14/02/2026
🥛 छाछ (तक्र) – आयुर्वेद और मॉडर्न साइंस की दृष्टि से
न तक्रसमं पथ्यं न तक्रसमं बलम्।
न तक्रसममौषधं न तक्रसमं हितम्॥
भावार्थ:
तक्र के समान पथ्य, बलवर्धक, औषधि और हितकर पदार्थ दूसरा नहीं।
📜 आयुर्वेद के अनुसार (तक्र गुण)
चरक संहिता और अष्टाङ्ग हृदयम् में तक्र को अत्यंत श्रेष्ठ पथ्य बताया गया है।
मुख्य गुण:
✔️ लघु (हल्का पचने वाला)
✔️ दीपनीय (जठराग्नि बढ़ाने वाला)
✔️ कफ-वात शामक
✔️ ग्रहणी दोष में लाभकारी
✔️ अर्श (बवासीर) में हितकारी
✔️ आम दोष का नाश करने वाला।
अष्टाङ्ग हृदयम् में तक्र की महिमा वर्णित है —
तक्रं लघु दीपनीयं कफवातहरं परम्।
ग्रहणीदोषनाशाय श्रेष्ठं तक्रं प्रकीर्तितम्॥
अर्थ:
तक्र (छाछ) लघु (हल्का पचने वाला) है।
दीपन अर्थात जठराग्नि को प्रज्वलित करने वाला कफ और वात दोष को शान्त करने वाला।
विशेषकर ग्रहणी दोष (क्रॉनिक पाचन समस्या) में अत्यंत हितकारी।
विशेष:
भोजन के बाद पतली छाछ में भुना जीरा + सेंधा नमक मिलाकर सेवन करने से अग्नि सुदृढ़ होती है।
🔬 मॉडर्न साइंस के अनुसार -
✔️ Probiotics से भरपूर – आंतों की हेल्दी बैक्टीरिया बढ़ाता है
✔️ Digestion सुधारता है
✔️ Lactose कम होने से हल्का पचता है
✔️ Hydration और Electrolyte balance बनाए रखता है
✔️ Gut inflammation कम करने में सहायक ।
⚠️ किन्हें सावधानी?
❌ अत्यधिक पित्त प्रकृति में बहुत अधिक खट्टी छाछ से बचें
❌ रात में सेवन न करें
❌ सर्दी-जुकाम में बिना मसाले की ठंडी छाछ न लें।
📌 निष्कर्ष
छाछ केवल पेय नहीं, बल्कि Daily Digestive Tonic है —
आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों इसे Gut Health का मित्र मानते हैं।
डॉ उज्जवल प्रताप सिंह
कँकरबाग़ पटना