05/12/2025
सर्दियों में कमर और घुटनों का दर्द क्यों बढ़ जाता है? (वैज्ञानिक कारण और उपाय)
सर्दियों का मौसम अपने साथ सुहावनापन तो लाता है, लेकिन कई लोगों के लिए यह मौसम जोड़ों के दर्द (Joint Pain) की समस्या को भी साथ लेकर आता है। तापमान में गिरावट होते ही ऑर्थराइटिस (गठिया) के मरीजों, बुजुर्गों और यहां तक कि युवाओं में भी कमर और घुटनों के दर्द की शिकायत बढ़ने लगती है। आखिर ठंड और दर्द का आपस में क्या संबंध है? आइए इसे विस्तार से समझते हैं।
दर्द बढ़ने के मुख्य वैज्ञानिक कारण
सर्दियों में शरीर में होने वाले दर्द के पीछे कोई एक नहीं, बल्कि कई कारण जिम्मेदार होते हैं:
1. बैरोमेट्रिक प्रेशर (Barometric Pressure) में गिरावट
वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, ठंड के मौसम में वायुमंडलीय दबाव (Air Pressure) कम हो जाता है। जब दबाव कम होता है, तो हमारे शरीर के ऊतक (Tissues) और मांसपेशियां फैलने लगती हैं। जोड़ों के अंदर यह फैलाव नसों पर दबाव डालता है, जिससे दर्द का अहसास अधिक होता है।
2. साइनोवियल फ्लूइड (Synovial Fluid) का गाढ़ा होना
हमारे घुटनों और जोड़ों के बीच एक प्राकृतिक तरल पदार्थ होता है जिसे 'साइनोवियल फ्लूइड' कहते हैं। यह गाड़ियों में इंजन ऑयल की तरह काम करता है और हड्डियों के बीच घर्षण (Friction) को रोकता है। सर्दियों में तापमान कम होने पर यह फ्लूइड गाढ़ा (Thick) हो जाता है, जिससे जोड़ों में अकड़न आ जाती है और हिलाने-डुलाने में दर्द होता है।
3. रक्त संचार (Blood Circulation) का कम होना
ठंड में शरीर अपनी गर्मी को बचाने के लिए रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) को सिकोड़ लेता है। इससे हाथ-पैरों और जोड़ों में रक्त का प्रवाह (Blood Flow) धीमा हो जाता है। जब जोड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं मिलते, तो वहां दर्द और जकड़न महसूस होती है।
4. धूप और विटामिन D की कमी
सर्दियों में लोग धूप में कम निकलते हैं और दिन छोटे होते हैं, जिससे शरीर में विटामिन D का स्तर गिर सकता है। विटामिन D हड्डियों और मांसपेशियों की मजबूती के लिए अनिवार्य है। इसकी कमी से हड्डियों में दर्द (Bone Pain) और संवेदनशीलता बढ़ जाती है।
5. शारीरिक गतिविधि में कमी
ठंड के कारण हम अक्सर रजाई में दुबके रहना पसंद करते हैं और व्यायाम या टहलना कम कर देते हैं। निष्क्रियता (Inactivity) के कारण मांसपेशियां कमजोर और सख्त हो जाती हैं, जो दर्द का एक बड़ा कारण बनती हैं।
आयुर्वेद क्या कहता है?
आयुर्वेद के अनुसार, सर्दियों में वातावरण में 'वात दोष' (वायु और आकाश तत्व) का प्रभाव बढ़ जाता है। वात का गुण रूखा, ठंडा और चंचल होता है। जब शरीर में वात बढ़ता है, तो यह जोड़ों में सूखापन और दर्द पैदा करता है। इसलिए आयुर्वेद में सर्दियों को वात-शामक (Vata-pacifying) आहार और दिनचर्या अपनाने का समय माना जाता है।
बचाव और राहत के उपाय (Tips for Relief)
अगर आप या आपके घर के बुजुर्ग इस समस्या से जूझ रहे हैं, तो इन उपायों को अपनाएं:
खुद को गर्म रखें: शरीर को कई परतों (Layers) में कपड़े पहनाएं। घुटनों और कमर को हवा से बचाने के लिए वार्मर या नी-कैप (Knee cap) का प्रयोग करें।
नियमित व्यायाम: भारी व्यायाम के बजाय हल्की स्ट्रेचिंग और वॉक करें ताकि जोड़ों में लचीलापन बना रहे।
सही खानपान (Diet): अपनी डाइट में ओमेगा-3 फैटी एसिड (अलसी, अखरोट), अदरक, लहसुन और हल्दी का सेवन बढ़ाएं। ये प्राकृतिक रूप से सूजन कम करते हैं।
विटामिन D: सुबह की धूप में कम से कम 15-20 मिनट बैठें।
हाइड्रेशन: सर्दियों में प्यास कम लगती है, लेकिन जोड़ों के लुब्रिकेशन के लिए पानी पीना बहुत जरूरी है। गुनगुना पानी पीना सबसे बेहतर है।
Dr krishnanand mishra (PT)
महामाया फिजियोथेरेपी क्लीनिक।
नेहरू चौक बिलासपुर
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