07/02/2026
नाड़ी विशेषज्ञ डॉ. भाग्यश्री गावंडे का खुलासा: आपके तलवों में छिपी है बांझपन से लड़ने की 'इम्यून पावर'!
आयुर्वेद के शाश्वत सूत्रों (चरक संहिता, सूत्र स्थान) और आधुनिक एंडोक्रिनोलॉजी के संगम से यह सिद्ध होता है कि हमारे पैरों के तलवे केवल चलने के साधन नहीं, बल्कि पूरे शरीर का 'रिमोट कंट्रोल' हैं। डॉ. भाग्यश्री गावंडे के अनुसार, बांझपन (Infertility) का सीधा संबंध शरीर के 'अपान वायु' के असंतुलन और उच्च मानसिक तनाव (High Cortisol) से है। जब हम कांसे की धातु से तलवों की मालिश करते हैं, जिसे 'पाद-अभ्यंग' कहा गया है, तो यह सीधे तौर पर 'तलहृदय मर्म' पर प्रहार करता है। यह मर्म बिंदु सीधे प्रजनन प्रणाली (Reproductive System) और पिट्यूटरी ग्रंथि से जुड़ा होता है। कांसे की रासायनिक संरचना (तांबा + टिन) घी के साथ मिलकर एक 'Electromagnetic Field' उत्पन्न करती है, जो शरीर के सूक्ष्म चैनलों (Srotas) में जमी 'आम' (Toxins) को सोख लेती है। जब घी काला पड़ता है, तो वह केवल गंदगी नहीं, बल्कि उस संचित ऊष्मा (Heat) का विसर्जन होता है जो डिम्बग्रंथि (Ovaries) और गर्भाशय के वातावरण को दूषित कर रही थी।
यह मालिश शरीर के लिए एक 'Global Reset Button' की तरह कार्य करती है। आयुर्वेद कहता है— "पादस्य स्पर्शं चक्षुष्यं, मारुतघ्नं च" अर्थात् पैरों की मालिश न केवल आँखों की रोशनी बढ़ाती है, बल्कि वात दोष का जड़ से नाश करती है। बांझपन से जूझ रहे दंपत्तियों में अक्सर 'वात' की अधिकता के कारण प्रजनन ऊतकों में सूखापन और हार्मोनल असंतुलन आ जाता है। कांसा वाटी मसाज के घर्षण से निकलने वाली ऊर्जा 'ओजस' (Immunity) को पुनर्जीवित करती है, जिससे शरीर की 'Self-Healing' क्षमता जागृत होती है। जब धातु मर्म से मिलती है, तो यह केवल त्वचा तक सीमित नहीं रहती, बल्कि नसों के माध्यम से मज्जा धातु तक पहुँचती है, जिससे मानसिक अवसाद कम होता है और गर्भधारण के लिए आवश्यक 'सौम्य वातावरण' निर्मित होता है। यह एक शास्त्र-सम्मत 'Bio-Hacking' है, जो आपके प्रजनन स्वास्थ्य को शून्य से शिखर तक ले जाने की क्षमता रखती है।
कांसा वाटी मसाज की 'शास्त्र-सम्मत' सही पद्धति:
ब्रह्म मुहूर्त या शयन काल: डॉ. गावंडे के अनुसार, इसे रात को सोने से पहले करना सर्वोत्तम है ताकि शरीर 'Deep Repair' मोड में जा सके।
द्रव्य का चयन: केवल ए-2 देसी गाय का शुद्ध घी या तिल का तेल उपयोग करें। घी एक 'संस्कारानुवर्ती' द्रव्य है जो कांसे के गुणों को कोशिकाओं तक ले जाता है।
घर्षण की दिशा: कांसे की कटोरी को तलवों के केंद्र (तलहृदय मर्म) से शुरू करते हुए गोलाकार (Clockwise) घुमाएं। फिर अंगुलियों से लेकर एड़ी तक लंबे 'स्ट्रोक्स' दें।
कालेपन का शोधन: जब घी पूरी तरह काला हो जाए, तो उसे सूती कपड़े से पोंछ दें और पुनः थोड़ा घी लगाकर प्रक्रिया दोहराएं जब तक कालापन कम न हो जाए।
विश्राम: मसाज के बाद 10-15 मिनट तक पैरों को पानी के संपर्क में न लाएं, ताकि धातु के औषधीय गुण नसों के माध्यम से अवशोषित (Absorb) हो सकें।
डॉ. गावंडेजी का संदेश: बीज (Egg/Sperm) और क्षेत्र (Uterus) की शुद्धि ही स्वस्थ संतान का आधार है। कांसा वाटी मसाज शरीर के विषाक्त पदार्थ की सफाई का पहला और सबसे शक्तिशाली कदम है।
डॉ. भाग्यश्री गावंडे का क्लिनिकल अनुभव
Hormonal Sync: नियमित पाद-अभ्यंग करने वाले मरीजों में 'Melatonin' और 'Oxytocin' का स्तर बेहतर पाया गया है, जो प्रजनन क्षमता (Fertility) के लिए अनिवार्य हैं।
चरक संहिता (चिकित्सा स्थान): "खरत्वं स्तब्धता रौक्ष्यं श्रमः सुप्तिश्च पादयोः। सद्य एव उपशाम्यन्ति पादभ्यंग निषेवणात्॥"
अर्थात्: पैरों का रूखापन, जकड़न और थकान पाद-अभ्यंग (मसाज) से तुरंत ठीक होते हैं। बांझपन में 'अपान वायु' की जकड़न को तोड़ने के लिए यह अचूक चिकित्सा है।
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यदि मसाज के दौरान घी 5 मिनट के भीतर गहरा काला हो रहा है, तो यह संकेत है कि आपके शरीर में 'Toxicity' का स्तर अधिक है। इसे अनदेखा न करें।
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डॉ. भाग्यश्री गावंडे (PhD - नाड़ी विशेषज्ञ) बिना सर्जरी समाधान, शास्त्र सम्मत आयुर्वेद।