Baastro

Baastro Birendra Dubey astro is known for his deep research work, spiritual and selfless approach in astrology. He has spent years in detailed study and research.

03/01/2022

. #ग्रहों_की_दृष्टियाँ :
आज आप लोगों को ग्रहों की दृष्टियों का मूलभूत सिद्धाँत अवगत कराने जा रहा हूँ !
जैसा कि आप सब अवगत ही हैं कि, सभी ग्रहों की अलग अलग दृष्टियाँ होती हैं ! पर यह शायद ही किसी को ज्ञात हो कि यह दृष्टियाँ अलग अलग ग्रह की अलग अलग प्रकार से क्यों होती हैं ? वैसे तो सब कोई न कोई भ्रामक कहानी गढ़ कर सुनाता है, पर वासतविक खगोलीय व वैज्ञानिक कारण कोई नहीं बताता है !
जैसे हमारी आपकी दृष्टि होती है, वैसे ही ग्रहों की भी दृष्टि होती है ! ग्रहों के कम अधिक फासले और गति की तीव्रता के अनुसार यह दृष्टियाँ कम या अधिक होती हैं !

जैसे — जब हम मोटर सायकिल से बहुत तीव्र गति से जा रहे होते हैं तब दुर्घटना से बचने के लिए केवल सामने देखते हैं, दाहिने बाँये देखने की गुंजाइश नहीं रहती है ! चन्द्रमा व बुद्ध की तरह !

वहीं जब कार से जा रहे हों तब कार में पीछे की सीट पर बैठकर जा रहे हों तब कार कितनी भी तेज गति से चल रही हो हम सामने और अपनी तरफ की खिड़की से दूर तक साफ देख सकते हैं, परन्तु दूसरी तरफ की खिड़क़ी से कुछ सीमित क्षेत्र ही स्पष्ट देख पाते हैं मंगल की तरह ! बीच में बैठा व्यक्ति सामने स्पष्ट व दूर तक देख सकता है, दोनो खिड़कियों से बगल में दोनो तरफ बैठे व्यक्तियों के कारण साइड में व पीछे नहीं देख सकता है शुक्र की तरह ! दूसरी खिड़की की तरफ बैठा व्यक्ति भी सामने व अपनी तरफ की खिड़की से स्पष्ट देख सकता है परन्तु दूसरी तरफ की खिड़की से सीमित दूरी तक ही देख सकता है गुरु की तरह ! वहीं चालक सामने तो देखता ही देखता है बैक मिरर से दोनो तरफ पीछे भी दूर तक साफ देख सकता है ! चालक के बगल में बैठा व्यक्ति शनि की तरह चालक की खिड़की से थोड़ी दूर तीसरे स्थान तक व अपनी तरफ की खिड़की से सामने व पीछे बहुत दूर दसवें स्थान तक देख सकता है ! राहु केतु की दृष्टियाँ नहीं होती क्योंकि छाया ग्रह हैं, काल्पनिक रूप से उनकी पाँचवी सातवीं व नवम गुरु के समान दृष्टि मान ली गयी है !
बस यही ग्रहों की दृष्टियों का सिद्धाँत है !
जिस ग्रह का परिक्रमा पथ जितना छोटा होता है वह उतनी ही तीव्र गति से चलता है, और इसी तेज गति व कम दूरी के कारण वह दाहिने बाँये नहीं देख सकता और उसकी केवल एक दृष्टि ही सामने 180॰ पर होती है !
इनमें चन्द्रमा, बुद्ध व शुक्र आते हैं ! वैसे सूर्य की भी एक ही दृष्टि मानी गयी है जिसका कारण भिन्न है !

सूर्य सौरमंडल के नवग्रहों के सापेक्ष स्थिर है, गति करता ही नहीं ! परन्तु हम चूंकि पृथ्वी से उसे देखते हैं अतः वह गति करता दिखाई देता है ! वैसे सूर्य की बारहों राशियों व नवो ग्रहों पर बराबर दृष्टि वनी रहती है, परन्तु पृथ्वी से हम पृथ्वी की चाल के कारण केवल एक ही दृष्टि सप्तम का ही अवलोकन कर पाते हैं ! चन्द्रमा एक राशि को सवा दो दिन में पार करता है ! बुध, शुक्र व सूर्य एक महीने में एक राशि को पार करते हैं ! अतःइसी तेज गति के कारण इनको केवल सामने ही देख पाने की विवशता होती है !

यही नहीं, सूर्य, बुद्ध व शुक्र एक दूसरे से इतने कम फासले से गति करते हैं कि इन तीनो की आपस में एक दूसरे को देख पाने का अवसर ही नहीं मिलता अतः इनकी आपस में कोई दृष्टि नहीं होती है !
बुद्ध ग्रह, सूर्य से चाहे आगे या पीछे अधिकतम 28॰ की दूरी तक ही दूर जा सकता है अन्यथा इससे कम दूरी पर ही हमेशा रहेगा !

इसी प्रकार शुक्र सूर्य से चाहे आगे हो या पीछे अधिकतम 48॰ की दूरी तक ही रह सकता है, अन्यथा इससे कम दूरी पर ही रहेगा ! अतः फासला कम होने के कारण यह तीनो ग्रह इतने कम फासले के कारण आपस में एक दूसरे पर दृष्टि डाल ही नहीं सकते हैं !

मंगल एक राशि को लगभग डेढ़ महीने में पार करता है, अतः वह सातवी, चौधी और आठवीं दृष्टि का प्रयोग कर पाता है !

गुरु एक राशि को पार करने में बारह माह से कुछ अधिक समय लेता है, अतः उसको पर्याप्त अवसर दाहिने वाये व सामने देखने को उपलब्ध होता है, अतः उसकी पांचवी, सातवीं और नौवीं दृष्टि होती है !

राहु और केतु एक राशि को डेढ़ वर्ष में पार करते हैं, जो गुरु से कुछ ही अधिक होने के कारण वह भी गुरु की भाँति ही सातवीं, पाँचवी और नौवीं दृष्टि से देख सकते हैं !

वहीं शनि एक राशि को लगभग ढाई वर्ष में पार करता है और मंथर गति से चलता है, अतः वह अपने बिल्कुल करीब तीसरे स्थान को, सामने सातवें स्थान को व दुरस्थ पीछे की तरफ दसवें स्थान तक भी दृष्टि डालने में

31/12/2021

. #रत्नो_का_चमत्कार :

यदि आने अपनी उंगलियों में पहन रखे हैं यह रत्न तब यह जानकारी हिला देगी आपका दिमाग —

क्योंकि रत्नो का ग्रहों से गहरा सम्बन्ध होता है !
#नवरत्न :
यदि आप बिना सोचे समझे कोई रत्न धारण कर रखा है तब, रत्नों का प्रभाव आपको बहुत जल्द ही समझ में आने लगेगा !
हकीकत में कोई रत्न पहनने के बाद लाभ मिलने में थोड़ी देरी लग सकती है, जबकि नुकसान तुरन्त समझ में आ जाता है !
ज्योतिष में रत्नों को ग्रहों से जोड़कर देखा गया है ! रत्न की रश्मि-तरंगें जीवन पर प्रभाव डालती हैं ! ऐसे में आवश्यक है कि आप जिस रत्न को धारण कर रहे है उसके बारे में आपकों विस्तृत जानकारी भी होनी चाहिए, कि कौन सा रत्न किस प्रकार से नुकसान या लाभ पहुंचा सकते हैं !

#माणिक्य_रत्न :
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कन्या, तुला, मकर, और कुम्भ लग्न के जातकों को माणिक्य धारण नहीं करना चाहिए ! इसके धारण करने से हड्डियों में दर्द की समस्या आने लगती है !

#मोती_रत्न :
यह चंद्रमा का रत्न है ! मन काे शांत रखने में सहायक होता है ! लेकिन वृष, मिथुन, कन्या और मकर लग्न लोगों के लिए यह नुकसानदेह साबित होता है ! इसके नुकसान से मनुष्य की मानसिक स्थिति बिगड़ने लगती है !

अगर आप भी रत्न धारण करने जा रहे है तो हो जाएं सावधान, हो सकता है ये बड़ा नुकसान

यदि आप भी रत्न धारण करने जा रहे है तब हो जाएं सावधान, हो सकता है यह बड़ा नुकसान !

अधिकतर लोगो को रत्न धारण करने का बहुत शौक होता है ! जिन लोगो का रत्न विक्रेताओं से घनिष्ठ सम्बंध होता है उनके इस शौक के उत्तरदायी ज्योतिषी ही होते हैं ! जब कोई व्यक्ति किसी अपने मित्र को रत्न ना धारण करने का परामर्श देता है, तो उनमें से कुछ मित्र आश्चर्यचकित हो जाते हैं और कुछ मायूस हो जाते हैं ! ज्योतिषी लोग राशि रत्न, लग्नेश का रत्न, विवाह हेतु गुरु-शुक्र के रत्न पहनने की सलाह देते हैं ! वर्तमान समय में लॉकेट के रूप में भी एक नया फैशन चल रहा है जिसमें लग्नेश,पंचमेश व नवमेश के रत्न होते हैं ! लेकिन ऐसा करना नुकसानदेह साबित हो सकता है !
जानिए कैसे —

ऐसा कहा जाता है की रत्न स्वयं सिद्ध प्रकृति का अनमोल उपहार हैं ! पृथ्वी पर मनुष्य ने अपनी हर समस्या का हल खोज लिया है, अब यह समाधान चाहे वैज्ञानिक हो या तांत्रिक या ज्योतिषीय या कोई और परन्तु उसे हमेशा सावधानीपूर्वक ही करना चाहिए ! आपको रत्नों को पहनने से पहले विशेष सावधानी रखनी चाहिए ! किसी भी रत्न को पहनने से पहले उसके अधिपति ग्रह की जन्म पत्रिका में स्थिति एवं अन्य ग्रहों के साथ उसके सम्बंध का गहनता से अध्ययन करना चाहिए, रत्‍न धारण करने से पहले यह देखना जरूरी होता है कि वह शुद्ध है या नहीं ! साथ ही साथ उन्हें पहने के लिए जो नियम बताए गए हैं उनका पूरी तरह से पालन करना भी जरूरी है ! ज्‍योतिष के अनुसार, नौ ग्रहों में किसी ग्रह के कमजोर होने पर अक्सर रत्न धारण करने की सलाह दी जाती है, लेकिन इनका प्रभाव तभी होता है जब इन्हें ठीक प्रकार से धारण किया जाए !

यदि आप भी रत्न धारण करने जा रहे है तो हो जाएं सावधान, हो सकता है ये बड़ा नुकसान :

रत्न धारण करने से पहले यह देख लें कि कहीं 4, 9 और 14 तिथि तो नहीं है ! इन तारीखों को रत्न धारण नहीं करना चाहिए ! यह भी ध्यान रखें कि जिस दिन रत्न धारण करें उस दिन गोचर का चंद्रमा आपकी राशि से 4,8,12 भाव में ना हो ! अमावस्या, ग्रहण और संक्रान्ति के दिन भी रत्न धारण ना करें ! यह भी जरुरी है कि जिस ग्रह का रत्न आप पहन रहे हैं वह रत्न धारण करने से आपकी समस्याओं का समाधान हो जाता है ! रत्न धारण करना कहने को तो अंगूठी पहनाने के समान आसान है परन्तु रत्न धारण करने में कुछ सावधानियां भी अनिवार्य हैं ! वह जन्म पत्रिका में किस प्रकार के योग का सृजन कर रहा है या किस ग्रह की अधिष्ठित राशि का स्वामी है ! यदि जन्म पत्रिका में एकाधिक रत्नों के धारण की स्थिति बन रही हो तब वर्जित रत्नों का भी पूर्ण ध्यान रखना भी आवश्यक है !

यह गलत धारणा है कि रत्न सदैव ग्रह की शांति के लिए धारण किया जाता है वास्तविकता तो इससे ठीक विपरीत है रत्न हमेशा शुभ ग्रह के बल में वृद्धि करने के लिए धारण किया जाता है ! अनिष्ट ग्रह की शांति के लिए उस ग्रह के रत्न का दान किया जाता है।

हर किसी की जन्मपत्री में ग्रहों की कमजोर और बलवान दशा के अनुसार ही भाग्य में परिवर्तन आता रहता है ! अशुभ ग्रहों को शुभ बनाना या शुभ ग्रहों को और अधिक शुभ बनाने के लिए लोग तरह-तरह के उपाय करते हैं जैसे कुछ रत्न ग्रहशांति के उपरांत अल्प समया‍वधि के लिए धारण किए जाते हैं जिनका निर्णय जन्म पत्रिका के गहन परीक्षण के उपरांत किया जाता है ! अत: रत्न धारण करने के पूर्व अत्यंत सावधानी रखते हुए किसी विद्वान ज्योतिषी से जन्म पत्रिका के गहन परीक्षण के उपरांत ही रत्न धारण करना चाहिए अन्यथा लाभ के स्‍थान पर हानि हो सकती

31/12/2021

** #विभिन्न_भाव_के_कारक_ग्रह :--

किसी भी भाव के शुभाशुभ फल जानने के लिए यह आवश्यक होता है कि हम उस भाव के कारक ग्रह को एवं कुण्डली में उस ग्रह की वर्तमान स्थिति को देखकर ही विश्लेषण करें, तभी यथेष्ठ परिणाम सामने आ सकता है ! नीचे सभी भाव व उनके कारक ग्रह दिए जा रहे हैं :-
1 - प्रथम भाव -- सूर्य,
2 - दूसरा भाव -- गुरू,
3 - तृतीय भाव – मंगल,
4 - चतुर्थ भाव – चंद्र,
5 - पंचम भाव – गुरु,
6 - षष्ठ भाव – मंगल,
7 - सप्तम भाव – शुक्र,
8 - अष्टम भाव – शनि,
9 - नवम भाव – गुरु,
10- दशम भाव – गुरु, सूर्य, बुध और शनि,
11-एकादश भाव – गुरु,
12-द्वादश भाव – शनि !

* सभी भाव को कोई न कोई विचारणीय विषय प्रदान किया गया है जैसे प्रथम भाव को व्यक्ति का रंग रूप व्यक्तित्व, तो दुसरा भाव धन, वाणी का भाव है, वहीं तीसरा भाव पराक्रम, सहोदर का भाव है ! इसी प्रकार सभी भाव को निश्चित विषय प्रदान किया गया है ! प्रस्तुत लेख में सभी भाव तथा ग्रह के कारकत्व बताने का प्रयास किया गया है !

** जन्मकुंडली के प्रत्येक भाव से विचारणीय विषय :
1st House : प्रथम अथवा तनु भाव :
जन्मकुंडली में प्रथम भाव से लग्न, उदय, शरीर,स्वास्थ्य, सुख-दुख, वर्तमान काल, व्यक्तित्व, आत्मविश्वास, आत्मसम्मान, जाति, विवेकशीलता, आत्मप्रकाश, आकृति( रूप रंग) मस्तिष्क, उम्र पद-प्रतिष्ठा, धैर्य, विवेकशक्ति, इत्यादि का विचार करना चाहिए ! किसी भी व्यक्ति के सम्बन्ध में यह देखना है कि उसका स्वभाव रंगरूप कैसा है तो इस प्रश्न का जबाब प्रथम भाव ही देता है !

2nd House : द्वितीय अथवा वाणी व धन भाव :
जन्मकुंडली में दूसरा भाव धन, बैंक एकाउण्ट, वाणी, कुटुंब-परिवार, पारिवारिक, शिक्षा, संसाधन, माता से लाभ, चिट्ठी, मुख, दाहिना नेत्र, जिह्वा, दाँत इत्यादि का उत्तरदायी भाव है ! यदि यह देखना है कि जातक अपने जीवन में धन कमायेगा या नहीं तो इसका उत्तर यही भाव देता है !

3rd House : तृतीय अथवा सहज भाव :
यह भाव जातक के लिए पराक्रम, छोटा भाई-बहन, धैर्य, लेखन कार्य, बौद्धिक विकास, दाहिना कान, हिम्मत, वीरता, भाषण एवं संप्रेषण, खेल, गला कन्धा दाहिना हाँथ, का उत्तरदायी भाव है ! यदि यह देखना है कि जातक का अपने भाई बहन के साथ कैसा सम्बन्ध है, तो इस प्रश्न का जबाब यही भाव देता है !

4rth House : चतुर्थ अथवा कुटुंब भाव :
यह भाव जातक के जीवन में आने वाली सुख-सुविधा, भूमि, घर, संपत्ति, वाहन, जेवर, गाय-भैस, जल, शिक्षा, माता, माता का स्वास्थ्य, ह्रदय, पारिवारिक प्रेम, छल, उदारता, दया, नदी, घर की सुख-शांति जैसे विषयों का उत्तरदायी भाव है ! यदि किसी जातक की कुंडली में यह देखना है कि जातक का घर कब बनेगा तथा घर में कितनी शांति है तो इस प्रश्न का उत्तर चतुर्थ भाव से मिलता है !

5th House : पंचम अथवा संतान भाव :
जन्मकुंडली में पंचम भाव से संतान सुख, बुद्धि, शिक्षा, विद्या, शेयर संगीत, मंत्री, टैक्स, भविष्य ज्ञान, सफलता, निवेश, जीवन का आनन्द, प्रेम, सत्कर्म, पेट, शास्त्र ज्ञान यथा वेद उपनिषद पुराण गीता, कोई नया कार्य, प्रोडक्शन, प्राण आदि का विचार करना चाहिए ! यदि कोई यह जानना चाहता है कि जातक की पढाई या संतान सुख कैसा है तो इस प्रश्न का जबाब पंचम अर्थात संतान भाव ही देगा अन्य भाव नहीं !

6th House : षष्ठ अथवा रोग भाव :
जन्मकुंडली में षष्ठ भाव से रोग,दुख-दर्द, घाव, रक्तस्राव, दाह, अस्त्र, कर्ज सर्जरी, डिप्रेशन, शत्रु, चोर, चिंता, लड़ाई झगड़ा, केश-मुक़दमा, युद्ध, दुष्ट, कर्म, पाप, भय, अपमान, नौकरी आदि का विचार करना चाहिए ! यदि कोई यह जानना चाहता है कि जातक का स्वास्थ्य कैसा रहेगा या मुकदमे में मेरी जीत होगी या नहीं तो इस प्रश्न का जबाब षष्ठ भाव ही देगा अन्य भाव नहीं !

7th House : सप्तम अथवा विवाह भाव :
जन्मकुंडली में सप्तम भाव से पति-पत्नी, ह्रदय की इच्छाए ( काम वासना), मार्ग, लोक, व्यवसाय, साझेदारी में कार्य, विवाह ( Marriage) , कामेच्छा, लम्बी यात्रा आदि पर विचार किया जाता है ! इस भाव को पत्नी वा पति अथवा विवाह या साझेदारी का भाव भी कहा जाता है ! यदि कोई यह जानना चाहता है कि जातक की पत्नी वा पति कैसा होगा या साझेदारी में किया गया कार्य सफल होगा या नही का विचार करना हो तो इस प्रश्न का जबाब सप्तम भाव ही देगा अन्य भाव नहीं !

8th House : अष्टम अथवा मृत्यु भाव :
जन्मकुंडली में अष्टम भाव से मृत्यु, आयु, मांगल्य ( स्त्री का सौभाग्य – पति का जीवित रहना), परेशानी, मानसिक बीमारी ( Mental disease) , संकट, क्लेश, बदनामी, दास ( गुलाम), बवासीर रोग, गुप्त स्थान में रोग, गुप्त विद्या, पैतृक सम्पत्ति, धर्म में आस्था और विश्वास, गुप्त क्रियाओं, तंत्र-मन्त्र अनसुलझे विचार, चिंता आदि का विचार करना चाहिए ! इस भाव को मृत्यु भाव भी कहा जाता है, यदि किसी की मृत्यु का विचार करना है तो यह भाव बताने में सक्षम है !

9th House : नवम अथवा भाग्य भाव :
जन्मकुंडली में निर्धारित नवम भाव से हमें भाग्य, धर्म, अध्यात्म, भक्ति, आचार्य-गुरु, देवता, पूजा, विद्या, प्रवास, तीर्थयात्रा, बौद्धिक विकास, और दान इत्यादि का विचार करना चाहिए ! इस स्थान को भाग्य स्थान तथा त्रिकोण भाव भी कहा जाता है ! यह भाव पिता (उत्तर भारतीय ज्योतिष) का भी भाव है इसी भाव को पिता के लिए लग्न मानकर उनके जीवन के सम्बन्ध में महत्त्वपूर्ण भविष्यवाणी की जाती है ! यह भाव हमें बताता है कि हमारी मेहनत और अपेक्षा में भाग्य का क्या रोल है क्या जितना मेहनत कर रहा हूँ उसके अनुरूप भाग्यफल भी मिलेगा ! क्या मेरे तरक्की में भाग्य साथ देगा इत्यादि प्रश्नों का उत्तर इसी भाव से मिलता है !

10th House : दशम अथवा कर्म भाव :
जन्मकुंडली में निर्धारित दशम भाव से राज्य, मान-सम्मान, प्रसिद्धि, नेतृत्व, पिता ( दक्षिण भारतीय ज्योतिष), नौकरी, संगठन, प्रशासन, जय, यश, यज्ञ, हुकूमत, गुण, आकाश, स्किल, व्यवसाय, नौकरी तथा व्यवसाय का प्रकार, इत्यादि का विचार इसी भाव से करना चाहिए ! कुंडली में दशम भाव को कर्म भाव भी कहा जाता है ! यदि कोई यह जानना चाहता है कि जातक कौन सा काम करेगा, व्यवसाय में सफलता मिलेगी या नहीं , जातक को नौकरी कब मिलेगी और मिलेगी तो स्थायी होगी या नहीं इत्यादि का विचार इसी भाव से किया जाता है !

11th House : एकादश अथवा लाभ भाव :
जन्मकुंडली में निर्धारित एकादश भाव से लाभ, आय, संपत्ति, सिद्धि, वैभव, ऐश्वर्य, कल्याण, बड़ा भाई-बहन, बायां कान, वाहन, इच्छा, उपलब्धि, शुभकामनाएं, धैर्य, विकास और सफलता इत्यादि पर विचार किया जाता है ! यही वह भाव है जो जातक को उसकी इच्छा की पूर्ति करता है ! इससे लाभ का विचार किया जाता है ! किसी कार्य के होने या न होने से क्या लाभ या नुकसान होगा उसका फैसला यही भाव करता है ! वस्तुतः यह भाव कर्म का संचय भाव है अर्थात आप जो काम कर रहे है उसका फल कितना मिलेगा इसकी जानकारी इसी भाव से प्राप्त की जा सकती है !

12th House : द्वादश वा व्यय भाव :
जन्मकुंडली में निर्धारित द्वादश भाव से व्यय, हानि, रोग, दण्ड, जेल, अस्पताल, विदेश यात्रा, धैर्य, दुःख, पैर, बाया नेत्र, दरिद्रता, चुगलखोर, शय्या-सुख, ध्यान और मोक्ष इत्यादि का विचार करना चाहिए ! इस भाव को रिफ भाव भी कहा जाता है ! जीवन पथ में आने वाली सभी प्रकार क़े नफा नुकसान का लेखा जोखा इसी भाव से जाना जाता है ! यदि कोई यह जानना चाहता है कि जातक विदेश यात्रा (abroad Travel) करेगा या नहीं यदि करेगा तो कब करेगा, शय्या सुख मिलेगा या नहीं इत्यादि का विचार इसी भाव से किया

29/12/2021

* #मूंगा_पहनने_के_फायदे_और_नुकसान --

* मूंगा समुद्र में पायी जानी वाली एक वनस्पति है, जिसे मंगल का रत्न कहा जाता है ! जिन लोगों की कुण्डली में मंगल पापी होकर अशुभ फल दे रहा होता है, उसे नियंत्रित करने के लिए मूंगा धारण करना चाहिए ! मूंगा एक ऐसा रत्न है, जिसे धारण करने से अनेको प्रकार के लाभ प्राप्त होते है !

मंगल के रत्न मूंगा से जीवन मंगलमय हो जाता है :

आईये जानते है कि मूंगा पहनने से क्या-क्या लाभ होते हैंं :--

* #मूंगा_पहनने_के_लाभ :
1. इस रत्न को सोने/चॉदी या तॉबे में पहनने से बच्चों को नजर नहीं लगती एंव भूत-प्रेत व बाहरी हवा का भय खत्म हो जाता है !

2. मूंगा धारण करने से ईर्ष्या दोष समाप्त होता है, साहस व आत्म-विश्वास में वृद्धि होती है !

3. मेडिकल क्षेत्र से जुड़े लोगों को मूंगा पहनने से अत्यन्त लाभ होता है !

4. उदासी व मानसिक अवसाद पर काबू पाने के लिए मूॅगा रत्न अवश्य धारण करना चाहिए !

5. किसी बच्चे को आलस्य बहुत सता रहा हो, रक्त सम्बन्धी बिमारी हो, पुलिस, आर्मी, डाक्टर, प्रापर्टी का काम करने वाले, हथियार निर्माण करने वाले, सर्जन, कम्प्यूटर साप्टवेयर व हार्डवेयर इन्जीनियर आदि लोगों को मूॅगा पहनने से विशेष लाभ होता है !

6. यदि किसी बच्चे को आलस्य बहुत आता है तब उसे मूॅगा पहनाने से उसका आलस्य दूर भाग जाता है !

7. यदि किसी व्यक्ति को रक्त से सम्बन्धित कोई दिक्कत है तब उसे मूंगा पहनने से फायदा मिलता है !

8. मिर्गी तथा पीलिया रोगियों के लिए मूंगा पहनना अत्यन्त हितकारी साबित होता है !

9. मेष, वृश्चिक, सिंह, धनु व मीन राशि वाले जातक तथा मधुमेह के शिकार, शुगर रोगी यदि मूंगा धारण करें तो उनका शुगर नियंत्रित हो जाता है !

10. जिनके मॉसपशियों में कष्ट रहता है, उन्हें मूॅगा पहनने से फायदा मिलता है !

11. मेष, वृश्चिक, सिंह, धनु व मीन राशि वाले लोग मूंगा धारण कर सकते है !

12. सूर्य और मंगल आपस में मित्र है ! सूर्य का रत्न माणिक्य है, इसलिए मूंगा के साथ माणिक्य पहना जा सकता है !

13. मूंगा रत्न पुखराज और मोती के साथ भी पहना जा सकता है !

14. मंगलवार के दिन प्रातःकाल शौच व स्नान के बाद मंगल के मंत्र का जाप कर विधिपूर्वक अभिमंत्रित कर मूंगा तर्जनी अथवा अनामिका अंगुली में धारण किया जा सकता है !

15. मूंगा गोमेद, लहसुनिया, हरी व नीलम के साथ पहनना हानिकारक सिद्ध हो सकता है !

16. मूंगा सिर्फ शुक्ल पक्ष में मंगलवार के दिन चित्रा व मृगशिरा नक्षत्र में ही धारण करना चाहिए !

17. मूंगा धारण करने के पश्चात चमड़े अथवा मृत शरीर से बनी कोई वस्तु कदापि नहीं धारण करना चाहिए और मंगलवार व शनिवार को तो मांसाहार कदापि नहीं करना चाहिए !

* #मूंगा_धारण_करने_की_विधि :

सोमवार, मंगलवार व बुधवार को धूम्रपान व मांसाहार कदापि न करें ! सोमवार के दिन प्रातःकाल स्नान ध्यान करके कच्चे दूध व गंगाजल में मूंगे को डालकर पूजा गृह में रख दें ! दूसरे दिन मंगलवार की सुबह 108 बार "ॐ भौं भौमाय नमः !" मन्त्र का जाप करें एंव हनुमान जी के चरणों मूगा की अंगूठी निकालकर कपड़े से पोंछकर साफ कर पहले हनुमानजी की प्रार्थना करें ! हे हनुमान जी हम आपकी कृपा से मूंगा रत्न धारण कर रहें है ! अतः इसको धारण करने पर हमारा मनोरथ पूर्ण करो ! तत्पश्चात मूंगा को तर्जनी या अनामिका उंगली में धारण कर लें !

#सावधानियाँ :
1- मूंगा से बनी अभिमंत्रित अंगूठी पहनने के बाद शराब पीना व मांसाहार नुकसान पहुँचा सकता है, क्योंकि हनुमान जी से भी सम्बन्धित होने के कारण ऐसा करना वर्जित है !
2 - मूंगा की अंगूठी पहनकर शवयात्रा या अंतिम संस्कार में सम्मिलित न हों, अंगूठी निकालकर घर के मंदिर, तिजोरी या किसी अन्य पवित्र स्थान पर रखकर जायें !
3 - मूंगा की अंगूठी के साथ नीलम, गोमेद, लहसुनिया, पन्ना की अंगूठी न पहनें ! हीरा या ओपल पहन सकते हैं ! पर परिणाम बुरे आवें तो इसे भी साथ न पहनें !
4 - मंगल यदि कुण्डली में मारक ग्रह है, तब मूंगा कदापि न पहनें !
5 - मंगल के कम अंश के होने, नीच राशि में होने, अस्त होने, पापकर्तरी योग में फंसे होने शत्रुक्षेत्री होने या शत्रुग्रह से दृष्ट होने पर यथोचित फल नहीं मिल पाता यदि मंगल कुण्डली में योगकारक हैं, तब मूंगा धारण करने से उनको बल मिलेगा और यथोचित लाभ

29/12/2021

पन्ना रत्न - Panna Stone.

ज्योतिषीय महत्व के अनुसार पन्ना रत्न जिसे मरकत मणि, हरित मणि व अंग्रेजी में "एमराल्ड स्टोन (Emerald Stone)" भी कहा जाता है, बहुत ही अनमोल और मूल्यवान रत्न है ! पन्ना मूलत: हरे रंग का होता है और यह हल्के और गहरे हरे रंग में उपलब्ध होता है ! क्रोमियम और वैनेडियम जैसे तत्वों की वजह से पन्ना हरे रंग का होता है ! पन्ना को कोयले की खदान से निकाला जाता है ! सबसे मूल्यवान और प्रभावी पन्ना रत्न अमेरिका के कोलंबिया में पाए जाते हैं ! खदान से प्राप्त किए जाने के बाद पन्ना रत्न की सतह पर आने वाली दरारों को दूर करने के लिए इसकी ऑयलिंग की जाती है यानि तेल लगाकर इसे तराशा जाता है ! इस वजह से रत्न की संरचना में और अधिक सुधार होता है व स्थिरता एवं स्पष्टता आती है ! इसके लिए देवदार तेल का उपयोग किया जाता है ! इन विधियों को पूरा करने से पन्ना रत्न की गुणवत्ता में सुधार होता है और यह लंबे समय तक टिका रहता है ! पन्ना रत्न की गुणवत्ता का निर्धारण 4 मापदंडों पर किया जाता है, इनमें रंग, आकार, स्पष्टता और कैरेट यानि वज़न है ! पन्ना को धारण करने से कई सकारात्मक नतीजे प्राप्त होते हैं ! इसके प्रभाव से कुछ हद तक मानसिक विकारों में सुधार होता है ! वे लोग जिनकी जन्म कुंडली में बुध कमज़ोर होता है वे मानसिक और बौद्धिक क्षमता में वृद्धि के लिए पन्ना धारण कर सकते हैं ! यह भी माना जाता है कि अगर गर्भवती महिला के कमर में पन्ना को बांधा जाता है तो प्रसव में आसानी होती है ! वे लोग जो बोलने में हकलाते या तुतलाते हैं उन्हें पन्ना पहनने की सलाह दी जाती है !

* पन्ना रत्न से होने वाले लाभ :
पन्ना रत्न के कई लाभ और विशेषताएं हैं ! जीवन में होने वाली कई घटनाएं और दुख में राहत पहुंचाने के लिए पन्ना बहुत ही सहायक होता है !
* इससे जुड़े लाभ नीचे दर्शाए गए हैं :

यह अच्छी सेहत व धन संबंधी मामलों के लिए अच्छा होता है और जीवन में खुशियों को बरकरार रखता है !
पन्ना में जहरीले तत्वों व विषाणु से लड़ने की भी क्षमता होती है और इसे धारण करने से सर्प दंश की संभावना भी कम हो जाती है !
यह गर्भवती महिलाओं के लिए लाभकारी होता है क्योंकि इसे धारण करने से उन्हें प्रसव के समय ज्यादा तकलीफ नहीं होती है !
यह मानसिक तनाव को भी कम करता है और रक्तचाप सामान्य बनाये रखता है !
यदि पन्ना रत्न आपको उपहार में दिया गया है, तो यह अच्छे भाग्य का कारक होता है, विशेषकर मिथुन और कन्या राशि के लोगों के लिए !
वे लोग जो बोलने में हकलाते हैं उनके लिए पन्ना रत्न धारण करना लाभकारी होता है ! यदि आप एक वक्ता हैं और पन्ना धारण करते हैं, तो आपकी भाषा और वाणी में और निखार आएगा !
पन्ना रत्न से होने वाले नुकसान
पन्ना एक बहुत ही मूल्यवान रत्न है ! यदि इसके सकारात्मक प्रभाव है, तो कुछ नकारात्मक प्रभाव भी होते हैं !

इनमें से कुछ बुरे प्रभाव इस प्रकार हैं :

वे लोग जो अपनी जन्म कुंडली में बुध के बुरे प्रभाव से पीड़ित हैं उन्हें पन्ना नहीं पहनना चाहिए !
वे लोग जिनकी आदत बातों को ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर कहने की होती है और झूठ बोलने की होती है, उन्हें पन्ना रत्न नहीं पहनना चाहिए !
वे व्यक्ति जो छोटी सी बात को बड़ा बना देते हैं उन्हें भी पन्ना नहीं धारण करना चाहिए !
वे लोग जो दूसरों के विरुद्ध षडयंत्र रचते हैं उन्हें भी पन्ना रत्न पहनने से परहेज़ करना चाहिए !
यदि आप चोरी करते हैं या कभी कोई चोरी की है तो भी आपको पन्ना धारण नहीं करना चाहिए !
वे लोग जो किसी भी तरह की एलर्जी से प्रभावित रहते हैं उन्हें भी पन्ना नहीं पहनना चाहिए !
वे लोग जिनकी बुद्धि बहुत तेज है उन्हें भी पन्ना नहीं पहनना चाहिए क्योंकि यह उन लोगों के लिए है जिनका बुध कमज़ोर होता है !

* कितने रत्ती यानि वज़न का पन्ना रत्न धारण करना चाहिए :
यदि आप पन्ना रत्न पहली बार पहन रहे हैं, तो यह कम से कम दो कैरेट का होना चाहिए ! इसे सोने या चाँदी में धारण करके पहनना लाभकारी होता है ! पन्ना रत्न दो कैरेट से लेकर कई प्रकार का होता है ! पन्ना रत्न पहनने के बाद 45 दिनों के अंदर इसका असर दिखने लगता है और इसका प्रभाव 3 वर्ष तक रहता है !

ज्योतिषीय विश्लेषण :-
विभिन्न राशियों पर पन्ना रत्न का प्रभाव :
पन्ना बुध ग्रह से संबंधित रत्न है और बुध का संबंध बौद्धिकता, स्मरण शक्ति और वाणी के प्रवाह से होता है इसलिए यह इन मामलों में शक्ति और वृद्धि प्रदान करता है ! ज्योतिषीय दृष्टिकोण से इस बात को समझा जा सकता है कि पन्ना रत्न सभी राशियों के लिए उपयुक्त नहीं होता है ! नीचे की ओर दी गई जानकारी में यह बताया गया है कि पन्ना रत्न किस राशि के लिए लाभकारी है या नहीं !

(सूचना: हम सभी पाठकों को यह सुझाव देते हैं कि कोई भी रत्न पहनने से पहले एक बार किसी ज्योतिषी से परामर्श अवश्य ले लें !)

मेष :
इस राशि के जातकों को पन्ना रत्न पहनने की सलाह नहीं दी जाती है !

वृषभ :
आप पन्ना पहन सकते हैं लेकिन अच्छे परिणाम के लिए इसके साथ-साथ हीरा या सफेद पुखराज भी धारण करें !

मिथुन :
मिथुन राशि के जातकों को पन्ना पहनने की सलाह दी जाती है क्योंकि यह उनकी जन्म राशि का रत्न है !

कर्क :
इस राशि के लोगों को पन्ना रत्न बिल्कुल नहीं पहनना चाहिए !

सिंह :
पन्ना पहनना आपके लिए बेहद लाभकारी होगा !

कन्या :
पन्ना इस राशि के लोगों का जन्म राशि रत्न है इसलिए पन्ना को धारण करने से आपको विविध क्षेत्रों में मदद मिलेगी !

तुला :
पन्ना से अच्छे परिणाम प्राप्त करने के लिए इसे हीरे के साथ पहनें !

वृश्चिक :
वृश्चिक राशि के जातक पन्ना धारण करने से पहले एक बार ज्योतिषीय परामर्श अवश्य लें !

धनु :
इस राशि के लोग पन्ना धारण कर सकते हैं लेकिन बेहतर परिणाम के लिए इसे पुखराज के साथ पहनें !

मकर :
पन्ना को आप बिना किसी परेशानी के भी पहन सकते हैं !

कुंभ
पन्ना पहने से पहले ज्योतिषीय परामर्श अवश्य लें और पन्ना को विशेष परिस्थितियों में नीलम रत्न के साथ ही धारण करें !

मीन :
अच्छे परिणाम प्राप्त करने के लिए मीन राशि के लोग पन्ना को किसी अन्य रत्न के साथ पहनें, इसके लिए ज्योतिषीय परामर्श लें ! क्योंकि केवल पन्ना रत्न धारण करना आपके लिए हानिकारक हो सकता हैं !

पन्ना रत्न की तकनीकी संरचना :
पन्ना में बेरिलयम और एल्यूमीनियम के सिलिकेट होते हैं इसलिए इसे मिश्रित खनिज कहा जाता है ! इसका रंग हरा होता है और हल्के हरे से गहरे हरे रंग के रूप में पाया जाता है ! मोह्स स्कैल पर इसकी कठोरता 7.5 से 8.0 तक होती है। इस कठोरता की वजह से पन्ना आभूषण संबंधी कार्यों के लिए अच्छा माना जाता है ! कठोरता अच्छी होने की वजह से पन्ना रत्न में स्थिरता से संबंधित समस्या होती है ! ऐसे पन्ना रत्न बहुत ही कम मिलते हैं जिनकी सतह पर कोई दरार या टूट-फूट ना हो ! दरअसल सतह पर दरारों की वजह से रत्न कमजोर होता है और इसकी वजह से टूटने का डर बना रहता है ! पन्ना रत्न में आने वाली दरारों को भरने और इसे मजबूती प्रदान करने के लिए इसमें अन्य सामग्री मिलाई जाती है ! इन तरीकों को अपनाने से रत्न की दिखावट में सुंदरता में बढ़ती है हालांकि इससे रत्न की स्थिरता में कोई सुधार या बदलाव नहीं होता है !

पन्ना रत्न पहनने की विधि :
पन्ना बुध ग्रह से संबंधित रत्न है और इसे सोने की अंगूठी में कनिष्ठा यानि छोटी अंगुली में पहना जा सकता है ! पन्ना रत्न को धारण करने से पहले इसे कच्चे दूध व गंगा जल में डालें और शुद्धिकरण करें ! इसके बाद भगवान विष्णु को पीले फूल चढ़ाएं व सुंगधित अगरबत्ती लगाएं, क्योंकि भगवान विष्णु बुध ग्रह के अधि देवता है और फिर बुध ग्रह के बीज मंत्र ‘’ऊँ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:’’ का 108 बार जप करें ! इसके बाद पन्ना को बुधवार के दिन या फिर अश्लेषा, ज्येष्ठा और रेवती नक्षत्र में पहना जा सकता है !

पन्ना बहुत ही प्रभावकारी रत्न है :

पन्ना रत्न अत्यन्त फायदेमंद रत्न है, लेकिन पहनने से पहले यह बातें समझ लें :—

आईये जानते है कि पन्ना रत्न किसे धारण करना चाहिए और किसे नहीं !

पन्ना पहनने के लाभ
पन्ना रत्न बुध ग्रह से सम्बन्धित है और बुध का स्मरण शक्ति पर सबसे अधिक प्रभाव रहता है, इसलिए जिन लोगों की स्मरण शक्ति कमजोर हो, उन्हें पन्ना धारण करने लाभ होता है !
जो लोग किसी भी प्रकार का व्यापार करते हैं उनके लिए पन्ना पहनना अत्यन्त लाभकारी सिद्ध होता है !
जिन बच्चों का पढ़ाई में मन न लगता हो या फिर जो पढ़ते हो वह शीघ्र ही भूल जाते हैं, उन्हें चांदी के लाकेट में पन्ना गले में धारण करवाना चाहिए !

सर्प भय :
पन्ना धारण करने से सर्प भय नहीं रहता है !

पन्ना धारण करने के लाभ व हानि : -
पन्ने को 10 मिनट तक पानी में डालें उसके पश्चात उस पानी की छींटे आंखों में मारने से नेत्र रोगों में आराम मिलता है एंव आंखे स्वस्थ्य रहती हैं !
जिन लोगों को सर्प भय रहता है, उन्हें पन्ना जरूर धारण करना चाहिए !
गणित और कामर्स की अध्यापकों को पन्ना पहनने से शुभ फल की प्राप्ति होती है !
यदि बुध धनेश होकर भाग्य भाव में हों तो पन्ना धारण करने से भाग्य पक्ष में वृद्धि होती है एंव धन की प्राप्ति होती है !
यदि बुध सप्तमेश होकर द्वितीय भाव में बैठा हो तो पन्ना पहनने से स्त्री व यात्रा के जरिये धन लाभ होता है !
बुद्ध ग्रह शुभ स्थान का स्वामी होकर अगर लाभ भाव में बैठे हों तब पन्ना पहनने से लाभ होता है !
मिथुन तथा कन्या राशि वालों के लिए पन्ना पहनना अत्यन्त शुभ रहता है !

पन्ना किसे नहीं धारण करना चाहिए ?
पन्ना रत्न बुद्ध ग्रह से सम्बन्धित है ! बुद्ध एक शुभ ग्रह हैं, इसलिए अगर त्रिक भाव 6, 8, 12 का बुद्ध स्वामी हो तो पन्ना पहनने से अचानक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है !
यदि बुद्धग्रह की महादशा चल रही है और बुद्ध आठवें या 12वें भाव में बैठा है तो पन्ना पहनने से समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है !
पन्ना ओपल या हीरा के साथ पहनने से नुकसान होता है !
पन्ना मोती के साथ भी धारण नहीं करना चाहिए !

स्वास्थ्य हेतु पन्ना धारण करने पर लाभ :

जिन लोगों की पाचन शक्ति खराब रहती हो, उन्हें पन्ना अवश्य धारण करना चाहिए !
गर्भवती महिलाओं को पन्ना धारण करने से अधिक लाभ मिलता है !
जो लोग दमा रोग से पीड़ित है, उन्हें पन्ना रत्न चांदी की अॅगूठी में बनवाकर कनिष्ठका अॅगुली में धारण करने से रोग में कमी आती है !
पन्ना पहनने से पौरूष शक्ति में भी वृद्धि होती है एंव स्वास्थ्य उत्तम रहता है !

पन्ना धारण करने की विधि :
मंगलवार के दिन प्रातःकाल स्नान-ध्यान करके पन्ना को गंगाजल में दूध मिलाकर डाल दें फिर दूसरे दिन बुद्धवार को स्नान-ध्यान करने के पश्चात गणेशजी की पूजा करके बुद्धदेव का निम्न मंत्र का जाप करना चाहिए :-

‘‘ऊॅ बुं बुधाय नमः'' अथवा " ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुद्धाय नमः "

मंत्र की कम से कम एक माला का जाप करने के बाद पन्ना की अंगूठी कनिष्ठका अंगुली में धारण करें ! सूर्योदय से लेकर सुबह 10 बजे तक पन्ना धारण कर लें ! मंगलवार, बुधवार और गुरूवार को इन तीन दिन तक मांसाहार एंव धूम्रपान कदापि न करेें अन्यथा पन्ना पहने से कोई लाभ नहीं होगा !

नोट-पन्ना रत्न किसी अनुभवी और विशेषज्ञ ज्योतिषी की देख-रेख में ही पहनना चाहिए न कि किसी झोला छाप ज्योतिषी या पण्डित की सलाह पर ! क्योंकि रत्न एक विज्ञान है, जिसमें पूरे विधान का उल्लेख है कि रत्न कितने रत्ती का और किसे धारण करना चाहिए ! अगर आवश्यकता से अधिक कैरेट का पहनेगें तो नुकसान होगा एंव कम कैरेट का पहनेंगे तो लाभ नहीं होगा !

असली पन्ना रत्न की पहचान कैसे करें :
एक असली पन्ना रत्न बहुत मुलायम और टिकाऊ होता है ! इसकी सतह पर कुछ काले धब्बे होते हैं जो इसमें कार्बन के मिश्रण की वजह से होते हैं ! इन विशेषताओं की मदद से हम असली पन्ना रत्न की पहचान कर सकते हैं ! पन्ना रत्न की सतह पर कुछ दरारें भी होती है लेकिन इससे रत्न की गुणवत्ता और प्रभाव पर कोई असर नहीं होता है ! पन्ना रत्न को कोयले की खदानों से निकाला जाता है ! असली पन्ना रत्न की पहचान करने के लिए निम्न बातों को अवश्य ध्यान में रखें :

यदि असली पन्ना रत्न को हम आंखों पर रखते हैं तो यह शीतलता प्रदान करता है लेकिन अगर रत्न नकली हुआ तो आपको गर्माहट महसूस होगी !
यदि हम पानी से भरे एक ग्लास में पन्ना को डालते हैं तो इसमें से निकलने वाली हरी रोशनी में हमें विकिरण देखने को मिलेगी !
असली पन्ना रत्न पर पानी की बूंद स्थिर रहती है जबकि नकली पन्ना रत्न पर पानी की बूंदें बिखर जाती हैं !

प्राकृतिक रत्नों के बारे में कैसे जानें?
विकिरण और प्रतिबिंब :
जब पन्ना रत्न को पानी में डाला जाता है तो उसमें हरी रोशनी की विकिरण दिखाई देती है और इसके प्रभाव से पानी का रंग हरा दिखने लगता है ! पन्ना रत्न को हथेली पर एक सफेद कपड़े पर रखें ! जब प्रकाश रत्न पर पड़ेगा तब हरे रंग का प्रतिबिंब बनेगा !

तापमान:
जब आप पन्ना को अपनी आंख पर रखेंगे या इसे आंख के करीब लेकर जाएंगे, तो यह शीतलता प्रदान करेगा इससे सिद्ध होगा कि पन्ना असली है ! लेकिन यदि आपको गर्माहट महसूस होती है तो यह पन्ना नकली होगा !

चमक:
असली पन्ना रत्न को लकड़ी के टुकड़े पर रगड़ने से चिंगारी उत्पन्न होने लगेगी ! यदि यह नकली हुआ तो रगड़ने पर कोई चिंगारी नहीं निकलेगी !

विशिष्ट घनत्व और अपर्वतक सूचकांक:

असली पन्ना रत्न का अपना विशिष्ट घनत्व और अपर्वतक सूचकांक होता है जबकि असली रत्नों की तुलना में नकली रत्नों का विशिष्ट घनत्व और अपर्वतक सूचकांक बहुत कम होता है !

रंग :
यदि असली पन्ना रत्न को कच्ची हल्दी पर सावधानी से रगड़ा जाये, तो कुछ देर बाद हल्दी का रंग हल्का लाल हो जाएगा और यदि ऐसा नहीं होता है तो रत्न के नकली होने की संभावना रहती है !

ड्रॉप टेस्ट :
असली पन्ना रत्न पर पानी की एक बूंद डालें ! यह बूंद बिल्कुल स्थिर रहेगी लेकिन अगर पानी की बूंद फैलने लगती है तो रत्न के नकली होने की संभावना होती

27/12/2021

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आइये यहाँ हम स्त्री की कुंडली में स्थित ग्रहों को थोडा समझने का प्रयास करे -
1. लग्न और चन्द्रमा , मेष , मिथुन , सिंह तुला धनु, कुम्भ, राशियों में स्थित हो तो स्त्री में पुरुषोचित गुण जैसे बलिष्ट देह, मुछों की रेखा, क्रूरता, कठोर स्व, आदि होते हैं. चरित्र की दृष्टि से इनकी प्रशंसा नहीं की जा सकती है . क्रोध और अहंकार भी इनके प्रकृति में होता है।
2. लग्न और चन्द्रमा के सम राशियों में जैसे वृषभ , कर्क, कण, वृश्चिक, मकर, मीन में हो तो स्त्रियोंचित गुण पर्याप्त मात्रा में होते है . अच्छी देह, लज्जा, पति के प्रति निष्ठा , कुल मर्यादा के प्रति आस्था, आदि प्रकृति में रहते है।
3. स्त्री के कुंडली में सातवे स्थान में शनि हो और उस पर पाप ग्रहों की दृष्टि हो तो उसका विवाह नहीं होता।
4. सप्तम स्थान का स्वामी शनि के साथ स्थित हो या शनि से देखा जा रहा हो तो बड़ी उम्र में विवाह होता है।
विधवा योग :
1. जन्म कुंडली में सातवे स्थान में मंगल हो और उस पर पाप ग्रहों की दृष्टि हो तो विधवा योग बनता है . ऐसी लड़कियों का विवाह बड़ी उम्र में करने पर दोष कम हो जाता है .
2. आयु भाव में या चंद्रमा से सातवे स्थान में या आठवे स्थान में कई पाप गृह हो तो विधवा योग होता है।
3. 8 या 12 स्थान में मेष या वृश्चिक राशि हो और उसमे पाप गृह के साथ राहू हो तो विधवा योग होता है।
4. लग्न और सातवे स्थान में पाप गृह होने से भी विधवा योग बनता है।
5. चन्द्रमा से सातवे , आठवे, और बारहवे स्थान में शनि , मंगल हो और उन्पर भी पाप ग्रहों की दृष्टि हो तो विधवा योग अबंता है।
6. क्षीण या नीच का चन्द्र 6 या 8 स्थान में हो तो भी विधवा योग बनता है
7. 6 और 8 स्थान का स्वामी एक दुसरे के स्थान में हो और उन पर पाप ग्रहों की दिष्टि हो तो विधवा योग बनता है।
8. सप्तम का स्वामी अष्टम में और अष्टम का स्वामी सप्तम में हो और इनमे से किसी को पाप गृह देख रहा हो तो विधवा योग बनता है।
तलाक योग :
1. सूर्य का सातवे स्थान में होना तलाक की संभावनाए बनता है।
2. सातवे स्थान में निर्बल ग्रहों के होने से और उनपर शुभ ग्रहों के होने से एक पति स्वर तलाक देने पर दुसरे विवाह के योग बनते है।
3. सातवे स्थान में शुभ और पाप दोनों गृह होने से पुनर्विवाह के योग बनते है।
पति से सम्बंधित कुछ योग :
1. लग्न में अगर मेष , कर्क, तुला , मकर राशि हो तो पति परदेश में रहने वाला होता हो या घुमने फिरने वाला होता हो।
2. सातवे स्थान में अगर बुध और शनि स्थित हो तो पति पुरुश्त्वहीन होता हो।
3. सातवे स्थान खाली हो और उस पर किसी गृह की दृष्टि भी न हो तो पति नीच प्रकृति का होता है।
सुख योग :
1. बुध और शुक्र लग्न में हो तो कमनीय देह वाली , कला युक्त, बुध्हिमान और पति प्रिय होती है।
2. लग्न में बुध और चन्द्र के होने से चतुर, गुणवान, सुखी और सौभाग्यवती होती है।
3. लग्न में चन्द्र और शुक्र के होने से रूपवती , सुखी परन्तु ईर्ष्यालु होती है।
4. केंद्र स्थान के बलवान होने पर या फिर चन्द्र,, गुरु और बुध इनमे से कोई 2 गृह के उच्च होने पर तथा लग्न, में वरिश, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर, मीन, होतो समाज्पूज्य स्त्री होती है।
5. सातवे स्थान में शुभ ग्रहों के होने से गुणवती, पति का स्नेह प्राप्त करने वाली और सौभाग्य शाली स्त्री होती है।
बंध्यापन के योग :
1. सूर्य और शनि के आठवे स्थान में होने से बंध्या होती है।
2. आठवे स्थान में बुध के होने से एक बार संतान होकर बंद हो जाती है।
संतति योग :
1. सातवे स्थान में चन्द्र या बुध हो तो कन्याये अधिक होंगी।
2. सातवे स्थान में राहू हो तो अधिक से अधिक 2 पुत्रियाँ होंगी पुत्र होने में बढ़ा हो।
3. नवे स्थान में शुक्र होने से कन्या का योग बनता है।
4. सातवे स्थान में मंगल हो और उसपर शनि की दृष्टि हो अथवा सातवे स्थान में शनि , मंगल, एकत्र हो तो गर्भपात होता रहता है।

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