08/03/2026
होली के रंग और एक अधूरी ज़िंदगी की कहानी
**(नशे से जूझ रहे हर भाई और उसके परिवार के नाम)**
आई है फिर से होली, रंगों की बौछार लिए,
ढोल की थाप, हँसी की गूँज और खुशियों का संसार लिए।
पर हर घर में रंग नहीं खिलते,
कुछ आँगन आज भी चुप हैं, कुछ दिल आज भी सिलते।
जहाँ कभी भाई-बहन संग रंगों की जंग होती थी,
आज वहाँ एक खालीपन है, जो हर पल चुभती थी।
नशे की लत ने ऐसा जाल बिछाया,
कि हँसता-खेलता परिवार भी रोता नज़र आया।
वो बेटा जो माँ की आँखों का तारा था,
आज आईने में खुद से भी हारा था।
चेहरा सूखा, आँखें लाल, हाथों में कंपन,
दिल में पछतावा, पर आदत बनी थी बंधन।
हर सुबह वह सोचता — “आज छोड़ दूँगा”,
पर शाम तक वही ज़हर फिर से पी लूँगा।
दिल जानता है ये गलत है,
पर शरीर की मांग कहती है — “बस एक बार और, फिर सब ठीक है।”
उसके भीतर चलती है एक जंग भयानक,
एक तरफ परिवार का प्यार, दूसरी तरफ लत की आग।
हर बार जब वह खुद से हारता है,
तो उसके साथ उसका परिवार भी टूट जाता है।
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**बहन का दर्द**
वो बहन जो राखी पर बड़े गर्व से कहती थी,
“मेरा भाई मेरी ढाल है”,
आज वही बहन भीड़ में सिर झुकाए चलती है,
क्योंकि समाज के ताने उसे हर रोज़ सालते हैं।
वो अपनी सहेलियों से भाई की बातें छुपाती है,
राखी के दिन चुपके से रो जाती है।
कलाई पर राखी तो बाँध देती है,
पर दिल में डर रहता है —
“क्या मेरा भाई फिर से घर देर रात लड़खड़ाता आएगा?”
उसकी दुआओं में सिर्फ एक ही बात होती है —
“भगवान, मेरा भाई पहले जैसा हो जाए,
नशे से दूर, खुशियों से भर जाए।”
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**छोटे भाई का दर्द**
और वो छोटा भाई…
जो कभी बड़े भाई को अपना हीरो मानता था,
आज उसी को देख डर जाता है।
वो स्कूल में लड़ता है जब कोई ताना मारता है,
पर घर आकर चुपचाप कोने में बैठ जाता है।
वो सोचता है —
“क्या मेरा भाई कभी फिर से मेरे साथ क्रिकेट खेलेगा?
क्या फिर से मुझे साइकिल चलाना सिखाएगा?”
उसकी आँखों में सवाल हैं,
पर जवाब देने वाला खुद सवालों में उलझा है।
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**नशे का असली दर्द**
नशा सिर्फ शरीर नहीं तोड़ता,
ये रिश्तों को चुपचाप घोंटता है।
पहले दोस्त छूटते हैं,
फिर भरोसा टूटता है,
फिर आत्मसम्मान बिखरता है,
और आखिर में इंसान खुद से ही दूर हो जाता है।
नशेड़ी का दर्द भी कम नहीं होता…
वो भी हर रात रोता है,
अपने किए पर पछताता है।
उसे भी माँ की सिसकियाँ सुनाई देती हैं,
उसे भी बहन की चुप्पी सालती है,
उसे भी छोटे भाई की टूटी उम्मीदें चुभती हैं।
पर लत की जंजीरें इतनी मजबूत होती हैं,
कि चाहकर भी वो खुद को छुड़ा नहीं पाता।
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**पर हमें होली क्या सिखाती है?**
होली सिखाती है —
बुराई को जलाओ,
नई शुरुआत अपनाओ।
जब होलिका जलती है,
तो बुराई का अंत होता है।
तो क्यों न इस बार
नशे की होलिका भी जलाई जाए?
क्यों न इस बार
माँ के आँसू सुखाए जाएँ,
बहन की इज़्ज़त लौटाई जाए,
छोटे भाई का हीरो फिर से बन जाएँ?
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**नई उम्मीद की राह**
याद रखो —
तुम गुनहगार नहीं, बीमार हो।
और हर बीमारी का इलाज होता है।
**Shantiratn Foundation**
**De-Addiction Rehabilitation Centre**
दे रहा है एक नई शुरुआत का अवसर।
यहाँ इलाज है, परामर्श है,
मनोवैज्ञानिक सहयोग है,
अनुभवी डॉक्टर हैं,
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यहाँ तुम्हें गिराने नहीं,
उठाने का प्रयास होता है।
यहाँ तुम्हें दोषी नहीं,
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**इस होली लो एक संकल्प**
इस होली रंगों से पहले
अपने जीवन को रंगीन बनाओ।
नशे को अलविदा कहो,
परिवार को गले लगाओ।
बहन की राखी की लाज रखो,
छोटे भाई की उम्मीद बनो।
माँ की आँखों का सुकून लौटाओ,
पिता के माथे का गर्व बनो।
क्योंकि —
सबसे खूबसूरत रंग गुलाल का नहीं,
बल्कि नशामुक्त जीवन का होता है।
इस होली, खुद को
आज़ाद करो —
नशे से नहीं, अपने परिवार के प्यार से रंग भरो।
नई सुबह तुम्हारा इंतज़ार कर रही है…
बस एक कदम तुम्हें बढ़ाना है।