06/04/2026
"योग दान गुरु ने दिया,जो सव सुखों की खान।
तीन लोक की संपदा, नहीं योग समान"।
योग एक ऐसा उपहार है जो हम सभी जीवों को भगवान ने स्वयंम दिया है ताकि इस जीवन को योग युक्त करके प्रसन्नचित ओर सन्तोषजनक वनाते हुए भगवान कि इस सृष्टि को खूबसूरत वनाने में अपना अपना सहयोग दें।योग ही केवल ऐसी विधि ,विद्या, सम्पति है जिसके समान कोई भी ओर विकल्प नहीं है।यह सारा तथ्य भगवान ने समय समय पर अवतरित हो कर चरितार्थ किया है। श्री सदगुरुदेव जी ने अपना सारा जीवन यही समझाने में समर्पित
कर दिया। योगयुक्त जीवन से हम अपने इस जीवन रुपी सफर को आनंदमय वना कर समस्त संसार को खुशहाल वनाने में अपना योगदान सुनिश्चित करने में समर्थ हो पाऐंगे।यह एक सर्वोच्च दान है।यही सन्तुष्ट, सुखी जीवन का आधार है।इसका दृढ़तापूर्वक पालन करना हम सभी का लक्ष्य होना चाहिए। यही इस जीवन की सचाई है।
सर्वे भवन्तु सुखिना, सर्वे सन्तु निरामयय।
सर्वे भद्राणी पशुयन्तु मा कशिचंददुख भाग भवेत।
"जय श्री सदगुरुदेव जी की जी"।