25/11/2025
ब्रिटिश पार्लियामेंट में होने वाले World Homeopathy Summit की तैयारियाँ अब अपने शिखर पर हैं।
और मैं… कल अपनी शादी की सालगिरह पर,
घर से हज़ारों किलोमीटर दूर,
अपने ही सपने के बीचों-बीच खड़ा था
एक ऐसा सपना, जहाँ भारतीय होम्योपैथी की लौ
लंदन की ठंडी हवाओं में भी उतनी ही उजली, उतनी ही गरम जल रही है।
कभी-कभी जीवन बड़ी चुपके से हमें समझाता है
कि राजा की तरह जीने के लिए, मनुष्य को पहले गुलामों की तरह अपने सपनों की सेवा करनी होती है।
हर त्याग, हर दूरी, हर बीता हुआ त्योहार,
हर छूटा हुआ पल
इन्हीं की कीमत पर इतिहास लिखा जाता है।
आज जब लंदन की सड़कों पर चलता हूँ,
तो हर कदम जैसे अपने भीतर एक प्राचीन प्रतिज्ञा उठाता है
कि मैं सिर्फ एक आयोजन नहीं कर रहा,
मैं उस परंपरा, उस विज्ञान, उस भारतीय विश्वास को
विश्व के सर्वोच्च मंच तक ले जा रहा हूँ
जो सदियों से चुपचाप लोगों को जीवन देता आया है।
सालगिरह मनाने को तो एक दिन काफी है,
पर अपने कर्मों को अमर बनाना…
उसके लिए समय का हर कण समर्पित करना पड़ता है।
जय माँ दुर्गे