प्रियंक आयुर्वेदिक औषधि भंडार

  • Home
  • India
  • Bhopal
  • प्रियंक आयुर्वेदिक औषधि भंडार

प्रियंक आयुर्वेदिक औषधि भंडार एक वार सेवा का मौका अवश्य दे

08/08/2022

*जय श्री कृष्ण*
*श्री बालकृष्ण प्रभु विजयते*
*श्रीमद वल्लभाचार्यो विजयते*

इस वर्ष रक्षाबंधन को लेकर लोगो के मन मे बहुत संशय बना हुआ है जिसे हम अपने अनुसार स्पष्ट करके आप सबका संशय दूर करेंगे कुछ लोग कह रहे है सारे पंचांगों में रक्षाबंधन 11अगस्त का है और निर्णयसागर में 12 अगस्त का है तो आपको बता दु निर्णयसागर पंचांग में भी रक्षाबंधन 11 अगस्त का है आप पेज न.5 देखे और पेज नम्बर 41 पर देखे तो दिनांक 11 अगस्त के सामने ही रक्षाबंधन पर्व लिखा हुआ है आइए सर्वप्रथम हम *श्री नाथजी ज्योतिष एवं श्रीमद्भागवत सेवा संस्थान मुरैना (म.प्र)* के संचालक *पं.श्री कृष्णगोपाल पाठक जी* के द्वारा रक्षाबंधन वाले दिन भद्रा के बारे में *--::::--*
रक्षाबंधन पर भद्राकाल का साया 11 अगस्त 2022 के दिन शाम 05 बजकर 17 मिनिट पर भद्रा पूंछ से शुरू होकर शाम 06 बजकर 18 मिनिट पर समाप्त होगी ! फिर
06 बजकर 18 मिनिट से भद्रा मुख से शुरू होगी जो कि रात्रि 08: बजकर 00 मिनिट पर समाप्त होगी !
भद्राकाल की समाप्ति के बाद राखी बांधी जा सकती है ! अगर भद्राकाल में राखी बांधना बहुत आवश्यक है तो जातक / जातिका इस दिन प्रदोषकाल में,
शुभ-लाभ अमृत में से कोई एक चौघडिया देखकर राखी बांधी या बंधवाई जा सकती है !

*रक्षाबंधन 11 अगस्त 2022*

*पूर्णिमा तिथि आरम्भ --::--*

11 अगस्त 2022 को सुबह 10 बजकर 38 मिनिट से

*पूर्णिमा तिथि समाप्ति --::--*

12 अगस्त 2022 को सुबह 7 बजकर 5 मिनिट पर

*राखी बांधने के शुभ मुहूर्त*

*11 अगस्त 2022 को प्रातः 09 बजकर 28 मिनिट से रात्रि 09 बजकर 14 तक शुभ*

*अभिजीत मुहूर्त --::--*
*मध्यान्ह 11 बजकर 37 मिनिट से 12 बजकर 29 मिनिट तक*

*अमृत काल --::--*
*शाम 06 बजकर 55 मिनिट से रात्रि 08 बजकर 20 मिनिट तक*

*ब्रह्म मुहूर्त --::--*
*प्रातः 04 बजकर 29 मिनिट से 05 बजकर 17 मिनिट तक*

*रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त*
*रक्षा बंधन प्रदोष मुहूर्त :* *20:52:15 से 21:14:18 तक*

*भद्राकाल में राखी बांधना वर्जित क्यों ?*
भद्राकाल का समय अशुभ होता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार भद्रा शनिदेव की बहन हैं। ऐसी मान्यता है जब माता छाया के गर्भ से भद्रा का जन्म हुआ तो समूची सृष्टि में तबाही होने लगी और वे सृष्टि को तहस-नहस करते हुए निगलने लगीं। सृष्टि में जहां पर भी किसी तरह का शुभ और मांगलिक कार्य संपन्न होता भद्रा वहां पर पहुंच कर सब कुछ नष्ट कर देती। इस कारण से भद्रा काल को अशुभ माना गया है। ऐसे में भद्रा काल होने पर राखी नहीं बांधनी चाहिए। इसके अलावा भी एक अन्य कथा है। रावण की बहन ने भद्राकाल में राखी बांधी जिस कारण से रावण के साम्राज्य का विनाश हो गया है। इस कारण से जब भी रक्षा बंधन के समय भद्राकाल होती है उस दौरान राखी नहीं बांधी जाती है।
*रक्षाबंधन पर इस बार चार शुभ योग --:::--*
*1- इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया रहेगा लेकिन इस दौरान चार तरह के शुभ योग भी बनेगा। 11 अगस्त को सूर्योदय से लेकर दोपहर 3 बजकर 31 मिनट तक आयुष्मान योग रहेगा।*

*2- इसके अलावा सुबह 5 बजकर 30 मिनट से लेकर शाम 6 बजकर 53 मिनट तक रवि योग रहेगा।*

*3- तीसरा शुभ योग सौभाग्य योग 11 बजकर 33 मिनट तक रहेगा।*

*4- चौथा और आखिरी शुभ योग रक्षाबंधन के दिन धनिष्ठा नक्षत्र में शोभन योग रहेगा।*

*आगे पं.श्री कृष्ण गोपाल पाठक जी के अनुसार --::--*
रक्षाबंधन के दिन लगने वाली भद्रा का निवास पृथ्वी लोक पर न होकर पाताल लोक पर है. रक्षा बंधन के दिन घटित होने वाली भद्रा वृश्चिका भद्रा है. सर्पिणी भद्रा नहीं होने के कारण यदि बहुत मजबूरी हो तो बहनें अपने भाई को सायंकाल 06:08 से रात्रि 08:00 बजे के बीच भी राखी बांध सकती हैं

*गुरुवार को राहुकाल का समय*
*मध्यान्ह 01: 30 से मध्यान्ह 03:00 बजे तक*

*नोट --::--*
सारी बातों को ध्यान में रखकर तैयार किये गए है अगर फिर भी किसी प्रकार की त्रुटि हो तो क्षमा करे !

*श्री नाथजी ज्योतिष एवं श्रीमद्भागवत सेवा संस्थान मुरैना (म.प्र) 476001*
*गली न.4 श्री राम कॉलोनी*
*नैनागढ़ रोड़ मुरैना (म.प्र) (476001)*
*9165944403--8225916680*

https://www.facebook.com/350018362350658/posts/878875502798272/
08/12/2021

https://www.facebook.com/350018362350658/posts/878875502798272/

*जय श्री कृष्ण*

*वल्लभाचार्यो विजयते*

*सूर्यदेव की पूजा विधि का वर्णन*

जय श्री राधे आज सभी ग्रुपो में मेरी ये अंतिम पोस्ट होगी बाकी की सारी पोस्ट सिर्फ मेरे पेज पर उपलब्ध रहेंगी अगर आप ऐसी ही अनेक जानकारी लेना चाहते है तो मेरे पेज को लाइक व फॉलो कर ले जिससे आपको अनेको जानकारियां आसानी से प्राप्त हो सके ! आपके लाइक व पेज को शेयर करने से अनेको पाठकों को ग्रन्थों का लाभ मिलेगा इसलिये पेज को लाइक व शेयर अवश्य कर ले ! जितने ज्यादा पेज के फॉलोवर्स होंगे उतना हमे पोस्ट करने में मजा आएगा

महादेव जी कहते है --- स्कंद ! अब मैं करन्यास और अंगन्यास पूर्वक सूर्य देवता के पूजन की विधि बताऊंगा ! मैं तेजोमय सूर्य हूँ - ऐसा चिंतन करके अर्घ्य-पूजन करे लाल रंग के चंदन या रोली मिश्रित जल को ललाट के निकट ले जाकर उसके द्वारा अर्घ्य पात्र को पूर्ण करे ! उसका गन्धादि से पूजन करके सूर्य के अंगों द्वारा रक्षावगुंठन करे ! तत्पश्चात जल से पूजा सामग्री का प्रोक्षण करके पूर्वाभिमुख हो सूर्यदेव की पूजा करे !
*"" ॐ आं ह्रदयाय नमः "" !*
इस प्रकार आदि में स्वर बीज लगाकर सिर आदि अन्य सब अंगों में भी न्यास करे ! पूजा गृह के द्वारदेश में दक्षिण की ओर "दण्डी" का और वाम भाग में "पिंगल" का पूजन करे ! ईशानकोण में *गं गणपतये नमः* ! इस मंत्र से "गणेश" की और अग्निकोण में गुरु की पूजा करे ! पीठ के मध्य भाग में कमलाकर आसन का चिंतन एवं पूजन करे ! पीठ के अग्नि आदि चारो कोनो में क्रमशः विमल,सार,आराध्य तथा परम् सुख की और मध्य भाग में प्रभुतासन कई पूजा करे ! उपर्युक्त प्रभूत आदि चारो के वर्ण क्रमशः श्वेत,लाल,पीले और नीले है तथा उनकी आकृति सिंह के समान हैं इन सबकी पूजा करनी चाहिए !
पीठस्थ कमल के भीतर *"रां दीप्तायै नमः"* इस मंत्र द्वारा दीप्ता की, *"रीं सूक्ष्मायै नमः"* ! इस मंत्र से सूक्ष्मा की , *"रुं जयायै नमः"* इससे जया की, *"रें भद्रायै नम:"* ! इससे भद्रा की, *"रें विभूतये नमः"* ! इससे विभूति की, *"रों विमलायै नमः"* ! इससे विमला की,
*" रौं अमोघायै नमः"* इससे अमोघा की, तथा *"रं विद्युतायै नमः"* इससे विद्युता की पूर्व आदि आठो दिशाओं में पूजा करे और मध्य भाग में *"रं सर्वतोमुख्यै नमः"* ! इस मंत्र से नवीं पीठ शक्ति सर्वतोमुख की आराधना करें ! तत्पश्चात *"ॐ ब्रह्मविष्णुशिवात्मकाय सौराय योगपीठात्मने नमः "* ! इस मंत्र के द्वारा सूर्यदेव के आसन (पीठ) का पूजन करे ! तदनन्तर *"खखोल्काय नमः"* ! इस षडक्षर मंत्र के आरंभ में *"ॐ हं खं"* जोड़कर नौ अक्षरों से युक्त *"(ॐ हं खं खखोल्काय नमः)"* इस मंत्र द्वारा सूर्य देव के विग्रह का आवाहन करे ! इस प्रकार आवाहन करके भगवान सूर्य की पूजा करनी चाहिए !
अञ्जलि में लिए हुए जल को ललाट के निकट तक ले जाकर रक्त वर्ण वाले सूर्यदेव का ध्यान करके उन्हें भावना द्वारा अपने सामने स्थापित करे ! फिर *"ह्रां ह्रीं सः सूर्याय नमः"* ऐसा कहकर उक्त जल से सूर्यदेव को अर्घ्य दे ! इसके बाद *"बिम्बमुद्रा"* दिखाते हुए आवाहन आदि उपचार अर्पित करे ! तदनन्तर सूर्यदेव के प्रीति के लिए गंध (चंदन-रोली) आदि समर्पित करे ! तत्पश्चात *"पद्ममुद्रा"* और *"बिम्बमुद्रा"* दिखाकर अग्नि आदि कोणों में ह्रदय आदि अंगों की पूजा करे ! अग्निकोण में *"ॐ आं हृदयाय नमः"* इस मंत्र से ह्रदय की, नैऋत्य कोण में *"ॐ भू: अर्काय शिरसे स्वाहा !"* इससे सिर की, वायव्य कोण में *"ॐ भुवः सुरेशाय शिखायै वषट !"* इससे शिखा की, ईशान कोण में *"ॐ स्व कवचाय हुम् !"* इससे कवच की, इष्टदेव और उपासक के बीच मे *"ॐ हां नेत्रत्रयाय वौषट !"* से नेत्र की, तथा देवता के पश्चिम भाग में *"वः अस्त्राय फट !"* इस मंत्र से अस्त्र की पूजा करे ! इसके बाद पूर्वादि दिशाओं में मुद्राओं का प्रदर्शन करे !
ह्रदय,सिर,शिखा और कवच इनके लिए पूर्वादि दिशाओं में धेनु मुद्रा का प्रदर्शन करे ! नेत्रों के लिए गोश्रृंग की मुद्रा दिखाये ! अस्त्र के लिए त्रासनिमुद्रा की योजना करे ! तत्पश्चात ग्रहो को नमस्कार और उनका पूजन करे !
*"ॐ सोमाय नमः"* इस मंत्र से पूर्व में चन्द्रमा की ! *"ॐ बुधाय नमः"* इस मंत्र से दक्षिण में बुध की ! *"ॐ ब्रं बृहस्पतये नमः"* इस मंत्र से पश्चिम में बृहस्पति की और *"ॐ भं भार्गवाय नमः"* इस मंत्र से उत्तर में शुक्र की पूजा करे ! इस तरह से पूर्वादि दिशाओं में चन्द्रमा आदि ग्रहो की पूजा करके, अग्नि आदि कोणों में शेष ग्रहो का पूजन करे ! *"ॐ भौं भौमाय नमः"* इस मंत्र से अग्निकोण में मंगल की, *"ॐ शं शनैश्चराय नमः"* इस मंत्र से नैऋत्य कोण में शनि की पूजा करे ! *"ॐ रां राहवे नमः"* इस मंत्र से वायव्य कोण में राहु की पूजा करे ! *"ॐ कें केतवे नमः !* इस मंत्र से ईशानकोण में केतु की गन्धादि उपचारों से पूजा करे ! खखोल्की (भगवान सूर्य) के साथ इन सब ग्रहो का पूजन करना चाहिए !
मूलमंत्र का जप करके,अर्घ्य पात्र में जल लेकर सूर्य को समर्पित करने के पश्चात उनकी स्तुति करे ! इस तरह स्तुति के पश्चात सामने मुँह किये खड़े हुए सूर्यदेव को नमस्कार करके कहे- प्रभो ! मेरे अपराधों और त्रुटियो को आप क्षमा करें ! इसके बाद *"अस्त्राय फट"* इस मंत्र से अणुसंहार का समाहरण करके *"शिव"* सूर्य ! (कल्याणमय सूर्यदेव) ऐसा कहते हुए संहारिणी -शक्ति या मुद्रा के द्वारा सूर्यदेव के उपसंह्रत तेज को अपने ह्रदय कमल में स्थापित कर दे तथा सूर्यदेव का निर्माल्य उनके पार्षद चण्ड को अर्पित कर दे ! इस प्रकार जगदीश्वर सूर्य का पूजन करके उनके जप,ध्यान और होम करने से साधक का सारा मनोरथ सिद्ध होता है !

*श्री नाथजी ज्योतिष सेवा संस्थान मुरैना*
*09165944403--8225916680*

https://youtube.com/shorts/SVFF4VwBBc8?feature=shareश्री नाथजी दिव्य ज्योतिष चक्षुइस चैनल को अधिक से अधिक सब्सक्राइब करे...
13/06/2021

https://youtube.com/shorts/SVFF4VwBBc8?feature=share

श्री नाथजी दिव्य ज्योतिष चक्षु

इस चैनल को अधिक से अधिक सब्सक्राइब करे और बेल आइकन को दवाएं शीघ्र ही 1000 सब्सक्राइब होने पर वीडियो के माध्यम से लाइव कुंडली निराकरण और आपको ज्योतिष से सम्बंधित जानकारी वीडियो में प्राप्त होगी ! अति शीघ्र विस्तार से चैनल की शुरुआत होगी ! आपका साथ चाहिए हमे हमने बहुत सी कुंडली का फ्री निराकरण किया आगे समय मिलने पर भी करेंगे !

मानव जीवन पर प्रभाव एवं उनके निवारण टोटके

https://youtu.be/SVFF4VwBBc8                 आप सभी को सादर जय श्री कृष्ण मित्रो जब आपके अधिक मित्रो यूट्यूब वीडियो एड क...
06/05/2020

https://youtu.be/SVFF4VwBBc8 आप सभी को सादर जय श्री कृष्ण मित्रो जब आपके अधिक मित्रो यूट्यूब वीडियो एड करने में तब आनन्द आता है कि जब आपके अधिक सब्सक्राइब हो तब पर जब आप इसको अधिक सब्सक्राइब कर देंगे तब मुझे भी वीडियो बनाने मे अधिक आनन्द आएगा ! इसलिए वीडियो को देखे और चैनल को सब्सक्राइब करे और नोटिफिकेशन आइकॉन बैल को अवश्य दबाए जिससे हमारी वीडियो मिलने में आपको कोई परेशानी नही आये !

मानव जीवन पर प्रभाव एवं उनके निवारण टोटके

15/03/2020

*जय श्री कृष्ण*
*कोरोना वायरस*-चीन के बुहान प्रांत में किये गए किसी परीक्षण से चीन में फैले वायरस को कोरोना वायरस नाम दिया गया है अब चीन ने इसे एक योजना के तहत कई देशों में इसे भेजना प्रारंभ कर दिया है अब तक ये लगभग 47 देशो में फैल गया है और इसमें हमारा भारत देश भी शामिल है ये एक ऐसा वायरस (संक्रमण) है जिसका संबंध सर्दी-झुकाम-खांसी-बुखार-सांस लेने में तकलीफ-गले मे खराश-सिर में तेज दर्द-नाक का बहना-निमोनिया जैसी समस्याएं उतपन्न होती है जहां डॉक्टर इसका इलाज ढूढ़ रहे है वही हमारे प्राचीन अथर्ववेद(आयुर्वेद)में गारन्टी के साथ इसका इलाज संभव है क्यो की हमारे ऋषि मुनि प्राचीन समय मे कई क्रियाओ द्वारा जड़ी-बूटियों एवं हवन यज्ञ आदि के द्वारा प्रत्येक बीमारी का इलाज़ किया करते थे उन्ही क्रियाओ में से एक क्रिया का नाम है धूम्रपान चिकित्सा जिसे हम शुद्ध भाषा मे हवन यज्ञ अनुष्ठान आदि नामो से जानते है
*अथर्ववेद सूत्र 3/11 के अनुसार* -:
*मुंचामी त्वा हविष्य जीवनाय !*
*कमज्ञात त्वा यक्ष्माद्रुत राजयक्ष्मात !!*
हम यज्ञ के द्वारा अनेक उन रोगों का इलाज कर सकते है जो सबके लिए असाध्य है क्यो की ये समस्त सारे संसार के वैज्ञानिकों ने माना है कि हवन यज्ञ करने से वातावरण तो शुद्ध होता ही है पर इसका धुंआ तन के अंदर जाने से कई बीमारियों को भी खत्म करता है
*चरक संहिता अ.8 श्लोक 122*
*यया प्रयुक्ता चोष्टया राजयक्ष्मा पुराजितः!*
*तां वेद विष्टिमारोगयार्थी प्रयोजयेत !!*
प्राचीन काल मे जिन यज्ञ हवन अनुष्ठानो से राजयक्ष्मा टीबी (यक्ष्मा, तपेदिक, क्षयरोग) जैसी बीमारियों पर विजय पा ली जाती थी अब भी उस विधि से यज्ञ आयोजन कर के कोरोना वायरस जैसी खतरनाक बीमारियों से छुटकारा पाया जा सकता है *अथर्ववेद सूत्र कहता है*
*इदं में अग्ने पुरुषां मुमुरध्वयं*
उन्मादी सनकी व्यक्ति भी इस यज्ञ की अग्नि के प्रभाव से रोग मुक्त हो जाता है आज के युग मे हमारे इन वेदों के अनुसार यज्ञों में जड़ी बूटी की भस्मो का प्रयोग औषधि के रूप में किया जा रहा है हमारी इस पद्धति का प्रयोग वर्तमान में बहुत से देश कर रहे है और इसका वर्तमान परीक्षण चिली-पौलेंड तथा पश्चिम जर्मनी जैसे देश कर रहे है और हमारे देश के नागरिक स्वयं के देश मे दवा होते हुए दूसरे देशों से दवा ला रहे है क्यो की वो नही जानते कि विदेशी कम्पनिया हमारे वेदों के आधार पर ही दवा बना रही है हमारे अथर्ववेद के अनुसार कोरोना वायरस का इलाज हवन यज्ञ के माध्यम से दावे के साथ सम्भव है धर्म ज्ञानियो के अनुसार कोरोना वायरस के लिए सबसे पहले शुद्ध देशी गाय का घी,त्रिफला घृत,गुड़,शहद,गौ मूत्र एवं 35 प्रकार की जड़ी बूटियां जिनको समान मात्रा में लेकर रोगी को हवन पर बिठाकर उसे धूम्र चिकित्सा के माध्य्म से दावे के साथ निरोग किया जा सकता है हवन के साथ कुछ इन बीमारियों के मंत्र भी असर करते है जिससे रोगी को अतिशीघ्र आराम मिलता है हम आपको सब तो नही पर कुछ जड़ी बूटियों के नाम बता रहे है जैसे अपराजिता,मालकंगनी,हरताल,मैनसिल,तेजपत्र,आम लकड़ी,अपामार्ग, अडूसा,राल जैसे और अन्य जड़ी बूटियों द्वारा गारन्टी के साथ कोरोना वायरस को दूर किया जा सकता है इस पोस्ट को कॉपी करना एवं अपने नाम से भेजना कानूनी अपराध है
एवं आप सभी से अनुरोध है कि इसे सारे व्हाट्सएप ग्रुप में शेअर करे जिससे सभी लोग हमारी भारतीय संस्कृति को पहचान सके !
*शोधकर्ता*
*आचार्य पं.कृष्ण गोपाल पाठक*
*श्री नाथजी ज्योतिष एवं श्रीमद्भागवत सेवा संस्थान मुरैना*
*9165944403*- *8225916680*

Address

गुरुद्वारा कॉंप्लेक्स दुकान न. 2 जवाहर चौक भोपाल
Bhopal

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when प्रियंक आयुर्वेदिक औषधि भंडार posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share