलपुर,बिहार
मोबाइल नंबर 8294779982
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆

बांझपन महिलाओं में एक गंभीर समस्या बनती जा रही है. ऐसे में प्रजनन क्षमता की कमी होने के कारण कपल्स को कंसीव करने में दिक...
06/12/2022

बांझपन महिलाओं में एक गंभीर समस्या बनती जा रही है. ऐसे में प्रजनन क्षमता की कमी होने के कारण कपल्स को कंसीव करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. आर्युवेद के अनुसार,

आयुर्वेद की प्रणाली एक सेहतमंद जीवन का विज्ञान है जिसमे आपकी बुद्धि और शरीर को प्राचीन चिकित्सीय क्रियाओं के द्वारा पूर्ण पोषण दिया जाता है ताकि आप स्वस्थ रहें।

महिलाओं में बांझपन के कई कारण हो सकते हैं, जैसे ओव्यूलेशन डिसऑर्डर, फैलोपियन ट्यूब में क्षति, एंडोमेट्रियोसिस, यूटेरस या सर्विक्स से जुड़ी समस्याएं आदि. एक्सपर्ट कहते हैं कि अगर लक्षणों का पता लगाकर इसका समय पर इलाज कर किया जाए तो बांझपन को ठीक किया जा सकता है. जानते हैं कुछ ऐसे लक्षणों के बारे में जो बांझपन का संकेत दे सकते हैं.
एंडोमेट्रियोसिस- कुछ महिलाओं को पीरियड्स के दौरान सामान्य से कम दर्द होता है या बिल्कुल नहीं होता, जबकि बहुत सी ऐसी महिलाएं हैं जिन्हें पीरियड्स के दौरान बहुत ज्यादा दर्द और ऐंठन का सामना करना पड़ता है. इसके अलावा, उनके पीरियड्स की अवधि काफी दिनों तक चलती है. एंडोमेट्रियोसिस एक ऐसी समस्या है जिसमें यूटेरस के अंदर पाया जाने वाला एक ऊतक (टिश्यू) बढ़कर गर्भाशय के बाहर फैलने लगता है. यह ऊतक अंडाशय, फैलोपियन ट्यूब या यूटेरस के बाहरी हिस्सों में और दूसरे हिस्सों में फैल सकता है. एंडोमेट्रियोसिस होने पर पीरियड्स के दौरान तेज दर्द हो सकता है. एंडोमेट्रियोसिस के कुछ अन्य लक्षणों में अनियमित पीरियड्स और स्पॉटिंग, क्रोनिक पैल्विक दर्द (न केवल मासिक धर्म के दौरान), मल त्याग करने में दर्द, सेक्स के दौरान दर्द, पीठ दर्द, थकान, मतली आदि शामिल हैं.
मासिक धर्म चक्र में अनियमितता- एक अनियमित चक्र, जिसमें मिस्ड पीरियड्स शामिल हैं, बांझपन का कारण बन सकता है. अनियमित पीरियड्स की वजह से ओव्यूलेशन नियमित तौर पर नहीं हो पाता है. पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीसीओएस), मोटापा, कम वजन और थायराइड की समस्याओं सहित कई फेक्टर्स के कारण ओव्यूलेशन की अनियमितताएं हो सकती हैं.
हार्मोनल समस्याएं- हार्मोन में उतार-चढ़ाव होने से शरीर में कई तरह के लक्षण दिखने लगते हैं. इनमें मुंहासे, हाथ पैरों का ठंडा पड़ना, सेक्स ड्राइव में कमी, यौन इच्छा में कमी, निप्पल डिस्चार्ज, चेहरे पर बालों का बढ़ना, सिर के बालों का पतला होना, वजन का बढ़ना आदि शामिल हैं. ऐसे लक्षण दिखने पर डॉक्टर की सलाह लें.
सेक्स के दौरान दर्द- डिस्पेर्यूनिया, या सेक्स के दौरान दर्द, एक ऐसी समस्या है जो महिला की प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकती है.

आयुर्वेद की प्रणाली एक सेहतमंद जीवन का विज्ञान है जिसमे आपकी बुद्धि और शरीर को प्राचीन चिकित्सीय क्रियाओं के द्वारा पूर्ण पोषण दिया जाता है ताकि आप स्वस्थ रहें।
Dr Syed Shahabuddin Ahmed MD (ayurvedic medicine) Bhagalpur Bihar

डिस्पेप्सिया (अपच): प्रमुख जानकारी और निदानडिस्पेप्सिया (अपच) क्या है?डिस्पेप्सिया आपकी आंत के ऊपरी हिस्से में उत्पन्न ह...
07/09/2022

डिस्पेप्सिया (अपच): प्रमुख जानकारी और निदान

डिस्पेप्सिया (अपच) क्या है?
डिस्पेप्सिया आपकी आंत के ऊपरी हिस्से में उत्पन्न हुई किसी समस्या के कारण आने वाली कई समस्याओं के लिए प्रयुक्त होने वाला एक शब्द है। इसे अपच या पेट में गड़बड़ के नाम से भी पहचाना जाता है।
यह पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द् या जलन का एहसास है। पेट में उपस्थित अम्ल जब पाचन तंत्र की संवेदनशील, सुरक्षाकारक परतों के संपर्क में आता है, तो इसका परिणाम इन परतों की उत्तेजना और सूजन (पीड़ा और फूलना) के रूप से सामने आता है, जिसके फलस्वरूप डिस्पेप्सिया उत्पन्न होता है।
रोग अवधि

अपच के प्रकरण अक्सर बिना चिकित्सीय सहायता के कुछ घंटों में स्वयं ही दूर हो जाते हैं। ठीक होने में लगने वाला समय स्थिति की गंभीरता और उपचार की सफलता पर निर्भर करता है।
जाँच और परीक्षण
रोग का निर्धारण शारीरिक परीक्षण द्वारा होता है. अन्य जाँचों में हैं :
श्वास या रक्त परीक्षण।
गेस्ट्रोस्कोपी
बेरियम स्वालो और मील एक्स-रे
डॉक्टर द्वारा आम सवालों के जवाब
1. डिस्पेप्सिया (अपच) क्या है?
डिस्पेप्सिया आपकी आंत के ऊपरी हिस्से में उत्पन्न हुई किसी समस्या के कारण आने वाली कई समस्याओं के लिए प्रयुक्त होने वाला एक शब्द है। इसे अपच या पेट में गड़बड़ के नाम से भी पहचाना जाता है। यह पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द् या जलन का एहसास है। पेट में उपस्थित अम्ल जब पाचन तंत्र की संवेदनशील, सुरक्षाकारक परतों के संपर्क में आता है, तो इसका परिणाम इन परतों की उत्तेजना और सूजन (पीड़ा और फूलना) के रूप से सामने आता है जिसके फलस्वरूप डिस्पेप्सिया उत्पन्न होता है।
2. इसके लक्षण क्या होते हैं?
अपच के लक्षणों में पेट में या पेट के ऊपरी हिस्से में जलन, सीने में जलन (पेट में या आहारनली में जलन का एहसास), पेटदर्द, पेट फूलना (भरे हुए होने का एहसास), डकार और गैस, मतली और उल्टी, अम्लीय स्वाद, पेट में “गुड़गुड़” या अतिसार आदि हैं।

3. डिस्पेप्सिया (अपच) कैसे होता है?
पेट में उपस्थित अम्ल जब पाचन तंत्र की संवेदनशील, सुरक्षाकारक परतों के संपर्क में आता है, तो इसका परिणाम इन परतों की उत्तेजना और सूजन (पीड़ा और फूलना) के रूप से सामने आता है जिसके फलस्वरूप डिस्पेप्सिया उत्पन्न होता है।

4. ठीक होने में कितना समय लगता है?
अपच के प्रकरण अक्सर बिना चिकित्सीय सहायता के कुछ घंटों में स्वयं ही दूर हो जाते हैं। ठीक होने में लगने वाला समय स्थिति की गंभीरता और उपचार की सफलता पर निर्भर करता है।

5. व्यक्ति को डॉक्टर से संपर्क कब करना चाहिए?
डॉक्टर से संपर्क करें यदि आपके पेट के ऊपरी हिस्से या छाती में दर्द, भरापन, या असहजता (जलन) होना, भूख में कमी, अस्वस्थता का अनुभव, डकार, पेट में गुड़गुड़ या गुदाद्वार से हवा निकलना या पेट दर्द आदि लक्षणों का अनुभव करते हैं। मुँह का स्वाद ख़राब होना, जीभ पर परत होना और श्वास दुर्गन्धयुक्त होना आदि को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

नींबू और अदरक दो चम्मच नींबू के रस में अदरक का रस मिलाएं और इनसे गर्म पानी के साथ पी लें। ...
धनिया पाउडर के साथ छाछ छाछ पेट को ठंडा रखता है और खाना पचाने में मदद करता है। ...
अजवायन या जीरा एक चम्मच अजवायन या जीरे को काला नमक के साथ मिलाकर गर्म पानी के साथ पिएं। ...
ग्रीन टी खाने के आधे घंटे बाद ग्रीन टी लें। ...
अदरक ...
बेकिंग सोडा
Dr Syed shahabuddin Ahmed.
(MD) ayurvedic medicine
Bhagalpur bihar

इसे अरबी में हिजामा, चीनी और अंग्रेजी में कपिंग, मिस्र में इलाज बिल कर्न व भारत में रक्त मोक्षण नाम से जाना जाता है। इसस...
21/08/2021

इसे अरबी में हिजामा, चीनी और अंग्रेजी में कपिंग, मिस्र में इलाज बिल कर्न व भारत में रक्त मोक्षण नाम से जाना जाता है। इससे जुड़े चिकित्सक कम होने के कारण यह ज्यादा प्रचलित नहीं है। जानें इसके बारे में-

खून से विषैले तत्त्वों की सफाई कर कई रोगों से मुक्त करती है 'हिजामा थैरेपी'

'हिजामा' थैरेपी हजारों वर्ष पुरानी यूनानी चिकित्सा पद्धति है। दुनिया के हर हिस्से में इस पद्धति का प्रयोग किया जाता है। इसे अरबी में हिजामा, चीनी और अंग्रेजी में कपिंग, मिस्र में इलाज बिल कर्न व भारत में रक्त मोक्षण नाम से जाना जाता है। इससे जुड़े चिकित्सक कम होने के कारण यह ज्यादा प्रचलित नहीं है। जानें इसके बारे में-

कैसे काम करती है थैरेपी ?
शरीर को निरोगी बनाए रखने का काम रक्त पर निर्भर है। रक्तसंचार शरीर के सभी अंगों को स्वस्थ रखता है। यह थैरेपी रक्तसंचार के अवरोध को खत्म कर अंगों तक पर्याप्त मात्रा में रक्त पहुंचाती है। इस चिकित्सा के तहत रक्त में मौजूद विषैले पदार्थ, मृत कोशिकाओंं व अन्य दूषित तत्त्वों को बाहर निकालकर रोगों से बचाव किया जाता है। इससे नए खून का निर्माण होता है और कई बीमारियां दूर हो जाती हैं। साथ ही मांसपेशियों व ऊत्तकों पर दबाव पड़ने से इनमें लचीलापन आता है और इसके कार्य में सुधार होता है। थैरेपी के दौरान सावधानी की जरूरत होती है इसलिए इसे विशेषज्ञ से ही करवाएं ताकि किसी प्रकार की परेशानी न हो।

हिजामा क्या है ?
'हिजामा' एक अरबी शब्द है जिसका अर्थ है - 'खींचकर बाहर निकालना' यानी शरीर से दूषित रक्त को बाहर निकालना। कपिंग (हिजामा) ड्राई और वेट दो तरह की होती है।

क्या यह पद्धति मान्यता प्राप्त है ?
हां, यह आयुष मंत्रालय से मान्यता प्राप्त है। बीयूएमएस और बीएएमएस डिग्री प्राप्त चिकित्सक इसे करने के लिए पात्र हैं।

क्या यह जोखिम भरा इलाज है ?
नहीं, यदि एक कुशल चिकित्सक करे तो इसमें कोई जोखिम नहीं है। यह लगभग बिना दर्द वाली पद्धति है जिसमें इंजेक्शन से भी कम दर्द महसूस होता है।

क्या इससे संक्रमण हो सकता है ?
नहीं, इसमें प्रयोग होने वाले कप मेडिकेटेड व डिस्पोजेबल होते हैं। अत: हर रोगी में अलग व नए कप प्रयुक्त होते हैं, इससे इंफेक्शन नहीं होता। बचाव के लिए हिजामा के बाद त्वचा पर एंटीसेप्टिक क्रीम या लोशन भी लगाया जाता है।

किन रोगों में उपयोगी है ?
सभी रोगों में यह फायदेमंद है। खासतौर पर हर प्रकार के दर्द में। सियाटिका, स्लिप डिस्क, सिरदर्द, चर्मरोग, स्पॉन्डिलाइटिस, किडनी, हृदय रोग, लकवा, मिर्गी, महिलाओं में इंफर्र्टिलिटी, माहवारी की समस्या, गर्भाशय व हार्मोनल विकार, अस्थमा, साइनुसाइटिस, मधुमेह, मोटापा, थायरॉइड की समस्या, पेट के रोग, चेहरे पर दाने व दाग-धब्बे और गंजेपन में यह थैरेपी कारगर है।
DR SYED SHAHABUDDIN AHMAD.
MD ( AYURVEDIC MEDICINE)

Gastritis treated by HIJAMA THERAPY आप पेट से परेशान हैं या फिर आपका पेट आपसे?---------------------------अधिकांश पेट के ...
06/06/2021

Gastritis treated by HIJAMA THERAPY
आप पेट से परेशान हैं या फिर आपका पेट आपसे?

---------------------------

अधिकांश पेट के रोगियों का चेकअप करने के बाद मैं उनसे कहता हूँ कि आपको पेट ने नहीं पेट को आपने परेशान कर रखा है। हमेशा ही वे मुझसे कहते हैं कि अरे डॉक्टर साहब क्या बताऊँ बहुत परेशान हूँ इस पेट से, दर्द होता है, पेट फूलता है, कब्ज़, गैस, एसिडिटी...से लेकर बवासीर और सीने में दर्द तक की शिकायतों का पिटारा खुल जाता है।

फिर मैं सवाल करता हूँ-

खाना कितनी कितनी देर में लेते हो?
जवाब आता है कभी भी।

फिर पूछता हूँ कि रात का खाना कब खा लेते हो और उसके कितनी देर बाद सो जाते हो?
जवाब मिलता है 10-11 या 12 बजे और फिर टीवी देखते हुए सो जाते हैं।

चाय कितनी पीते हैं आप?
अधिकांश का जवाब मिलता है- 3 से लेकर 10-12 तक।

गुटखा, तम्बाखू, सिगरेट कुछ पीते हो?
अधिकांश पुरुषों का जवाब हां में होता है।

पानी गर्म पीते हो या ठंडा?
ठंडा, गर्म पानी पीने में आता है क्या, प्यास ही नहीं बुझेगी उससे तो।

सलाद या फ्रूट खाते हो?
कभी कभी।

कितने किलोमीटर चलते हैं आप?
अधिकांश बस हंस देते हैं और कुछ कहते हैं सीढियां बहुत है हमारे घर मे इसलिए उसी पर 5 से 6 चक्कर लग जाते हैं।

मेरे यह सवाल उसे खुद ब खुद समझा देते हैं कि पेट पर वह कितना अत्याचार कर रहा है और दोष भी उसे ही दे रहा है। फिर भी मैं उन्हें बता देता हूँ कि अब आप मुझे बताइये दोष किसका है... आपका या आपके मासूम पेट का?

आप भी अगर पेट की समस्या से ग्रस्त हैं तो एक बार जरूर सोचें कि पेट ने आपको परेशान किया है या आपने उस बेचारे को...अगर आप तय समय पर भोजन करें, 3 से 4 किलोमीटर रोज़ाना चले, गर्म पानी पिएं (ज्यादा नहीं तो कम से कम 3 से 4 ग्लास ही सही), खाना सोने के 4 घंटे पहले खा लें, फ्रूट्स और सलाद रोज़ाना लें और फिर अगर पेट आपको परेशान करता तो बात मानी जाती कि- "हां पेट ने आपको परेशान किया है।" लेकिन सारे सुबूत तो आपके ख़िलाफ़ हैं, इसलिए दोषी आप ही हैं, पेट बेचारा बेकसूर है। सज़ा के तौर पर आपको अब जीवन भर मेरे बताए काम (ऊपर सवालों वाले) करना होंगें।

DR SYED SHAHABUDDIN AHMAD.
MD ( AYURVEDIC MEDICINE)
पेट की तरफ से जिरह करने वाला वकील

■■■

06/06/2021

े_अंदर_ब्लेक_फंगस_से_सावधान........?
***************************************
बाजार से आप प्याज खरीद कर लाते हैं.....कभी आपने देखा होगा उसके ऊपर काला-काला कोई पदार्थ लगा रहता है........
असल में यही ब्लैक फंगस (काला फफूंद) होता है।
अआप अपने घरों के फ्रिज के दरवाजे खोलिए उसमें एक रबर लगी मिलेगी।
उस रबर को साफ रखें, एवं फ्रिजर को साफ रखें, अगर काला काला फंगस दिख रहा हो तो तत्काल उसकी अच्छे ढंग से सफाई कर दें,और बराबर उसकी सफाई पर ध्यान दें।

उस रबर पर वो जो काला काला है, वही है #म्यूकोरमाइकोसिस यानी ब्लैक फंगस

अगर आपने ध्यान न दिया तो ये फंगस आपके फ्रिज के अंदर रखे खाद्य पदार्थों के माध्यम से बेहद आसानी से आपके अंदर प्रवेश कर सकता है।

★आटा गूंथ कर फ्रिज में ना रखें।
★ कटे फल फ्रिज में ना रखें।
★प्याज ताजा काटकर खाए, कटा प्याज देर तक ना रखें।
★फ्रिज में रखी हुई ब्रेड कत्तई यूज न करें।
★ए.सी. इस्तेमाल कम से कम करें।

सब कुछ ताजा और तुंरन्त इस्तेमाल करें।
और जिस भी खाद्य पदार्थ पर आपको काला काला फंगस जैसा कुछ भी दिखे उसको तुरन्त सावधानी से नष्ट कर दें।

अपने कूलर, एसी और आरओ मशीन की टोटी भी चेक करते रहिएगा।

बेहद चौकन्ना रहिए, चीजों के बारे में पढ़ते-लिखते रहिए और अपडेट रहिए, चित्त बिल्कुल शांत रखिए, शुद्ध खान पान से इम्युनिटी मजबूत रखिए, और व्यायाम करते रहें और हमेशा सकारात्मक रहें।

सभी अपना ध्यान रखें तो......मजाल है जो कोई फंगस आपको छू भी ले❗
DR. SYED SHAHABUDDIN AHMAD
MD. ( AYURVEDIC MEDICINE)

एक्ने क्या है, जानिये इसके कारण, लक्षण और इलाज टीनएज में शुरू हुई मुंहासों की समस्या ज़िंदगी में लंबे समय तक परेशान करती...
13/01/2021

एक्ने क्या है, जानिये इसके कारण, लक्षण और इलाज
टीनएज में शुरू हुई मुंहासों की समस्या ज़िंदगी में लंबे समय तक परेशान करती है। तैलीय (ऑयली) त्वचा वाले लोग खासतौर पर इस समस्या से ग्रस्त रहते हैं। जीवनशैली, गलत आदतों, खानपान, खराब कॉस्मेटिक्स का इस्तेमाल, दवाइयों का सेवन करने आदि वजहों से मुंहासों की समस्या बेहद आम हो गई है। ये मुंहासे माथे, होंठों से लेकर चेहरे के किसी भी भाग में हो सकते हैं। हालांकि, अपनी त्वचा का ख्याल रखकर और जीवनशैली में थोड़ा बदलाव करके इस समस्या का इलाज (acne ka ilaj) किया जाता है।

मुंहासे क्या हैं ? - What is Acne in Hindi?
चेहरे पर पिंपल्स या एक्ने (acne) होना बेहद आम बात है। मुँहासे क्यों होते है? ये अक्सर तब होते हैं, जब हमारी त्वचा के पोर्स में किसी तरह की गंदगी या ऑयल जमा हो जाता है। आमतौर पर ऑयली स्किन वाले लोग मुंहासों की समस्या से ज्यादा परेशान रहते हैं मगर ये किसी को भी हो सकते हैं।

खूबसूरती बढ़ाने के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है तिल का तेल

मूल रूप से मुंहासे त्वचा के नीचे मौजूद तेल ग्रंथियों से संबंधित एक विकार हैं। स्किन के रोम छिद्र (पोर्स) अंदर से तेल ग्रंथी वाली कोशिकाओं से जुड़े होते हैं, जिनके कारण सीबम ऑयल स्किन के रोम छिद्र में उत्पन्न होता है। सीबम खराब सेल्स को रोम छिद्र से बाहर लाने में मदद करता है, जिसके साथ ही नए सेल्स बनते रहते हैं। मगर कई बार असंतुलित हॉर्मोन के कारण यह सीबम तेल ज्यादा मात्रा में बनने लगता है, जिससे रोम छिद्र बंद होने लगते हैं और मुंहासे या दाने होने लगते हैं। सीबम में बैक्टीरिया के बढ़ने से भी रोमछिद्र बंद होने लगते हैं, जिससे मुंहासों की समस्या आम हो जाती है।

Pimples, acne on girl's face

मुंहासे होने के कारण - Reasons of Pimple on Face
चेहरे व पीठ पर मुंहासे या एक्ने के कारण बहुत से हैं। हम यहां आपको कुछ ऐसी आम वजहों के बारे में बता रहे हैं, जिनसे आपको पिपंल हो सकते हैं। अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव कर व थोड़ा ध्यान रखकर एक्ने की समस्या से बचा जा सकता है। जानिए, एक्ने क्या होता है (acne kya hota hai) और इसकी मुख्य वजह।

टीनएज में शुरू हुई मुंहासों की समस्या ज़िंदगी में लंबे समय तक परेशान करती है। तैलीय (ऑयली) त्वचा वाले लोग खासतौर पर इस समस्या से ग्रस्त रहते हैं। जीवनशैली, गलत आदतों, खानपान, खराब कॉस्मेटिक्स का इस्तेमाल, दवाइयों का सेवन करने आदि वजहों से मुंहासों की समस्या बेहद आम हो गई है। ये मुंहासे माथे, होंठों से लेकर चेहरे के किसी भी भाग में हो सकते हैं। हालांकि, अपनी त्वचा का ख्याल रखकर और जीवनशैली में थोड़ा बदलाव करके इस समस्या का इलाज (acne ka ilaj) किया जाता है।

ONLINE ADVICE KE LIYE CONTACTS KARE 8294779982: इलाज में आमतौर पर खून चढ़ाया जाता है, लेकिन हिजामा थेरेपी में शरीर से खू...
25/12/2020

ONLINE ADVICE KE LIYE CONTACTS KARE
8294779982

: इलाज में आमतौर पर खून चढ़ाया जाता है, लेकिन हिजामा थेरेपी में शरीर से खून निकालकर बीमारी दूर की जाती है। सालों पुरानी इस पद्धति को कपिंग थेरेपी भी कहते हैं। माइग्रेन, जॉइंट पेन, कमर दर्द, स्लिप डिस्क, सर्वाइकल डिस्क, पैरों में सूजन, सुन्न होना और झनझनाहट जैसी बीमारी का इलाज मिनटों में संभव है। इस इलाज में दवा की जरुरत नहीं होती है। सालों पुरानी इस पद्धति से लोग अनजान हैं, यहां तक कि डॉक्टर भी इसके बारे में कम जानते हैं। देश भर के यूनानी डॉक्टरों को इसकी ट्रेनिंग भी दी जाती है। यूनानी डॉक्टरों का कहना है कि कई बीमारियों में यह रामबाण है।
क्या है हिजामा थेरेपी कि यह थेरेपी काफी पुरानी है। हम इसे मॉडीफाय कर रहे हैं और लोगों तक पहुंचा रहे हैं। इसकी थ्योरी यह है कि शरीर में कई बीमारी की वजह खून का असंतुलन होता है। हम कपिंग थेरेपी के जरिए इस ब्लड को बैलेंस कर देते हैं और बीमारी ठीक हो जाती है और पेशंट को जल्द आराम मिल जाता है। इलाज कैसे सबसे पहले मरीज का जरूरी ब्लड टेस्ट किया जाता है और उससे संबंधित बीमारी का एक्स रे कराया जाता है। अगर किसी को माइग्रेन है तो ब्लड जांच के अलावा पारा नेजल साइट एक्सरे करते हैं। इससे माइग्रेन का इफेक्ट देखा जाता है और डॉक्टर इस रिपोर्ट के आधार पर तय करते हैं कि बॉडी में कपिंग कहां की जाए। कपिंग के लिए एनाटॉमी और फीजियोलॉजी की समझ होनी चाहिए। बीमारी के अनुसार गर्दन या गर्दन के नीचे या पीठ में कपिंग की जाती है। कपिंग के लिए शीशे का कप यूज करके वैक्यूम पैदा किया जाता है ताकि कप बॉडी से चिपक जाए। अब इसके लिए मशीन का यूज किया जाने लगा है। जिस पॉइंट पर बीमारी की पहचान होती है, वहीं पर कपिंग की जाती है। कपिंग करने के तीन से पांच मिनट बाद असंतुलित खून जमा हो जाता है। जमा हुए खून को निकाल दिया जाता है। अगर बीमारी शुरुआती हो तो दो

सीटिंग में बीमारी खत्म हो जाती है, वरना तीन-चार सीटिंग की जरुरत होती है।
काफी पुरानी हिजामा थेरेपी प्राकृतिक चिकित्सा की सबसे पुरानी पद्घति है। समय के साथ-साथ हम इस पद्घति को भूलते चले गए। अब समय आ गया है कि फिर से हिजामा थेरेपी को जिंदा किया जोड़ों के दर्द, हृदय रोग, डायबिटीज, सिर दर्द, चर्म रोग, ब्लड प्रेशर, रीढ़ की हड्डी, नसों से जुड़ी बीमारियों में होने वाले दर्द से 70 पर्सेंट तक राहत मिलती है।

Address

Bhagalpur

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Ayurvedic Physician Dr sms Ahmed posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Practice

Send a message to Ayurvedic Physician Dr sms Ahmed:

Share

Share on Facebook Share on Twitter Share on LinkedIn
Share on Pinterest Share on Reddit Share via Email
Share on WhatsApp Share on Instagram Share on Telegram