Srsdm Ayurveda

Srsdm Ayurveda रोगी सेवा ही मेरा धर्म है।
DR MK GAHLOT
Ayurveda Consultant | World Record Holder
Founder & Chief Physician – SRSDM Ayurveda

❗ क्या जान की कोई कीमत नहीं? ❗अख़बार की यह रिपोर्ट केवल खबर नहीं, बल्कि एक गंभीर चेतावनी है।जो दवाइयाँ सीधे हमारे स्वास्...
28/12/2025

❗ क्या जान की कोई कीमत नहीं? ❗
अख़बार की यह रिपोर्ट केवल खबर नहीं, बल्कि एक गंभीर चेतावनी है।

जो दवाइयाँ सीधे हमारे स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ी हैं, वही दवाइयाँ अगर अमानक / प्रतिबंधित / गलत संयोजन में खुलेआम बिकें, तो परिणाम केवल बीमारी नहीं — मौत भी हो सकती है।

👉 बच्चों, युवाओं और बुज़ुर्गों में बिना चिकित्सकीय सलाह के ली गई दवाइयाँ
👉 स्टेरॉयड, एंटीबायोटिक, पेनकिलर का अंधाधुंध उपयोग
👉 जानलेवा दुष्प्रभाव, किडनी-लिवर फेलियर, हार्मोनल गड़बड़ी

एक चिकित्सक होने के नाते मेरा स्पष्ट संदेश है —
दवा वही सुरक्षित है जो सही रोग, सही व्यक्ति और सही मात्रा में दी जाए।

आयुर्वेद में उपचार का मूल सिद्धांत है “प्रकृति अनुसार चिकित्सा” — न कि जल्दबाज़ी और मुनाफ़ा।

🙏 जनता से आग्रह
• बिना पर्ची दवा न लें
• झूठे प्रचार से बचें
• शरीर के संकेतों को अनदेखा न करें
• सुरक्षित, वैज्ञानिक और समग्र चिकित्सा पद्धति अपनाएँ।

🩺 स्वास्थ्य कोई प्रयोगशाला नहीं है।
आज सावधानी, कल सुरक्षा।

Case - बड़ा हुआ कान का छेद,आयुर्वेद चिकित्सा से फिर से चिपक गया।Enlarged Ear PiercingStretched EarlobeEarlobe Tear / Spl...
27/12/2025

Case - बड़ा हुआ कान का छेद,आयुर्वेद चिकित्सा से फिर से चिपक गया।

Enlarged Ear Piercing
Stretched Earlobe
Earlobe Tear / Split Earlobe (जब छेद बहुत ज्यादा फैल जाए या फट जाए)

छेद फिर से भर जाना आयुर्वेद की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण परिणाम है। इसे इस प्रकार समझा जाता है:

यह व्रण (Wound) का सम्यक रोपण है
रक्त, मांस और त्वचा धातु की पुनः पूर्ति हुई
स्थानीय स्तर पर धातु पोषण एवं संधान क्रिया हुई।
आयुर्वेद में इसे 👉 “व्रण संधान (Wound Healing & Tissue Regeneration)”
कहा जाता है।

👉यह क्यों खास है?
आधुनिक चिकित्सा में प्रायः ऐसे मामलों में
सर्जरी (earlobe repair surgery)
की सलाह दी जाती है।

👉यह समस्या क्यों होती है?

✅भारी झुमके या लंबे समय तक ईयररिंग पहनना
✅बार-बार ईयररिंग बदलना
✅उम्र के साथ त्वचा की ढीलापन
✅प्रसव के बाद या हार्मोनल बदलाव
✅कान के छेद की सही देखभाल न होना

आयुर्वेदिक चिकित्सा से बिना ऑपरेशन प्राकृतिक रूप से
छेद का भरना एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।

DR MK GAHLOT
GAHLOT
082336 66311
Bikaner

50 मिनट का योग – शुगर नियंत्रण में प्रभावीहाल ही में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार AIIMS की ऑब्ज़र्वेशनल स्टडी में यह सामने...
26/12/2025

50 मिनट का योग – शुगर नियंत्रण में प्रभावी
हाल ही में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार AIIMS की ऑब्ज़र्वेशनल स्टडी में यह सामने आया है कि प्रतिदिन लगभग 50 मिनट का नियमित योग करने से ब्लड शुगर लेवल में उल्लेखनीय सुधार देखा गया। अध्ययन में श्वसन अभ्यास, आसन, प्राणायाम और ध्यान को सम्मिलित किया गया, जिससे इंसुलिन सेंसिटिविटी बेहतर हुई और मेटाबॉलिक संतुलन में मदद मिली।

आयुर्वेद भी यही कहता है—
विहार (दिनचर्या) + आहार + योग = रोग नियंत्रण
मधुमेह केवल दवा से नहीं, बल्कि जीवनशैली सुधार से नियंत्रित होता है। योग तनाव घटाता है, पाचन-अग्नि को संतुलित करता है और शरीर की स्व-नियमन क्षमता को मजबूत करता है।

👉 ध्यान रहे: योग इलाज का पूरक है, विकल्प नहीं। दवा, आहार और योग—तीनों का संतुलन आवश्यक है।
स्वास्थ्य के लिए आज ही नियमित योग को दिनचर्या में शामिल करें।
🌿 स्वस्थ रहें, सजग रहें।

वैद्य मनीष कुमार गहलोत
082336 66311

🛑 सोचिए… कहीं हम अनजाने में बीमारी की ओर तो नहीं बढ़ रहे?अख़बार में छपी यह खबर एक गंभीर चेतावनी है।रिपोर्ट के अनुसार मां...
25/12/2025

🛑 सोचिए… कहीं हम अनजाने में बीमारी की ओर तो नहीं बढ़ रहे?

अख़बार में छपी यह खबर एक गंभीर चेतावनी है।

रिपोर्ट के अनुसार मांसाहार, अत्यधिक प्रोटीन सेवन, कम नींद और बढ़ता मोटापा महिलाओं में स्तन कैंसर के खतरे को तेजी से बढ़ा रहे हैं।

भारत में हर साल लगभग 50,000 नए मामले सामने आ रहे हैं—जो सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि बिगड़ती जीवनशैली का परिणाम है।

आज फिटनेस के नाम पर
👉 जरूरत से ज्यादा मीट–मांस
👉 प्रोटीन सप्लीमेंट्स
👉 देर रात तक जागना
👉 और वजन बढ़ना
को नॉर्मल मान लिया गया है।

लेकिन शरीर को केवल प्रोटीन नहीं, संतुलन चाहिए।
नींद, पाचन, वजन और मानसिक शांति—इनमें गड़बड़ी लंबे समय में गंभीर रोगों का कारण बनती है।

🔍 संदेश साफ है:
रोग अचानक नहीं आते,
वे रोज़ की गलत आदतों से धीरे-धीरे बनते हैं।

👉 आज समय रहते नहीं संभले,
तो कल पछताना पड़ेगा।
स्वास्थ्य दिखावे से नहीं, सही जीवनशैली से बनता है।

🟢 कफ प्रकृति पुरुष – यह चित्र आयुर्वेद में वर्णित कफ प्रकृति पुरुष के शारीरिक एवं मानसिक गुणों को बहुत सुंदर रूप से समझा...
25/12/2025

🟢 कफ प्रकृति पुरुष –
यह चित्र आयुर्वेद में वर्णित कफ प्रकृति पुरुष के शारीरिक एवं मानसिक गुणों को बहुत सुंदर रूप से समझाता है। कफ प्रकृति वाले व्यक्ति सामान्यतः स्निग्ध, श्लक्ष्ण, मृदु और स्थिर शरीर वाले होते हैं। इनका शरीर सुडौल, गौर वर्ण, अंग-प्रत्यंग पुष्ट और जोड़ मजबूत होते हैं। त्वचा, केश और नेत्रों में प्राकृतिक चमक होती है।

कफ प्रकृति की सबसे बड़ी विशेषता है धैर्य, स्थिरता और मानसिक संतुलन। ऐसे व्यक्ति जल्दी क्रोधित नहीं होते, मन शांत रहता है और निर्णय सोच-समझकर लेते हैं। इनकी चाल ढाल धीमी लेकिन निश्चित होती है। भूख और प्यास अपेक्षाकृत कम रहती है, परंतु अग्नि मंद होने के कारण यदि आहार-विहार ठीक न रखा जाए तो मोटापा, आलस्य, श्लेष्म विकार, मधुमेह आदि रोगों की संभावना बढ़ जाती है।

👉 चिकित्सकीय सलाह:

कफ प्रकृति वालों को हल्का, उष्ण, कम स्निग्ध आहार लेना चाहिए, नियमित व्यायाम, प्राणायाम और दिन में सोने से बचना चाहिए। सही दिनचर्या अपनाने पर यही कफ प्रकृति बल, ओज, आयु और स्थायित्व का आधार बनती है।
प्रकृति को जानना ही सही उपचार की पहली सीढ़ी है — यही आयुर्वेद का विज्ञान है।

25/12/2025
🌿 हेमंत ऋतु में पथ्य आहार – स्वास्थ्य का मजबूत आधारहेमंत ऋतु में शरीर की जठराग्नि प्रबल होती है, इसलिए इस समय संतुलित, प...
25/12/2025

🌿 हेमंत ऋतु में पथ्य आहार – स्वास्थ्य का मजबूत आधार
हेमंत ऋतु में शरीर की जठराग्नि प्रबल होती है, इसलिए इस समय संतुलित, पौष्टिक और स्निग्ध आहार शरीर को बल, ओज और रोग-प्रतिरोधक क्षमता देता है। आयुर्वेद के अनुसार इस ऋतु में शुकधान्य, शिंबीवर्ग, शाकवर्ग, मांसवर्ग, कंदवर्ग, फलवर्ग, दुग्धवर्ग तथा इक्षु-निर्मित पदार्थ पथ्य माने जाते हैं—जैसे गेहूं, ज्वार, मूंग, चना, मौसमी सब्ज़ियाँ, दूध-घी, फल, मेवे एवं गुड़।

साथ ही पथ्य विहार—नियमित व्यायाम, तैल अभ्यंग, स्वेदन/सेक, धूप में बैठना और गुनगुने जल का सेवन—शरीर को ऋतु-संक्रमण से सुरक्षित रखता है।

👉 ध्यान रखें: अति-शीत, अति-रूक्ष भोजन से बचें; मात्रा और समय का पालन करें।

स्वस्थ रहना दवा से नहीं, दिनचर्या + आहार से संभव है।
✨ Ayurveda for every home.


🛑 नॉन-स्टिक बर्तन: सुविधा या स्वास्थ्य जोखिम? (Scientific Talk)क्या आप जानते हैं कि नॉन-स्टिक पैन पर एक छोटा सा स्क्रैच ...
25/12/2025

🛑 नॉन-स्टिक बर्तन: सुविधा या स्वास्थ्य जोखिम? (Scientific Talk)

क्या आप जानते हैं कि नॉन-स्टिक पैन पर एक छोटा सा स्क्रैच भी खाने में हज़ारों माइक्रोप्लास्टिक कण छोड़ सकता है?

🔬 विज्ञान क्या कहता है?
नॉन-स्टिक कोटिंग (अक्सर PTFE / टेफ्लॉन आधारित) जब
▪️ खुरच जाती है
▪️ ज्यादा तापमान पर गरम होती है
▪️ या धातु के चम्मच से रगड़ी जाती है
तो उससे माइक्रोप्लास्टिक और केमिकल कण भोजन में मिल सकते हैं।

📌 रिसर्च के अनुसार:
➡️ ये कण शरीर में जाकर
▪️ सूजन (Inflammation)
▪️ हार्मोनल असंतुलन
▪️ लिवर व इम्युनिटी पर असर
▪️ आंतों के माइक्रोबायोम को नुकसान
जैसी समस्याओं से जुड़े पाए गए हैं।
🧠 समस्या तुरंत ज़हर जैसी नहीं दिखती,
लेकिन यह धीमी और साइलेंट एक्सपोज़र है — जो सालों में असर दिखाती है।

✅ क्या करें? (Practical & Safe Advice)
✔️ खुरचे हुए नॉन-स्टिक बर्तन बदलें
✔️ तेज़ आंच पर नॉन-स्टिक न रखें
✔️ लकड़ी / सिलिकॉन स्पैचुला का प्रयोग करें
✔️ लोहे, स्टील, कास्ट आयरन, मिट्टी के बर्तनों को प्राथमिकता दें l

🌿 आयुर्वेद भी कहता है —
“पाकपात्र (Cooking vessel) का सीधा प्रभाव स्वास्थ्य पर पड़ता है।”
👉 स्वास्थ्य केवल खाने से नहीं, उसे पकाने के तरीके से भी बनता है।

माइग्रेन (आधे सिर का दर्द) – आयुर्वेद के अनुसार कारण व उपचारआयुर्वेद में माइग्रेन को “अर्धावभेदक” कहा गया है। यह मुख्यतः...
24/12/2025

माइग्रेन (आधे सिर का दर्द) – आयुर्वेद के अनुसार कारण व उपचार
आयुर्वेद में माइग्रेन को “अर्धावभेदक” कहा गया है। यह मुख्यतः वात दोष के साथ पित्त दोष के असंतुलन से उत्पन्न होता है। इसलिए इसका उपचार केवल दर्द दबाने से नहीं, बल्कि कारण को ठीक करने से होता है।

🔴 माइग्रेन के प्रमुख कारण (आयुर्वेद अनुसार)
1️⃣ वात दोष वृद्धि
अनियमित दिनचर्या
देर रात जागना
अधिक मोबाइल/स्क्रीन देखना
मानसिक तनाव

2️⃣ पित्त दोष वृद्धि
तीखा, खट्टा, तला-भुना भोजन
धूप, गर्मी
क्रोध, चिड़चिड़ापन

3️⃣ पाचन की गड़बड़ी (अग्निमांद्य)
गैस, कब्ज
समय पर भोजन न करना

4️⃣ हार्मोनल असंतुलन
महिलाओं में पीरियड्स से पहले/बाद दर्द

5️⃣ मानसिक कारण
चिंता, अवसाद, दबा हुआ तनाव
🧠 माइग्रेन के लक्षण
▪️ आधे सिर में तेज दर्द
▪️ उल्टी या मितली
▪️ रोशनी व आवाज से परेशानी
▪️ आंखों में जलन
▪️ चक्कर

🌿 आयुर्वेदिक उपचार (Root Cause Treatment)
✔️ 1. शोधन चिकित्सा (Detox)
नस्य कर्म – नाक के द्वारा औषधि
वमन / विरेचन – दोषों की शुद्धि
(रोगी की प्रकृति अनुसार)

✔️ 2. शमन चिकित्सा
वात-पित्त संतुलक औषधियाँ
मस्तिष्क को शांत करने वाली रसायन चिकित्सा

✔️ 3. आहार (Diet)
हल्का, सुपाच्य भोजन
गर्म, ताजा खाना
ज्यादा तेल, मसाले, फास्ट फूड से परहेज

✔️ 4. विहार (Lifestyle)
नियमित नींद
सुबह का समय पर उठना
योग, प्राणायाम, ध्यान

🧘‍♂️ माइग्रेन में लाभकारी योग
अनुलोम-विलोम
भ्रामरी
शवासन

⚠️ क्या न करें
❌ खाली पेट रहना
❌ बार-बार पेन किलर
❌ देर रात जागना
❌ अत्यधिक चाय-कॉफी
✅ निष्कर्ष (वैद्य की सलाह)
माइग्रेन लाइलाज नहीं है,
लेकिन धैर्य, अनुशासन और सही आयुर्वेदिक उपचार आवश्यक है।
दर्द को नहीं, कारण को ठीक करें — यही आयुर्वेद है।

DR MK GAHLOT
082336 66311

यह चित्र आयुर्वेद में वर्णित “शुक्रवह स्रोतस” को दर्शाता है, जो पुरुष प्रजनन शक्ति, वीर्य की गुणवत्ता और मानसिक संतुलन स...
24/12/2025

यह चित्र आयुर्वेद में वर्णित “शुक्रवह स्रोतस” को दर्शाता है, जो पुरुष प्रजनन शक्ति, वीर्य की गुणवत्ता और मानसिक संतुलन से सीधे जुड़ा हुआ है। आचार्यों के अनुसार अतिशय मैथुन, वीर्य का वेग से दमन, अत्यधिक श्रम, रात्रि जागरण, मद्यपान, मानसिक तनाव तथा अग्नि के विपरीत आहार-विहार से शुक्रवह स्रोतस दूषित हो जाता है।

जब शुक्रवह स्रोतस में विकृति आती है, तो वैद्य व्यवहार में अल्पशुक्र, शुक्रदुष्टि, शुक्रक्षय, नपुंसकता, अरुचि, क्लीबता, शीघ्रपतन, कामेच्छा की कमी तथा दाम्पत्य जीवन में तनाव जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं। यह केवल शारीरिक समस्या नहीं, बल्कि मन–शरीर–ओज तीनों के असंतुलन का परिणाम है।

एक वैद्य के अनुसार शुक्र की रक्षा के लिए
👉 संयमित ब्रह्मचर्य,
👉 दीपन–पाचन सुधार,
👉 बल्य, वृष्य और रसायन औषधियाँ,
👉 सात्त्विक आहार और शांत मन
अत्यंत आवश्यक हैं।

शुक्र धातु की रक्षा = संपूर्ण स्वास्थ्य की रक्षा
यही आयुर्वेद का शाश्वत सिद्धांत है।

#शुक्रवहस्रोतस #पुरुषस्वास्थ्य #शुक्रदोष #नपुंसकता #शुक्रक्षय #अल्पशुक्र #आयुर्वेद #वैद्यकीसलाह

यह चार्ट आयुर्वेद के मूल सिद्धांतों के अनुसार कफप्रधान प्रकृति वाले व्यक्तियों के लिए पथ्य आहार को दर्शाता है। कफ दोष का...
24/12/2025

यह चार्ट आयुर्वेद के मूल सिद्धांतों के अनुसार कफप्रधान प्रकृति वाले व्यक्तियों के लिए पथ्य आहार को दर्शाता है। कफ दोष का स्वभाव गुरु, शीत, स्निग्ध और मंद होता है, इसलिए यदि व्यक्ति भारी, तैलीय और मधुर आहार अधिक लेता है तो कफ बढ़कर रोग उत्पन्न करता है। वैद्य के अनुभव में ऐसे रोगियों में प्रायः मोटापा, आलस्य, श्वास-कास, प्रमेह, सूजन और पाचन की कमजोरी देखी जाती है।

इसलिए कफ संतुलन हेतु आयुर्वेद हल्का, उष्ण और रूक्ष आहार सुझाता है। जौ, ज्वार, बाजरा, मूंग व मसूर जैसे धान्य अग्नि को प्रदीप्त करते हैं। पालक, मेथी, करेला, मूली जैसी शाक सब्ज़ियाँ कफ को शोषित करती हैं। अनार और पपीता पाचन को सुधारते हैं। सीमित मात्रा में गाय का दूध व छाछ बल प्रदान करते हैं, जबकि गुनगुना जल कफ पिघलाने में सहायक होता है। जीरा, अजवाइन, हींग और इलायची जैसे द्रव्य दीपन-पाचन का कार्य करते हैं।

एक वैद्य के अनुसार औषधि से पहले आहार का सुधार ही वास्तविक चिकित्सा है। जब आहार-विहार कफानुकूल हो जाता है, तब रोग स्वतः नियंत्रित होने लगते हैं—यही आयुर्वेद की सच्ची और स्थायी चिकित्सा पद्धति है।

Address

Near Babosa Temple, Gharsisar Road, Gangashahar
Bikaner
334401

Opening Hours

Monday 9am - 8pm
Tuesday 9am - 8pm
Wednesday 9am - 8pm
Thursday 9am - 8pm
Friday 9am - 8pm
Saturday 9am - 8pm
Sunday 9am - 2pm

Telephone

+918233666311

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