19/10/2025
“कुंडलिनी जागरण से पहले का राज़! कुछ घंटे पहले क्यों बदल जाती है ऊर्जा?”
क्या आपने कभी ध्यान के दौरान महसूस किया है...
कि अचानक भीतर कुछ बदल गया है?
ऊर्जा जैसे अपने आप ऊपर उठ रही है,
शरीर में कंपन्न हो रहे हैं,
और मन एक अजीब सी शांति और उत्तेजना — दोनों महसूस कर रहा है?
अगर हाँ...
तो संभव है कि आपकी कुंडलिनी जागरण की तैयारी शुरू हो चुकी है।
---
🕉️ भाग 1 — कुंडलिनी जागरण से पहले का रहस्यमय बदलाव
कुंडलिनी कोई साधारण ऊर्जा नहीं है,
यह चेतना का मूल स्रोत है,
जो मूलाधार में सुप्त अवस्था में रहती है।
जागरण से पहले, यह ऊर्जा धीरे-धीरे नाड़ियों को शुद्ध करना शुरू करती है —
आपको महसूस होगा:
रीढ़ में हल्का कंपन
सिर के बीच या आँखों के बीच दबाव
कभी गर्मी, कभी ठंडक
और श्वास का अपने आप रुक जाना
यह संकेत हैं कि ऊर्जा सुषुम्ना नाड़ी में प्रवेश कर रही है —
अब यात्रा शुरू होने वाली है।
---
🕯️ भाग 2 — कुछ घंटे पहले क्यों बदल जाती है ऊर्जा?
कुंडलिनी के जागरण के ठीक पहले,
साधक के भीतर तीन गहरे परिवर्तन होते हैं 👇
1️⃣ नाड़ी शुद्धि (Energy Channel Cleansing)
ऊर्जा अब बाएँ या दाएँ मार्ग से नहीं बहती —
वह अब मध्य मार्ग, सुषुम्ना, में केंद्रित हो जाती है।
इससे शरीर के अंदर एक “ऊर्जा पुनर्संयोजन” शुरू होता है।
2️⃣ कर्मिक ऊर्जा का विसर्जन (Karmic Release)
जैसे-जैसे ऊर्जा ऊपर उठती है,
पुराने संस्कार, डर, भावनाएँ सतह पर आने लगती हैं।
कभी बेचैनी, कभी आँसू, कभी अत्यधिक शांति —
यह सब शुद्धिकरण के संकेत हैं।
3️⃣ दैवीय ऊर्जा का अवतरण (Descending Grace)
ऊपर से आने वाली चेतना —
नीचे उतरने लगती है, ताकि कुंडलिनी को उठाने में सहायता दे सके।
तभी आप महसूस करते हैं —
मानो “कुछ बड़ा” होने वाला है…
यह Grace का आगमन होता है।
---
🌸 भाग 3 — वैज्ञानिक दृष्टि से क्या होता है?
कुंडलिनी जागरण के ठीक पहले:
Pineal और Pituitary ग्रंथियाँ सक्रिय होती हैं
डोपामिन और सेरोटोनिन का स्राव बदलता है
रीढ़ और मस्तिष्क के बीच बायो-इलेक्ट्रिक प्रवाह बढ़ता है
इसीलिए आपको कभी थकान, कभी उत्साह,
कभी शांति, तो कभी कंपन का अनुभव होता है।
यह संकेत है कि शरीर और चेतना —
नए आवृत्ति स्तर पर जा रहे हैं।
---
🌼 भाग 4 — साधक के लिए मार्गदर्शन
1. डरें नहीं — यह सब सामान्य प्रक्रिया है।
2. श्वास पर ध्यान रखें — श्वास जितनी शांत होगी,
ऊर्जा उतनी सहजता से ऊपर उठेगी।
3. अहं को छोड़ें, आत्मसमर्पण करें —
कुंडलिनी कोई बलपूर्वक उठाई जाने वाली शक्ति नहीं है,
यह अपने समय पर स्वयं उठती है।
4. संतुलित आहार, नींद और मौन रखें —
ताकि शरीर उस ऊर्जा को संभाल सके।
---
🌺 समापन:
कुंडलिनी जागरण से पहले ऊर्जा का बदलना —
दरअसल एक दैवीय संकेत है,
कि अब चेतना, अपने उच्च स्वरूप में प्रवेश करने को तैयार है।
यह भय का नहीं,
बल्कि आंतरिक पुनर्जन्म का क्षण है।
(धीमी आवाज में)
जब ऊर्जा बदलती है...
तो समझ लेना —
अब ब्रह्मांड तुम्हारे भीतर कार्य करने लगा है। 🕉️
“हर साधक को ये क्षण मिलते हैं,
बस पहचानना सीखिए…”