टेलीपैथी- A Yoga For Complete Transformation

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🚨 1139 AQI — क्या हम ज़िंदा हैं या धीरे-धीरे मर रहे हैं? 🚨सेक्टर-77, नोएडा…आज यहाँ की हवा का AQI 1139 (Hazardous) दर्ज क...
31/12/2025

🚨 1139 AQI — क्या हम ज़िंदा हैं या धीरे-धीरे मर रहे हैं? 🚨
सेक्टर-77, नोएडा…
आज यहाँ की हवा का AQI 1139 (Hazardous) दर्ज किया गया है।
यह सिर्फ एक नंबर नहीं है, यह हमारी साँसों पर सीधा हमला है।
PM2.5 = 646 µg/m³
PM10 = 907 µg/m³
👉 यह वही ज़हरीले कण हैं जो
• फेफड़ों में चिपक जाते हैं
• दिल पर दबाव डालते हैं
• बच्चों की ग्रोथ रोकते हैं
• बुज़ुर्गों की उम्र घटाते हैं
• और हमें बिना बताए बीमार बना देते हैं
हम मास्क को कोविड के बाद उतार चुके हैं,
लेकिन हवा अब भी कोविड से ज़्यादा ख़तरनाक हो चुकी है।
❓ सवाल सिर्फ सरकार से नहीं है
❓ सवाल सिस्टम से नहीं है
❓ सवाल हमसे भी है
– गाड़ियाँ बढ़ती जा रही हैं
– पेड़ कटते जा रहे हैं
– कचरा जलता जा रहा है
– और हम सब “नॉर्मल” मानते जा रहे हैं
जब हवा ज़हर बन जाए,
तो ध्यान, योग, दवा सब सीमित हो जाते हैं।
आज AQI 1139 है…
कल यह हमारे बच्चों की सांसों की उम्र तय करेगा।
⚠️ यह पोस्ट डराने के लिए नहीं है
⚠️ यह पोस्ट जगाने के लिए है
अगर अब भी नहीं जागे,
तो आने वाली पीढ़ी हमें माफ़ नहीं करेगी।
साँस बचाओ, पेड़ बचाओ, शहर बचाओ।

मित्रो कमेंट में अपने अपने यहां के air quality index (AQI) को पोस्ट करे।।
🔥




एक मित्र का प्रश्न: ध्यान लगाने का सबसे सुरक्षित तरीका कौन-सा है?✅ उत्तर (सबसे सुरक्षित, सरल और स्थिर मार्ग)ध्यान का सबस...
31/12/2025

एक मित्र का प्रश्न: ध्यान लगाने का सबसे सुरक्षित तरीका कौन-सा है?

✅ उत्तर (सबसे सुरक्षित, सरल और स्थिर मार्ग)
ध्यान का सबसे सुरक्षित तरीका है — स्वाभाविक श्वास पर साक्षी भाव।
यह विधि
✔ किसी चक्र को जबरदस्ती नहीं छेड़ती
✔ कुंडलिनी को उकसाती नहीं
✔ शरीर-मन को नुकसान नहीं पहुँचाती
✔ हर स्थिति में सुरक्षित है

🧘‍♂️ सबसे सुरक्षित ध्यान विधि (Step-by-Step)
1️⃣ आसन
सीधे बैठें या आराम से लेटें
रीढ़ सहज रहे, कोई ज़ोर नहीं
2️⃣ आँखें
हल्की बंद
भौंहों या किसी बिंदु पर ध्यान न टिकाएँ
3️⃣ श्वास
बस यह देखें कि
➡ साँस आ रही है
➡ साँस जा रही है
कुछ बदलना नहीं
कुछ नियंत्रित नहीं करना
4️⃣ मन भटके तो
बस जान लें — “मन भटक गया”
फिर श्वास को देखना शुरू कर दें
5️⃣ समय
20–30 मिनट पर्याप्त है
इससे अधिक की ज़रूरत नहीं

⚠️ किन बातों से बचें (बहुत ज़रूरी)
❌ चक्रों पर जबरदस्ती ध्यान
❌ आँखों के बीच दबाव बनाना
❌ तेज़ श्वास-प्रश्वास
❌ शक्ति, दर्शन, रोशनी की अपेक्षा
❌ “कुछ हो जाए” वाला भाव
याद रखें:
ध्यान में “कुछ पाना” ही सबसे बड़ा खतरा है।

कृपा मार्ग का सूत्र
ध्यान कोई क्रिया नहीं
ध्यान = जो हो रहा है, उसे चुपचाप देखना
जहाँ दबाव नहीं,
वहीं सुरक्षा है।












31/12/2025
एक मित्र का प्रश्न : कहा जाता है कि कुंडलिनी जागरण के बाद व्यक्ति में विशेष शक्तियाँ आ जाती हैं और उसके द्वारा बोले गए श...
30/12/2025

एक मित्र का प्रश्न : कहा जाता है कि कुंडलिनी जागरण के बाद व्यक्ति में विशेष शक्तियाँ आ जाती हैं और उसके द्वारा बोले गए शब्द सच होने लगते हैं।
मुझे इस विषय का पहले सही ज्ञान नहीं था। अनजाने में मुझसे कुछ बातें कह दी गई होंगी।
बाद में जब मुझे यह जानकारी मिली तो मन में डर और पश्चाताप होने लगा।
अब मुझे यह समझ नहीं आ रहा है कि उस अनजानी गलती को कैसे सुधारा जाए।
कृपया मुझे सही मार्गदर्शन प्रदान करें।...............................................
✅ उत्तर
सबसे पहले यह समझना बहुत आवश्यक है कि
कुंडलिनी जागरण के बाद बोले गए हर शब्द का सच हो जाना — यह पूर्ण सत्य नहीं है, बल्कि एक भ्रांति है।

1️⃣ शक्ति से पहले शुद्धि आती है
किसी व्यक्ति के शब्द तभी प्रभावी होते हैं जब उसमें
अहंकार का अभाव
भय से मुक्ति
और मन की पूर्ण स्थिरता
हो।
यदि मन में डर, चिंता या पश्चाताप है, तो समझ लेना चाहिए कि शब्दों में कोई सिद्धि कार्य नहीं कर रही।

2️⃣ अनजाने में कही गई बात का बोझ न उठाएँ
यदि आपको लगता है कि आपसे कुछ अनुचित कहा गया:
तो मन ही मन क्षमा-भाव रखें
और यह संकल्प लें कि आगे आपके शब्द किसी के अहित का कारण न बनें
ईश्वर या चेतना भाव और नीयत देखती है, न कि भय से बोले गए शब्द।

3️⃣ सच्ची आध्यात्मिक शक्ति का लक्षण — संयम और मौन
वास्तविक आध्यात्मिक उन्नति में व्यक्ति:
कम बोलता है
सोच-समझकर बोलता है
और स्वाभाविक रूप से मौन की ओर बढ़ता है
डर का होना यह दर्शाता है कि साधना अभी स्थिरता की ओर जा रही है — इसमें घबराने की कोई आवश्यकता नहीं।

4️⃣ अब आपके लिए सही मार्ग क्या है
✔️ शक्ति, सिद्धि और कुंडलिनी जैसे विचारों से कुछ समय के लिए दूरी बनाएँ
✔️ केवल सरल भाव से नाम-जप या मंत्र-जप करते रहें
✔️ सहस्रार चक्र या ऊर्जा पर विशेष ध्यान न दें
✔️ सामान्य, सरल और संतुलित जीवन जीने पर ध्यान रखें
✔️ सेवा, करुणा और सहजता को जीवन का आधार बनाएं
जहाँ भय नहीं होता,
वहीं वास्तविक आध्यात्मिक परिपक्वता होती है।

🌱 सार
गलती का बोध होना ही सबसे बड़ी चेतना है।
आप गलत मार्ग पर नहीं हैं, बल्कि जागरूकता की ओर बढ़ रही हैं।

#आध्यात्मिकसत्य
#शब्दकीशक्ति #साधनामार्ग

#शक्ति_और_संयम

#आत्मबोध

एक मित्र का प्रश्न: मेरे परिवार में सबसे बड़े बेटे के यहाँ पैदा होने वाले बच्चे (लड़का या लड़की) मानसिक रूप से कमजोर या ...
30/12/2025

एक मित्र का प्रश्न: मेरे परिवार में सबसे बड़े बेटे के यहाँ पैदा होने वाले बच्चे (लड़का या लड़की) मानसिक रूप से कमजोर या विकलांग होते हैं। यह स्थिति लगातार तीन पीढ़ियों से चल रही है।
क्या यह समस्या genetic कारणों से होती है या इसके पीछे कोई अन्य कारण भी हो सकता है?..................................................
✅ उत्तर
यह स्थिति केवल एक कारण से नहीं, बल्कि तीन स्तरों पर समझी जानी चाहिए:
1️⃣ Genetic कारण (मुख्य और प्रमाणित कारण)
यदि किसी परिवार में यह समस्या लगातार पीढ़ियों में दिख रही है, तो इसके पीछे
Recessive genes
Chromosomal disorders
या वंशानुगत neurological conditions
हो सकती हैं।
👉 ऐसे मामलों में Genetic Counseling और Medical Testing बहुत आवश्यक होती है।
2️⃣ विवाह पैटर्न और जैविक कारण
नज़दीकी रिश्तों में विवाह
बार-बार एक ही genetic line में विवाह
गर्भावस्था में पोषण की कमी, संक्रमण, दवाइयों का प्रभाव
ये सभी genetic risk को कई गुना बढ़ा देते हैं।
3️⃣ कर्म या आध्यात्मिक कारण – केवल विश्वास का विषय
कुछ लोग इसे कर्म सिद्धांत से जोड़ते हैं, लेकिन
👉 यह वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है।
किसी बच्चे की स्थिति को
पिछले जन्म
पाप
दंड
से जोड़ना न तो सही है और न ही मानवीय।
विकलांगता कोई दंड नहीं,
यह जैविक और प्राकृतिक प्रक्रिया का परिणाम होती है।

🌱 क्या करना चाहिए (बहुत ज़रूरी)
✔️ शादी से पहले Genetic Testing
✔️ गर्भधारण से पहले Medical Guidance
✔️ गर्भावस्था में सही पोषण और जाँच
✔️ बच्चे के लिए early therapy और support
👉 सही समय पर मार्गदर्शन मिलने से
अगली पीढ़ी को सुरक्षित रखा जा सकता है।
🔥






एक मित्र का प्रश्न: मैं प्रतिदिन मंत्र-जप करती हूँ। नियमित रूप से ध्यान नहीं हो पाता, लेकिन जप करते समय थोड़ा-बहुत ध्यान...
30/12/2025

एक मित्र का प्रश्न: मैं प्रतिदिन मंत्र-जप करती हूँ। नियमित रूप से ध्यान नहीं हो पाता, लेकिन जप करते समय थोड़ा-बहुत ध्यान अपने आप हो जाता है। लगभग एक वर्ष से निरंतर जप कर रही हूँ।
पिछले कुछ दिनों से मुझे कानों में लगातार सीटी जैसी आवाज़ सुनाई दे रही है। यह आवाज़ कभी धीमी हो जाती है और कभी तेज़, लेकिन लगातार बनी रहती है। मंत्र-जप करते समय इस आवाज़ के कारण ऐसा महसूस होता है कि कानों में शक्ति बढ़ गई है और कुछ बाहर निकलने जैसा अनुभव होता है।
इसके अलावा, एक-दो बार ध्यान करते समय सहस्रार चक्र पर बहुत तीव्र ऊर्जा का अनुभव हुआ। बाद में वही ऊर्जा नीचे की ओर सरकती हुई कानों के पास से होकर आज्ञा चक्र तक आती हुई महसूस हुई।
कृपया इन अनुभवों के बारे में उचित मार्गदर्शन प्रदान करें।...................................................
मार्गदर्शन/ उत्तर
आपने अपना अनुभव बहुत साफ़ और ईमानदारी से साझा किया है। मैं इसे संयम, विवेक और संतुलन के साथ समझाने का प्रयास कर रहा हूँ।
जो अनुभव आप बता रही हैं — उनका अर्थ

1️⃣ कानों में लगातार सीटी जैसी आवाज़
साधना में इसे परंपरागत रूप से “नाद” कहा जाता है।
जब मंत्र-जप लंबे समय तक होता है तो मन भीतर की ओर सूक्ष्म होने लगता है और इंद्रियाँ भी संवेदनशील हो जाती हैं।
यह आवाज़ कभी धीमी, कभी तेज़ होना — ध्यान की गहराई बदलने का संकेत हो सकता है
जप के समय कानों में “पावर बढ़ने” या बाहर निकलने जैसा लगना — प्राण की सक्रियता का अनुभव है
👉 लेकिन एक जरूरी विवेक की बात
यदि यह आवाज़
बहुत परेशान करे
नींद में बाधा बने
सिर दर्द, घबराहट या बेचैनी दे
तो ENT डॉक्टर से सामान्य जाँच अवश्य करा लें।
आध्यात्मिक साधना और शारीरिक संतुलन — दोनों साथ चलना चाहिए।

2️⃣ ऊर्जा का सहस्रार से नीचे आना
ध्यान में सहस्रार पर तेज़ ऊर्जा और फिर उसका
कानों के पास से होते हुए आज्ञा चक्र तक आना —
यह प्राण प्रवाह का मार्ग है।
कान के पास से गुजरना इसलिए अनुभव होता है क्योंकि:
वहाँ सूक्ष्म नाड़ियाँ बहुत सक्रिय होती हैं
आज्ञा चक्र से पहले प्राण वहीं संतुलन खोजता है
यह अनुभव अपने आप में सही दिशा का संकेत है,
लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि अब किसी विशेष चक्र पर ज़ोर दिया जाए।

आपको अब क्या करना चाहिए (बहुत महत्वपूर्ण)
✅ 1. जप जारी रखें — पर दबाव न बनाएं
आपका जप सही चल रहा है।
ध्यान अलग से न हो पाए तो भी जप ही आपका ध्यान है — इसे स्वीकार करें।
✅ 2. किसी भी आवाज़ या ऊर्जा पर “टिकने” की कोशिश न करें
न आवाज़ को पकड़ें
न उसे बढ़ाने की इच्छा करें
न चक्रों को ऊपर-नीचे करने का प्रयास करें
👉 सिर्फ मंत्र में सहज रहें
✅ 3. सहस्रार पर ज़ोर न दें
यह बहुत आवश्यक है।
सहस्रार पर बार-बार ध्यान या ऊर्जा रोकना
मानसिक असंतुलन
बेचैनी
डर या भ्रम
दे सकता है।
यदि ऊर्जा ऊपर जाए — उसे जाने दें,
यदि नीचे आए — उसे भी जाने दें।
✅ 4. शरीर को ग्राउंड करें (बहुत ज़रूरी)
रोज़ इनमें से कुछ करें:
सुबह 10–15 मिनट नंगे पैर धरती पर चलना
हल्का भोजन
दिन में 1–2 बार गुनगुना पानी
साधना के बाद थोड़ी देर सामान्य काम (झाड़ू, बर्तन, पौधों को पानी)
यह ऊर्जा को संतुलित रखेगा।

सबसे महत्वपूर्ण बात 🙏
आप जो अनुभव कर रही हैं वह
न कोई सिद्धि है
न कोई लक्ष्य
यह केवल रास्ते के संकेत हैं।
सच्ची साधना में:
अनुभव आते हैं —
और साधक उनसे चिपकता नहीं।
आपका मार्ग सही है,
बस संयम, सहजता और विवेक बनाए रखें।

यदि आगे
डर
बेचैनी
नींद की समस्या
अत्यधिक संवेदनशीलता
महसूस हो — तो बताना
मैं उसी अनुसार अगला मार्गदर्शन दूँगा 🙏






ऋग्वेद में वर्णित महर्षि अत्रि का तप और ऋषित्वऋग्वेद में महर्षि अत्रि का उल्लेख उन ऋषियों में होता है जिन्होंने तप द्वार...
30/12/2025

ऋग्वेद में वर्णित महर्षि अत्रि का तप और ऋषित्व
ऋग्वेद में महर्षि अत्रि का उल्लेख उन ऋषियों में होता है जिन्होंने तप द्वारा चेतना को प्रकाशित किया। उनके नाम से ऋग्वैदिक सूक्त रचे गए, जो यह संकेत देते हैं कि उनका जीवन स्वयं वेद था। अत्रि मुनि की साधना किसी एक विधि तक सीमित नहीं थी, बल्कि संपूर्ण जीवन संयम और मौन में ढला था। जिस भूमि पर उन्होंने तप किया, वह केवल निवास स्थान नहीं रही, बल्कि ऋषित्व के प्रकट होने का क्षेत्र बन गई। वेद यह स्पष्ट करते हैं कि जहाँ इच्छाएँ क्षीण होती हैं, वहीं ब्रह्मबोध संभव होता है।
जो मित्र यहां साधना का इच्छुक है कमेंट में व्हाट्सएप ग्रुप लिंक है पर जुड़े।।






























वेद–पुराणों में वर्णित तपस्थली का आज भी जीवित प्रभाववेद और पुराण कहते हैं कि तपस्थलियाँ कभी नष्ट नहीं होतीं, केवल विस्मृ...
30/12/2025

वेद–पुराणों में वर्णित तपस्थली का आज भी जीवित प्रभाव
वेद और पुराण कहते हैं कि तपस्थलियाँ कभी नष्ट नहीं होतीं, केवल विस्मृति में चली जाती हैं। अत्रि–अनसूया की यह भूमि इसलिए आज भी जीवित है क्योंकि यहाँ की साधना इच्छा-रहित थी। न सिद्धि की चाह, न यश की आकांक्षा। यही कारण है कि आज भी साधक यहाँ आते ही भीतर शांति और मौन का अनुभव करते हैं। यह स्थान दर्शन का नहीं, परिवर्तन का क्षेत्र है। जो यहाँ कुछ दिन ठहरता है, वह भीतर से परिवर्तित होकर लौटता है।

यहाँ साधना हेतु व्हाट्सएप ग्रुप लिंक कमेंट में है पर जुड़े।।🙏






























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