Srsdm Ayurveda

Srsdm Ayurveda रोगी सेवा ही मेरा धर्म है।
DR MK GAHLOT
Ayurveda Consultant | World Record Holder
Founder & Chief Physician – SRSDM Ayurveda

11/03/2026
11/03/2026

सुबह का नाश्ता शरीर की ऊर्जा, पाचन और मानसिक क्षमता के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसलिए सुबह का नाश्ता कभी नहीं छोड़ना चाहिए।

1️⃣ अलार्म के बाद तुरंत उठना क्यों अच्छा हैजब हम अलार्म बजते ही उठ जाते हैं तो शरीर की जैविक घड़ी (Biological Clock / Ci...
11/03/2026

1️⃣ अलार्म के बाद तुरंत उठना क्यों अच्छा है

जब हम अलार्म बजते ही उठ जाते हैं तो शरीर की जैविक घड़ी (Biological Clock / Circadian Rhythm) संतुलित रहती है।
इससे—

नींद की गुणवत्ता बेहतर रहती है

दिनभर ऊर्जा बनी रहती है

मानसिक एकाग्रता और कार्यक्षमता बढ़ती है

आयुर्वेद में भी ब्राह्म मुहूर्त में जागरण को स्वास्थ्य के लिए उत्तम बताया गया है।

📜 श्लोक (अष्टांग हृदय)
“ब्राह्मे मुहूर्ते उत्तिष्ठेत् स्वस्थो रक्षार्थमायुषः।”
अर्थ: स्वस्थ व्यक्ति को आयु और स्वास्थ्य की रक्षा के लिए ब्रह्म मुहूर्त में उठना चाहिए।

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2️⃣ बार-बार Snooze करने की समस्या

कई लोग अलार्म बंद करके 5–10 मिनट और सोने की आदत रखते हैं। इसे Snooze कहते हैं।

इससे कुछ समस्याएँ हो सकती हैं:

नींद बार-बार टूटती है

शरीर और मस्तिष्क भ्रमित हो जाते हैं

सुबह उठने पर थकान और सुस्ती महसूस होती है

दिनभर आलस्य और ध्यान की कमी हो सकती है

इसे विज्ञान में Sleep Fragmentation कहा जाता है।

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3️⃣ आयुर्वेदिक दृष्टिकोण

आयुर्वेद के अनुसार सुबह देर तक सोना या बार-बार नींद लेना कफ वृद्धि करता है, जिससे—

आलस्य

भारीपन

मंदाग्नि

काम में मन न लगना

जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।

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4️⃣ सही दिनचर्या क्या हो

स्वास्थ्य के लिए यह दिनचर्या अच्छी मानी जाती है:

✔ ब्रह्म मुहूर्त में जागना
✔ उठते ही जलपान (उष्ण जल)
✔ हल्का व्यायाम या योग
✔ प्राणायाम या प्रभात भ्रमण

यह दिनभर शरीर और मन को सक्रिय रखता है।

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✅ निष्कर्ष

अलार्म के बाद बार-बार Snooze करना छोटी आदत लगती है, लेकिन यह धीरे-धीरे नींद की गुणवत्ता और दिनचर्या दोनों को खराब कर सकती है।
सबसे अच्छा तरीका है अलार्म बजते ही उठ जाना और दिन की शुरुआत सकारात्मक तरीके से करना।

👉 “अगर आप भी अलार्म बजते ही उठते हैं तो ‘YES’ लिखें और इस संदेश को 10 लोगों तक जरूर भेजें।”

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पढ़ाई का दबाव नहीं, समझ और संस्कार जरूरीहाल ही में आई एक खबर ने पूरे समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है। एक बेटे ने पढ़ाई...
11/03/2026

पढ़ाई का दबाव नहीं, समझ और संस्कार जरूरी

हाल ही में आई एक खबर ने पूरे समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है। एक बेटे ने पढ़ाई के दबाव और गुस्से में अपने ही पिता की हत्या कर दी। यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है।

आज के समय में बच्चों पर पढ़ाई, प्रतियोगिता और करियर का बहुत अधिक दबाव बना दिया जाता है। माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा सबसे आगे निकले, लेकिन कई बार यह दबाव बच्चों के मन और मानसिक संतुलन पर भारी पड़ जाता है। जब बच्चों को केवल परिणाम और सफलता के आधार पर आंका जाता है, तो उनके अंदर तनाव, गुस्सा और निराशा बढ़ने लगती है।

बच्चों को केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि संस्कार, धैर्य, संवाद और जीवन के मूल्य भी सिखाने की आवश्यकता है। माता-पिता और बच्चों के बीच खुलकर बातचीत होनी चाहिए। यदि बच्चा किसी विषय में कमजोर है तो उसे डांटने के बजाय समझाना और सहयोग देना अधिक जरूरी है।

हम सबको यह समझना होगा कि
जीवन में सफलता से अधिक महत्वपूर्ण मानसिक संतुलन, परिवार का प्रेम और अच्छे संस्कार हैं।

इसलिए समाज और माता-पिता के लिए कुछ बातें बहुत जरूरी हैं—
• बच्चों पर पढ़ाई का अत्यधिक दबाव न डालें।
• बच्चों की मानसिक स्थिति को समझें और उनसे मित्र की तरह बात करें।
• उन्हें खेल, योग, प्रार्थना और अच्छे संस्कारों से जोड़ें।
• सफलता से अधिक अच्छे इंसान बनने की शिक्षा दें।

यदि परिवार में प्रेम, संवाद और संस्कार होंगे तो ऐसी दुखद घटनाएँ कभी जन्म नहीं लेंगी।
बच्चों को केवल डिग्री नहीं, बल्कि सही दिशा और संस्कार देना ही सबसे बड़ी शिक्षा है।

🙏 समाज के सभी माता-पिता से विनम्र निवेदन है कि बच्चों को समझें, उनसे प्रेम करें और उन्हें सही मार्ग दिखाएँ।

“हर माता-पिता और हर शिक्षक तक यह संदेश जरूर पहुँचाएँ। एक शेयर किसी बच्चे का जीवन बचा सकता है।”

#समाजजागरण #बच्चोंकीपरवरिश #संस्कार #मानसिकस्वास्थ्य #परिवारिकमूल्य #समाजकीजिम्मेदारी #युवापीढ़ी #सकारात्मकसोच #समाजसुधार #भारत

1️⃣ सन चार्ज वॉटर क्या है??जब पानी को काँच के पात्र में रखकर कुछ समय सूर्य की रोशनी में रखा जाता है, तो उसे सामान्य भाषा...
11/03/2026

1️⃣ सन चार्ज वॉटर क्या है??

जब पानी को काँच के पात्र में रखकर कुछ समय सूर्य की रोशनी में रखा जाता है, तो उसे सामान्य भाषा में Sun Charged Water कहा जाता है।

आयुर्वेद में यह अवधारणा सूर्यतप्त जल या सूर्यपाक जल के रूप में मिलती है।

📜 शास्त्रीय संदर्भ
“आतपेन तप्तं जलं पथ्यं लघु दोषहरं स्मृतम्।”
— (आयुर्वेदिक मत)
अर्थ: सूर्य की किरणों से तप्त जल हल्का और पाचन के लिए हितकर माना गया है।

2️⃣ आयुर्वेद के अनुसार संभावित लाभ -
सूर्य के संपर्क में रखा जल कुछ हद तक इन गुणों को बढ़ा सकता है:
☀️ दीपन-पाचन में सहायक
☀️ अग्नि को थोड़ा प्रोत्साहित करता है
☀️ हल्का (लघु) और पचने में आसान
☀️ सुबह पीने से मंदाग्नि में लाभ
यह लाभ मुख्यतः गर्म या सूर्यतप्त जल के कारण होते हैं।

3️⃣ वैज्ञानिक दृष्टिकोण
वैज्ञानिक रूप से:
✔ सूर्य की UV किरणें कुछ बैक्टीरिया को कम कर सकती हैं
✔ पानी थोड़ा गर्म और ऊर्जा युक्त महसूस हो सकता हैसही तरीका (यदि उपयोग करना हो)
साफ काँच के बर्तन में पानी रखें
3–5 घंटे धूप में रखें
उसी दिन उपयोग करें
दूषित या बहुत गर्म पानी न पिएं
⚠️ प्लास्टिक या RO के बारे में तस्वीर में जो लिखा है वह पूरी तरह वैज्ञानिक नहीं है।

5️⃣ आयुर्वेद का बेहतर विकल्प
आयुर्वेद में इससे अधिक प्रमाणित विधि है:
✔ उष्ण जल (गर्म पानी)
✔ ताम्रपात्र जल

📜 श्लोक
“ताम्रपात्रस्थितं तोयं पिबेत प्रातरुत्थितः।
तत् सर्वरोगनाशाय बलवर्णकरं परम्॥”
अर्थ: तांबे के पात्र में रखा जल सुबह पीने से स्वास्थ्य और रोग प्रतिरोध में लाभ मिलता है।

प्रभात फेरी: शास्त्र और विज्ञान के आलोक में एक स्वस्थ परंपरालेखक: डॉ. मनीष कुमार गहलोत, आयुर्वेद चिकित्सकभारतीय संस्कृति...
08/03/2026

प्रभात फेरी: शास्त्र और विज्ञान के आलोक में एक स्वस्थ परंपरा

लेखक: डॉ. मनीष कुमार गहलोत, आयुर्वेद चिकित्सक

भारतीय संस्कृति में प्रातःकाल को अत्यंत पवित्र, ऊर्जावान और स्वास्थ्यवर्धक समय माना गया है। सनातन परंपरा में प्रभात फेरी—अर्थात प्रातःकाल भगवान के नाम का कीर्तन करते हुए सामूहिक रूप से भ्रमण करना—केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य संवर्धन, मानसिक शांति और सामाजिक एकता का प्रभावी माध्यम भी है।

आयुर्वेद, योगशास्त्र और धर्मग्रंथों में प्रातःकालीन जागरण, भ्रमण और नामस्मरण का विशेष महत्व बताया गया है। आधुनिक विज्ञान भी इन सिद्धांतों की पुष्टि करता है।

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1. आयुर्वेद में प्रातःकाल का महत्व

आयुर्वेद में स्वस्थ जीवन के लिए दिनचर्या का विशेष महत्व बताया गया है।

“ब्राह्मे मुहूर्त उत्तिष्ठेत् स्वस्थो रक्षार्थमायुषः।”
— अष्टांग हृदय, सूत्रस्थान 2/1

अर्थात् स्वस्थ व्यक्ति को अपने आयुष्य की रक्षा के लिए ब्रह्ममुहूर्त में उठना चाहिए।

इसी प्रकार चरक संहिता में भी दिनचर्या का पालन स्वास्थ्य के लिए आवश्यक बताया गया है—

“नित्यं हिताहारविहारसेवी
समिक्ष्यकारी विषयेष्वसक्तः।
दाता समः सत्यपरः क्षमावान्
आप्तोपसेवी च भवत्यरोगः॥”
— चरक संहिता, सूत्रस्थान 5

अर्थात जो व्यक्ति उचित आहार-विहार का पालन करता है और संयमित जीवन जीता है, वह रोगों से दूर रहता है।

प्रभात फेरी इस आयुर्वेदिक दिनचर्या को व्यवहार में लाने का एक सरल और प्रभावी तरीका है।

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2. प्रातःकालीन भ्रमण का महत्व

प्राचीन ग्रंथों में सुबह के समय भ्रमण (वॉक) को स्वास्थ्य के लिए श्रेष्ठ बताया गया है—

“प्रातःकाले च भ्रमणं आरोग्यकरमुत्तमम्।”
— योगशास्त्रीय मत

अर्थात प्रातःकाल का भ्रमण स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी होता है।

प्रभात फेरी में जब लोग पैदल चलते हुए भगवान का नाम लेते हैं, तो यह व्यायाम और भक्ति का सुंदर संगम बन जाता है।

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3. नामस्मरण की महिमा

धर्मग्रंथों में भगवान के नाम जप को कलियुग का सबसे सरल और प्रभावी साधन बताया गया है—

“हरेर्नाम हरेर्नाम हरेर्नामैव केवलम्।
कलौ नास्त्येव नास्त्येव नास्त्येव गतिरन्यता॥”
— बृहन्नारदीय पुराण

अर्थात कलियुग में भगवान के नाम का जप ही मोक्ष का सर्वोत्तम मार्ग है।

प्रभात फेरी में सामूहिक रूप से भगवान का नाम लेने से वातावरण भक्तिमय और सकारात्मक बन जाता है।

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4. वैज्ञानिक दृष्टिकोण

आधुनिक विज्ञान भी प्रातःकालीन भ्रमण और सकारात्मक वातावरण के लाभों को स्वीकार करता है।

(1) फेफड़ों के लिए लाभकारी

सुबह के समय वातावरण में ऑक्सीजन अधिक और प्रदूषण कम होता है। इस समय चलने से फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है।

(2) हृदय स्वास्थ्य

नियमित वॉक से हृदय मजबूत होता है और उच्च रक्तचाप, मोटापा तथा मधुमेह जैसी समस्याओं का जोखिम कम होता है।

(3) मानसिक स्वास्थ्य

भजन-कीर्तन और सुबह की शुद्ध हवा से मस्तिष्क में सकारात्मक हार्मोन (सेरोटोनिन, एंडोर्फिन) का स्राव बढ़ता है, जिससे तनाव कम होता है।

(4) विटामिन D का स्रोत

सुबह की सूर्य किरणें शरीर को प्राकृतिक विटामिन D प्रदान करती हैं, जो हड्डियों और प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण है।

(5) सामाजिक एकता

प्रभात फेरी में सभी आयु वर्ग के लोग एक साथ जुड़ते हैं, जिससे समाज में भाईचारा, सहयोग और सकारात्मकता बढ़ती है।

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5. वर्तमान समय में प्रभात फेरी की आवश्यकता

आज के आधुनिक जीवन में देर रात तक जागना, तनाव और शारीरिक निष्क्रियता सामान्य हो गई है। इसके कारण अनेक जीवनशैली संबंधी रोग बढ़ रहे हैं।

ऐसे समय में प्रभात फेरी जैसी परंपराएँ लोगों को स्वास्थ्य, अध्यात्म और सामाजिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य करती हैं।

यदि किसी क्षेत्र में प्रभात फेरी चल रही हो तो उसमें नियमित भाग लेना चाहिए, और यदि नहीं चल रही हो तो समाज के लोगों को मिलकर इसे प्रारंभ करना चाहिए।

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निष्कर्ष

प्रभात फेरी केवल धार्मिक गतिविधि नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य, संस्कृति और अध्यात्म का समन्वय है।

जब समाज के लोग प्रातःकाल उठकर प्रभु का नाम लेते हुए भ्रमण करते हैं, तो न केवल व्यक्ति का स्वास्थ्य सुधरता है बल्कि पूरे समाज में सकारात्मक ऊर्जा और संस्कारों का प्रसार होता है।

— डॉ. मनीष कुमार गहलोत
आयुर्वेद चिकित्सक

Case Gallbladder Stone – Patient age - 73 years Before & After Treatment 🌿उपचार से पहले मरीज के Gallbladder में दो बड़े ...
07/03/2026

Case Gallbladder Stone –
Patient age - 73 years

Before & After Treatment 🌿
उपचार से पहले मरीज के Gallbladder में दो बड़े पत्थर (60 mm और 50 mm) पाए गए थे। मरीज को पेट दर्द, भारीपन और पाचन संबंधी समस्या हो रही थी।

आयुर्वेदिक उपचार के लगभग 1 महीने बाद सोनोग्राफी में पत्थरों का आकार घटकर लगभग 15 mm रह गया।

यह परिणाम दर्शाता है कि उचित आयुर्वेदिक औषधि, आहार और परहेज के साथ कई मामलों में Gallbladder stones के आकार को कम करने में सहायता मिल सकती है। 🌿

नोट:
हर मरीज की स्थिति अलग होती है, इसलिए उपचार हमेशा चिकित्सकीय सलाह से ही करें।

किसी भी बीमारी के आयुर्वेद उपचार के लिए संपर्क करे।

वैद्य मनीष कुमार गहलोत
8233666311, 9252459033
बीकानेर

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ताम्र पात्र में जल रखने के फायदे - 1️⃣ सुश्रुत संहितासूत्र स्थान 45/96 (आचार रसायन / जल के गुणों के संदर्भ में)यहाँ बताय...
07/03/2026

ताम्र पात्र में जल रखने के फायदे -

1️⃣ सुश्रुत संहिता

सूत्र स्थान 45/96 (आचार रसायन / जल के गुणों के संदर्भ में)
यहाँ बताया गया है कि ताम्र पात्र में रखा जल दोष शमन में सहायक होता है और शुद्धता बढ़ाता है।

2️⃣ भैषज्य रत्नावली

इसमें भी ताम्र पात्र में रखे जल (ताम्र जल) को पाचन सुधारने और कफ-वात शमन में उपयोगी बताया गया है।

3️⃣ आयुर्वेदिक सिद्धांत

आयुर्वेद में तांबे को कषाय-तिक्त गुण वाला माना गया है, जो

कफ और वात को संतुलित करने में

पाचन को सुधारने में
सहायक माना जाता है।

4️⃣ आधुनिक रिसर्च

कुछ आधुनिक अध्ययनों में भी पाया गया है कि Copper surface पर bacteria लंबे समय तक जीवित नहीं रहते, इसलिए पानी की शुद्धता में मदद मिल सकती है।

उदाहरण:

University of Southampton (UK) research – copper surface bacteria को destroy कर सकती है।

Journal of Health, Population and Nutrition (2012) – copper vessel में रखा पानी bacterial contamination कम कर सकता है।

✅ इसलिए आयुर्वेद में सुबह रातभर ताम्र पात्र में रखा जल पीने की परंपरा बताई गई है।
वैद्य मनीष कुमार गहलोत
आयुर्वेद आचार्य
बीकानेर
8233666311

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06/03/2026
आयुर्वेदिक एनेस्थीसिया: पंकजकस्तूरी को मिला ऐतिहासिक पेटेंटतिरुवनंतपुरम: पंकजकस्तूरी (Pankajakasthuri) द्वारा विकसित दुन...
06/03/2026

आयुर्वेदिक एनेस्थीसिया: पंकजकस्तूरी को मिला ऐतिहासिक पेटेंट
तिरुवनंतपुरम: पंकजकस्तूरी (Pankajakasthuri) द्वारा विकसित दुनिया के पहले पूर्णतः हर्बल 'लोकल एनेस्थीसिया' इंजेक्शन को आधिकारिक रूप से पेटेंट मिल गया है। इस अभूतपूर्व औषधि को डॉ. जे. हरेंद्रन नायर और डॉ. शान शशिधरन ने तैयार किया है। इसकी सुरक्षा और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए 18 वैज्ञानिकों की टीम ने लगभग 8,005 सुरक्षा परीक्षण किए हैं।
प्रमुख विशेषताएँ:
- प्राकृतिक स्रोत: यह इंजेक्शन जटामांसी जैसी शक्तिशाली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों से निर्मित है।
- बेहतर प्रभाव: शोध में यह पुष्टि हुई है कि यह पारंपरिक एलोपैथिक एनेस्थीसिया की तुलना में अधिक प्रभावी है।
- दुष्प्रभाव रहित: इसके उपयोग से शरीर पर कोई प्रतिकूल प्रभाव (Side-effects) नहीं पड़ता।
पंकजकस्तूरी के संस्थापक और प्रबंध निदेशक, डॉ. जे. हरेंद्रन नायर ने कहा कि यह उपलब्धि आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा (सर्जरी) के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी और ऐतिहासिक कदम साबित होगी।

Address

Near Babosa Temple, Gharsisar Road, Gangashahar
Bikaner
334401

Opening Hours

Monday 9am - 8pm
Tuesday 9am - 8pm
Wednesday 9am - 8pm
Thursday 9am - 8pm
Friday 9am - 8pm
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Sunday 9am - 2pm

Telephone

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