17/03/2018
ज्योतिष पर हो रहे अनुसंधानों पर यदि दृष्टि डालें तो यह स्पष्ट हो जाता है कि ज्योतिष कि इस विद्या काे वैज्ञानिक स्वीकार करने लगे हैं-ग्रहणो के निश्चित समय आदि कुछ ऐसे व्यवहारिक उदाहरण हैं, जिनमें ज्योतिष की साख को कोई नकार नहीं पा रहा है , इसीलिए गणित-ज्योतिष में तो विश्व स्तर पर प्राप कहर पर्याप्त अन्वेषण हो रहे हैं , पर फलित-ज्योतिष पर नहीं. वैसे यह विश्वास है कि गणित ज्योतिष की खोजों का प्रभाव फलित-ज्योतिष पर भी सकारात्मक रूप से अवश्य पड़ेगा. इन अनुसंधानों का अर्थ यह कभी भी नहीं लेना चाहिए कि इससे इस शास्त्री की परिपक्वता पर कोई शक होता है , बल्कि इससे तो यह सिद्ध होता है कि विदेशी आक्रमणो और अपने ज्ञान के प्रति कीगई उपेक्षाओं से सच में हमने बहुत कुछ खोया है. बराहमिहिर, आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त, मुंजाल, भारोतपल, शतानंद भास्कर आदि ज्योतिषाचार्यो की थाती को हम बचा नहीं पाए तक्षशीला, नालंदा, मगध, उज्जैन, तंजौर, काशी आदि की विश्व प्रसिद्ध वैेधशालाएं और ज्योतिष की पाठशालाएं नष्ट कर दी गई. रावण संहिता, पुलस्त्य सहित, जंबाली संहिता, इंद्र संहिता, सूर्य संहिता, अरुण संहिता, जैमिनी संहिता, रुद्र संहिता आदि अनेक गणित तथा फलित-ज्योतिष के ग्रंथों के नाम ही शेष रह गए हैं, और फिर सबसे बड़ी बात है इन शास्त्रों के पढ़ने पढ़ाने की विधि का नष्टप्राय हो जाना.