16/01/2026
राधे राधे 🙏🙏
आज सुबह यूट्यूब देखते हुए अचानक कुमार विश्वास जी की कविता 'चाह में कोई और बांह में कोई और' सामने आ गई... पहली लाइन सुनते ही जवाब देने का मन कर गया आगे सुना ही नहीं...... उनकी कविता का जवाब कुछ इस तरह है, नई रचना है उम्मीद है आप लोगों को पसंद आएगी हमेशा की तरह....🙏😊
💐चाह💐
चाह होती समर्पित अगर पूर्ण तो ,2
बाँह में और कोई भी आता नहीं ,,,,
वह अगर रूह में ही उतर जाते तो,2
फिर कोई और दिल को लुभाता नहीं ,,
चाह होती समर्पित ,,,,
राह बेशक मिले ना कभी राह से,2
वापसी का मगर मोड़ आता नहीं ,,
चाह होती समर्पित ,,,,
ढूंढ लाओ अगर जो नया हमसफर,
फिर पलटकर ना देखो पुरानी डगर,,2
प्रेम में डूबा दिल, दिल दुखता नहीं ,,
चाह होती समर्पित अगर पूर्ण तो
बांह में और कोई भी आता नहीं!,,,
डॉ अनीता सिंह "अंजुम"
🙏🙏💐💐💐🙏🙏