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Astrology Dr. Ajay Kumar Vaidh, has been an expert in the field of astrology for many years.

He also has an experience in other categories as well which include Healing, Tarot, Numerology, Vastu , motivator, Negativity remover

फिरोजा (Turquoise) पत्थर न केवल अपनी खूबसूरती के लिए मशहूर है, बल्कि इसे एक "लिविंग स्टोन" (जीवित पत्थर) भी कहा जाता है।...
23/12/2025

फिरोजा (Turquoise) पत्थर न केवल अपनी खूबसूरती के लिए मशहूर है, बल्कि इसे एक "लिविंग स्टोन" (जीवित पत्थर) भी कहा जाता है। इसके बारे में विस्तार से जानकारी यहाँ दी गई है:
1. यह कहाँ और कैसे मिलता है? (Origin)
फिरोजा एक ऐसा पत्थर है जो दुनिया के सूखे और रेगिस्तानी इलाकों में पाया जाता है।
प्रमुख स्थान: यह मुख्य रूप से ईरान (Persia), तिब्बत, तुर्की, अमेरिका (अरिज़ोना और नेवादा) और मिस्र में मिलता है। ईरानी (निशापुरी) फिरोजा को सबसे उच्च गुणवत्ता वाला माना जाता है।
निर्माण: यह तांबे (Copper) और एल्युमिनियम के मिश्रण से बनता है। जब ज़मीन के नीचे पानी और खनिज (Minerals) आपस में क्रिया करते हैं, तो करोड़ों सालों में यह पत्थर तैयार होता है। इसका नीला रंग तांबे की वजह से और हरा रंग लोहे (Iron) की मौजूदगी की वजह से होता है।
2. हीलिंग पावर्स (Healing Powers)
प्राचीन समय से ही इसे एक सुरक्षा कवच माना गया है। इसकी प्रमुख शक्तियां इस प्रकार हैं:
सुरक्षा (Protection): ऐसी मान्यता है कि फिरोजा पहनने वाले पर आने वाली मुसीबत को खुद पर ले लेता है। अक्सर मुसीबत आने पर यह पत्थर अचानक चटक जाता है या अपना रंग बदल देता है।
शारीरिक स्वास्थ्य: यह गले की समस्याओं (Throat infections), अस्थमा, तनाव (Stress) और माइग्रेन में राहत देने के लिए जाना जाता है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को भी बढ़ाता है।
मानसिक शांति: यह मन को शांत करता है, गुस्से को कम करता है और डिप्रेशन या एंग्जायटी से लड़ने में मदद करता है।
कम्युनिकेशन: यह थ्रोट चक्र (Throat Chakra) से जुड़ा है, इसलिए यह व्यक्ति के बोलने की कला और आत्मविश्वास को बेहतर बनाता है।
3. ज्योतिष और ग्रह (Astrology & Planets)
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, फिरोजा मुख्य रूप से बृहस्पति (Jupiter) ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है।
शुभ ग्रह: इसे पहनने से बृहस्पति मजबूत होता है, जिससे ज्ञान, धन और सौभाग्य मिलता है। कुछ विद्वान इसे शनि (Saturn) और बुध (Mercury) के लिए भी शुभ मानते हैं।
राहु-केतु का प्रभाव: यह राहु और केतु के नकारात्मक प्रभावों को कम करने में भी बहुत कारगर माना जाता है।
किसे पहनना चाहिए: धनु (Sagittarius) और मीन (Pisces) राशि के लोगों के लिए यह सबसे शुभ है। हालांकि, यह एक ऐसा रत्न है जिसे अक्सर बिना कुंडली दिखाए भी सुरक्षा के लिए पहना जा सकता है क्योंकि इसके दुष्प्रभाव बहुत कम होते हैं।
4. पहनने का तरीका
धातु: इसे चांदी (Silver) में पहनना सबसे उत्तम माना जाता है।
दिन: इसे शुक्रवार या शनिवार के दिन पहनना शुभ होता है (कुछ लोग गुरुवार को भी पहनते हैं)।
अंगुली: इसे हाथ की अनामिका (Ring Finger) या तर्जनी (Index Finger) में पहनना चाहिए।
असल में, फिरोजा (Turquoise) को लेकर ज्योतिष में दो अलग-अलग मत चलते हैं, और वीनस (शुक्र) वाला तर्क बहुत लोकप्रिय है।
यहाँ स्थिति को स्पष्ट करने के लिए कुछ बिंदु दिए गए हैं:
1. शुक्र (Venus) और फिरोजा का संबंध
पश्चिमी ज्योतिष (Western Astrology) और कुछ आधुनिक भारतीय ज्योतिषियों के अनुसार, फिरोजा शुक्र (Venus) ग्रह से गहराई से जुड़ा है।
क्यों: शुक्र प्रेम, सुंदरता, लग्जरी और कला का प्रतीक है। फिरोजा का फिरोजी/आसमानी रंग शुक्र की ऊर्जा से मेल खाता है।
फायदा: इसे पहनने से वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है और व्यक्ति की रचनात्मकता (Creativity) बढ़ती है। अगर किसी की कुंडली में शुक्र कमजोर है, तो उसे अक्सर फिरोजा पहनने की सलाह दी जाती है।
2. बृहस्पति (Jupiter) और फिरोजा का संबंध
पारंपरिक वैदिक ज्योतिष में इसे अक्सर 'बृहस्पति' का उपरत्न (Substitute) माना जाता है क्योंकि:
यह ज्ञान और सुरक्षा प्रदान करता है।
प्राचीन ग्रंथों में इसे पीले पुखराज के विकल्प के तौर पर भी देखा गया है।
3. यह 'न्यूट्रल' रत्न क्यों है?
सबसे दिलचस्प बात यह है कि फिरोजा उन गिने-चुने रत्नों में से है जो शुक्र (Venus) और बृहस्पति (Jupiter) दोनों की अच्छी खूबियों को मिलाता है:
सुरक्षा: राहु-केतु के बुरे असर से बचाता है।
रिश्ते: शुक्र के प्रभाव से रिश्तों में प्यार बढ़ाता है।
सफलता: बृहस्पति के प्रभाव से करियर में ग्रोथ देता है।
निष्कर्ष: यदि आपको किसी जानकार ने शुक्र (Venus) के लिए इसे पहनने को कहा है, तो वे गलत नहीं हैं। विशेषकर प्रेम संबंधों, फिल्म/मीडिया इंडस्ट्री और लग्जरी लाइफ के लिए इसे शुक्र का ही पत्थर माना जाता है।
एक छोटी सी सलाह: अगर आप इसे शुक्र के लिए पहन रहे हैं, तो इसे अंगूठे (Thumb) या बीच की उंगली (Middle Finger) में पहनना ज्यादा असरदार हो सकता है।

06/12/2025

लापिस लाजुली एक बहुत ही पुराना और शक्तिशाली रत्न माना जाता है। इसे ज्ञान, सत्य और आध्यात्मिकता का प्रतीक माना जाता है।​य...
01/12/2025

लापिस लाजुली एक बहुत ही पुराना और शक्तिशाली रत्न माना जाता है। इसे ज्ञान, सत्य और आध्यात्मिकता का प्रतीक माना जाता है।
​यहाँ इसके हीलिंग गुण और उपयोग विस्तार से बताए गए हैं:
​💎 लापिस लाजुली के हीलिंग गुण और उपयोग ( and Uses)
​1. मानसिक और भावनात्मक हीलिंग (Mental and )
​तनाव मुक्ति और शांति (Stress Relief and Peace): यह पत्थर तनाव और चिंता को कम करने में मदद करता है, जिससे गहरी शांति और स्थिरता मिलती है।
​आत्म-अभिव्यक्ति और सच्चाई (Self-Expression and Truth): यह ईमानदारी और बिना किसी समझौते के अपनी बात कहने की क्षमता को बढ़ाता है। यह आपको अपनी आंतरिक सच्चाई को पहचानने में मदद करता है।
​आत्म-जागरूकता (Self-Awareness): यह आत्म-जागरूकता को प्रोत्साहित करता है और आत्म-स्वीकृति (self-acceptance) को बढ़ाता है, जिससे भावनात्मक अवरोध (emotional blockages) दूर होते हैं।
​बुद्धि और ज्ञान (Wisdom and Intellect): यह 'उच्च मन' (higher mind) को सक्रिय करता है, जिससे बौद्धिक क्षमता, ज्ञान और सीखने की प्रक्रिया में सुधार होता है। यह याददाश्त और स्पष्ट सोच (clarity of thought) के लिए भी अच्छा माना जाता है।
​2. शारीरिक हीलिंग ( )
​माइग्रेन और सिरदर्द (Migraines and Headaches): इसके शांत करने वाले गुणों के कारण यह माइग्रेन और सामान्य सिरदर्द में राहत देने में सहायक माना जाता है।
​गला और थायरॉइड (Throat and Thyroid): यह विशेष रूप से गले के चक्र (Throat Chakra) से जुड़ा है, इसलिए गले के दर्द, स्वर तंत्र (vocal chords) और थायरॉइड से संबंधित समस्याओं में मदद करता है।
​प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System): यह माना जाता है कि यह प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है और शरीर की प्राकृतिक उपचार क्षमता को बढ़ाता है।
​रक्त और रक्त परिसंचरण (Blood and Circulation): कुछ मान्यताओं के अनुसार, यह रक्त को शुद्ध करने और रक्त परिसंचरण में सुधार करने में सहायक है।
​तंत्रिका और श्वसन प्रणाली (Nervous and Respiratory System): यह तंत्रिका और श्वसन प्रणाली के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में भी मदद करता है।
​3. आध्यात्मिक और चक्र सक्रियण (Spiritual and )
​तीसरा नेत्र चक्र (Third Eye Chakra): लापिस लाजुली मुख्य रूप से तीसरे नेत्र चक्र (Third Eye Chakra) को सक्रिय और संतुलित करता है, जो अंतर्ज्ञान (intuition) और आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि (spiritual insight) का केंद्र है।
​गला चक्र (Throat Chakra): यह गला चक्र को भी संतुलित करता है, जिससे स्पष्ट और प्रभावी संचार सुनिश्चित होता है।
​आध्यात्मिक यात्रा (Spiritual Journey): यह पत्थर आध्यात्मिक विकास और आत्म-खोज की यात्रा में सहायक माना जाता है। यह भौतिक और दिव्य लोकों के बीच संबंध बनाने में मदद करता है।
​नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा (Protection from Negative Energy): इसे एक सुरक्षात्मक पत्थर के रूप में भी जाना जाता है, जो पहनने वाले को नकारात्मक ऊर्जा से बचाता है।
​🛠️ उपयोग के तरीके (Ways to Use Lapis Lazuli)
​गहने के रूप में पहनना (Wearing as Jewelry): इसे पेंडेंट, अंगूठी या ब्रेसलेट के रूप में पहनने से इसके गुण लगातार आपके शरीर के संपर्क में रहते हैं। गले या थर्ड आई के पास पहनने से संबंधित चक्रों पर अधिक प्रभाव पड़ता है।
​ध्यान (Meditation): ध्यान करते समय इस पत्थर को अपने हाथ में पकड़ना या इसे अपने तीसरे नेत्र (माथे के बीच) पर रखना आध्यात्मिक कनेक्शन और अंतर्ज्ञान को बढ़ाने में सहायक होता है।
​घर या कार्यस्थल में रखना (Placing at Home or Workplace): ज्ञान और स्पष्ट सोच को बढ़ाने के लिए इसे अपने अध्ययन या कार्य क्षेत्र में रखें।
​उपचार चिकित्सा (Crystal Therapy): शारीरिक या भावनात्मक उपचार के लिए, संबंधित क्षेत्र पर कुछ देर के लिए पत्थर रखें, जैसे सिरदर्द के लिए माथे पर।
expert

12/11/2025

वास्तु" के दो मुख्य अर्थ हैं: पहला, एक भौतिक वस्तु (जैसे फर्नीचर या भोजन), और दूसरा, "वास्तु शास्त्र" के संदर्भ में, किसी निवास या भवन का निर्माण और दिशा-निर्देश। वास्तु शास्त्र एक प्राचीन भारतीय विज्ञान है जो वास्तुकला और ऊर्जा के संतुलन से संबंधित है, ताकि रहने वाले व्यक्ति के लिए सकारात्मक वातावरण बनाया जा सके।

04/11/2025

31/10/2025
02/10/2025
















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