आयुर्वेदिक इलाज़

आयुर्वेदिक इलाज़ Ayurved treatment salaah..

06/02/2026
06/02/2026

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क्या आपके पेट में गेस या अफरा बनता है तो आपके लिए है उपाय....परिचय –पेट में गेस की समस्या अब आम होती जा रही है ,मुख्यतः ...
25/01/2026

क्या आपके पेट में गेस या अफरा बनता है तो आपके लिए है उपाय....

परिचय –
पेट में गेस की समस्या अब आम होती जा रही है ,मुख्यतः यह खाने-पिने की अनियमितता और अधिक चिंता से होती है .नियमित खाना खाने से व सन्तुलित भोजन द्वरा भी कुछ हड तक गेस से छुटकारा पाया जा सकता है इसके और भी अन्य तरीके है जिससे हम पेट में गैस की समस्या से छुटकारा पा सकते है

नींबू –
एक बड़े गिलास में आधा नींबू निचोड़कर रोज सुबह पिने से गेस की समस्या समाप्त हो जाती है

मूली –
लंच या डिनर के साथ मुली पर नमक,कालीमिर्च डालकर दो महीने तक नियमित खाने से उदर वायु ,गैस दूर होती है

लोंग –
पांच लोंग पीसकर उबलते हुए आधे कप पानी में डालिए ,फिर ठंडा होने के बाद पीजिये ,इस किर्या को दिन में तीन बार दोहराएं साडी गेस निकल जाएगी .

सेब –
एक लाल सेब ले ,उसे कांटे से चारो तरफ से गोद दे ,फिर गुदे हुए सेब में जितनी भी लोंग जाये अंदर की तरफ घुसाकर भर दे .पन्द्रह दिनों तक सेब को जहा हवा न लगे ,वहा रख दे ,सोलहवे दिन साडी लोंग निकालकर एक शीशी में रख दे और सेब फेंक दे ,तीन लोंग को घिसकर तीन बूंद शहद के साथ रोज दस दिन तक सुबह के समय लीजिये ,यह बड़ी गुणकारी साबित होगी ,
सेब का रस भी प्रतिदिन पिने से पेट की गेस से छुटकारा पाया जा सकता है .
बेंगन –
पानी पिने के बाद पेट फूलता है ,तो ऐसी स्थिति में ताजे लम्बे बेंगन की सब्जी खाने से एक ही मोसम में गेस की बीमारी ठीक हो जाएगी .

अजवायन –
6 ग्राम अजवायन में डेड ग्राम काला नमक मिलाकर फांके ,पेट की गेस से आराम मिलेगा .

पुदीना –
सुबह एक गिलास पानी में 25 ग्राम पुदीने का रस व 30 ग्राम शहद मिलाकर पिने से गेस की बीमारी में आराम मिलेगा .

दूध –
दूध उबालते समय उसमे छोटी पीपल डाल दे ,फिर दूध पिए इससे गेस बननी बंद हो जाती है .

कालीमिर्च –
10 कालीमिर्च को दरदरा कूट ले आधा नींबू निचोड़कर रख ले ,फिर इस कालीमिर्च को फांक कर ,नींबू पानी पी ले इसको सुबह -शाम लीजिये गेस बनना बंद हो जाएगी .

सोंफ –
नींबू के रस में सोंफ भिगोकर रख दे .लंच-डिनर के बाद नींबू के रस में भीगा हुआ सोंफ खाने से पेट का भारीपन दूर होता है ,गेस बननी बंद हो जाएगी ,ज्यादा भूख लगती है और मोशन भी साफ होता है .

गेस हर चूर्ण बनाने की विधि –
छोटी हरड आधा किलो साफ करके छाछ में सुबह फूलने के लिए डाल दे ,अगले दिन सुबह छाछ में से निकालकर पानी से साफ करके छाया में एक कपड़े पर डालकर सुखा दे ,जब सुख जाए तब पुनः छाछ में डाल दे ,इस तरह 3-4-6 तक भावना दे सकते है .

भावना देने के बाद सुख जाने पर इन्हें महीन पिस ले एंव कपड छान कर ले इस चूर्ण में आधा पाव अजवायन पीसकर मिला दे एंव रूचि अनुसार काला नमक मिला ले ,इस तरह यह चूर्ण तेयार हो जाता है .भोजन के बाद यह चूर्ण गुनगुने जल से सेवन करे .चाहे तो ठंडे पानी से भी ले सकते है ,गेस की तकलीफ में अदितीय है .तकलीफ होने पर 5-6 मिनट में ही आराम हो जाता है इसके सेवन से पाचन-शक्ति बढती है दस्त साफ होते है .

शरीर के 13 वेग 〰️〰️🔸〰️〰️मल, मुत्र, पाद, बूख, प्यास, ढकार, छींक, उबासी, नींद, आंसू, थकान से आये सांस, वीर्य और उल्टी।हमार...
24/01/2026

शरीर के 13 वेग
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मल, मुत्र, पाद, बूख, प्यास, ढकार, छींक, उबासी, नींद, आंसू, थकान से आये सांस, वीर्य और उल्टी।

हमारे शरीर में 13 वेग होते हैं अगर वो अपने समय पर आए तो उन्हें रोकना नही चाहिए।

और ना ही इन्हें जबरस्ती लाना चाहिए।

कई बार लोग जानबूझकर रोने की कोशिश करते हैं। हसने की कोशिश करते है जो अक्सर पार्को मैं देखा गया है जो बुजुर्ग लोग घेरा बना के बिना बात हस्ते हैं वो रोग का कारण बन जाता है।

वैसे तो हँसना सेहत के लिए अच्छा होता है लेकिन बिना बात नही। इसकी बजाय अगर वो कोई किस्सा या चुटकुला सुना मार laughing exercise करें तो ज्यादा बेहतर होता है।

कई बार जोर लगा लगा कर मल निकालते हैं जिसके कारण बवासीर या hernia की प्रॉब्लम हो जाती है।

आइये देखते हैं वेगो को रोकने से क्या रोग हो सकते हैं :

1👉 मल को रोकने से पेट में गुड़गुड़ाहट, गुदा में पीड़ा, कब्ज, बवासीर, भगन्दर और अन्य गुदा के रोग हो जाते हैं।

2👉 मुत्र को रोकने से मूत्राशय और लिंग में जलन व दर्द, मुत्र संबंधित सभी बीमारी, प्रमेह, किडनी की बीमारियां, पत्थरी, सिर में पीड़ा, पेशाब का बार बार आना या कम आना,पेशाब में जलन आदि।

3👉 पाद को रोकने अफारा, पेट दर्द, कब्ज, क्लांति, बुखार, पेट के बहुत से रोग हो जाते हैं।

4👉 उबासी को रोकने से cervical spondelitis, जबड़ा दुखना, गर्दन में दर्द, सिर में पीड़ा, सिर के बहुत से रोग, आँख, नाक, कान के बहुत से रोग और वात के रोग हो जाते हैं।

5👉 आंसू चाहे वो खुशी के हों या गम के उनको रोकने से सिर में भारीपन, आखों के बहुत से रोग, भयंकर जुखाम, नजला और नाक के रोग आदि रोग हो जाते हैं।

6👉 छींक को रोकने cervical spondelitis, सिर में दर्द, मुह का लकवा, पक्षाघात, इंद्रियों का काम करना बंद करना और भी अन्य वात के भयंकर रोग होते हैं।

7👉 डकार को रोकने से गला और मुख भरा रहता है मानो खाना गले में ही है, सम्पूर्ण शरीर में दर्द होना, आंतो में शब्द होना, अफारा बन जाना, पाद न निकलना और भी वात के रोग हो जाते हैं।

8👉 उल्टी को रोकने से खाज, खुजली, अरुचि, चहरे पे झाइयां पड़ना, edema, पिलिया, बुखार, सभी प्रकार के चर्म रोग, उभकाई और erysipelas रोग हो जाते हैं।

9👉 वीर्य को रोकने से मूत्राशय, गुदा, अंडकोष में दर्द और सूजन, वीर्य संबंधित सभी रोग, नपुंसकता, मुत्र में वीर्य निकलना, पत्थरी, अंडकोष में पथरी रोग हो जाते है।

10👉 भूख में खाना न खाने से आलस्य, शरीर का टूटना, अरुचि, आखों की दृश्टि में कमी, पेट का cancer और पेट के रोग हो जाते हैं।

11👉 प्यास में पानी न पीने से कंठ और मुख सूखता है, श्रवणशक्ति का अवरोध होता है, हृदय में पीड़ा होति है, शरीर टूट जाता है।

NOTE : अगर भूख लगे तो खाना ही खाना चाहिए। और प्यास लगे तो पानी ही पीना चाहिए। अगर बूख लगी हो और पानी पी लिया जाए तो जलोदर रोग हो जाता है। और प्यास लगी हो और खाना खा लिया जाए तो पेट का cancer हो जाता है।

12👉 थकान से आये सांस को रोकने से दिल के सभी रोग, मोह और stomach cancer हो जाता है।

13👉 नींद आने पर अगर सोएं नही तो उबासी, शरीर का टूटना, आखों के बहुत से रोग, सिर भारी होना और दर्द होना और आलस्य हो जाता है।

इसीलिए हमे शरीर के वेगो को ना तो रोकना चाहिए न जबरदस्ती लाना चाहिए।
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थायराइड का दुश्मन थाइराइड आजकल एक आम समस्या बन गई है, जो शरीर में हार्मोन असंतुलन के कारण होती है। यह स्थिति हाइपोथायरॉय...
24/01/2026

थायराइड का दुश्मन

थाइराइड आजकल एक आम समस्या बन गई है, जो शरीर में हार्मोन असंतुलन के कारण होती है। यह स्थिति हाइपोथायरॉयडिज्म (थायरॉयड हार्मोन की कमी) या हाइपरथायरॉयडिज्म (थायरॉयड हार्मोन की अधिकता) के रूप में प्रकट हो सकती है।

हालांकि, आयुर्वेद में इसका प्राकृतिक समाधान मौजूद है। एक विशेष पेड़ की पत्तियां 21 दिन तक सेवन करने से थाइराइड की समस्या को जड़ से खत्म किया जा सकता है। आइए जानते हैं इस उपाय के बारे में विस्तार से।
कौन सा पेड़ और उसकी पत्तियां,,?
यह चमत्कारी पेड़ है बेल (बिल्व वृक्ष)। बेल की पत्तियां आयुर्वेद में औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध हैं। इनमें एंटीऑक्सिडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी, और इम्यून मॉड्यूलेटरी गुण पाए जाते हैं, जो थाइराइड ग्रंथि के कार्य को संतुलित करने में मदद करते हैं।

सेवन का सही तरीका,,,,

पत्तियां चुनें:ताजी, हरी और स्वस्थ पत्तियों का चयन करें। ध्यान रखें कि पत्तियां साफ और कीटनाशक मुक्त हों।
धोकर साफ करें:पत्तियों को साफ पानी से धो लें ताकि किसी भी प्रकार की गंदगी या धूल हट जाए।
खाली पेट सेवन करें:सुबह खाली पेट दो जोड़ा पत्तियां चबाकर खाएं। यानी 2 जोड़ा मतलब 6 पत्ते,,,एक जोड़े में तीन पतियां होती है,,,आप चाहें तो इनका पेस्ट बनाकर एक गिलास गुनगुने पानी के साथ भी ले सकते हैं।
लगातार 21 दिन तक:इस प्रक्रिया को बिना रुके लगातार 21 दिन तक करें। थाइराइड ग्रंथि पर इसका सकारात्मक प्रभाव नजर आने लगेगा।

बेल पत्तियों के स्वास्थ्य लाभ,,, यह वही बेलपत्र का वृक्ष है जो भगवान शिव पर चढ़ाया जाता है,,,,

1. थाइराइड ग्रंथि का संतुलन:

बेल की पत्तियों में थाइराइड हार्मोन को नियमित करने वाले गुण होते हैं। यह ग्रंथि के आकार को सामान्य बनाए रखने में मदद करती हैं।

2. इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाना:

इन पत्तियों में मौजूद पोषक तत्व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं, जिससे थाइराइड से जुड़ी अन्य समस्याओं से बचाव होता है।

3. शरीर से विषैले पदार्थों को निकालना:

बेल की पत्तियां शरीर को डिटॉक्स करती हैं और थाइराइड ग्रंथि को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करती हैं।
बेल की पत्तियां थाइराइड जैसी गंभीर समस्या का प्राकृतिक और सुरक्षित समाधान प्रदान करती हैं। 21 दिन तक इनका नियमित सेवन हार्मोन असंतुलन को ठीक करने और थाइराइड ग्रंथि को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है। आयुर्वेद के इस चमत्कारी उपाय को अपनाकर आप अपने स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं..

जिन दोस्तों को सेक्स संबनधि कोई दिक्क़त हो , सम्पर्क करे ।।।जानकारी गुप्त रखी जायगी. ।।8368447052.. सलाह का कोई. पैसा नही...
24/01/2026

जिन दोस्तों को सेक्स संबनधि कोई दिक्क़त हो , सम्पर्क करे ।।।जानकारी गुप्त रखी जायगी. ।।8368447052.. सलाह का कोई. पैसा नही लगता ।।।पक्का इलाज़ ।।।

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