29/05/2022
हर आयुर्वेद के डिग्री धारी चिकित्सक को TV चैनल पर बाबा और ज्योतिषी जो आयुर्वेद को represent करते दिखाई देते हैं तथा अखबारों या पत्रिकाओं में फ्री आयुर्वेद सलाह देते हैं उनकी पोल जनता के सामने अवश्य खोलनी चाहिये और हर डिग्री धारी अपनी वाल पर यह जरूर लिखे कि आयुर्वेद की हर दवा की मात्रा व्यक्ति विशेष के अनुसार निर्धारित की जाती है, तथा बिना वैद्यकीय सलाह के लेने से हानिकारक भी सिद्ध हो सकती है।डिग्री वाले चिकित्सको को यह मुहिम चलानी पड़ेगी, अन्यथा छद्मचर वैद्य आयुर्वेद को बदनाम कर देंगे।
मैने सिर्फ एक विचार दिया है इसका अर्थ है कि मैं इसका प्रबल समर्थक हूँ ,जहाँ और जब जिस जगह मौका मिलता है प्रयास करता हूँ, बात रखता हूँ मेरी अपनी कुछ सीमाएं भी हैं।
पर और सब लोग जो इस विचार से सहमत हैं अपनी फेसबुक ट्विटर पर अपनी क्षमता से बात रखें ,जब कहेंगे ही नहीं तो कोई समझेगा कैसे,मेरे fb मित्रों में से कई मेरे विचारों के समर्थक नहीं हैं लेकिन अपनी वाल पर वह कुछ भी स्वतंत्र रूप से अपने विचार रख सकते हैं।
मैं समय समय पर अपनी बात रखता रहा हूँ ।
1,आयुर्वेद एक सम्पूर्ण चिकित्सा पद्धति है ,अल्टरनेटिव सिस्टम नहीं ।
2 आयुर्वेद के दो मूल सिद्धांत हैं,
A: स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा: इम्युनिटी बढ़ाने वाले सारे उपाय इसमें ही आते हैं।तथा ऋतु व काल के अनुसार आहार विहार आते हैं।
B: रोगी के रोग की चिकित्सा:
जो दवाओं द्वारा तथा मन को स्वस्थ्य रखने वाले अन्य अनेकों उपायों से की जाती है।जिसमें देवव्यापाश्रय व सत्वावजय चिकित्सा आयुर्वेद की विशेषता है।
3 वर्तमान में आयुर्वेद की एक मात्र डिग्री BAMS है जो साढ़े पाँच वर्ष का एक रेगुलर कोर्स है। इसके अलावा इसमें तीन वर्ष की स्नातकोत्तर विशेषज्ञता के लिये MD (Ay) की डिग्री है।
जो विभिन्न विभागों में दी जाती है।
4रस शास्त्र एवं भैषज्य कल्पना इसका एक पूर्ण विकसित स्नातकोत्तर विभाग है,जिसमें केवल हर्बल नहीं बल्कि Minerals तथा जन्तुओ से प्राप्त द्रव्यों का प्रयोग बहुलता से होता रहा है।
5 रस औषधियों का प्रयोग हजारों सालों से आयुर्वेद में हो रहा है और यह आयुर्वेद की विशेषता है व किसी अन्य पैथी में यह इस प्रकार से वर्णित नहीं है।रस औषधियाँ व विभिन्न भस्में नैनो मेडिसिन व इंजेक्शन की भाँति बहुत कम मात्रा में प्रयोग होकर बहुत जल्दी असरकारक होती हैं।
रस शास्त्र में भी लगातार शोध हो रहे हैं व उनकी उपयोगिता आधुनिक पैरामीटर पर भी सिद्ध की जा रही है।
इसलिये सबसे विनम्र निवेदन है कि
1 किसी भी बिना डिग्री धारी बाबा व एस्ट्रोलॉजर के मत को आयुर्वेद का मत नहीं मानें।
2 आयुर्वेद चिकित्सा को केवल हर्बल चिकित्सा न मानें यह तो केवल एक छोटा सा हिस्सा है।
3 आयुर्वेद के मूल सिद्धांत 5000 साल पुराने हैं व जब तक सृष्टि है तब तक वही रहेंगे व आने वाले समय में भी हर रोग की चिकित्सा में मार्गदर्शन करेंगे।
4 आयुर्वेद में हर काल में निरन्तर शोध होते रहे हैं व हर काल में संहिताओं में परिमार्जन भी हुआ है ,नयी नयी संहिता व पुस्तकों का निर्माण भी हुआ है,व आगे भी होते रहेंगे।
अखबार,TV या किसी व्यवसायी की सलाह से या किसी व्यवसायी विशेष की ही औषधि देने वाले निःशुल्क सलाह देने वाले चिकित्सक की सलाह से यदि आप आयुर्वेदिक औषधि का सेवन करते हैं ,और आपको लाभ नहीं मिलता या हानि होती है तो उसके उत्तरदायी आप स्वयं हैं आयुर्वेद नहीं ,
किसी के बहकावे में न आयें धैर्य रखें।