06/10/2024
टारगेट बैचज में वापस सीनियर फैकल्टी को तरजीह दिए जाने लगी
✍️प्रवीण केमिस्ट्री वाले (PCW)
एक समय ऐसा था कि नए स्टूडेंट जो प्री फाउंडेशन या फाउंडेशन बैचज में आ रहे थे,उन्हें एकदम यंग एनर्जेटिक टीचर्स की रिक्वायरमेंट रहती थी.वह चाहते थे की क्लास में एंजॉयमेंट के साथ पढ़ाई हो.लेकिन इससे धीरे-धीरे क्लास का माहौल और डिसिप्लिन खराब होने लगे. इससे पढ़ने वाले स्टूडेंट को प्रॉब्लम्स आने लगी.धीरे-धीरे एक धारणा बनने लगी की जो टीचर एंजॉयमेंट करवाता है वही बच्चों को ढंग से समझा पाता है.
धीरे-धीरे पैरेंट्स भी बच्चों की पसंद को तरजीह देने लगे.लेकिन जब ऐसे टीचरों के कारण सिलेक्शन रेशों धीरे-धीरे कम होता हुआ शून्य पर पहुंच गया,तो टारगेट बैच के अधिकांश स्टूडेंट, (जो केवल और केवल कैरियर बनाना ही अपना धेय समझते हैं) इस भ्रांति को दरकिनार कर केवल पढ़ाने वाले टीचर्स की डिमांड करने लगे.इन स्टूडेंट ने एक नया रास्ता निकाला पर्सनल ट्यूशन. पर्सनल ट्यूशन में जहां एक ही टीचर पूरे साल पढाता है और कोर्स भी कंप्लीट करवा देता है.प्रॉब्लम का ये सॉल्यूशन पढने वाले स्टूडेंट्स ने निकाला.आज कोटा सीकर और बड़े-बड़े शहरों में टारगेट बैच की क्लासेस केवल वरिष्ठ व विषय की गहरी समझ रखने वाले टीचर्स को ही दी जाती है.ताकि स्टूडेंट बाहर पर्सनल ट्यूशन ना करें.धीरे-धीरे यह धारणा टारगेट बैच से होते हुए ट्वेल्थ के बैच में भी प्रभावी होने लगी है.दोहरा मतलब संवाद वाली फैकेल्टी,एन्जॉयमेंट और बात-बात पर डायलॉग कक्षाओं के माहौल को ख़राब कर देते हैं.अनएकेडमी,बियजुस,बंसल क्लासेस आदि के ख़त्म होने का कारण निचले स्तर के हास्य फैक्लटी है,यह फैकल्टी सोशल मीडिया पर तो छाई हुई है,लेकिन रिजल्ट में जीरो है.हल्के-फुल्के गाने,एंजॉयमेंट,हास- परिहास थोड़ा बहुत क्लास में चलते रहना सभी पसंद करते हैं. लेकिन फुहड़ता को पढ़ाई से जोड़ना गलत है.आज मार्केट में सीनियर फैकल्टी की डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है जिसका मुख्य कारण है की स्टूडेंट और पेरेंट्स अब एंजॉयमेंट से ज्यादा पढ़ाई को तरजीह देने लगे हैं. लेकिन कुछ नई कोचिग फैकल्टी जो सब्जेक्ट पर पकड़ रखती है, स्टूडेंट के मनोविज्ञान को जानती हैं तथा निरंतर अपने नॉलेज को अपडेट करती रहती हैं,वह भी तेजी से आगे बढ़ रही हैं.इसका जीता जागता उदाहरण पीडब्लू है.