Vagbhata Ayurveda

Vagbhata Ayurveda फोन पर सलाह लें। घर बैठे औषधि मगंवायें।

26/02/2026

सर्वाइकल के रोगी ये करें।
राई को हल्का सा भून कर पीस लो
एक एक चम्मच दिन में तीन बार लो
10 दिन तक लेना है।

12/01/2026
03/09/2025

बाढ़ पीड़ितों की सहायता हेतु आप यहाँ दिये गये वागभट्ट आयुर्वेद ट्रस्ट के बैंक खाते में सहायता राशि भेज सकते हैं।

Vagbhata Ayurveda TrusT

Saving Bank Account No.
126812010000083

Union Bank Of India

IFSC CODE : UBIN0812684

08/12/2024

बिना चीर फाड़ बिना आपरेशन के Lipoma का इलाज आयुर्वेद के से करें। चर्बी युक्त गांठों को आयुर्वेद के माध्यम से नष्ट करें ताकि भविष्य में यह व्याधि समूल नष्ट हो जाये और जीवन में दोबारा परेशान ना होना पड़े। आज ही वाग्भट्ट आयुर्वेद सम्पर्क करें।

26/11/2024

जिनको भी हमारी दवाओं से लाभ मिला है कृपया कमेंट में जरूर बतायें।लीवर की समस्याओं का समाधान घर बैठे पायें। हमारे एक्सपर्...
20/10/2024

जिनको भी हमारी दवाओं से लाभ मिला है कृपया कमेंट में जरूर बतायें।
लीवर की समस्याओं का समाधान घर बैठे पायें। हमारे एक्सपर्ट से सलाह ले कर दवा मँगवायें और लीवर समस्याओं में आराम पायें।

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21/09/2024

काँस का बड़ा भाई, मूंजा या मूँज:

ये बेक पैन का स्पेशलिस्ट है। अगर आप मूँज नही जानते तो फिर आप गलत हैं। कुछ ही साल पहले जिस खाट पर आप सोते थे, उसकी रस्सियाँ इसी से बनती थी...

हनुमान चालीसा पाठ करते समय पंक्ति आती है.. "हाथबज्र और ध्वजा विराजे, कांधे मूंज जनेऊ साजै॥5॥
अर्थात - आपके हाथ में बज्र और ध्वजा है और कन्धे पर मूंज के जनेऊ की शोभायमान है। तो चलिये आपको ले चलता हूँ, मूँज की परिचय यात्रा पर...

मुंज घास सूखे प्रदेशो में पायी जाने वाली एक प्रमुख घास है, राजस्थान के रेतीले क्षेत्रो में इसका खूब फैलाव है, किन्तु मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में भी यहाँ पाया जाता है। लगभग 2 से 3 मीटर ऊंचाई वाला यह घास मिटटी के कटाव को रोकनेके लिये ब्रम्हास्त्र है, साथ ही छोटे जीवो के लिए शरण स्थली और भोजन का भी स्त्रोत है। कुछ वर्षों पहले तक इसकी पत्तियो से खाट की रस्सी तैयार की जाती थी। और जब तक लोग इससे बनी खाट पर बैठते या सोते रहे न तो उन्हें कोई बैक, पैन हुआ। न ही कोई सरवाइकल प्रॉब्लम हुई और न ही अन्य तरह की समस्या।

इसमें किसी प्रकार का टोना - टोटका या जादुई रहस्य या गुणधर्म नही है। असल मे खाट की रस्सी शरीर पर मसाज या एक तरह से एक्यूप्रेशर जैसा ट्रीटमेंट शरीर को मुफ्त में उपलब्ध करवा देती थी। अब कोमल गद्दों में सोने वाली आजकल की सुकमार पीढ़ी न तो खटिया की वो गड़न/ चुभन जानती है न ही उसकी चूँ चूँ। वो जानती है तो सिर्फ BP, sugar, diabeties टाइप के बड़े बड़े नाम। ये गरीब और छोटे छोटे राहत भरे शब्द सुनने- जानने का न तो उनमें।साहस है और न ही उनके पास इतना फालतू समय है। चलो छोड़ो इस बेमतलब विषय को। हम लौटते हैं, मूँज की रस्सी पर। हालांकि सबसे मजबूत और टिकाऊ रस्सी मोआ नामक घास की होती है, इसकी नही।
इसके लंबे पुष्पक्रम से कई प्रकार के ornamental items बनाये जाते थे, घास की लेयर को मकान, झोपडी आदि की छत निर्माण में लगाया जाता था, चटाई, हाथ के पंखे और यहाँ तक की छूप से बचने के लिए चटाइनुमा चादर भी उससे बनाये जाते थे। लेकिन आधुनिक प्लास्टिक युग ने इस महत्वपूर्ण पौधे के सारे महत्त्व और उपयोग छीन लिये। किन्तु दुनिया की कोई भी प्लास्टिक मिटटी का कटाव रॉकने और जंगली जानवरो, पक्षियो एवम कीटो को संरक्षण प्रदान करने में इसकी बराबरी नहीं कर सकते।

इन सबके अलावा यह एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधे के रूम में विख्यात था। हमारे गाव में कुछ लोग इसे बड़ी काँस भी कहते हैं। उनके अनुसार इसके जड़ो का रस पेशाप में जलन होने पर फायदेमंद होती है। साथ ही खून को साफ करने का कार्य भी करती है।

18/09/2024

मधुमेह रोगी ध्यान दें।

यदि आप टाईप 2 मधुमेह से पीड़ित हैं तो फैटी लीवर की जाँच अवश्य करवा लें । यदि लीवर फैटी निकले तो लीवर को सही करने के लिये उपचार आरंभ करें। जैसे जैसे लीवर सही होगा। मधुमेह का प्रकोप भी कम होना शुरू हो जायेगा।

कई रोगियों में देखा गया है की फैटी लीवर एव वजन नियंत्रण सीमा में आते ही उनकी अंग्रेज़ी दवा बंद कर देनी पड़ी क्योंकि उनका मधुमेह स्तर सामान्य हो चुका था।

आप भी कोशिश जरूर करें। और स्वस्थ जीवन का आनंद लें।

 #जनेऊ पटना के एक बड़े चिकित्सक बता रहे थे कि जनेऊ पहनने से दिल का दौरा पड़ने का खतरा उस समय कम होता है जब व्यक्ति यूरिन...
12/09/2024

#जनेऊ

पटना के एक बड़े चिकित्सक बता रहे थे कि जनेऊ पहनने से दिल का दौरा पड़ने का खतरा उस समय कम होता है जब व्यक्ति यूरिन का त्याग कर रहा होता है शरीर में एक विशेष प्रकार का कंपन होता है ऐसे समय में जनेऊ धारण करने वाले लोग कान पर उसे चढ़ाए रहते हैं जिससे हार्टबीट नियंत्रित होता है।

तस्वीरों में दिख रहा यह महज पीला धागा मात्रा नहीं बल्कि सनातन धर्म से जुड़ा हुआ एक ऐसा ब्रह्मास्त्र है जिसे कलयुग के जागृत देवता बजरंगबली भी नहीं तोड़ पाए थे।

हमारे इलाके में इसे जनेऊ बोलते हैं। जिन लोगों का यज्ञपवित्र संस्कार हो जाता है वहीं से धारण करते हैं। ब्रह्मचर्य को धारण करने वाले लोगों के लिए अलग जनेऊ होता है और विवाहित लोगों के लिए अलग।जनेऊ को संस्कृत भाषा में ‘यज्ञोपवीत’ कहा जाता है।

यह तीन धागों वाला सूत से बना पवित्र धागा होता है, जिसे व्यक्ति बाएं कंधे के ऊपर तथा दाईं भुजा के नीचे पहनता है। अर्थात् इसे गले में इस तरह डाला जाता है कि वह बाएं कंधे के ऊपर रहे। जनेऊ में तीन सूत्र – त्रिमूर्ति ब्रह्मा, विष्णु और महेश के प्रतीक – देवऋण, पितृऋण और ऋषिऋण के प्रतीक – सत्व, रज और तम के प्रतीक होते है।

साथ ही ये तीन सूत्र गायत्री मंत्र के तीन चरणों के प्रतीक है तो तीन आश्रमों के प्रतीक भी। जनेऊ के एक-एक तार में तीन-तीन तार होते हैं। अत: कुल तारों की संख्‍या नौ होती है।इनमे एक मुख, दो नासिका, दो आंख, दो कान, मल और मूत्र के दो द्वारा मिलाकर कुल नौ होते हैं। इनका मतलब है – हम मुख से अच्छा बोले और खाएं, आंखों से अच्छा देंखे और कानों से अच्छा सुने। जनेऊ में पांच गांठ लगाई जाती है जो ब्रह्म, धर्म, अर्ध, काम और मोक्ष का प्रतीक है। ये पांच यज्ञों, पांच ज्ञानेद्रियों और पंच कर्मों के भी प्रतीक है।

जनेऊ की लंबाई 96 अंगुल होती है क्यूंकि जनेऊ धारण करने वाले को 64 कलाओं और 32 विद्याओं को सीखने का प्रयास करना चाहिए। 32 विद्याएं चार वेद, चार उपवेद, छह अंग, छह दर्शन, तीन सूत्रग्रंथ, नौ अरण्यक मिलाकर होती है। 64 कलाओं में वास्तु निर्माण, व्यंजन कला, चित्रकारी, साहित्य कला, दस्तकारी, भाषा, यंत्र निर्माण, सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, दस्तकारी, आभूषण निर्माण, कृषि ज्ञान आदि आती हैं।

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