13/03/2026
"ज्ञान समुद्र है परम, विस्तृत मेरे तात।
पार न इसका पा सके,निश्चित है यह बात"।।
योग ही ऐसी विद्या है/ योग ही एक माध्यम है जो हमें इस जीवन रुपी यात्रा के लक्ष्य,मानव जीवन का कारण अथवा इस यात्रा का उद्देश्य व यात्रा पूरी होने के उपरान्त कहां जाना है। उपरोक्त सव विषयों का समग्र ज्ञान प्राप्त कराता है।
"योग का आधार"। योग का आधार सत्य है।इस सिद्धांत पर चलने वाला योगी संकल्प सिद्ध हो जाता है,तत्पश्चात वाक सिद्ध तथा वर देने का सामर्थवाहन होता है।
"मन का विज्ञान "
मन मन का साक्षी है।
हिंसा हिंसा को उपजाती है।
दया दया को प्रकटता है।
यह सब जानने,समझने व प्रमाणित करने के लिए श्री सदगुरुदेव जी ने अपना पूरी जीवन यात्रा हम सव जन मानस के लिए समर्पित कर दिया,समस्त जनों का कल्याण केवल योगयुक्त जीवन शैली से ही हैऔर यही जीवन की वास्तविकता है।
सर्वे सर्भवन्तु सुखिनां,सर्वे सन्तु निरामया।
सर्वे भद्राणी पश्यंतु मा कशिचददु:ख भाग भवेत।।
"जय श्री प्रभु जी की जी"
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