11/11/2025
राष्ट्रीय मायोपिया सप्ताह (14 से 20 नवम्बर)
थीम: स्क्रीन्स डाउन, आइज़ अप
मायोपिया या निकट दृष्टि दोष बच्चों और युवाओं में बहुत तेजी से बढ़ रहा है। भारत में यह समस्या 1999 में 4% थी, आज बढ़कर 25% हो चुकी है, और यदि यही रफ्तार रही तो 2050 तक हर दूसरे बच्चे में मायोपिया हो सकता है।
मायोपिया बचपन में ही शुरू हो जाता है, लगभग 5 साल की उम्र से। और बिना सही देखभाल के यह बच्चों के मानसिक विकास, पढ़ाई और सामाजिक जीवन को भी प्रभावित करता है।
इस वर्ष की थीम *स्क्रीन्स डाउन, आइज़ अप* बेहद महत्वपूर्ण है। आजकल बच्चे अधिकतर समय डिजिटल स्क्रीन पर बिताते हैं, जिससे मायोपिया की प्रगति तेज होती है। इसलिए जरूरी है कि बच्चों को स्क्रीन से दूरी बनाए रखने और बाहर खेलने के लिए प्रेरित किया जाए।
लो डोज एट्रोपिन की आंखों की बूँदें इस समस्या को कम करने में मददगार साबित हुई हैं। 0.01% एट्रोपिन बूँदों के उपयोग से मायोपिया प्रगति लगभग 50% तक कम हो सकती है। यह लंबी अवधि तक इस्तेमाल के लिए सुरक्षित है और विशेषज्ञ इसे सुझाते हैं।
ड्यूल फोकस चश्मे भी मायोपिया प्रगति रोकने में कारगर हैं। ये चश्मे बच्चों की आंखों के तनाव को कम करते हैं और आंख के आकार के बढ़ने को रोकते हैं। शोधों में पाया गया है कि ये चश्मे 40-60% तक मायोपिया को धीमा कर सकते हैं।
राष्ट्रीय मायोपिया सप्ताह पर हम सभी से निवेदन करते हैं:
1. स्क्रीन टाइम कम करें और बच्चों को रोजाना बाहर खेलने को प्रोत्साहित करें
2. समय-समय पर आंखों की जांच जरूर कराएं
3. मायोपिया के कारणों और इलाज के विकल्पों जैसे लो डोज एट्रोपिन और ड्यूल फोकस चश्मों के बारे में जानकारी लें
4. बच्चों को स्वास्थ्यकर नेत्र आदतें अपनाने के लिए प्रोत्साहित करें
आइए बच्चों की आँखों को बेहतर बनाएं और इस राष्ट्रीय अभियान में शामिल हों!