06/01/2026
मन एव मनुष्याणां कारणं बन्धमोक्षयोः ।
बन्धाय विषयासक्तं मुक्त्यै निर्विषयं स्मृतम् ॥
अर्थात-: "मन ही मनुष्यों के बंधन और मोक्ष का कारण है। विषयों (सांसारिक सुखों) में फँसा हुआ मन बंधन का कारण बनता है, और विषयों से रहित (शांत और शुद्ध) मन मोक्ष का कारण माना गया है।"