Satyamev Mansik Vikas Kendra

Satyamev Mansik Vikas Kendra Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from Satyamev Mansik Vikas Kendra, Mental Health Service, Awadhpuri, Bhopal.

शारीरिक स्वास्थ्य की तरह ही मानसिक स्वास्थ के पहलुओं के प्रति सजग रहना और खुद को मानसिक रूप से स्वस्थ रखना बेहतरीन जिन्दगी जीने के लिए बहुत जरुरी है. विश्व को मानसिक स्वास्थ के विभिन्न पहलुओं से परिचय कराने के साथ –साथ, विभिन्न मानसिक समस्या से उबारने में मदद करने के उद्देश्य से ”सत्यमेव मानसिक विकास केन्द्र “ का संचालन किया जा रहा है .
“सत्यमेव मानसिक विकास केन्द्र” का उद्देश्य केवल व्यक्तिओं के व्यवहारों से जुड़ी समस्याओं का वैज्ञानिक रूप से समाधान करने से है. इसका जुड़ाव किसी जाति, धर्म, लिंग और उम्र के व्यक्तियों से नहीं बल्कि वैज्ञानिक और संवैधानिक विचारों पर केन्द्रित मानसिक स्वास्थ्य के उपचारों से है .
अगर आप अपने या अपने परिवार या साथियों के व्यवहार में किसी भी प्रकार का व्यवहार संबंधित बदलाव महसूस कर रहे हैं तो “सत्यमेव मानसिक विकास केन्द्र “ के संपर्क नंबर -09329243202 पर और satyamevmvk@gmail.com पर शाम 6 बजे से रात्रि 8 बजे तक संपर्क कर सकते हैं.
इसके अलावा निम्न सुविधाओं के लिए भी संपर्क कर सकते हैं -
- मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन और परीक्षण
- संज्ञानात्मक मूल्यांकन और पुनःनिर्माण
- लैंगिक समानता के लिए प्रशिक्षण
- हेल्थ केयर काउन्सलिंग
- केरियर सम्बंधित परामर्श
-विशेष क्षमताओं वाले बच्चों के मनोवैज्ञानिक थेरेपी और विशेष शिक्षा के लिए
- मानसिक स्वास्थ्य मुद्दे से जुड़े पहलुओं पर व्याख्यान,जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन में भागीदारी


स्मिता कुमारी
निदेशक एवं पुनर्वास मनोवैज्ञानिक
सत्यमेव मानसिक विकास केन्द्र , भोपाल

" महिलाओं की पहचान एक संकट और मानसिक स्वास्थ्य पर इसका प्रभाव" विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आज दिनांक 30 मार्च को सत्यमेव ...
30/03/2026

" महिलाओं की पहचान एक संकट और मानसिक स्वास्थ्य पर इसका प्रभाव" विषय पर जागरूकता कार्यक्रम

आज दिनांक 30 मार्च को सत्यमेव मानसिक विकास केंद्र की निदेशिका स्मिता कुमारी द्वारा आंगनबाड़ी क्रमांक 710, गोविंदपुरा में "महिलाओं की पहचान एक संकट और मानसिक स्वास्थ्य पर इसका प्रभाव" विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। साथ ही इसलिए बार बोर्ड की परीक्षा में शामिल होने वाले बच्चे किस प्रकार अपना कैरियर सही दिशा में ले जाए इसके लिए भी मार्गदर्शन दिया गया। लड़कियों में आर्थिक संबलता की जरूरत, घरेलू हिंसा की रोकथाम, महिलाओं एवं बच्चों के संवैधानिक अधिकार पर विस्तार से चर्चा किया गया। स्मिता पेशे से मनोवैज्ञानिक होने के साथ-साथ महिलाओं और बच्चों के अधिकार पर लगातार जागरूकता कार्यक्रम करती हैं। उन्होंने बताया कि कैसे आर्थिक रूप से कमजोर या निर्भर लड़की किसी ना किसी रूप में मानसिक या शारीरिक शोषण की शिकार होती रहती है और इसे उसकी परवरिश में ऐसे गढ़ा गया है कि उस शोषण को अपनी नियति समझ कभी उसके निराकरण होने की आस भी नहीं कर पाती। अगर लड़कियां आर्थिक रूप से संबल हो जाए तो वह अपने ऊपर हो रही हर हिंसा का विरोध और निराकरण कर सकती हैं। लड़कियों को पैदा होने से अधिकार से लेकर जीने का अधिकार भी पितृसत्तात्मक समाज के हाथ में है, ऐसे में उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर होता है। इससे आने वाली पीढ़ियों के मानसिकता पर भी गहरा असर हो रहा है। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने बताया कि वह कभी किसी ऐसे कार्यक्रम में शामिल नहीं हुई हैं जहाँ मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा होती है यह उनके लिए पहली कार्यक्रम है। कार्यक्रम के अंत में स्क्रीनिंग में एक महिला डिप्रेशन और आत्महत्या की विचार की समस्या से गुजर रही थी, उसे अलग से काउंसलिंग दिया गया और चिकित्सा से जोड़ा गया। इस कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य पर कई सवाल-जवाब हुए, इस कार्यक्रम में आंगनवाड़ी की कार्यकर्त्ता मधु सोनी,सहायिका मंजू और लगभग 20 महिलाएँ शामिल हुई।

सादर आभार
स्मिता कुमारी




वक्त हो तो जरूर पढ़िएगा...​28 फरवरी को रायसेन के शासकीय कन्या महाविद्यालय में महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से आयोजित क...
07/03/2026

वक्त हो तो जरूर पढ़िएगा...

​28 फरवरी को रायसेन के शासकीय कन्या महाविद्यालय में महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में, मैं 'मानसिक स्वास्थ्य' विषय पर वक्ता एवं मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुई। मुझे दो सत्र लेने थे—पहला, मानसिक स्वास्थ्य एवं आत्महत्या से बचाव पर और दूसरा, करियर काउंसलिंग पर।

​विषय इतना गंभीर था और समय का अभाव इतना अधिक कि मुझे दोनों सत्र बिना किसी ब्रेक के एक साथ ही लेने पड़े। सत्र के दौरान छात्राओं और शिक्षकों के कई सवाल भी आए और सब कुछ बहुत अच्छे से चल रहा था। सत्र समाप्त होने पर, यह सोचकर कि कुछ छूट न जाए, मैंने छात्राओं से सवाल पूछने को कहा। साथ ही, महिला एवं बाल विकास विभाग में कार्यरत मित्र दिनेश मालवीय जी से मैंने रिकॉर्डिंग करने के लिए कहा, ताकि यदि समय की कमी के कारण किसी के सवाल रह जाएं, तो मैं बाद में उन्हें फोन पर उत्तर दे सकूं (क्योंकि हमें तुरंत एक अन्य शासकीय कार्यक्रम में पहुँचना था)।
​तभी एक लड़की सवाल पूछने के लिए खड़ी हुई। जैसे ही दिनेश जी ने रिकॉर्डिंग ऑन की, वह अभी एक ही लाईन बोल पाई थी कि फूट-फूटकर रोने लगी। हम कैमरा बंद कर उसे संभालने पहुँचे ही थे कि दूसरी ओर से एक और चीख सुनाई दी, और देखते ही देखते सभी लड़कियां रोने लगीं। वे सिर्फ सिसकियाँ नहीं थीं, बल्कि कई लड़कियों की चीखें थीं। हम सब स्तब्ध थे। अपने 14 वर्षों से अधिक के कार्य अनुभव में मैंने पहली बार ऐसा देखा था कि एक-दो नहीं, बल्कि सभी प्रतिभागी इतनी व्याकुलता से रो रही थीं। ऐसा लगा मानो उन सबके मन में बहुत कुछ दबा हो जिसे वे कहना चाहती थीं, लेकिन उन्हें सुनने और समझने वाला कोई नहीं था।

​वहाँ एक छात्रा थी जो टॉपर थी, परिवार से उसे बढ़िया स्पोर्ट भी था। लोग उससे कह रहे थे, 'तुम तो हर चीज़ में इतनी बेहतर हो, तुम्हें घबराने की क्या ज़रूरत?' मैंने तुरंत टोकते हुए कहा—"टॉपर होना, हंसमुख होना, खुले विचारों का होना या दूसरों को संभालने वाला होना, ये सब भी एक इंसान ही हैं। ऐसे व्यक्ति को भी तनाव और डिप्रेशन हो सकता है। इसलिए उसे 'मजबूत' या 'महान' बताकर उसकी भावनाओं को दबाना बंद कीजिए। महानता और मजबूती के बोझ तले किसी को इतना मत दबाइये कि वह खुद को ही भूल जाए, या इतना घुट जाए कि बिना कुछ साझा किए हमेशा के लिए चला जाए।"

​यह उस सत्र की उपलब्धि थी कि सभी छात्राएं बेझिझक अपनी भावनाएं व्यक्त कर रही थीं। मगर यह सोचने वाली बात है कि क्या आज के दौर में हम सच में अपनों के साथ सब कुछ साझा कर पा रहे हैं? क्या कोई वास्तव में किसी को समझ रहा है, या हम उतना ही देख रहे हैं जो जितना दिखाया जा रहा है?

​किसी को जज करना बंद कीजिए कि 'आप उसे बेहतर जानते हैं'। जब कोई तनाव या नकारात्मकता की बात करे, तो उसे अनदेखा न करें। मोबाइल की आभासी दुनिया से बाहर निकलकर असलियत में लोगों के करीब जाइए। साथ बैठिए, एक-दूसरे को जानिए और समझने की कोशिश कीजिए।




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28/02/2026

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आज एक आंगनवाड़ी में बच्चों में बोर्ड परीक्षा के तनाव और आत्महत्या की रोकथाम को ध्यान में रखकर मानसिक स्वास्थ्य और कैरियर ...
27/02/2026

आज एक आंगनवाड़ी में बच्चों में बोर्ड परीक्षा के तनाव और आत्महत्या की रोकथाम को ध्यान में रखकर मानसिक स्वास्थ्य और कैरियर काउंसलिंग पर सत्र का आयोजन की. एक बात की बेहद खुशी हुई कि जिस उद्देश्य से मैं यह कार्यक्रम कर रही हूँ उसकी छोटी सी ही सही मगर सकारात्मक झलक दिख गई. मैं चाहती हूँ कि लोग मानसिक स्वास्थ्य पर बात करने में खुद को छिपाएं नहीं. यह बात इतनी सहज हो कि लोग सबके सामने बोलें कि मुझे तनाव लग रहा है, थेरेपी चाहिए या करा रहे हैं या मैंने थेरेपी लिया है और दूसरे उनकी परिस्थिति को जज ना करें बल्कि सराहें और उस पर बात करें. आज वही हुआ. सत्र के बाद एक महिला सबके सामने बोली मैम मैं इलाज करा रही हूँ. और मेरे बेटे को कुछ तनाव है, आप इससे एक बार इसकी समस्या पर बात कर लीजिए कि क्या करना चाहिए, बेटा भी खुलकर बात किया. अच्छा लगा. याद रखिए यह कोई अपराध या पाप नहीं स्वास्थ्य समस्या है जिस पर खुलकर बात होनी चाहिए.



आज सुबह सवेरे में इंदौर में हुई रेप और मर्डर केस पर मेरा आलेख पढ़े। हिंसा और अपराध रोकने के लिए मानसिक स्वस्थ और उसके चिक...
21/02/2026

आज सुबह सवेरे में इंदौर में हुई रेप और मर्डर केस पर मेरा आलेख पढ़े। हिंसा और अपराध रोकने के लिए मानसिक स्वस्थ और उसके चिकित्सकीय पहलुओं को भी स्वीकारना जरूरी है।
https://epaper.subahsavere.news/clip/23382





आज दादा का पुण्यतिथि है. हर साल की तरह अपने दादी, दादा  और दादी सास की याद में अपने केंद्र के माध्यम से आंगनवाड़ी क्रमांक...
27/01/2026

आज दादा का पुण्यतिथि है. हर साल की तरह अपने दादी, दादा और दादी सास की याद में अपने केंद्र के माध्यम से आंगनवाड़ी क्रमांक -710 में निःशुल्क मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता के लिए कार्यक्रम का आयोजन किया. यह कार्यक्रम हर महीने मेरे केंद्र द्वारा अलग -अलग विषय पर किया जा रहा है. इसमें हर बार एक अलग विषय पर चर्चा की जा रही है. आज तीन पीढ़ियों को एक सूत्र में बाँधने के लिए कुछ तकनीकों पर बात की गई. सास-बहु, दादी, नानी और पोते-पोतिया की रिश्तों के आपसी उलझनों को सुलझाने पर चर्चा की गई. कार्य आसान नहीं है, पर कहते हैं न घर वालों की बातें बुरी लगती है मगर काउंसलिंग एक ऐसा माध्यम है जिसमें निष्पक्षता के साथ चर्चा की जाती है. इसलिए काउंसलिंग के माध्यम से कुछ बताये तो उसमें निष्पक्षता भी नजर आती है और समझ भी आता है. आज इस चर्चा के अलावा एक 29 वर्षीय महिला जिसका पति नशे के कारण अपराध कर जेल चला गया उसके तनाव के लिए काउंसलिंग की. एक 18 साल की लड़की तम्बाकू की लत से निकलना चाहती है उसके लिए उसके साथ समाधान पर बात की. यह एक ऐसा माध्यम है जिसमें लोग अपनी समस्याओं पर अलग से भी मानसिक स्वास्थ्य के लिए मदद ले पा रहे हैं. यहाँ ज्यादातर वह लोग जुड़ते हैं जो आर्थिक रूप से मानसिक स्वास्थ्य पर खर्च नहीं कर सकते.


कल राज्य महिला आयोग में डीआईजी डॉ विनीत कपूर जी और राज्य महिला आयोग के सचिव सुरेश तोमर जी के साथ चर्चा में "Women's Righ...
11/12/2025

कल राज्य महिला आयोग में डीआईजी डॉ विनीत कपूर जी और राज्य महिला आयोग के सचिव सुरेश तोमर जी के साथ चर्चा में "Women's Right are Human Rights"


सत्यमेव मानसिक विकास केंद्र द्वारा मंगलवार को आंगनवाड़ी क्रमांक 710 और 1146, गोविंदपुरा में विश्व एड्स दिवस, भोपाल गैस त...
06/12/2025

सत्यमेव मानसिक विकास केंद्र द्वारा मंगलवार को आंगनवाड़ी क्रमांक 710 और 1146, गोविंदपुरा में विश्व एड्स दिवस, भोपाल गैस त्रासदी दिवस और विश्व दिव्यांगता दिवस के अवसर पर संयुक्त जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य तीनों विषयों से जुड़ी मानसिक समस्याओं, उनकी रोकथाम, पहचान और उपचार की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाना था।

भोपाल : 4 दिसंबर/ सत्यमेव मानसिक विकास केंद्र द्वारा मंगलवार को आंगनवाड़ी क्रमांक 710 और 1146, गोविंदपुरा में विश्व एड्स...

आप सभी को शुक्रिया हमारे कार्य को स्थान देने के लिए 🙏
06/12/2025

आप सभी को शुक्रिया हमारे कार्य को स्थान देने के लिए 🙏

मेरे कई प्रोफेसर, मेंटर ने इस कार्य को सराहा, शुक्रिया उनका. अच्छा लगता है जब अपने आपके कार्य के नजरिया को समझना शुरू कर...
05/12/2025

मेरे कई प्रोफेसर, मेंटर ने इस कार्य को सराहा, शुक्रिया उनका. अच्छा लगता है जब अपने आपके कार्य के नजरिया को समझना शुरू करते हैं आपके सोच को हिम्मत देते हैं.आगे भी साधारण भाषा में मानसिक स्वास्थ्य को ले जाने की कोशिश करुँगी. जिस विषय से मुझे प्यार है उसको साधारण भाषा में सब तक पहुंचा पाऊँ तो मैं खुद भी एक दिन उन तक पहुँच जाऊँगी ❤️







Disability Awareness Activity-1 दिव्यान्गता जागरूकता गतिविधि Mental Health Activity मानसिक स्वास्थ्यइस चर्चा की रिकॉर्डिंग एक आंगनवाड़ी केंद्र म...

04/12/2025
सत्यमेव मानसिक विकास केंद्र द्वारा विश्व दिव्यांगता दिवस पर जागरूकता कार्यक्रमआज भोपाल में सत्यमेव मानसिक विकास केंद्र द...
03/12/2025

सत्यमेव मानसिक विकास केंद्र द्वारा विश्व दिव्यांगता दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम

आज भोपाल में सत्यमेव मानसिक विकास केंद्र द्वारा आंगनबाड़ी क्रमांक 710 और 1146 गोविंदपुरा में विश्व एड्स दिवस , भोपाल गैस त्रासदी और विश्वास दिव्यांगता दिवस पर मानसिक समस्याओं पर जागरूकता के लिए कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में केंद्र की निदेशक स्मिता कुमारी ने एड्स से बचाव, भोपाल गैस त्रासदी के कारण हुई मानसिक एवं शारीरिक क्षति, दिव्यांगता से बचाव, दिव्यांगता के लक्षणों की शीघ्र पहचान, उपचार, एवं उनके पुनर्वास पर चर्चा की. साथ गर्भवती माताओं एवं प्रसूति के मानसिक स्वास्थ्य के बारे में चर्चा की. उन्होंने बताया कि 1 दिसम्बर को विश्व एड्स जागरूकता दिवस, 2-3 दिसम्बर को भोपाल गैस त्रासदी दिवस और 3 दिसम्बर को विश्व दिव्यांगता दिवस मनाया जाता है. यह तीनों समस्याओं से मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत गहरा प्रभावत पड़ता हैं. इसलिए आज विश्व दिव्यांगता दिवस पर मानसिक समस्याओं से बचाव के लिए बताया कि किस प्रकार से मानसिक, शारीरिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए. ऐसे लोगों के साथ कैसे समानुभूति का व्यवहार रखना चाहिए, बचाव और चिकित्सकीय देखरेख के बाद भी अगर किसी कारण किसी बच्चे में असामान्य विकास दिखे तो तत्काल थेरेपी से काफी हद तक स्थिति में सुधार किया जा सकता है. सबसे महत्वपूर्ण है उन बच्चों के दिव्यांगता का शीघ्र पहचान कर उनकी क्षमताओं का बेहतर विकास करना. उन्होंने आगे बताया कि इसमें थेरेपिस्ट, अभिभावक, रिश्तेदार, आस-पड़ोस, सामाजिक कार्यकर्ता, मीडिया, शासन-प्रशासन सबकी साझी जिम्मेदारी है कि इस विषय पर खुलकर बात करें, लोगों के बीच अनुभव साझा करें जिससे दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा में जोड़ना सहज और सरल हो. स्मिता ने आगे यह भी बताया कि दिसम्बर माह में ही सत्यमेव मानसिक विकास केंद्र का 11वाँ स्थापना दिवस भी हैं. इस उपलक्ष्य पर यह तय किया गया है कि मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता के लिए महीने में कम से कम एक दिन शासकीय संस्थानों के हितग्राहियों को मेरे केंद्र द्वारा निःशुल्क सेवा दिया जायेगा, जिससे अधिक से अधिक लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में जागरूक किया जा सकें. इस केंद्र के माध्यम से पिछले 11 सालों से मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में जागरूकता, शोध कार्य, इंटर्नशिप और प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है. आज के इस कार्यक्रम में 50 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, कार्यक्रम में आये दिव्यांगजन और अवसाद ग्रस्त महिला का स्क्रीनिंग करके चिकित्सा सुविधा की जानकारी दी. जरूरत अनुसार थेरेपी बताई, दिव्यांग प्रमाणपत्र एवं शासन की सुविधाओं की जानकारी दी. साथ ही कार्यक्रम में सत्यमेव मानसिक विकास केंद्र से निदेशक स्मिता कुमारी, सुमित कुमार,आंगनवाड़ी की कार्यकर्त्ता मधु सोनी, सहायिका मंजू तिवारी, बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी से दो इंटर्न कोंपल राखोंडे एवं अभिनव शर्मा भी शामिल हुए.


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