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*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®**👉पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण ...
17/03/2026

*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®*

*👉पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण करते थे। पंचांग को नित्य पढ़ने और सुनने से देवताओं की कृपा, कुंडली के ग्रहो के शुभ फल मिलते है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फल की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना और पढ़ना चाहिए।*

*🐚🌺📜आज का पञ्चाङ्ग📜🌺🐚*

🔅 आज का दिनाँक 17 मार्च 2026
🔅 दिन - मंगलवार
🔅 विक्रम संवत - 𝟐𝟎𝟖𝟐
🔅 शाकः संवत - 𝟏𝟗𝟒𝟕
🔅 संवत्सर नाम - सिद्धार्थी
🔅 अयन - उत्तरायण
🔅 ऋतु - बसंत
🔅 मास - चैत्र
🔅 पक्ष - कृष्णपक्ष
🔅 तिथि - त्रयोदशी
🔅 नक्षत्र - शतभिषा
🔅 योग - सिद्ध
🔅 दिशाशूल - उत्तर दिशा मे
🔅 सूर्योदय - 06:44 मिनट पर
🔅 सूर्यास्त - 18:46 मिनट पर
🔅 चंद्रोदय - 06:08 मिनट पर
🔅 चंद्रास्त - 17:12 मिनट पर
🔅 राहुकाल - 15:46 - 17:16 अशुभ
🔅 अभिजित -12:23 -13:10 शुभ
🔅 तिथि विशेष - पंचक , मासिक शिवरात्रि
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*🔱⚜ भाग्योदय के लिए क्या करें⚜🔱*

*👉जानिए क्यों अन्न दान से बड़ा दुनियाँ में कोई दूसरा दान नहीं है::--------------*

*🌻इस पूरे संसार में भूख से बड़ा दूसरा कोई शत्रु नहीं है, फिर चाहे वह किसी भी भूख हो इंसान या फिर जानवर की l अगर आप जीवन मे दान ही करना चाहते है तो अन्न का दान करें क्योंकि इससे बड़ा दुनिया में कोई दूसरा दान ही नहीं होता है l जब आप किसी को भोजन करा रहे होते है या फिर किसी को अन्न का दान कर रहे होते है तब आप सिर्फ उस व्यक्ति की भूख की तृप्ति नहीं बल्कि उस परमात्मा को संतुष्ट कर रहे होते है जो उस व्यक्ति के शरीर से जुड़ी हुई है l जब आप अन्न दान अर्पण करते हैं, तो आप उनका शरीर उन्हें दे रहे होते हैं।*

*🌻अन्न दान भोजन के साथ अपने रिश्ते को चेतना और जागरूकता के निश्चित स्तर पर लाने के लिए एक संभावना है। इसे सिर्फ भोजन के रूप में मत देखियें, यह जीवन है। यह हम सब को समझना बहुत जरूरी है - जब भी आप के सामने भोजन आता है, आप इसें एक वस्तु की तरह न समझें जिसका आप उपयोग कर सकते हैं या फेंक सकते है - यह जीवन है। अगर आप अपने जीवन को विकसित करना चाहते हैं,तो आप को भोजन,जल,वायु और पृथ्वी को जीवन के रूप में देखना होगा - क्योंकि ये वे तत्व है जिससे आपका निर्माण हुआ है। अन्न दान एक तरीका है जिस के द्वारा आप पूरे जुड़ाव के साथ अपने हाथों से, प्रेम और भक्ति के साथ खाना परोसते हुए दूसरे इंसान से गहराई से जुड़ सकते हैं।*

*🌻हमारे प्राचीन भारतीय शास्त्रों के अनुसार अगर इस संसार में कोई सबसे बड़ा दान है तो वह है अन्न दान l यह संसार अन्न से ही चलता है और अन्न की सहायता से ही इसकी रचनाओं का पालन हो रहा है। अन्न एकमात्र ऐसी वस्तु है जिससे शरीर के साथ-साथ आत्मा भी तृप्त होती है। इसीलिए कहा गया है कि अगर कुछ दान करना ही है तो अन्नदान करो। अन्नदान करने से बहुत लाभ होता है।सभी शास्त्रों में जितने दान और व्रत कहे गए हैं, उनकी तुलना में अन्नदान सबसे श्रेष्ठ है।*

*🌻इस संसार का मूल अन्न है, प्राण का मूल अन्न है। यह अन्न अमृत बनकर मुक्ति देता है। सात धातुएं अन्न से ही पैदा होती हैं, यह अन्न जगत का उपकार करता है। इसलिए अन्न का दान करना चाहिए। इन्द्र आदि देवता भी अन्न की उपासना करते हैं, वेद में अन्न को ब्रह्मा कहा गया है। सुख की कामना से ऋषियों ने पहले अन्न का ही दान किया था। इस दान से उन्हें तार्किक और पारलौकिक सुख मिला। जो इंसान पूरे विधि-विधान से अन्नदान करता है, उसे पुण्य और यश की प्राप्ति होती है।*

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*👉नोट~~~~ आज सिद्ध योग में कुमकुम का दान करना शुभफलदायी है।*
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*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®**👉पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण ...
16/03/2026

*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®*

*👉पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण करते थे। पंचांग को नित्य पढ़ने और सुनने से देवताओं की कृपा, कुंडली के ग्रहो के शुभ फल मिलते है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फल की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना और पढ़ना चाहिए।*

*🐚🌺📜आज का पञ्चाङ्ग📜🌺🐚*

🔅 आज का दिनाँक 16 मार्च 2026
🔅 दिन - सोमवार
🔅 विक्रम संवत - 𝟐𝟎𝟖𝟐
🔅 शाकः संवत - 𝟏𝟗𝟒𝟕
🔅 संवत्सर नाम - सिद्धार्थी
🔅 अयन - उत्तरायण
🔅 ऋतु - बसंत
🔅 मास - चैत्र
🔅 पक्ष - कृष्णपक्ष
🔅 तिथि - द्वादशी
🔅 नक्षत्र - घनिष्ठा
🔅 योग - शिव
🔅 दिशाशूल - पूर्व दिशा मे
🔅 सूर्योदय - 06:45 मिनट पर
🔅 सूर्यास्त - 18:46 मिनट पर
🔅 चंद्रोदय - 29:36 मिनट पर
🔅 चंद्रास्त - 16:11 मिनट पर
🔅 राहुकाल - 08:15 - 09:46 अशुभ
🔅 अभिजित -12:23 -13:10 शुभ
🔅 तिथि विशेष - पंचक प्रारभ , पापमोचनी एकादशी पारण , प्रदोष व्रत
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*🔱⚜ भाग्योदय के लिए क्या करें⚜🔱*

*👉मीन सक्रांति आखिर क्यों मनायी जाती है::---------*

*🌻हर माह एक सक्रांति मनायी जाती है सूर्य हर माह एक राशि से दूसरी राशि में भ्रमण करता है जब वो मीन राशि में भ्रमण करने जाता है तब मीन सक्रांति मनायी जाती है इस सक्रांति का अपना विशेष महत्ता होती है जिसे करने से नकरात्मकता दूर होती है साथ ही सकरात्मक विचार मन में आते हैं.!*

*👉क्या है मीन सक्रांति:-*

*🌻हमारे हिन्दू कैलेंडर में हर माह एक सक्रांति होती है जिनकी संख्या 12 होती है मीन संक्रांति वर्ष के आखिरी माह की संक्रांति होती है जिसके कारणवश इसका विशेष महत्व होता है प्रत्येक माह सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में भ्रमण करते हैं सूर्य के मीन राशि में संक्रमण करने की तिथि को मीन संक्रांति कहा जाता है इस बार यहाँ 14 मार्च दिन रविवार को मनायी गई थी.!*

*🌻दक्षिण भारत में इसे मीन सक्रांति के नाम से भी जाना जाता हैं बाकी सक्रांति की तरह इस सक्रांति को भी दान पुण्य करने का विशेष महत्व है इस दिन पवित्र नदियों में स्नान किया जाता है ये सक्रांति ओडिशा में बड़े उल्लास पूर्वक मनाया जाता है जिसमें एक अलग आनंद की छटा दिखाई देती है.!*

*👉मीन सक्रांति क्यों है इतनी खास:-*

*🌻जैसा कि हम सब इसे अवगत है कि हिन्दू कैलेंडर में 12 सक्रांति होती है जिनका अपना अपना महत्व होता है किन्तु मीन संक्रांति वर्ष के आखिरी माह की संक्रांति होती है जिसके कारणवश इसका विशेष महत्व होता है उत्तरायण होते सूर्य के कारण दिन का समय बढ़ने लगता है और रात्रि छोटी होने लगती हैं इस समय प्रकृति में नया सृजन होता है इस समय उपासना, ध्यान, योग करने से तन-मन और बुद्धि को पुष्ट होती है मीन संक्रांति पर भगवान सूर्य की उपासना से नकारात्मकता दूर होती है और ऊर्जा की प्राप्ति होती है.!*

*👉मीन सक्रांति की पूजन विधि:-*

*🌻मीन सक्रांति की पूजन विधि कुछ इस तरह से है इस दिन सुबह सूर्यादय से पहले पवित्र नदियों में स्नान करना अच्छा माना जाता है किन्तु किसी कारणवश नदियों में स्नान नहीं कर पाएं तो घर पर ही पानी में गंगाजल डालकर स्नान करना भी अच्छा होता है स्नान करने का बाद सूर्यदेव को प्रणाम करके उन्हें अर्घ्य दें संक्रांति के दिन मंदिर में जाकर भगवान के दर्शन करें इस दिन वैदिक मंत्रों का जाप करना बहुत ही शुभफलदायी रहता है.!*

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*👉नोट~~~~ आज शिव योग में दूध का दान करना शुभफलदायी है।*
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*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®**👉पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण ...
15/03/2026

*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®*

*👉पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण करते थे। पंचांग को नित्य पढ़ने और सुनने से देवताओं की कृपा, कुंडली के ग्रहो के शुभ फल मिलते है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फल की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना और पढ़ना चाहिए।*

*🐚🌺📜आज का पञ्चाङ्ग📜🌺🐚*

🔅 आज का दिनाँक 15 मार्च 2026
🔅 दिन - रविवार
🔅 विक्रम संवत - 𝟐𝟎𝟖𝟐
🔅 शाकः संवत - 𝟏𝟗𝟒𝟕
🔅 संवत्सर नाम - सिद्धार्थी
🔅 अयन - उत्तरायण
🔅 ऋतु - बसंत
🔅 मास - चैत्र
🔅 पक्ष - कृष्णपक्ष
🔅 तिथि - एकादशी
🔅 नक्षत्र - श्रवण
🔅 योग - परिघ
🔅 दिशाशूल - पश्चिम दिशा मे
🔅 सूर्योदय - 06:47 मिनट पर
🔅 सूर्यास्त - 18:45 मिनट पर
🔅 चंद्रोदय - 29:02 मिनट पर
🔅 चंद्रास्त - 15:11 मिनट पर
🔅 राहुकाल - 17:15 - 18:45 अशुभ
🔅 अभिजित -12:23 -13:10 शुभ
🔅 तिथि विशेष - द्विपुष्कर योग, पापमोचनी एकादशी , मीन संक्रांति
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*🔱⚜ भाग्योदय के लिए क्या करें⚜🔱*

*👉सूर्य का मीन राशि में प्रवेश: साप्ताहिक राशिफल पर खास प्रभाव:--*

*🌹सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करते ही ग्रहों की ऊर्जा में एक नया बदलाव देखने को मिलता है। ज्योतिष के अनुसार यह समय भावनाओं, कल्पनाशीलता और आध्यात्मिकता को बढ़ाने वाला माना जाता है। इस परिवर्तन का असर सभी राशियों के जीवन पर अलग-अलग रूप में दिखाई देगा। आइए जानते हैं कि सूर्य के इस गोचर से आपका साप्ताहिक राशिफल कैसा रहने वाला है।*

*1. मेष*

*"आपका रुका काम सरलता से पूरा होगा। जीवनसाथी का व्यवहार नरम रहेगा। परिवार के साथ समय बिताएंग े और घर के लिए जरूरी सामान खरीदेंगे। सेहत अच्छी रहेगी और कम मेहनत में अधिक लाभ होगा। कानूनी पेशे वालों के लिए समय शुभ है। वाहन चलाते समय सावधानी बरतें।*

*2. वृषभ*

*"सप्ताह का आरंभ शुभ रहेगा। कार्यक्षेत्र में स्थानांतरण हो सकता है। परिजनो ं के विचारों को महत्व देंगे। धन लाभ होगा और मानसिक परेशानिया दूर होंगी। बीमार लोगों की सेहत सुधरेगी। निर्णय वरिष्ठों की सलाह से लें। गठिया के रोगी सावधान रहें। जीवनसाथी की सेहत का ध्यान रखें।*

*3. मिथुन*

*"सप्ताह का अधिकतर भाग शुभ रहेगा। अविवाहितों का विवाह तय हो सकता है। ससुराल पक्ष से संबंध मधुर रहेंगे। यश और कीर्ति में वृद्धि होगी। वर्तमान परिस्थितियाँ प्रतिकूल रहेंगी। नए व्यापार में निवेश न करें। करियर के प्रति निष्ठावान रहें। बच्चों का मन पढ़ाई से हट सकता है।*

*4. कर्क*

*"पूरा सप्ताह बहुत अच्छा रहेगा, विशेषकर अंत सुखद रहेगा। सभी काम बिना बाधा पूरे होंगे। विद्यार्थियों के लिए सप्ताह शुभ है। सप्ताह की शुरुआत में सावधानी रखें। आत्मविश्वास की कमी हो सकती है और उच्चाधिकारियो ं से संबंध खराब न करें। स्वास्थ्य का ध्यान रखें, नींद मे बाधा आ सकती है।*

*5. सिंह*

*"व्यापार मे नए प्रयोग सफल रहेंगे। प्रेम संबंधो में निकटता बढ़ेगी। नई नौकरी के लिए आवेदन सफल हो सकता है। दिनचर्या सुव्यवस्थित रखें। नकारात्मक चिंतन से बचें। कोर्ट-कचहरी के मामलो में परेशानी हो सकती है। धोखा और विश्वासघात से सावधान रहें। यात्रा में असुविधा होगी।*

*6. कन्या*

*"सप्ताह की शुरुआत शानदार रहेगी। विनम्र आचरण से लोग प्रभावित होंगे। आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी और आय के नए स्रोत मिलेंगे। नशीले पदार्थों से दूर रहें। प्रेम में अति आसक्ति न रखें। महंगी वस्तुएं न खरीदें। गोपनीय योजना लीक हो सकती है। सप्ताह के मध्य तनाव रहेगा।*

*7. तुला*

*"सप्ताह की शुरुआत शानदार रहेगी। कार्यक्षेत्र में निर्णय समझदारी से लेंगे। तकनीक समस्याओ का समाधान होगा। मीडिया क्षेत्र के लोगों की आय बढ़ सकती है। रिश्तेदारों से संबंध खराब हो सकते हैं। शरीर में थकान और पारिवारिक कलह संभव है। प्रेम संबंधो मे दूरी आ सकती है।*

*8. वृश्चिक*

*"कार्यक्षेत्र में कठिन परिश्रम करेंगे। नए व्यापारिक समझौते होंगे। प्रतियोगी परीक्षा मे सफलता मिलेगी। निजी जीवन में शांति रहेगी। बहुप्रतीक्षित कार्य सफल होंगे। नए कारोबार के लिए लोन लेना पड़ेगा। स्वास्थ्य समस्याए बनी रहेंगी। दिखावे मे महंगी वस्तुएं न खरीदें। छोटे भाई-बहनो से मनमुटाव होगा।*

*9. धनु*

*"सप्ताह की शुरुआत अच्छी रहेगी। नई तकनीक सीखने में व्यस्त रहेंगे। आर्थिक दृस्टि से सप्ताह शुभ है। बड़ा निर्णय लेना पड़ सकता है। कार्य की प्रशंसा होगी। सामाजिक सक्रियता बढ़ेगी, सुरक्षा का ध्यान रखें। निवेश में सावधानी बरतें। कड़वी बातें न बोलें। दांपत्य संबंधों को समय दें।*

*10. मकर*

*"ऑनलाइन शॉपिंग मे ऑफर मिलेंगे। घर में प्रसन्नता का माहौल रहेगा। बीमारों की सेहत सुधरेगी। बुजुर्गों का आशीर्वाद मिलेगा। विदेशी क्लाइंट से व्यापार के अवसर बनेंगे। परिवार को समय दें। सोशल मीडिया पर कम समय बिताएं। बच्चों से अच्छा व्यवहार रखें।*

*11. कुंभ*

*"कार्यक्षेत्र में लाभ की स्थितिया बनेंगी। बॉस मेहनत की प्रशंसा करेंगे। दांपत्य जीवन में प्रेम बढ़ेगा। विशेष कार्य के अवसर मिलेंगे। नया वाहन खरीदने का विचार बनेगा। सप्ताह की शुरुआत अच्छी नही रहेगी। उधार लेन-देन मे सावधानी बरतें। खांसी-जुकाम से बचाव रखें। आवेग में गलत निर्णय न लें।*

*12. मीन*

*"सभी कार्य शांतिपूर्वक पूरे होंगे। व्यापार में विस्तार की योजना बनेगी। बेरोजगारों को नौकरी मिल सकती है। राजनीति में पकड़ मजबूत होगी। जीवनसाथी से संबंध मधुर रहेंगे। पुरानी यादो से मन व्यथित होगा। जीवनसाथी की कड़वी बातों को गंभीरता से न लें। सेहत में लापरवाही न करें।*

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*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®**👉पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण ...
14/03/2026

*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®*

*👉पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण करते थे। पंचांग को नित्य पढ़ने और सुनने से देवताओं की कृपा, कुंडली के ग्रहो के शुभ फल मिलते है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फल की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना और पढ़ना चाहिए।*

*🐚🌺📜आज का पञ्चाङ्ग📜🌺🐚*

🔅 आज का दिनाँक 14 मार्च 2026
🔅 दिन - शनिवार
🔅 विक्रम संवत - 𝟐𝟎𝟖𝟐
🔅 शाकः संवत - 𝟏𝟗𝟒𝟕
🔅 संवत्सर नाम - सिद्धार्थी
🔅 अयन - उत्तरायण
🔅 ऋतु - बसंत
🔅 मास - चैत्र
🔅 पक्ष - कृष्णपक्ष
🔅 तिथि - दशमी
🔅 नक्षत्र - उत्तराषाढा
🔅 योग - वरियान
🔅 दिशाशूल - पूर्व दिशा मे
🔅 सूर्योदय - 06:48 मिनट पर
🔅 सूर्यास्त - 18:45 मिनट पर
🔅 चंद्रोदय - 28:25 मिनट पर
🔅 चंद्रास्त - 14:11 मिनट पर
🔅 राहुकाल - 09:47 - 11:17 अशुभ
🔅 अभिजित -12:23 -13:10 शुभ
🔅 तिथि विशेष - सर्वार्थसिद्धि योग
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*🔱⚜ भाग्योदय के लिए क्या करें⚜🔱*

*👉शनि चालीसा के पाठ से हर तरह के विघ्न व दुर्भाग्य कैसे होते है दूर::----------*

*जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनय विनय महाराज।*
*कृपा करहुं हे रवि तनय, राखहु जन-जन की लाज।।*

*🌻कलयुग के इस कलकाल में दो ही देवता जाग्रत माने जाते है, शनिदेव और हनुमान जी। किसी भी व्यक्ति को राजा बनाना या किसी को भी रंक बनाना या किसी व्यक्ति को साधु बना देना , विद्वान बना देना , शैतान बना देना शनि देव का काम माना जाता है। इस पूरे बृह्मांड में शनि ही एक ऐसा ग्रह है जो कि मोक्ष प्रदान करने में पूरी तरह से समक्ष है। जब शनि देव आपको कठिनाई देते है और आपके कार्यों में समस्याएं पैदा करते है तो आपको उस समय मान लेना चाहिए कि शनि देव उस समय आपको कुछ सीखा रहें अर्थात आने वाले समय के लिए आपको और भी मजबूत कर रहे है ताकि आपका विश्वास कमजोर न होने पायें। शनि देव समस्याएं जरुर पैदा करते है परंतु भविष्य उज्जवल करते है और भविष्य में चमक पैदा करते है, परंतु जब शनिदेव समस्याएं पैदा कर रहे होते है और उस समय हमारा इम्यून सिस्टम अर्थात हमारी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है तो हमारी यह समस्याएं बढ़ती जाती है। ऐसे समय में शनि चालीसा का पाठ करने से हमारे अंदर रोग प्रतिरोधक क्षमता, बीमारियों से लड़ने की ताकत और जीवन में आने वाले हर विघ्न का सामना करने की क्षमता शनि चालीसा का पाठ करने से प्राप्त होती है।*

*🌻शनि देव की कृपा सभी लोगों पर एक जैसी होती है परंतु जो शनि देव के उपासक है या शनिदेव के भक्त है तो ऐसा नही है कि उनके जीवन में समस्या नही आती लेकिन बहुत आसानी से उन पर विजय प्राप्त कर लेते है। आप यदि अपने कार्य क्षेत्र में तरक्की कर रहे है तो शनि देव पूरी तरह से आपके ऊपर मेहरवान है क्योंकि शनि देव को ही भाग्य के देवता कहा जाता है। शनि देव आर्शीवाद के बिना कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में सफल नही हो सकता है। ऐसे में शनि चालीसा का पाठ बहुत ही उपयोगी और लाभकारी माना गया है क्योंकि जब इंसान के जीवन का बहुत बुरा समय चल रहा हो और वह इसके निवारण के लिए लिए शनि चालीसा का पाठ करता या फिर करवाता है तो यह बुरा समय बहुत ही आसानी से दूर हो जाता है।*

*🌻शनि चालीसा विधि – शनि चालीसा का पाठ करने से पूर्व सबसे पहले मन में संकल्प करें या फिर जिस किसी पंडित जी से आप शनि चालीसा का पाठ करवाना चाह रहें है उनको संकल्प दें। शनि चालीसा का पाठ किसी भी शनिवार से प्रारंभ कर सकते है और यह पाठ सूर्य अस्त होने के बाद ही करें। शनि चालीसा का पाठ करने से पहले एक लोहे का टुकड़ा अपने सामने जरुर रख लें।*

*👉नोट – शनिवार के दिन भूलकर भी मांस-मदिरा का सेवन बिल्कुल न करें और हो सके तो इस दिन घर के सदस्यों को भी ऐसा भोजन करने से रोक दें।*

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*👉नोट~~~~ आज वरियान योग में कम्बल का दान करना शुभफलदायी है।*
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13/03/2026

*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®*

*👉पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण करते थे। पंचांग को नित्य पढ़ने और सुनने से देवताओं की कृपा, कुंडली के ग्रहो के शुभ फल मिलते है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फल की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना और पढ़ना चाहिए।*

*🐚🌺📜आज का पञ्चाङ्ग📜🌺🐚*

🔅 आज का दिनाँक 13 मार्च 2026
🔅 दिन - शुक्रवार
🔅 विक्रम संवत - 𝟐𝟎𝟖𝟐
🔅 शाकः संवत - 𝟏𝟗𝟒𝟕
🔅 संवत्सर नाम - सिद्धार्थी
🔅 अयन - उत्तरायण
🔅 ऋतु - बसंत
🔅 मास - चैत्र
🔅 पक्ष - कृष्णपक्ष
🔅 तिथि - दशमी
🔅 नक्षत्र - पूर्वाषाढा
🔅 योग - व्यतिपात
🔅 दिशाशूल - पश्चिम दिशा मे
🔅 सूर्योदय - 06:49 मिनट पर
🔅 सूर्यास्त - 18:44 मिनट पर
🔅 चंद्रोदय - 27:44 मिनट पर
🔅 चंद्रास्त - 13:12 मिनट पर
🔅 राहुकाल - 11:17 - 12:46 अशुभ
🔅 अभिजित -12:23 -13:10 शुभ
🔅 तिथि विशेष -....
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*🔱⚜ भाग्योदय के लिए क्या करें⚜🔱*

*👉जानिए भद्रा की शुभता-अशुभता पंचांग में भद्रा का महत्व::-------------*

*🌻किसी भी मांगलिक कार्य में भद्रा योग का विशेष ध्यान रखा जाता है। क्योंकि भद्रा काल में मंगल-उत्सव की शुरुआत या समाप्ति अशुभ मानी जाती है। अत: भद्रा काल की अशुभता को मानकर कोई भी आस्थावान व्यक्ति शुभ कार्य नहीं करता। इसलिए जानते हैं कि आखिर क्या होती है भद्रा और क्यों इसे अशुभ माना जाता है?*

*🌻पुराणों के अनुसार भद्रा भगवान सूर्य देव की पुत्री और राजा शनि की बहन है। शनि की तरह ही इसका स्वभाव भी कड़क बताया गया है। उनके स्वभाव को नियंत्रित करने के लिए ही भगवान ब्रह्मा ने उन्हें कालगणना या पंचाग के एक प्रमुख अंग विष्टी करण में स्थान दिया। भद्रा की स्थिति में कुछ शुभ कार्यों, यात्रा और उत्पादन आदि कार्यों को निषेध माना गया। किंतु भद्रा काल में तंत्र कार्य, अदालती और राजनैतिक चुनाव कार्यों सुफल देने वाले माने गए हैं।*

*👉पंचांग में भद्रा का महत्व::--------*

*🌻श्रीसारस्वत पंचांग के पांच प्रमुख अंग होते हैं। यह है - तिथि, वार, योग, नक्षत्र और करण। इनमें करण एक महत्वपूर्ण अंग होता है। यह तिथि का आधा भाग होता है। करण की संख्या 11 होती है। यह चर और अचर में बांटे गए हैं। चर या गतिशील करण में बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज और विष्टि गिने जाते हैं। अचर या अचलित करण में शकुनि, चतुष्पद, नाग और किंस्तुघ्न होते हैं। इन 11 करणों में सातवें करण विष्टि का नाम ही भद्रा है। यह सदैव गतिशील होती है। पंचाग शुद्धि में भद्रा का खास महत्व होता है।*

*🌻यूं तो भद्रा का शाब्दिक अर्थ है कल्याण करने वाली लेकिन इस अर्थ के विपरीत भद्रा या विष्टी करण में शुभ कार्य निषेध बताए गए हैं। ज्योतिष विज्ञान के अनुसार अलग-अलग राशियों के अनुसार भद्रा तीनों लोकों में घूमती है। जब यह मृत्युलोक में होती है, तब सभी शुभ कार्यों में बाधक या या उनका नाश करने वाली मानी गई है।*

*🌻जब चंन्द्रमा, कर्क, सिंह, कुंभ व मीन राशि में विचरण करता है और भद्रा विष्टी करण का योग होता है, तब भद्रा पृथ्वीलोक में रहती है। इस समय सभी कार्य शुभ कार्य वर्जित होते है। इसके दोष निवारण के लिए भद्रा व्रत का विधान भी धर्मग्रंथों में बताया गया है।*

*👉भद्रा की उत्पत्ति::---------*

*🌻ऐसा माना जाता है कि दैत्यों को मारने के लिए भद्रा गर्दभ (गधा) के मुख और लंबे पुंछ और तीन पैर युक्त उत्पन्न हुई। पौराणिक कथा के अनुसार भद्रा भगवान सूर्य नारायण और पत्नी छाया की कन्या व शनि की बहन है।*

*🌻भद्रा, काले वर्ण, लंबे केश, बड़े दांत वाली तथा भयंकर रूप वाली कन्या है। जन्म लेते ही भद्रा यज्ञों में विघ्न-बाधा पहुंचाने लगी और मंगल-कार्यों में उपद्रव करने लगी तथा सारे जगत को पीड़ा पहुंचाने लगी। उसके दुष्ट स्वभाव को देख कर सूर्य देव को उसके विवाह की चिंता होने लगी और वे सोचने लगे कि इस दुष्टा कुरूपा कन्या का विवाह कैसे होगा? सभी ने सूर्य देव के विवाह प्रस्ताव को ठुकरा दिया। तब सूर्य देव ने ब्रह्मा जी से उचित परामर्श मांगा।*

*🌻ब्रह्मा जी ने तब विष्टि से कहा कि -'भद्रे, बव, बालव, कौलव आदि करणों के अंत में तुम निवास करो तथा जो व्यक्ति तुम्हारे समय में गृह प्रवेश तथा अन्य मांगलिक कार्य करें, तो तुम उन्ही में विघ्न डालो, जो तुम्हारा आदर न करे, उनका कार्य तुम बिगाड़ देना। इस प्रकार उपदेश देकर बृह्मा जी अपने लोक चले गए।*

*🌻तब से भद्रा अपने समय में ही देव-दानव-मानव समस्त प्राणियों को कष्ट देती हुई घूमने लगी। इस प्रकार भद्रा की उत्पत्ति हुई।*

*🌻भद्रा का दूसरा नाम विष्टि करण है। कृष्णपक्ष की तृतीया, दशमी और शुक्ल पक्ष की चर्तुथी, एकादशी के उत्तरार्ध में एवं कृष्णपक्ष की सप्तमी-चतुर्दशी, शुक्लपक्ष की अष्टमी-पूर्णमासी के पूर्वार्ध में भद्रा रहती है।*

*🌻जिस भद्रा के समय चन्द्रमा मेष, वृष, मिथुन, वृश्चिक राशि में स्थित तो भद्रा निवास स्वर्ग में होता है। यदि चन्द्रमा कन्या, तुला, धनु, मकर राशि में हो तो भद्रा पाताल में निवास करती है और कर्क, सिंह, कुंभ, मीन राशि का चन्द्रमा हो तो भद्रा का भू-लोक पर निवास रहता है। शास्त्रों के अनुसार धरती लोक की भद्रा सबसे अधिक अशुभ मानी जाती है। तिथि के पूर्वार्ध की दिन की भद्रा कहलाती है। तिथि के उत्तरार्ध की भद्रा को रात की भद्रा कहते हैं। यदि दिन की भद्रा रात के समय और रात्रि की भद्रा दिन के समय आ जाए तो भद्रा को शुभ मानते हैं।*

*🌻यदि भद्रा के समय कोई अति आवश्यक कार्य करना हो तो भद्रा की प्रारंभ की 5 घटी जो भद्रा का मुख होती है, अवश्य त्याग देना चाहिए।*

*🌻भद्रा 5 घटी मुख में, 2 घटी कंठ में, 11 घटी ह्रदय में और 4 घटी पुच्छ में स्थित रहती है।*

*👉जानिए भद्रा के प्रमुख दोष::-----*

*★जब भद्रा मुख में रहती है तो कार्य का नाश होता है।*

*★जब भद्रा कंठ में रहती है तो धन का नाश होता है।*

*★जब भद्रा हृदय में रहती है तो प्राण का नाश होता है।*

*★जब भद्रा पुच्छ में होती है, तो विजय की प्राप्ति एवं कार्य सिद्ध होते हैं।*

*👉भद्रा के दुष्प्रभावों से बचने का आसान उपाय है भद्रा के 12 नामों का जप करना::--------*

*धन्या दधमुखी भद्रा महामारी खरानना।*
*कालारात्रिर्महारुद्रा विष्टिश्च कुल पुत्रिका।*
*भैरवी च महाकाली असुराणां क्षयन्करी।*
*द्वादश्चैव तु नामानि प्रातरुत्थाय यः पठेत्।*
*न च व्याधिर्भवैत तस्य रोगी रोगात्प्रमुच्यते।*
*गृह्यः सर्वेनुकूला: स्यर्नु च विघ्रादि जायते।*

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*👉नोट~~~~ आज व्यतिपात योग में फलों का दान करना शुभफलदायी है।*
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*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®**👉पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण ...
12/03/2026

*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®*

*👉पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण करते थे। पंचांग को नित्य पढ़ने और सुनने से देवताओं की कृपा, कुंडली के ग्रहो के शुभ फल मिलते है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फल की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना और पढ़ना चाहिए।*

*🐚🌺📜आज का पञ्चाङ्ग📜🌺🐚*

🔅 आज का दिनाँक 12 मार्च 2026
🔅 दिन - गुरुवार
🔅 विक्रम संवत - 𝟐𝟎𝟖𝟐
🔅 शाकः संवत - 𝟏𝟗𝟒𝟕
🔅 संवत्सर नाम - सिद्धार्थी
🔅 अयन - उत्तरायण
🔅 ऋतु - बसंत
🔅 मास - चैत्र
🔅 पक्ष - कृष्णपक्ष
🔅 तिथि - नवमी
🔅 नक्षत्र - मूला
🔅 योग - सिद्धि
🔅 दिशाशूल - दक्षिण दिशा मे
🔅 सूर्योदय - 06:50 मिनट पर
🔅 सूर्यास्त - 18:43 मिनट पर
🔅 चंद्रोदय - 27:00 मिनट पर
🔅 चंद्रास्त - 12:16 मिनट पर
🔅 राहुकाल - 14:16 - 15:45 अशुभ
🔅 अभिजित -12:23 -13:10 शुभ
🔅 तिथि विशेष - गाण्डमूल योग
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*🔱⚜ भाग्योदय के लिए क्या करें⚜🔱*

*👉जानिए माता लक्ष्मी और भगवान का पूजन क्यों किया जाता है एक साथ::----------------*

*🌻शास्त्रों के अनुसार भगवान गणेश का आह्वान किए बिना कोई उत्सव एवं शुभ कार्य पूर्ण नहीं माना जाता है। गणेश जी को सभी बाधाओं का निवारक माना जाता है। इसलिए, हमारे विकास में बाधा बनने वाली सभी बाधाओं से छुटकारा पाने के लिए पहले उनकी पूजा की जाती है। इसके साथ ही, देवी महालक्ष्मी के रूपों की पूजा की जाती है। पुराणों की कथा के अनुसार, एक बार देवी लक्ष्मी में अपने धन और शक्तियों को लेकर अहंकार भाव आ गया। अपने पति, भगवान विष्णु के साथ वार्तालाप करते समय, वह खुद की प्रशंसा करती रही, और दावा किया कि वह ही केवल पूजा के योग्य है। क्योंकि वे धन और संपत्ति का आशीर्वाद सभी आराध्यों को देती है। इस प्रकार बिना रुके आत्म प्रशंसा सुनने पर, भगवान विष्णु ने उनके अहंकार को दूर करने का फैसला किया। भगवान विष्णु ने कहा कि सभी गुणों के होने के बावजूद, एक महिला अधूरी रह जाती है अगर वह बच्चों की माँ नहीं है। मातृत्व परम आनंद है जिसे एक महिला अनुभव कर सकती है जबकि लक्ष्मी जी के बच्चे नहीं थे, इसलिए उन्हें पूरा नहीं माना जा सकता था। यह सुनकर देवी लक्ष्मी अत्यंत निराश हुईं। भारी मन से देवी लक्ष्मी देवी पार्वती के पास मदद मांगने गई। माता पार्वती के दो पुत्र थे, इसलिए उन्होंने देवी से अनुरोध किया कि वह उन्हें मातृत्व के आनंद का अनुभव करने के लिए अपने एक पुत्र को गोद लेने दें। पार्वती जी लक्ष्मी जी को अपने बेटे को गोद देने के लिए अनिच्छुक थी क्योंकि उन्हें ज्ञात था कि लक्ष्मी जी लंबे समय तक एक स्थान पर नहीं रहती है। इसलिए, वह अपने बेटे की देखभाल नहीं कर पाएगी। लेकिन लक्ष्मी ने उसे विश्वास दिलाया कि वह हर संभव तरीके से उनके बेटे की देखभाल करेगी और उसे सभी खुशियों से नवाजेंगी। लक्ष्मी के दर्द को समझते हुए, देवी पार्वती ने उन्हें अपने पुत्र के रूप में गणेश को अपनाने दिया। देवी लक्ष्मी बेहद खुश हो गईं और कहा कि जो भी आराधक मेरे साथ गणेश का पूजन करेगा, मैं उसे अपनी सभी सिद्धियाँ और समृद्धि दूँगी। इसलिए तभी से धन के लिए लक्ष्मी की पूजा करने वालों को सबसे पहले गणेश की पूजा करनी चाहिए। जो लोग बिना गणेश के लक्ष्मी की पूजा करेंगे उन्हें देवी की कृपा पूर्ण रुप से नहीं मिलती है, ऐसा माना जाता है। इसलिए हमेशा गणेश के साथ-साथ लक्ष्मी की भी पूजा की जाती है। साथ ही यह भी माना जाता है कि बिना बुद्धि के धन पाने से धन का दुरुपयोग ही होगा। इसलिए, सबसे पहले धन को सही तरीके से खर्च करने के लिए बुद्धि प्राप्त करनी चाहिए। बुद्धि प्राप्ति के लिए श्रीगणेश जी की पूजा कर उनसे सद्बुद्धि के लिए प्रार्थना की जाती है और इसके पश्चात श्री लक्ष्मी जी का शास्त्रोंसम्मत विधि से पूजन करना चाहिए।*

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*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®**👉पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण ...
10/03/2026

*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®*

*👉पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण करते थे। पंचांग को नित्य पढ़ने और सुनने से देवताओं की कृपा, कुंडली के ग्रहो के शुभ फल मिलते है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फल की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना और पढ़ना चाहिए।*

*🐚🌺📜आज का पञ्चाङ्ग📜🌺🐚*

🔅 आज का दिनाँक 10 मार्च 2026
🔅 दिन - मंगलवार
🔅 विक्रम संवत - 𝟐𝟎𝟖𝟐
🔅 शाकः संवत - 𝟏𝟗𝟒𝟕
🔅 संवत्सर नाम - सिद्धार्थी
🔅 अयन - उत्तरायण
🔅 ऋतु - बसंत
🔅 मास - चैत्र
🔅 पक्ष - कृष्णपक्ष
🔅 तिथि - सप्तमी
🔅 नक्षत्र - अनुराधा
🔅 योग - हर्षण
🔅 दिशाशूल - उत्तर दिशा मे
🔅 सूर्योदय - 06:52 मिनट पर
🔅 सूर्यास्त - 18:42 मिनट पर
🔅 चंद्रोदय - 25:15 मिनट पर
🔅 चंद्रास्त - 10:39 मिनट पर
🔅 राहुकाल - 15:45 - 17:13 अशुभ
🔅 अभिजित -12:25 -13:12 शुभ
🔅 तिथि विशेष - शीतला सप्तमी, रवियोग
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*🔱⚜ भाग्योदय के लिए क्या करें⚜🔱*

*👉ये सपने होते हैं बहुत ख़ास, जानें इनका संकेत एवं महत्व:-------*

*🌻सपने वो नहीं होते जिन्हें तुम रात को सोते वक्त देखते हो सपने वो होते हैं जो तुम्हें सोने नहीं देते ए. पी.जी अब्दुल कलाम का ये कथन हम अक्सर सुनते हैं जो बहुत प्रेरणादायी विचार है लेकिन क्या आप जानते हैं जो हम सपने देखते हैं वो हमारे भविष्य में होने वाली घटना का भी संकेत देते हैं.!*

*🌻आईए आज हम बात करते हैं उन सपनों में दिखाई देने वाले चीजों की जिसे देखकर हम अक्सर खुशी, दुखी या डर जाते हैं.!*

*👉आकाश की ओर उड़ना - लम्बी यात्रा:-*

*★अगर कोई व्यक्ति खुद को हेलीकॉप्टर में बैठा हुए देखता है तो ये सपना उसे संकेत देता है कि वो किसी लम्बी यात्रा में जाने वाला है.!*

*👉सूर्य को देखना - किसी महात्मा के दर्शन:-*

*★अगर कोई व्यक्ति किसी रोज सपने में ये देखता है कि वो सूर्य को देख रहा है तो इसका संकेत यहाँ मिलता है कि उसे किसी महात्मा के दर्शन होने वाले है.!*

*👉बादल देखना - तरक्की:-*

*★बचपन में जब हेलीकॉप्टर ऊपर से जाता हुआ हमें दिखाई देता था तो हम आकाश की ओर देखकर हेलीकॉप्टर बाय- बाय करते थे अगर सपनों में हम बादल देखते हैं तो उसका मतलब है कि आप जल्द ही तरक्की करने वाले है.!*

*👉घोड़े पर चढ़ना - व्यापार में उन्नति:-*

*★घोड़े पर चढ़कर दुल्हा दुल्हन के घर जाता है ये हम अक्सर देखते हैं लेकिन अगर हम सपनों में हम खुद को घोड़े पर चढ़ते हुए देखते है तो ये हमारे व्यापार में उन्नति होने का संकेत है.!*

*👉शीशे में मुंह देखना - स्त्री से प्रेम:-*

*★आम तौर हम खुद को शीशे में रोज देखते हैं लेकिन अगर कोई पुरुष सपनें में खुद को शीशे में देखता है तो इसका मतलब उसे किसी स्त्री से प्रेम होने वाला है.!*

*👉ऊंचे से गिरना - हानि:-*

*★मूवी में हीरो को ऊंचाई से छलाग लगाते हुए हम अक्सर देखते हैं लेकिन हम खुद को अगर ऊंचाई से गिरता हुआ देखते हैं तो ये हानि का संकेत है.!*

*👉बाग - फुलवारी देखना - खुशी:-*

*★बागों में से फूल तोड़ना आमबात है लेकिन अगर आप सपनों में बाग देखते हैं तो इसका मतलब आपके जीवन में खुशी आने वाली है.!*

*👉सर के कटे बाल देखना - कर्ज से छुटकारा:-*

*★सिर के बाल को काटना सामान्य बात है लेकिन अगर आप सपनों में खुद के बाल को काटते हुए देखते है तो ये खुशी की बात है आप कर्ज से मुक्त होने वाले है.!*

*👉पाखाना करना - धन प्राप्त:-*

*★हम रोज ही पाखाना करते हैं जो सपनों में करते हुए देखना भले ही गंदा सा लगे लेकिन इसका सपना देखना आपको धन प्राप्त करने का संकेत देता है.!*

*👉फूल देखना - प्रेमी मिले:-*

*★गुलाब के फूल को लगातार देखना बड़े ही सुख की अनुभूति करता है ऐसे में अगर आप सपने में फूल को देखते हैं तो इसका संकेत ये है कि आप जल्द ही अपने प्रेमी से मिलने वाले है.!*

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*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®**👉पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण ...
09/03/2026

*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®*

*👉पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण करते थे। पंचांग को नित्य पढ़ने और सुनने से देवताओं की कृपा, कुंडली के ग्रहो के शुभ फल मिलते है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फल की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना और पढ़ना चाहिए।*

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🔅 आज का दिनाँक 09 मार्च 2026
🔅 दिन - सोमवार
🔅 विक्रम संवत - 𝟐𝟎𝟖𝟐
🔅 शाकः संवत - 𝟏𝟗𝟒𝟕
🔅 संवत्सर नाम - सिद्धार्थी
🔅 अयन - उत्तरायण
🔅 ऋतु - बसंत
🔅 मास - चैत्र
🔅 पक्ष - कृष्णपक्ष
🔅 तिथि - षष्ठी
🔅 नक्षत्र - विशाखा
🔅 योग - व्याघात
🔅 दिशाशूल - पूर्व दिशा मे
🔅 सूर्योदय - 06:53 मिनट पर
🔅 सूर्यास्त - 18:42 मिनट पर
🔅 चंद्रोदय - 24:19 मिनट पर
🔅 चंद्रास्त - 09:58 मिनट पर
🔅 राहुकाल - 08:22 - 09:50 अशुभ
🔅 अभिजित -12:25 -13:12 शुभ
🔅 तिथि विशेष - सर्वार्थसिद्धि योग, रवियोग
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*🔱⚜ भाग्योदय के लिए क्या करें⚜🔱*

*👉घी का दीपक जलाने से भगवान होते हैं अति प्रसन्न मिलाता है सुख का आशीष:--*

*🌻वास्तु शास्त्र अनुसार कई बातों का ध्यान रखते हुए यदि काम किया जाए तो इसका अच्छा फल जीवन में प्राप्त होता है. हिंदू धर्म में दीपक जलाना बेहद पवित्र माना जाता है. किसी भी पूजा या शुभ कार्य को शुरू करने से पहले दीपक जलाने से भगवान प्रसन्न होते हैं. बिना दीपक जलाए न तो कोई पूजा पूरी मानी जाती है और न ही शुभ फल मिलता है. शास्त्रों में दीपक जलाने के कई फायदे बताए गए हैं.!*

*🌻घर के मंदिर में रोजाना दीपक जलाने से सकारात्मक ऊर्जा आती है. साथ ही नकारात्मक ऊर्जा भी दूर हो जाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि घर में घी या तेल का दीपक जलाना शुभ होता है या नहीं. विस्तार से बताया जा रहा है कि भगवान को प्रसन्न करने के लिए किसका दीपक जलाना शुभ रहेगा.!*

*👉घी का दीपक जलाने के लाभ:-*

*🌻घर हो या मंदिर, दीपक की लौ के बिना पूजा पूरी नहीं मानी जाती है. भगवान दीपक से प्रसन्न होते हैं. अगर यह दीपक घी का बना हो तो भगवान को प्रसन्न करने के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है. घी का दीपक घर या मंदिर में जलाकर देवताओं को समर्पित किया जाता है. साथ ही घर में लक्ष्मी का वास होता है और सुख-शांति बनी रहती है. इससे घर के वास्तु दोष भी दूर होते हैं और नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है.!*

*👉तेल का दीपक मनोकामना पूर्ण करता है.!*

*🌻अगर आप अपनी मनोकामना पूरी करना चाहते हैं तो भगवान के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इससे जातक की मनोकामना पूरी हो सकती है. इसके अलावा शनिवार के दिन शनि देव के मंदिर या पीपल के पेड़ पर सरसों के तेल का दीपक जलाने से शनि पीड़ा से मुक्ति मिलती है. ध्यान रहे कि टूटा हुआ दीपक शुभ नहीं माना जाता है. साथ ही तेल का दीपक जलाते समय लंबी बत्ती का ही प्रयोग करें.!*

*👉दीपक जलाते समय दिशा का ध्यान रखें.!*

*🌻जब भी आप दीपक जलाएं तो उसे पश्चिम दिशा में ही रखें. ऐसा करने से आपके घर में सकारात्मक ऊर्जा का आगमन हो सकता है.!*
*👉घी का दीपक जलाने से भगवान होते हैं अति प्रसन्न मिलाता है सुख का आशीष:--*

*🌻वास्तु शास्त्र अनुसार कई बातों का ध्यान रखते हुए यदि काम किया जाए तो इसका अच्छा फल जीवन में प्राप्त होता है. हिंदू धर्म में दीपक जलाना बेहद पवित्र माना जाता है. किसी भी पूजा या शुभ कार्य को शुरू करने से पहले दीपक जलाने से भगवान प्रसन्न होते हैं. बिना दीपक जलाए न तो कोई पूजा पूरी मानी जाती है और न ही शुभ फल मिलता है. शास्त्रों में दीपक जलाने के कई फायदे बताए गए हैं.!*

*🌻घर के मंदिर में रोजाना दीपक जलाने से सकारात्मक ऊर्जा आती है. साथ ही नकारात्मक ऊर्जा भी दूर हो जाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि घर में घी या तेल का दीपक जलाना शुभ होता है या नहीं. विस्तार से बताया जा रहा है कि भगवान को प्रसन्न करने के लिए किसका दीपक जलाना शुभ रहेगा.!*

*👉घी का दीपक जलाने के लाभ:-*

*🌻घर हो या मंदिर, दीपक की लौ के बिना पूजा पूरी नहीं मानी जाती है. भगवान दीपक से प्रसन्न होते हैं. अगर यह दीपक घी का बना हो तो भगवान को प्रसन्न करने के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है. घी का दीपक घर या मंदिर में जलाकर देवताओं को समर्पित किया जाता है. साथ ही घर में लक्ष्मी का वास होता है और सुख-शांति बनी रहती है. इससे घर के वास्तु दोष भी दूर होते हैं और नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है.!*

*👉तेल का दीपक मनोकामना पूर्ण करता है.!*

*🌻अगर आप अपनी मनोकामना पूरी करना चाहते हैं तो भगवान के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इससे जातक की मनोकामना पूरी हो सकती है. इसके अलावा शनिवार के दिन शनि देव के मंदिर या पीपल के पेड़ पर सरसों के तेल का दीपक जलाने से शनि पीड़ा से मुक्ति मिलती है. ध्यान रहे कि टूटा हुआ दीपक शुभ नहीं माना जाता है. साथ ही तेल का दीपक जलाते समय लंबी बत्ती का ही प्रयोग करें.!*

*👉दीपक जलाते समय दिशा का ध्यान रखें.!*

*🌻जब भी आप दीपक जलाएं तो उसे पश्चिम दिशा में ही रखें. ऐसा करने से आपके घर में सकारात्मक ऊर्जा का आगमन हो सकता है.!*

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