16/10/2023
डेंगू बुखार____
मुख्य कारण, लक्षण, इलाज एवँ सावधानियां
इलाज में थोड़ी सी लापरवाही हो सकती है जानलेवा
जैसा कि हम सभी जानते है कि डेंगू एक वायरल सक्रंमित बीमारी है जिसका कारण
डेंगू बुखार एडीज इजिप्टी मच्छर के काटने से होता है।
मच्छर के काटने के करीब 3-5 दिनों के बाद मरीज में डेंगू बुखार के लक्षण दिखने लगते हैं।
____डेंगू बुखार के लक्षण ___
- ठंड लगने के बाद अचानक तेज बुखार चढ़ना
- सिर, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होना
- आंखों के पिछले हिस्से में दर्द होना
- बहुत ज्यादा कमजोरी लगना
- भूख न लगना
- जी मिचलाना और मुंह का स्वाद खराब होना
- गले में हल्का-सा दर्द होना
- शरीर खासकर चेहरे, गर्दन और छाती पर लाल-गुलाबी रंग के रैशेज का होना
___डेंगू बुखार के निम्नलिखित रूप है ___
>सामान्य डेंगू बुखार<
इसमें बुखार के साथ तेज बदन दर्द, सिर दर्द खास तौर पर आंखों के पीछे और शरीर पर दाने हो जाते है। यह जल्द ठीक हो जाता है। एक डेंगू बुखार ऐसा भी होता है जिसमें लक्षण नहीं उभरते। ऐसे मरीज का टेस्ट करने पर डेंगू पॉजिटिव आता है लेकिन वह खुद-ब-खुद बिना तय समय पर इलाज से ठीक हो जाता है।
>क्लासिकल डेंगू बुखार <
यह डेंगू फीवर एक नॉर्मल वायरल फीवर है। इसमें तेज बुखार, बदन दर्द, तेज सिर दर्द, शरीर पर दाने जैसे लक्षण दिखते हैं। यह डेंगू 5-7 दिन के सामान्य इलाज से ठीक हो जाता है।
> डेंगू हेमरेजिक बुखार <
यह बुखार खतरनाक साबित हो सकता है। इसमें प्लेटलेट और वाइट ब्लड सेल्स की संख्या कम होने लगती है। नाक और मसूढ़ों से खून आना, शौच या उल्टी में खून आना या स्किन पर गहरे नीले-काले रंग के चकते जैसे लक्षण भी हो सकते हैं।
> डेंगू शॉक सिंड्रोम <
इसमें मरीज धीरे-धीरे होश खोने लगता है, उसका बीपी और नब्ज एकदम कम हो जाती है और तेज बुखार के बावजूद स्किन ठंडी लगती है।
>जांच <
डेंगू की लैबरेटरी जांच में मरीज के खून में ऐंटीजन IgM और IgG व प्रोटीन NS-1 देखे जाते हैं। NS-1 की मौजूदगी से यह पता चलता है कि मरीज के अंदर डेंगू वायरस का इंफेक्शन है लेकिन जरूरी नहीं कि उसे डेंगू फीवर हो। IgM और IgG में से अगर केवल IgG पॉजिटिव है तो इसका मतलब है कि मरीज को पहले कभी डेंगू रहा है। कभी-कभी इन तीनों में से किसी के भी पॉजिटिव होने पर भी डेंगू में प्लेटलेट्स और PCV दोनों का ध्यान रखना जरूरी है। PCV ब्लड में रेड ब्लड सेल्स का प्रतिशत बताता है। यह सेहतमंद पुरुषों में 45 फीसदी और महिलाओं में 40 फीसदी होता है। डेंगू में बढ़ सकता है। इसके बढ़ने का मतलब खून का गाढ़ा होना है। अगर PCV बढ़ रहा है तो खतरनाक है।
>डेंगू बुखार से बचाव <
लक्षण दिखने पर तत्काल डॉक्टर से परामर्श लें साथ ही डॉक्टर द्वारा दिये गए दिशा निर्देश का पालन करें
आउटडोर में पूरी बांह की शर्ट, बूट, मोजे और फुल पैंट पहनें। खासकर बच्चों के लिए इस बात का जरूर ध्यान रखे
कमरे में मच्छर भगानेवाले स्प्रे, मैट्स, कॉइल्स आदि का प्रयोग करें। मस्किटो रेपलेंट को जलाते समय सावधानी बरतें। इन्हें जलाकर कमरे को 1-2 घंटे के लिए बंद कर दें।
सुनिश्चित करें कि आसपास पानी इकट्ठा ना हो। कूलर का पानी बदलते रहें। पानी को ढंक कर रखें। इन जगहों पर ही मच्छर अंडे देते हैं।
यदि कोई खुला जल स्रोत है, जिसे आप हटा नहीं कर सकते हैं, तो उसे या तो ढंक दें या फिर उपयुक्त कीटनाशक अप्लाई करें।
_____डेंगू के दौरान खान-पान और जीवनशैली ____
डेंगू में मरीज का मुँह और गला सूख जाता है। इसलिए रोगी को ताजा सूप, जूस और नारियल पानी का सेवन करना चाहिए।
नींबू पानी बनाकर पिएँ। नींबू का रस शरीर से गंदगी को पेशाब के द्वारा निकाल कर शरीर को स्वस्थ बनाता है।
डेंगू के लक्षण आने पर ताजी सब्जियों का जूस पिएँ। इसमें गाजर, खीरा और अन्य पत्तेदार सब्जियाँ बहुत अच्छी होती हैं। ये सब्जियाँ आवश्यक विटामिन और खनिजों से परिपूर्ण है जो रोगी के प्रतिरक्षा शक्ति बढ़ाने में मदद करते हैं।
दलिया का सेवन करें। इसमें मौजूद उच्च फाइबर और पोषक तत्व रोगों से लड़ने के लिए पर्याप्त शक्ति देते हैं।
डेंगू होने पर पेट की समस्या हो जाती है। इसलिए तेलयुक्त और मसालेदार भोजन का सेवन बिल्कुल ना करें।
डेंगू के रोगी को प्रोटीन की बहुत आवश्यकता होती है। इसलिए रोगी को दूध और डेयरी उत्पाद का सेवन जरूर करना चाहिए।*
अधिक से अधिक पानी पिएँ।
___डेंगू के दौरान परहेज _____
डेंगू होने पर तेज बुखार रहता है, साथ ही पेट की समस्या भी हो जाती है। ऐसे में जितना सम्भव हो हल्का एवं सुपाच्य आहार ही लेना चाहिए। इसलिए शाकाहारी भोजन को ही प्राथमिकता देनी चाहिए। शाकाहारी भोजन में सभी जरूरी पोषक तत्व होते हैं और ये आसानी से पच जाते हैं। शरीर को स्वस्थ बनाते हैं।
डेंगू होने पर डॉक्टर से कब सम्पर्क करें ?
डेंगू में व्यक्ति को बहुत तेज बुखार आता है। इसलिए यदि किसी क्षेत्र विशेष में डेंगू का संक्रमण फैला हुआ हो तो बुखार आने पर और अन्य लक्षण जैसे बदन दर्द, जी मिचलाना, भूख की कमी यह सब होने पर तुरन्त डॉक्टर से सम्पर्क करें। डेंगू की पुष्टि के लिए जरूरी जाँच जरूर करवाने चाहिए।
जागरुकता में ही बचाव है।