14/05/2021
जय श्री राधेकृष्णा जी । आज अक्षय तृतीया (अखतीज ) भगवान श्री विष्णु जी के अंशावतार भगवान श्री परशुराम जी के जन्म दिवस की आपको सपरिवार हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई । दान देना और दान लेना दोनों ही महत्वपूर्ण है । आज अक्षय तृतीया का महान पर्व है । कहा जाता है दान देना देना आसान काम नही है लेकिन दान लेना भी आसान काम नही है। दान देने एवं यज्ञ करने के बारे में श्रीमद्भागवत गीता जी में भगवान श्री कृष्ण जी ने कहा कि सभी देवी देवता एवं प्रकृति हम सभी को कुछ न कुछ देते है जैसे वायु देवता हमें प्राण वायु , अग्नि देवता अग्नि , सूर्य देवता धूप , वरुण देवता जल , ब्राह्मण देवता ज्ञान एवं धर्म की वृद्धि , कुबेर धन , प्रकृति की देवी हमें सभी प्राकृतिक चीजें देती है । भगवान श्री कृष्ण जी कहते है कि हम सभी लोग उपरोक्त देवी देवताओं द्वारा दी गई चीजों का उपभोग करते है और उनके बदले में हम उनके प्रति यदि कुछ भी कृतिज्ञता प्रकट नही करते है तो वह चोरी कहलाती है । दूसरी बात ये है कि दान देना आसान नही है तो दान लेना भी आसान नही है क्योंकि दान देने वाला दान के साथ देता है अपने दुख एवं कष्ट एवं पाप और दान यदि 1 रुपया करता है तो उससे सैकड़ों गुणा महँगी वस्तु भगवान से माँगता है । अब जो भी ब्राह्मण किसी से दान लेता है तो उस दान को शुद्ध करने एवं दान दाता के दुःख एवं कष्ट एवं पापों को भी ग्रहण कर उन्हें अपनी तप एवं साधना का बहुत बड़ा हिस्सा चुका कर ही वो उसे उपभोग कर पाता है । और यदि ब्राह्मण के पास अपनी साधना एवं तपोबल नही है तो उसके द्वारा लिया गया दान उसके लिए बेहद हानिकारक सिद्ध होता है । सनातन धर्म में इसी लिए यज्ञ करने एवं दान एवं तप करने के लिए कहा गया है । आज अक्षय तृतीया को किया गया दान , तप , यज्ञ सभी अक्षय हो जाता है । ✍️✍️🙏