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* कोरोना वायरस क्या है?कोरोना वायरस बहुत सूक्ष्म लेकिन प्रभावी वायरस है। कोरोना वायरस मानव के बाल की तुलना में 900 गुना ...
29/07/2020

* कोरोना वायरस क्या है?

कोरोना वायरस बहुत सूक्ष्म लेकिन प्रभावी वायरस है। कोरोना वायरस मानव के बाल की तुलना में 900 गुना छोटा है, लेकिन कोरोना का संक्रमण दुनियाभर में तेजी से फ़ैल रहा है।

कोरोना वायरस (सीओवी) का संबंध वायरस के ऐसे परिवार से है जिसके संक्रमण से जुकाम से लेकर सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्या हो सकती है। इस वायरस को पहले कभी नहीं देखा गया है। इस वायरस का संक्रमण दिसंबर में चीन के वुहान में शुरू हुआ था। डब्लूएचओ के मुताबिक बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ इसके लक्षण हैं। अब तक इस वायरस को फैलने से रोकने वाला कोई टीका नहीं बना है।

इसके संक्रमण के फलस्वरूप बुखार, जुकाम, सांस लेने में तकलीफ, नाक बहना और गले में खराश जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। इसलिए इसे लेकर बहुत सावधानी बरती जा रही है। यह वायरस दिसंबर में सबसे पहले चीन में पकड़ में आया था।

* क्या हैं इस बीमारी के लक्षण?

कोवाइड-19 / कोरोना वायरस में पहले बुख़ार होता है। इसके बाद सूखी खांसी होती है और फिर एक हफ़्ते बाद सांस लेने में परेशानी होने लगती है।
इन लक्षणों का हमेशा मतलब यह नहीं है कि आपको कोरोना वायरस का संक्रमण है। कोरोना वायरस के गंभीर मामलों में निमोनिया, सांस लेने में बहुत ज़्यादा परेशानी, किडनी फ़ेल होना और यहां तक कि मौत भी हो सकती है। बुजुर्ग या जिन लोगों को पहले से अस्थमा, मधुमेह या हार्ट की बीमारी है उनके मामले में ख़तरा गंभीर हो सकता है। ज़ुकाम और फ्लू में के वायरसों में भी इसी तरह के लक्षण पाए जाते हैं।

* कोरोना वायरस का संक्रमण हो जाए तब?

इस समय कोरोना वायरस का कोई इलाज नहीं है लेकिन इसमें बीमारी के लक्षण कम होने वाली दवाइयां दी जा सकती हैं।

जब तक आप ठीक न हो जाएं, तब तक आप दूसरों से अलग रहें।

कोरोना वायरस के इलाज़ के लिए वैक्सीन विकसित करने पर काम चल रहा है।

इस साल के अंत तक इंसानों पर इसका परीक्षण कर लिया जाएगा।

कुछ अस्पताल एंटीवायरल दवा का भी परीक्षण कर रहे हैं।

* क्या हैं इससे बचाव के उपाय?

स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने कोरोना वायरस से बचने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

इनके मुताबिक हाथों को साबुन से धोना चाहिए।

अल्‍कोहल आधारित हैंड रब का इस्‍तेमाल भी किया जा सकता है।

खांसते और छीकते समय नाक और मुंह रूमाल या टिश्‍यू पेपर से ढंककर रखें।

जिन व्‍यक्तियों में कोल्‍ड और फ्लू के लक्षण हों, उनसे दूरी बनाकर रखें।

अंडे और मांस के सेवन से बचें।

जंगली जानवरों के संपर्क में आने से बचें।

* मास्क पहनने का तरीका :-

मास्क पर सामने से हाथ नहीं लगाना चाहिए।

अगर हाथ लग जाए तो तुरंत हाथ धोना चाहिए।

मास्क को ऐसे पहनना चाहिए कि आपकी नाक, मुंह और दाढ़ी का हिस्सा उससे ढंका रहे।

मास्क उतारते वक्त भी मास्क की लास्टिक या फीता पकड़कर निकालना चाहिए, मास्क नहीं छूना चाहिए।

हर रोज मास्क बदल दिया जाना चाहिए।

सर्दी के बाद बसंत व बसंत के बाद ग्रीष्म ऋतु आती है। गर्मियों की चिलचिलाती धूप में बाहर निकलने से लू लग सकती है। ‘लू’ के ...
01/04/2019

सर्दी के बाद बसंत व बसंत के बाद ग्रीष्म ऋतु आती है। गर्मियों की चिलचिलाती धूप में बाहर निकलने से लू लग सकती है।

‘लू’ के लक्षण – पसीना न आना , चेहरा लाल हो जाना , तेज बुखार ( 106 डिग्री के लगभग ) , नाड़ी का तेज चलना , श्वास लेने में कठिनाई , चक्कर आना ।

लू से बचने की सावधानियाँ –

* धूप से बचें । बाहर निकले भी तो सिर व गर्दन को कपड़े से ढकें । छाता , टोपी उपयोग में लें । बहुत पानी पी कर ही बाहर जावे।

* खाली पेट घर से न निकलें । खाना खाकर ही बाहर निकलें ।

* भीड़ व घुटन भरे स्थानों से दूर रहें ।

* ठंडे पेय , नमक , ताजे फल व कैरी के पानी का सेवन करें ।


* लू से बचने के लिए शहतूत खाएं ।

* गहरे रंगों के कपड़े भी सूर्य की किरणों को आकर्षित करते है इसलिए गर्मी में सफ़ेद कपड़ा पहनना सर्वोत्तम है। धूप में बहुत महीन कपड़ा पहनना भी हानिकारक है।

* सुबह नित्य कर्म से निवृत होकर एक गिलास अच्छी ठंडाई, दूध या दही की लस्सी अथवा जौ का सत्तू पानी में घोलकर मीठा मिलकर पी लेना चाहिए।

* नारिकेल का जल, गन्ने या संतरों आदि का ताजा रस पीना भी उत्तम है। इस मौसम में छोटे बीजू आमों का सेवल अति लाभप्रद होता है।

लू लगने पर साधारण उपाय :-

* रोगी को तुरंत छायादार व खुले स्थान पर ले जायें ।

* कपड़े खोल दें व ढीले कर दें ।

* माथे पर ठंडे पानी की पट्टियाँ रखें ।

* ठंडे पेय , नमक व नींबू दें । गर्म वस्तु न दें ।

* तेज बुखार न उतरें तो डॉक्टर को दिखावे ।

सिलफिस क्या है और इसके कारण लक्षण इलाजयह एक यौन रोग (एसटीडी) जिसे हिंदी में उपदंश भी कहा जाता है | यह बैक्टीरिया और संक्...
20/02/2019

सिलफिस क्या है और इसके कारण लक्षण इलाज

यह एक यौन रोग (एसटीडी) जिसे हिंदी में उपदंश भी कहा जाता है | यह बैक्टीरिया और संक्रमण से फैलता है और इस रोग से प्रभावित इंसान के साथ यौन सम्बन्ध बनाने से हमें भी यह रोग लग जाता है | सिफलिस के लक्षण हमेशा स्पष्ट नहीं होते हैं और बहुत समय तक कोई लक्षण भी नहीं हो सकते लेकिन जब तक इलाज़ नहीं कराया जाता, शरीर में उपदंश का संक्रमण बना रहता है | आइये जानते है इसके कारण लक्षण और इलाज |

कैसे होता है ? -

सिफलिस बैक्टीरिया के कारण होने वाला एक रोग है | यह बैक्टीरिया, कोशिकाओं पर हमला कर उसमें अपनी संख्या को बढ़ाता है | यह जीवित बैक्टीरिया योनि, गुदा अथवा ओरल सेक्स के दौरान स्वस्थ्य पार्टनर के प्रजनन अंगों, मलाशय और मुंह की श्लेष्मा झिल्ली को संक्रमित कर देते हैं | सिफलिस का संक्रमण योनि, गुदा या ओरल सेक्स के द्वारा संक्रमित व्यक्ति से स्वस्थ्य व्यक्ति में जा सकता है |

यह मुख्य रूप से सुरक्षित यौन सम्बन्ध ना बनाने की वजह से होता है | इसके अलावा यह गर्भवती माँ से बच्चे को भी हो सकता है | सेक्स टॉयज साझा करना , बिना कंडोम ओरल सेक्स करना आदि ऐसे कई सारे कारण है जिनकी वजह से यह रोग होता है | इसके लक्षण हमें कई सालो बाद दिखाई देते है इसीलिए इस रोग के बढने की संभावना अधिक होती है | इसके चार स्टेज होते है प्राइमरी, सेकेंडरी , लैटेंट और टेरिटरी | इन चारो स्टेजो में बीमारी क्रमशः बढती चली जाती है |

लक्षण -

लिंग या योनी के पास छोटे छोटे घाव या चकते दिखाई देना |

हाथ और पैर के साथ शरीर में लाल चकते |

थकान , सर दर्द , बुखार या शरीर में सूजन |

इसके इलाज -

यह एक यौन रोग है तो इसका सबसे इलाज है बचाव की आप सेक्स के दौरान सावधानी रखे | इसके अलावा इसके लक्षण पता चल जाने पर एंटी बायोटिक के माध्यम से इसे ठीक किया जा सकता है और अगर आप एंटी बायोटिक का इंजेक्शन नहीं लेते तो आपको इसकी दवाइयां खानी पड़ेगी | एंटी बायोटिक के अलावा अभी तक इसके की भी घरेलू या मेडिकल इलाज सामने नहीं आये है | आप बीमारी के उपचार के दौरान ये ध्यान रखे की उपचार पूरा हो जाने के तीन हफ्तों तक किसी के साथ यौन सम्बन्ध ना बनाये वर्ना इसके बढने की संभावना है |

गर्भावस्था में सिलफिस -

यदि आप गर्भवती हैं और आपको सिफलिस संक्रमण है तो यह बच्चे भी उपदंश से संक्रमित हो सकता है | सिफलिस से बच्चे का वजन कम हो सकता है। बच्चे का जन्म समय से बहुत पहले हो सका है | बच्चा स्टिलबोर्न भी हो सकता है।नवजात बच्चा जो जन्मजात सिफलिस संक्रमित है, उसमें शुरू में कोई लक्षण नहीं हो सकते हैं लेकिन कुछ समय बाद बच्चे में कैटरेक्ट, बहरापन, या दौरे पड़ सकते हैं | यदि संक्रमण हो तो इसे बच्चा करने से पहले इसका ट्रीटमेंट करा लें और यदि बच्चा ठहर गया है तो इलाज़ कराएं |

Note - Blood Test For Syphlis is (TPHA)

ब्लड कैंसर एक गंभीर जानलेवा बीमारी है और पूरी दुनिया में इसके मरीजों की संख्या बढती ही जा रही है। इससे जुड़ी सबसे परेशान ...
11/02/2019

ब्लड कैंसर एक गंभीर जानलेवा बीमारी है और पूरी दुनिया में इसके मरीजों की संख्या बढती ही जा रही है। इससे जुड़ी सबसे परेशान करने वाली बात यह है कि अधिकतर मरीजों को शुरुवात में यह पता ही नहीं चलता है कि वे ब्लड कैंसर के शिकार हैं और जब तक उन्हें पता चलता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।इसलिए यह ज़रूरी है कि आपको इसके शुरुवाती लक्षणों के बारे में पता हो जिससे आप तुरंत उसकी पहचान कर सकें और समय रहते अपना इलाज करवा लें।

आमतौर पर ब्लड कैंसर का पता तभी चलता है जब आप रूटीन ब्लड टेस्ट करवाते हैं। इसलिए नियमित अंतराल पर अपना मेडिकल चेकअप भी ज़रूर करवाते रहें। इस आर्टिकल में हम आपको ब्लड कैंसर के कुछ शुरुवाती लक्षणों के बारे में बता रहे हैं।

बुखार- बुखार आना ल्यूकेमिया के शुरुआती लक्षणों में से एक है। शरीर का अधिक तापमान संक्रमण से लड़ रहे शरीर की एक प्रतिक्रिया है। जब शरीर ल्यूकेमिया से प्रभावित होता है, तो कोशिकाओं की संक्रमण से लड़ने की क्षमताएं तेजी से कम होने लगती हैं और अप बहुत जल्दी इस बीमारी की चपेट में आ जाते हैं।

ब्लीडिंग : अगर आपके मुंह, नाक से या शौच के दौरान खून निकल रहा है तो इसे सामान्य समस्या समझकर अनदेखा न करें बल्कि जितनी जल्दी हो सके डॉक्टर के पास जाकर अपनी जांच कराएं

शरीर पर रैशेज़ – खून में प्लेटलेट्स की संख्या कम हो जाना भी ल्यूकेमिया के लक्षणों में से एक है। जब शरीर में इन खून के थक्कों की पर्याप्त कोशिकाएं नहीं होती हैं, तो चोट लगना और खून बहना एक सामान्य बात हो जाती है। प्लेटलेट्स की कम संख्या के कारण त्वचा के नीचे छोटी रक्त वाहिकाएं टूट जाती हैं जिसकी वजह से शरीर पर नीले या बैगनी कलर के निशान पड़ जाते हैं।

सोते समय पसीना आना : अगर आपको रात में सोते समय अचानक पसीना आने लगता हैं तो जान लें कि यह भी ब्लड कैंसर का एक लक्षण है। हालांकि अभी तक यह ज्ञात नहीं है कि ल्यूकेमिया के मरीजों के साथ ऐसा क्यों होता है।

थकावट- जब कोई व्यक्ति ल्यूकेमिया से पीड़ित हो तो उसके शरीर में हीमोग्लोबिन की संख्य़ा तेज़ी से गिर जाती है। हीमोग्लोबिन की कमी के ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में सभी अंगों तक नहीं पहुंच पाता है जिस वजह से सारे अंग ठीक से काम नहीं कर पाते हैं और आप हमेशा थका हुआ महसूस करते हैं।

पैरों में लगातार सूजन और छाती में दर्द सूजन आमतौर पर ल्यूकेमिया के रोगियों में देखा जाता है साथ ही उन्हें ब्लीडिंग और ब्लड क्लॉटिंग जैसी परेशानियां भी होने लगती हैं।

बार-बार इंफेक्शन होना : वाइट ब्लड सेल्स की मात्रा कम होने के कारण शरीर की इम्युनिटी पॉवर कमजोर हो जाती है। इस वजह से मरीज बार बार इन्फेक्शन की चपेट में आ जाते हैं। अगर आप बार बार सर्दी जुकाम या किसी तरह के इन्फेक्शन के शिकार हो रहे हैं तो डॉक्टर से तुरंत अपना चेकअप करवाएं। ऊपर बताये हुए लक्षणों को पढ़कर आप डरे नहीं बल्कि अगर आपको इनमें से कुछ लक्षण दिखाई भी देते हैं तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप ल्यूकेमिया या ब्लड कैंसर की चपेट में हैं। बल्कि यहां लक्षण बताने का तात्पर्य यह है कि कभी भी आप इन लक्षणों को अनदेखा न करें और भविष्य की किसी मुश्किल से बचने के लिए पहले ही सावधानी बरतें और अपना चेक अप ज़रूर करवाएं।

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