SPASA De addiction society

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This society was started in 2013.we are conducting de-addiction camps for drug addicts.our treatment includs personal counselling,Yoga,Relaxation therapy, music therapy and Rehablitation center, and psycological and mental disorder

24/02/2021
शाश्वत स्वतंत्रता का, जो दीप जल रहा हैआलोक का पथिक जो, अविराम चल रहा हैविश्वास है कि पल भर, रूकने उसे न देंगेउस दीप की श...
15/08/2016

शाश्वत स्वतंत्रता का, जो दीप जल रहा है
आलोक का पथिक जो, अविराम चल रहा है
विश्वास है कि पल भर, रूकने उसे न देंगे
उस दीप की शिखा को, ज्योतित सदा रखेंगे
हम अर्चना करेंगें...

सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं...💐

Avoid Wine...
30/07/2016

Avoid Wine...

29/07/2016
29/07/2016
Avoid the drug...
28/07/2016

Avoid the drug...

Avoid the drug
01/07/2016

Avoid the drug

शरीर की शुद्धि के लिए योगासन,मन की शुद्धि के लिए प्राणायाम,आत्मा की शुद्धि के लिए ध्यान किया जाता हैI योग स्वस्थ जीवन का...
21/06/2016

शरीर की शुद्धि के लिए योगासन,मन की शुद्धि के लिए प्राणायाम,आत्मा की शुद्धि के लिए ध्यान किया जाता हैI योग स्वस्थ जीवन का सूत्र हैI
विश्व योग दिवस की शुभकामनायें....

नशा करने वाले को कैसे पहचानें?अगर आपका बेटा, बेटी, परिवार का कोई सदस्य या दोस्त नशीली दवाओं का सेवन कर रहा हो तो नीचे दि...
02/06/2016

नशा करने वाले को कैसे पहचानें?
अगर आपका बेटा, बेटी, परिवार का कोई सदस्य या दोस्त नशीली दवाओं का सेवन कर रहा हो तो नीचे दिए गए लक्षणों से आप उसकी आदत को पहचान सकते हैं।
ऽ खाने के तौर तरीकों में बदलाव, खासकर भूख न लगना
ऽ अस्वस्थ्य लगना, लाला आंखें, त्वचा का रंग फीका पड़ना
ऽ सफाई न रखना - स्नान नहीं करना, बाल नहीं, धोना, दांत साफ नहीं करना।
ऽ याददाश्त की कमजोरी
ऽ एकाग्रता में कमी
ऽ एक ही जगह पर मन न लगना
ऽ आक्रमक, हिंसक और चिंतित होना ।
ऽ धोख देना, झूठ बोलना, चोरी या जालसाजी करना।
ऽ पुराने दोस्तों के साथ वक्त न बिताना।
ऽ दिशा विहीन होना।
ऽ आत्मविश्वास की कमी, स्वास्थ्य की फिक्र न करना
ऽ शरीर की उर्जा की कमी ।
ऽ नींद में बदलाव
ड्रग का सेवन करने वाले ड्रग्स से जुड़ा सामान अपने बैग, बाथरूम, बैडरूम, दराज या कार में रखते हैं। इस सामान में कई चीजें शामिल होती हैं, जैसे -
ऽ सिगरेट रोलिंग पेपप और रोलिंग व्हील
ऽ बबली या टूटी बोतल का उपरी हिस्सा
ऽ पावडर, गोलियां व पौधे
ऽ ऐश ट्रे या पॉकेट में पाउडर, पत्तियां या बीज
ऽ फ्लेवर्ड तंबाकू
ऽ अगर आपकों ये शंका है कि आपा बच्चा नशीला दवाओं का सेवन कर रहा है, तो सबसे पहले अपने बच्चे के ड्रग्स से दूर रखने के लिए आप उसके साथ ईमानदारी और अच्छा रवैया अपनाएं। जब आप दूर हों तो उसके दोस्त, दोस्तों के रहन-सहन और आदतों की जानकारी लें और लगातार उनसे सम्पर्क में रहें। जिन बच्चों पर दिन भर किसी का ध्यान नहीं रहता, वो कब घर में आते और जाते हैं, इसका कोई ध्यान नहीं रखता, तो ऐसे बच्चों में नशीली दवाओं के सेवन का ज्यादा खतरा होता है।
कैसे होता है इलाज
कराते हैं खास थेरपी
ड्रग्स की लत से पीड़ित शख्स में कई बुरी आदतें भी आ जाती हैं, जिस वजह से लत छोड़ने में दिक्कत आती है। ऐसे में उन्हें कुछ थेरपे कराई जाती हैं, जैसे कि आर्ट, डांस, ड्रामा, म्यूजिक, राइटिंग थेरपे आदि। इनके जरिए मरीज का मन बुरी आदतों से दूर होता हैं। मरीज को पार्कों में बच्चों की तरह खिलाया जाता हैं और पिकनिक आदि कराई जाती है। इससे उनमें नजदीकियां बढ़ने लगती हैं और समाज के प्रति उनकी नाराजगी खत्म होने लगती हैं।
बांटते हैं अनुभव
मरीजों की एक-दूसरे से बातचीत कराई जाती हैं ताकि उन्हें अपने बारे में दूसरों से चर्चा करने का मौका मिले। वे बताते हैं कि नशे की वजह से उन्होंने क्या गंवाया। इससे उनके मन का बोझ दूर होता है।
दवा का रोल सीमित
नशे के शिकार के इलाज के लिए दवा की भूमिका सीमित हैं। किसी-किसी रिहैबिलिटेशन सेंटर पर दवा के बिना (ठंडे पान से स्नान और विश्राम) से इलाज किया जाता है। इसके बाद क्रोध करना, उलटी आना, अनिद्रा, व्याकुलता आदि लक्षणों के आधार पर दवा दी जाती है। कहीं-कहीं विकल्प के रूप में अवैध ड्रग्स की जगह मान्यता प्राप्त दवांए दी जाती हैं ऐसी दवाएं किसी डॉक्टर की देख-रेख में ही दी जाती है।
कितना समय लगता है
रिहैबिलिटेशन सेंटर्स में 3 से 9 महीनें के कोर्स हैं। इसके बाद मरीज को एक से डेढ़ साल तक लगातार सम्पर्क बनाएं रखने की सलाह दी जाती है।
प्रतिदिन दवाखाने पर मुख के कैंसर/गले के कैंसर तथा फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित लोग आते हैं जिनकी उम्र लगभग 30 साल से 65 साल तक है इन सभी मरीजों ने गुटका, सिगरेट, बीड़ी का सेवन पूर्व में किया होता है।
कई मरीज तो ऐसे आते है कि जिनका मुंह खुलना ही पूरी तरह से बंद हो गया।
गुटका/पान मसाला, सिगरेट, बीड़ी पीने वाले लगभग 85 प्रतिशत लोग मुख/गले/फेफड़े की किसी न किसी बीमारी से अवश्य पीड़ित हो गए हैं। लगभग 90 प्रतिशत केसेस में मुंह में फाईबोसिस अथवा बार-बार छाले हो जाने की समस्या पाई गई है, जिसमें होम्योपैथिक इलाज काफी हद तक राहत पहुंचा रहा है। कई मरीजों के मुंह जो बंद हो गए थे होम्योपैथी इलाज के बाद खुलने लगे है।

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Bhopal

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