12/09/2025
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ग्रामीण समुदायों में दाँतों पर पानी का प्रभाव
पूर्वी दिल्ली अरुण शर्मा रिधि दर्पण !
पानी जीवन का सार है – चाहे गाँव हो या शहर, हर घर पीने, पकाने और रोज़मर्रा की सफाई के लिए पानी पर निर्भर रहता है। लेकिन अक्सर लोग यह नहीं समझ पाते कि वही पानी, जो हमें ज़िन्दा रखता है, समय के साथ हमारे दाँतों और मुँह के स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है।
बच्चों पर पानी का असर
गाँवों में बच्चे ज़्यादातर सीधे हैंडपम्प, कुएँ या टंकी का पानी पीते हैं। इस पानी में कई बार ज़्यादा नमक, आयरन (जंग वाले तत्व) या फ्लोराइड मौजूद होता है। समय के साथ ये खनिज दाँतों पर साफ़ असर छोड़ते हैं – सफेद दाँत पीले या भूरे पड़ जाते हैं, कैविटी जल्दी आने लगती है, और कुछ मामलों में दाँत खुरदरे हो जाते हैं या उन पर छोटी-छोटी दरारें पड़ जाती हैं, वह भी जवानी से पहले ही।
बुज़ुर्गों की परेशानी
बुज़ुर्गों के लिए यह समस्या और भी बड़ी हो जाती है। सालों तक वही बिना उपचार वाला पानी पीते-पीते उनके दाँत संवेदनशील और कमज़ोर हो जाते हैं। बहुतों को चाय या ठंडा पानी पीते समय तेज़ दर्द महसूस होता है, तो किसी को लगता है कि दाँत ढीले पड़ रहे हैं। अधिकतर लोग इसे उम्र का असर मान लेते हैं, लेकिन असल में इसकी जड़ पानी की ख़राब गुणवत्ता होती है।
सफाई की समस्या
एक और बड़ी समस्या है गंदगी। गाँवों में कई बार जो पानी घर तक पहुँचता है, वह पूरी तरह साफ़ नहीं होता। उसमें मौजूद छोटे-छोटे कीटाणु और गंदगी मुँह में जाकर संक्रमण, मसूड़ों की सूजन और बदबू जैसी दिक़्क़तें पैदा करते हैं। धीरे-धीरे बच्चों और बड़ों दोनों की मुस्कान और आत्मविश्वास प्रभावित होता है।
क्यों यह महत्वपूर्ण है
एक स्वस्थ मुस्कान केवल दिखावे की बात नहीं है, यह आत्मविश्वास, गरिमा और अच्छे स्वास्थ्य की निशानी है। जब बच्चे जल्दी दाँत खो देते हैं या बुज़ुर्ग लगातार दर्द झेलते हैं, तो इसका असर उनके पोषण, सामाजिक व्यवहार और आत्मसम्मान पर पड़ता है। और इसकी शुरुआत होती है रोज़ पी जाने वाले पानी से।
आसान और व्यवहारिक समाधान
1. साफ़ पानी पिएं – जितना संभव हो, फ़िल्टर किया हुआ, उबला हुआ या सुरक्षित रूप से रखा गया पानी ही इस्तेमाल करें।
2. नियमित ब्रश करें – दिन में दो बार अच्छे टूथपेस्ट से ब्रश करना दाँतों को दाग और कैविटी से बचाता है।
3. खाना खाने के बाद कुल्ला करें – खाने के बाद सिर्फ़ कुल्ला करना भी मुँह की सफाई के लिए बहुत फायदेमंद है।
4. पानी की जाँच करवाएँ – गाँव वाले स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र से पानी की जाँच करवा सकते हैं। अगर फ्लोराइड या आयरन अधिक है तो सही उपाय सुझाए जा सकते हैं।
5. संतुलित भोजन करें – दूध, दही, फल और सब्जियाँ ज़्यादा खाने से दाँत अंदर से मज़बूत होते हैं।
6. स्वास्थ्य शिविर लगाएँ – स्कूलों और पंचायतों को नियमित रूप से मेडिकल और डेंटल चेकअप कैंप आयोजित करने चाहिए, ताकि गाँववालों को सही मार्गदर्शन मिल सके।
ग्रामीण परिवारों के लिए संदेश
पानी एक आशीर्वाद है, लेकिन जब यह अशुद्ध होता है या इसमें खनिज ज़्यादा होते हैं, तो यह धीरे-धीरे हमारे दाँतों और स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाता है। हर बच्चा उजली मुस्कान का हक़दार है और हर बुज़ुर्ग दर्द रहित भोजन का आनंद लेने के लायक है। अगर हम आज छोटे-छोटे कदम उठाएँ, तो हम कल की मुस्कान बचा सकते हैं।
याद रखिए - साफ़ पानी मतलब स्वस्थ दाँत, और स्वस्थ दाँत मतलब सुखी और स्वस्थ जीवन।