Nature's Miracle with Modern Medicine & Immuno-therapy. Aiims,Pgi Return Pt

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Nature's Miracle with Modern Medicine & Immuno-therapy. Aiims,Pgi Return Pt TOTAL SOLUTIONS FOR TIRED PATIENT. RELIABLE FOR ALL.
(264)

एलोपैथ,होम्योपैथ,आयुर्वेदिक,यूनानी सबकरके देख लिया?
ऐम्स,पीजीआई,फोर्टिस,मैक्स हॉस्पिटल से निराश रोगी भी मिलें
हमारा लक्ष्य रोग को जड़ से दूर करना है,याद रखें रोगका जड़से निदान न होना घातक हो सकता है,हमेशा परेशानी बनी रहती है
पहले 30 दिन की दवा दी जाती है

क्या आप जानते हैं तीन औषधियों का ये मिश्रण इन 18 असाध्य रोगों का काल है., बुढ़ापे में भी रहेगी जवानी ...अगर किसी को ये भ...
28/06/2025

क्या आप जानते हैं
तीन औषधियों का ये मिश्रण इन 18 असाध्य रोगों का काल है., बुढ़ापे में भी रहेगी जवानी ...
अगर किसी को ये भी सेट न करे तो संपर्क कर सकते हैं 🙏

बार बार रोगी उपचार हेतु एलोपैथिक चिकित्सक के पास जाता है. एलोपैथिक उपचार करवाने पर भी जब उसे स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं दिखता, वह आयुर्वेदिक उपचार की ओर मुडता है।आयुर्वेदिक उपचार करवाने के उपरांत रोगी को रोग ठीक होने का भान होता है।

तब वह यह विचार करने लगता है, कि अच्छा होता यदि मैं आरंभ से ही आयुर्वेदिक उपचार करवाता।

इसलिए ऐसा ना हो तथा हानिकारक दुष्प्रभावों (side effects)से बचने के लिए, रोग के आरंभ में ही आयुर्वेदिक उपचार करवाना आवश्यक है।

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इन 3 औषधियों की बहुत उपयोगी दवा बनाने के लिए आवश्यक सामग्री :

250 ग्राम मैथीदाना

100 ग्राम अजवाईन

50 ग्राम काली जीरी (ज्यादा जानकारी के लिए नीचे देखे)

तैयार करने का तरीका :

उपरोक्त तीनो चीजों को साफ-सुथरा करके हल्का-हल्का सेंकना(ज्यादा सेंकना नहीं) तीनों को अच्छी तरह मिक्स करके मिक्सर में पावडर बनाकर कांच की शीशी या बरनी में भर लेवें।

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औषधि को सेवन करने का तरीका,,,,,

रात्रि को सोते समय एक चम्मच पावडर एक गिलास पूरा कुन-कुना पानी (हल्का गर्म) के साथ लेना है। गरम पानी के साथ ही लेना अत्यंत आवश्यक है लेने के बाद कुछ भी खाना पीना नहीं है। यह चूर्ण सभी उम्र के व्यक्ति ले सकतें है।

चूर्ण रोज-रोज लेने से शरीर के कोने-कोने में जमा पडी गंदगी (कचरा) मल और पेशाब द्वारा बाहर निकल जाएगी । पूरा फायदा तो 80-90 दिन में महसूस करेगें, जब फालतू चरबी गल जाएगी, नया शुद्ध खून का संचार होगा। चमड़ी की झुर्रियाॅ अपने आप दूर हो जाएगी। शरीर तेजस्वी, स्फूर्तिवाला व सुंदर बन जायेगा ।

इन 18 रोगों में फायदेमंद है,,,,

गठिया दूर होगा और गठिया जैसा जिद्दी रोग दूर हो जायेगा।

हड्डियाँ मजबूत होगी।

आँखों रौशनी बढ़ेगी।

बालों का विकास होगा।

पुरानी कब्जियत से हमेशा के लिए मुक्ति।

शरीर में खुन दौड़ने लगेगा।

कफ से मुक्ति।

हृदय की कार्य क्षमता बढ़ेगी।

थकान नहीं रहेगी, घोड़े की तहर दौड़ते जाएगें।

स्मरण शक्ति बढ़ेगी।

स्त्री का शरीर शादी के बाद बेडोल की जगह सुंदर बनेगा।

कान का बहरापन दूर होगा।

भूतकाल में जो एलाॅपेथी दवा का साईड इफेक्ट से मुक्त होगें।

खून में सफाई और शुद्धता बढ़ेगी।

शरीर की सभी खून की नलिकाएं शुद्ध हो जाएगी।

दांत मजबूत बनेगा, इनेमल जींवत रहेगा।

शारीरिक कमजोरी दूर तो मर्दाना ताक़त बढ़ेगी।

डायबिटिज काबू में रहेगी, डायबिटीज की जो दवा लेते है वह चालू रखना है। इस चूर्ण का असर दो माह लेने के बाद से दिखने लगेगा।

जिंदगी निरोग,आनंददायक, चिंता रहित स्फूर्ति दायक और आयुष्यवर्धक बनेगी। जीवन जीने योग्य बनेगा।

कृपया ध्यान दे :

कुछ लोग कलौंजी को काली जीरी समझ रहे है जो कि गलत है काली जीरी अलग होती है जो आपको पंसारी या आयुर्वेद की दुकान से मिल जाएगी, यह स्वाद में हल्की कड़वी होती है, नीचे जो फोटो है वो कालीजीरी (Purple Fleabane) का है, जिसका नाम अलग-अलग भाषाओं में कुछ इस तरह से है।

हिन्दी कालीजीरी, करजीरा।

संस्कृत अरण्यजीरक, कटुजीरक, बृहस्पाती।

मराठी कडूकारेलें, कडूजीरें।

गुजराती कडबुंजीरू, कालीजीरी।

बंगाली बनजीरा।

अंग्रेजी पर्पल फ्लीबेन

कालीजीरी -

कालीजीरी को आयुर्वेद में सोमराजि, सोमराज, वनजीरक, तिक्तजीरक, अरण्यजीरक, कृष्णफल आदि नाम से जानते हैं। हिंदी भाषा में इसे कालीजीरी, बाकची और बंगाल में सोमराजी कहते हैं।

कालीजीरी किसी भी तरह के जीरे से अलग है। इंग्लिश में इसे पर्पल फ़्लीबेन कहते हैं पर यह कलोंजी Nigella sativa से बिल्कुल भिन्न है। कलोंजी को भी इंग्लिश में ब्लैक क्यूमिन ही कहते है। इसी प्रकार बाकची, या सोमराजी एक और पौधे के बीज को, सोरेला कोरीलिफ़ोलिया (Psoralea corylifolia) को कहते है।

आयुर्वेद के बहुत से विशेषज्ञ सोरेला कोरीलिफ़ोलिया को ही बावची या सोमराजी मानते हैं पर बंगाल में कालीजीरी को सोमराजी नाम से जानते और प्रयोग करते हैं।

कालीजीरी स्वाद में कड़वा और तेज गंद्ध वाला होता है, इसलिए इसे किसी भी तरह के भोजन बनाने में प्रयोग नहीं किया जाता। इसको केवल एक दवा की तरह ही प्रयोग किया जाता है। लैटिन में इसका नाम, सेंट्राथरम ऐनथेलमिंटिकम या वरनोनिया ऐनथेलमिंटिकम है।

इसके वैज्ञानिक नाम में 'ऐनथेलमिंटिकम' इसके प्रमुख आयुर्वेदिक प्रयोग को बताता है। ऐनथेलमिंटिकम का मतलब है, शरीर से परजीवियों को नष्ट करने वाला। आयुर्वेद में इसे कृमिनाशक की तरह प्रयोग किया जाता है।

इसका सेवन और बाह्य प्रयोग चर्म रोगों के इलाज, जैसे की श्वित्र (leukoderma) सफ़ेद दाग, खुजली, एक्जिमा, आदि। इसे सांप या बिच्छु के काटे पर भी लगाते हैं। कालीजीरी का क्षुप, पूरे देश में परती जमीन पर पाया जाता है। इसके पत्ते शल्याकृति किनारेदार होते हैं। बारिश के मौसम के बाद इसमें मंजरी निकलती है। जिसमे काले बीज आते है।

काली जीरी आकार में छोटी और स्वाद में तेज, तीखी होती है। इसका फल कडुवा होता है। यह पौष्टिक एवं उष्ण वीर्य होता है। यह कफ, वात को नष्ट करती है और मन व मस्तिष्क को उत्तेजित करती है। इसके प्रयोग से पेट के कीड़े नष्ट होते हैं और खून साफ होता है। त्वचा की खुजली और उल्टी में भी इसका प्रयोग लाभप्रद होता है।

यह त्वचा के रोगों को दूर करता है, पेशाब को लाता है एवं गर्भाशय को साफ व स्वस्थ बनाता है। यह सफेद दाग (कुष्ठ) को दूर करने वाली, घाव और बुखार को नष्ट करने वाली होती है। सांप या अन्य विषैले जीव के डंक लगने पर भी इसका प्रयोग लाभकारी होता है।

कालीजीरी के 13 फायदे :

यह कृमिनाशक और विरेचक है।

यह गर्म तासीर के कारण श्वास, कफ रोगों को दूर करती है।

मूत्रल होने के कारण यह मूत्राशय, की दिक्कतों और ब्लड प्रेशर को कम करती है।

यह हिचकी को दूर करती है।

यह एंटीसेप्टिक है चमड़ी की बिमारियों जैसे की खुजली, सूजन, घाव, सफ़ेद रोग, आदि सभी में बाह्य रूप से लगाई जाती है।

जंतुघ्न होने के कारण शरीर के सभी प्रकार के परजीवियों को दूर करती है।

काली जीरी को चमड़ी के रोगों में नीम के काढ़े के साथ मालिश या खादिर के काढ़े के आंतरिक प्रयोग के साथ करना चाहिए।

भयंकर चमड़ी रोगों में, काली जीरी + काले तिल बराबर की मात्रा में लेकर, पीस कर 4 ग्राम की मात्रा में सुबह, एक्सरसाइज की बाद पसीना आना पर लेना चाहिए। ऐसा साल भर करना चाहिए।

श्वेत कुष्ठ जिसे सफ़ेद दागभी कहते है, उसमे चार भाग काले जीरी और एक भाग हरताल को गोमूत्र में पीसकर प्रभावित स्थान पर लगाना चाहिए। इसी को काले तिलों के साथ खाने को भी कहा गया है। (भैषज्य रत्नावली)

पाइल्स या बवासीर में, 5 ग्राम कालाजीरालेकर उसमे से आधा भून कर और आधा कच्चा पीसकर, पाउडर बनाकर तीन हस्से कर के दिन में तीन बार खाने से दोनों तरह की बवासीर खूनी और बादी में लाभ होता है।

पेट के कीड़ों में इसके तीन ग्राम पाउडर को अरंडी के तेल के साथ लेना चाहिए।

खुजली में, सोमराजी + कासमर्द + पंवाड़ के बीज + हल्दी + दारुहल्दी + सेंधा नमक को बराबर मात्रा में मिलकर, कांजी में पीसकर लेप लगाने से कंडू, कच्छु (खुजली) आदि दूर होते हैं।

कुष्ठ में, कालीजीरी + वायविडंग + सेंधानमक + सरसों + करंज + हल्दी को गोमूत्र में पीस कर लगना चाहिए।

कालीजीरी के सेवन की मात्रा :

इसको 1-3 ग्राम की मात्रा में लें। इससे अधिक मात्रा प्रयोग न करें।

आवश्यक सावधानियाँ :

कृमिनाशक की तरह प्रयोग करते समय किसी विरेचक का प्रयोग करना चाहिए।

कालीजीरी के प्रयोग में सावधानियां

यह बहुत उष्ण-उग्र दवा है।

गर्भावस्था में इसे प्रयोग न करें।

यह वमनकारक है।

अधिक मात्रा में इसका सेवन आँतों को नुकसान पहुंचाता है।

यदि इसके प्रयोग के बाद साइड इफ़ेक्ट हों तो गाय का दूध / ताजे आंवले का रस / आंवले का मुरब्बा खाना चाहिए।

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दुनिया में पहली बार अनोखा चमत्कार।एक चीनी सर्जन ने 8,000 किलोमीटर दूर मौजूद एक मरीज़ का ऑपरेशन किया — और वो भी 100% सफल ...
15/06/2025

दुनिया में पहली बार अनोखा चमत्कार।
एक चीनी सर्जन ने 8,000 किलोमीटर दूर मौजूद एक मरीज़ का ऑपरेशन किया — और वो भी 100% सफल रहा।

दुनिया में पहली बार ऐसा कुछ हुआ है। चीनी सर्जन डॉ. झांग ज़ु (Zhang Xu) ने इटली के रोम में बैठकर एक कैंसर पीड़ित मरीज़ का ऑपरेशन किया, जबकि वह मरीज़ उस समय चीन की राजधानी बीजिंग में था।

डॉक्टर और मरीज़ के बीच एक 5G-पावर्ड सर्जिकल रोबोट के ज़रिए कनेक्शन स्थापित किया गया। यह लगभग रीयल-टाइम में काम कर रहा था। इसमें सिर्फ 135 मिलीसेकंड की देरी थी — जो पलक झपकने से भी तेज़ है।

इस टेली-सर्जरी को एक ग्लोबल मेडिकल कॉन्फ्रेंस में लाइव दिखाया गया। एक पूरे महाद्वीप की दूरी होने के बावजूद, रोबोट ने डॉ. झांग की हर एक हरकत को हूबहू दोहराया। यह दृश्य सभी को चकित कर देने वाला था।

बता दें कि चीन की रोबोट टेक्नोलॉजी आज इतनी विकसित हो चुकी है कि फैक्ट्री में उत्पादन से लेकर आम जिंदगी के कई कामों में भी इसका इस्तेमाल एक क्रांति ला चुका है।

डॉ. झांग और उनकी टीम ने इस ऑपरेशन के जरिए इतिहास रच दिया। उन्होंने साबित कर दिया कि अगर इंसानी कौशल के साथ सही तकनीक और संचार को जोड़ा जाए, तो चमत्कार मुमकिन हैं।

यह टेली-सर्जरी हमें उम्मीद देती है — शायद भविष्य में इलाज के लिए सरहदें कभी बाधा नहीं बनेंगी।
देखते हैं, वक़्त हमें और किन चमत्कारों की ओर ले जाता है!




डॉक्टर बोले- ब्लड  #कैंसर है..बचना मुश्किल,,,जब मौत सामने थी और दवा ने जवाब दे दिया, तब इस आदमी ने जंगल और बर्फीली नदी स...
28/05/2025

डॉक्टर बोले- ब्लड #कैंसर है..बचना मुश्किल,,,जब मौत सामने थी और दवा ने जवाब दे दिया, तब इस आदमी ने जंगल और बर्फीली नदी से जिंदगी की नई कहानी लिखी..,
न ही रेडिएशन कराया और न ही कीमो ओर रच दिया इतिहास।

52 वर्षीय एक व्यक्ति की कहानी इस सोच को नई ऊर्जा देती है। उन्हें ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर) और लिंफोमा (लसीका ग्रंथि का कैंसर) हुआ। डॉक्टरों ने तुरंत कीमोथेरेपी और रेडिएशन की सलाह दी। लेकिन उन्होंने conventional treatment को ठुकराकर Natural Cancer Healing का मार्ग अपनाया।

इस व्यक्ति ने खुद को एक ‘प्राकृतिक ट्रायल’ में झोंक दिया। उन्होंने 4°C के बर्फीले पानी में 187 मील तैरने का संकल्प लिया। यह किसी भी औसत व्यक्ति के लिए असंभव लगता है, लेकिन उनके लिए यह प्रकृति से जुड़ने का एक जरिया था। Natural Cancer Healing के तहत ठंडे पानी में तैरना न सिर्फ शरीर को झटका देता है, बल्कि इम्यून सिस्टम को भी जाग्रत करता है।

187 मील (करीब 300 किलोमीटर) तैराकी 4°C के बर्फीले पानी में की हर हफ्ते एक रात जंगल में बिताई कैंसर से लड़ने की बजाय जीवन से प्यार करने का नजरिया अपनाया

हर हफ्ते एक रात वह जंगल में अकेले बिताते थे। कोई गैजेट नहीं, कोई इंसानी संपर्क नहीं – सिर्फ पेड़, चांदनी और उनके विचार। यह प्रकृति से गहन संपर्क Natural Cancer Healing का एक अनिवार्य हिस्सा है, जहां शरीर को नकारात्मकता से मुक्ति मिलती है।

पहली तैराकी के बाद जब ब्लड टेस्ट हुआ तो ल्यूकेमिया गायब हो चुका था। उनके कैंसर विशेषज्ञ डॉक्टर ने यहां तक कहा, "अगर मैंने खुद उनका टेस्ट नहीं किया होता, तो यकीन नहीं करता कि उन्हें कभी कैंसर था!"

इस तरह के प्राकृतिक तरीकों को आज विज्ञान भी समर्थन देता है:

जापान में हुए एक शोध में पाया गया कि जंगल में 72 घंटे बिताने पर नैचुरल किलर सेल्स (NK Cells) की संख्या 50 से 200 गुना तक बढ़ जाती है। ये वही कोशिकाएं हैं जो कैंसर से लड़ती हैं।

Natural_Cancer_Healing में प्रयोग होने वाले शारीरिक और मानसिक व्यायाम, जैसे तैराकी और मेडिटेशन, इम्यून सिस्टम को पुनर्जीवित करने में सहायक हैं।

ColdWater में डुबकी लगाने से एंटी-इंफ्लेमेटरी हार्मोन्स सक्रिय होते हैं, जिससे शरीर खुद को मरम्मत करता है।

सच है कि दवाएं आखिरी विकल्प होनी चाहिए, पहली नहीं। हर दवा के साइड इफेक्ट होते हैं, लेकिन प्रकृति के सिर्फ फायदे होते हैं।

आज वह 64 वर्ष के हैं, पूरी तरह स्वस्थ और दो वर्ल्ड रिकॉर्ड उनके नाम हैं – एक लंबी दूरी की बर्फीली तैराकी और दूसरा जंगल में सबसे लंबा एकल ध्यान (solo meditation retreat)।
उनका मानना है कि जीवन में उद्देश्य और आत्मबल से बड़ा कोई इलाज नहीं।
वे अब लोगों को बिना दवा, कीमो और रेडिएशन के अपनी प्राकृतिक हीलिंग पावर को जगाना सिखा रहे हैं।
एक सच्ची कहानी किसी भारतीय की मदद कर सकती है,,,
अगर प्रेरणादायक लगे तो शेयर जरूर करें 🙏

#कैंसरसेबचाव #कैंसर #हेल्थी #ऐम्स #सिस्ट

बिना ऑपरेशन पित्त की पथरी निकल सकती है क्या ?पथरी क्या है?, पथरी कितने प्रकार की होती है?, पथरी होने के लक्षण क्या है?, ...
25/05/2025

बिना ऑपरेशन पित्त की पथरी निकल सकती है क्या ?
पथरी क्या है?, पथरी कितने प्रकार की होती है?, पथरी होने के लक्षण क्या है?, पथरी से होने वाली समस्याएं क्या है?, और पथरी का इलाज क्या है?,

पथरी : पथरी (Kidney Stone) एक सामान्य स्वास्थ्य समस्या है, जिसमें किडनी, मूत्राशय या मूत्रमार्ग में छोटे-छोटे कठोर खनिज और लवण के कण जमा हो जाते हैं। यह स्थिति दर्दनाक हो सकती है और समय पर इलाज न करने पर गंभीर जटिलताएं पैदा कर सकती है। यहां पथरी से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें दी गई है।

पथरी के प्रकार : पथरी मुख्यतः 4 प्रकार की होती हैं।

1. कैल्शियम पथरी :

यह पथरी सबसे आम प्रकार की है जो कैल्शियम ऑक्सलेट से बनी होती है।ऑक्सलेट गाजर, पालक, नट्स, चाय और चॉकलेट जैसे खाद्य पदार्थों में पाया जाता है।

2. यूरिक एसिड पथरी :

यह पथरी अधिक प्रोटीन युक्त भोजन, जैसे मांस और मछली खाने से बनती है।यह अधिकतर उन लोगों में होती है जो गाउट (gout) या चयापचय संबंधी विकारों से पीड़ित होते हैं।

3. स्ट्रुवाइट पथरी :

ये पथरी मूत्र मार्ग संक्रमण (UTI) के कारण बनती है। ज़्यादातर यह महिलाओं में पाई जाती है।

4. सिस्टीन पथरी :

यह पथरी एक दुर्लभ प्रकार, जो अनुवांशिक विकारों के कारण होती है।

लक्षण :
1. पेट या कमर के निचले हिस्से में तेज दर्द।
2. पेशाब में खून आना।
3. पेशाब करते समय जलन या दर्द।
4. मतली और उल्टी।
5. बार-बार पेशाब आने की आवश्यकता महसूस होना।
6. बुखार और ठंड लगना (यदि संक्रमण हो)।
कारण :
1. पर्याप्त मात्रा में पानी न पीना।
2. कैल्शियम, ऑक्सलेट, या यूरिक एसिड का अधिक सेवन।
3. मोटापा।
4. जेनेटिक फैक्टर्स।
5. पाचन तंत्र की समस्याएं।
6. मूत्र संक्रमण।
उपचार :

प्राकृतिक रूप से बाहर निकालना:
1.अधिक मात्रा में पानी पीना।
2.हमारी तीन महीने की दवाई से 18mm तक की पित्त की पथरी (GB Stone)निकल जाती है

मेडिकल ट्रीटमेंट : (Only Kidney, not for GB stone)
1.दवाइयों द्वारा पथरी का घुलना।
2 .लिथोट्रिप्सी (Shock wave therapy)।
3 .सर्जरी (यदि पथरी बहुत बड़ी हो)।
रोकथाम :
1. रोजाना 8-10 गिलास पानी पिएं।
2. ऑक्सलेट, नमक और प्रोटीन के अधिक सेवन से बचें।
3. संतुलित आहार का सेवन करें।
4. नियमित रूप से स्वास्थ्य जांच कराएं।
घरेलू उपचार :
1. नींबू और पानी: नींबू का रस पथरी को घोलने में मदद कर सकता है।
2. तुलसी का रस: तुलसी का सेवन किडनी के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।
3. सेब का सिरका: इसमें एसिडिक गुण होते हैं जो पथरी को घोलने में मदद कर सकते हैं।
4. ज्वार और मूली का रस: इनका नियमित सेवन फायदेमंद हो सकता है।
स्वस्थ रहे, स्वस्थ रखे, सुखी रहें
आयुर्वेद अपनाए निरोग जीवन जिए।🙋‍♂

नेचर मिरेकल रिसर्च सेंटर
शनि बाज़ार, भलस्वा, नई दिल्ली
फतुहा ब्लॉक के सामने, पटना
मोबाइल 094306 87086

⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡
Diabetes Reversal Expert

21/05/2025

सरकार ने हाई अलर्ट जारी किया है

29 मई से 2 जून तक सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक कोई भी व्यक्ति बाहर (खुले आसमान के नीचे) नही निकलेगा क्योंकि मौसम विभाग ने यह बताया है कि तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से 55 डिग्री सेल्सियस तक जायेगा,जिससे अगर किसी भी व्यक्ति को घुटन महसूस हो या अचानक तबियत खराब हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं रूम के अंदर दरवाजा खोल कर रखे ताकि विंटीलेशन ना रहे,मोबाइल का प्रयोग कम करे, मोबाइल फटने की संभावना जताई जा रही है,कृपया सावधान रहें और लोगो को सूचित करें,दही , मट्ठा, बेल का जूस आदि ठंडे पेय पदार्थ का प्रयोग ज्यादा से ज्यादा करें।

*अत्यधिक महत्वपूर्ण सूचना *

नागरिक सुरक्षा महानिदेशालय नागरिकों और निवासियों को निम्नलिखित के प्रति सचेत करता है।

आने वाले दिनों में 47 से 55 डिग्री सेल्सियस के बीच बढ़ते तापमान और क्यूम्यलस बादलों की उपस्थिति के कारण अधिकांश क्षेत्रों में दमघोंटू माहौल होने के कारण, यहां कुछ चेतावनियां और सावधानियां दी गई हैं।

कारों में से इन्हें हटा दिया जाना चाहिए

1. गैस सामग्री, 2 लाइटर, 3. कार्बोनेटेड पेय पदार्थ
4. सामान्यतः इत्र और उपकरण बैटरियाँ
5. कार की खिड़कियाँ थोड़ी खुली (वेंटिलेशन) होनी चाहिए
6. कार के फ्यूल टैंक को पूरा न भरें
7.शाम के समय कार में ईंधन भरें
8.सुबह के समय कार से यात्रा करने से बचें
9. कार के टायरों को ज़्यादा न भरें, ख़ासकर यात्रा के दौरान।

बिच्छुओं और सांपों से सावधान रहें क्योंकि वे अपने बिलों से बाहर निकलेंगे और ठंडी जगहों की तलाश में पार्क और घरों में प्रवेश कर सकते हैं।

खूब पानी और तरल पदार्थ पियें,सुनिश्चित करें कि गैस सिलेंडर को धूप में न रखें, सुनिश्चित करें कि बिजली मीटरों पर अधिक भार न डालें और एयर कंडीशनर का उपयोग केवल घर के व्यस्त क्षेत्रों में करें, विशेषकर अत्यधिक गर्मी के समय में। और दो तीन घंटे के बाद 30 मनिट्स का रेस्ट ज़रूर दे। बाहर 45-47° घर पे AC 24-25° पर ही चेलाएँ,सेहत और तबियत ठीक रहेगी सूरज की रोशनी के सीधे संपर्क में आने से बचें, खासकर सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच।

अंत में: कृपया इस जानकारी को जरूर साझा करें क्योंकि सब लोग नहीं जानते होंगे और हो सकता है कि वे इसे पहली बार पढ़ रहे हों।

सादर, नागरिक सुरक्षा महानिदेशालय

19/04/2025

एलोपैथ होम्योपैथ आयुर्वेदिक यूनानी सब करके देख लिया, ऐम्स, पीजीआई, फोर्टिस, मैक्स हॉस्पिटल से भी निराश रोगी मिलें
हमारा लक्ष्य बीमारी को जड़ से दूर करना है, याद रखें रोग का जड़ से निदान न होना घातक हो सकता है और हमेशा की परेशानी बनी रहती है
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🚨 "डिजिटल अर्रेस्ट" के लिए फर्जी कॉल पैसे ऐंठने के लिए घोटाले हैं ! 🚨ऐसी कॉल से सावधान रहें !❌ घबराएँ नहीं ! - डिजिटल अर...
19/04/2025

🚨 "डिजिटल अर्रेस्ट" के लिए फर्जी कॉल पैसे ऐंठने के लिए घोटाले हैं ! 🚨

ऐसी कॉल से सावधान रहें !

❌ घबराएँ नहीं ! - डिजिटल अर्रेस्ट जैसी कोई चीज़ नहीं होती।

❌ शेयर न करें ! - कभी भी व्यक्तिगत या वित्तीय जानकारी का खुलासा न करें।

❌ भुगतान न करें !

✅ तुरंत https://cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें या मदद के लिए 1930 पर कॉल करें।

📢 इस 90वीं वर्षगांठ पर, RBI कहता है...जानकार बनिए, सतर्क रहिए !

🔗 अधिक जानकारी के लिए rbikehtahai.rbi.org.in/da पर जाएं।

📌 भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जनहित में जारी !

यदि आप दोस्तों को भेज सकते हैं तो ज़रूर भेजें 🙏

इंसान ही इंसान को खा रहे हैं 🥹 #वायरल    #मेडिसिनफ्रीलाइफ  #कैंसरसेबचाव        #कैंसर  #लालच
18/04/2025

इंसान ही इंसान को खा रहे हैं 🥹
#वायरल

#मेडिसिनफ्रीलाइफ
#कैंसरसेबचाव



#कैंसर
#लालच

11/04/2025

 #लालचसड़ी सब्जी, कीड़े वाले मसाले, जानवर का कटा सिर... Momos फैक्ट्री का हाल देख छोड़ देंगे खानाबिजनेस कम लालच ज़्यादा....
20/03/2025

#लालच
सड़ी सब्जी, कीड़े वाले मसाले, जानवर का कटा सिर... Momos फैक्ट्री का हाल देख छोड़ देंगे खाना
बिजनेस कम लालच ज़्यादा..
Momos Factory Raid: अगर आप भी मोमोज खाने के शौकीन हैं तो सावधान हो जाएं. मोमोज फैक्ट्री का हैरान करने वाला वीडियो सामने आया है, जिसे देखकर आप मोमोज खाने से पहले सोचेंगे ज़रूर
😭😭😭😭😭😭😭😭😭😭😭😭

No Meat मछली हमारे शरीर में कैसे काम करती है जानते हैं इस बारे में यह व्यापक रूप से माना जाता है कि देश या समुदाय जो अपन...
26/01/2025

No Meat मछली हमारे शरीर में कैसे काम करती है जानते हैं इस बारे में
यह व्यापक रूप से माना जाता है कि देश या समुदाय जो अपने आहार में मछली सेवन करतें हैं, दूसरों की तुलना में अधिक बुद्धिमान होते हैं| शोधकर्ताओं ने साबित किया है कि कुछ पोषक तत्व जो मस्तिष्क के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं, वे मछली के तेल में बहुत ज्यादा मात्रा में पाए जाते हैं| फैटी एसिड डोकोसा हैक्साइनोइक एसिड (DHA) मस्तिष्क में बड़ी मात्रा में होता है परन्तु मानव शरीर इस फैटी एसिड को उस मात्रा में नहीं उत्पन्न कर पाता, जितनी मस्तिष्क को आवश्यकता होती है| यह आम तौर पर मांस, अण्डा, मछली विशेष रूप से मछली तेल में पाया जाता है, और आहार द्वारा शरीर की कमी को पूरा करता है| मैकरल (Meckerel), सार्डीन (sardine), हैरींग (Herring), और टूना (Tuna) मछलियों में DHA पर्याप्त मात्रा में होता है परन्तु कॉड (Cod), plaice or Monk Fish में DHA केवल जीगर (Liver) में पाया जाता है| मछली Elcosa Pentaenoic Acid (EPA) और डोकोसा हैक्साइनोइक एसिड में समृद्ध है और यह पोली अन्सेच्युरेटिड फैटी एसिड बहुत महत्वपूर्ण है| ऐसा माना जाता है कि EPA और DHA आहार में कम से कम 200 मिली ग्राम प्रतिदिन होने चाहिए और यह मात्रा आसानी से एक सप्ताह में एक बार मछली खाने से प्राप्त हो सकती है| एक शोध में पाया गया है कि नर बानरों और चूहों को यह डोकोसा हैक्सानोइक एसिड (DHA) समृद्ध आहार खिलाने से उनकी सिखने की क्षमता में काफी सुधार पाया गया| कुछ दृष्टि की जागरूकता में भी वृद्धि पाई गयी| ऐसे प्रयोगों द्वारा यह निष्कर्ष निकाला जाता है कि DHA आंखों की रोशनी बढ़ाने में और त्वचा सम्बन्धी समस्याओं को सुलझाने में मदद्गार होता है| DHA गठिया में होने वाली दर्द को भी कम करता है|

अपने हृदय की रक्षा के लिए मछली लें|

न्यू ओर्लीयंस, ब्रीघम और महिला अस्पताल में वार्षिक अमेरिकन हार्ट असोसिएशन की बैठक में चिकित्सकों ने कहा – कि ओमेगा - 3 फैटी एसिड जो कि सालमन, मैकरल, टूना और सार्डीन्स में पाया जाता है, वह ऊतकों और धमनियों में प्रवेश कर हृदय की रक्षा करता है| उन्होंने कहा कि सप्ताह में कम-से-कम एक बार मछली खाने से अचानक हृदय गति रुकने से मरने की संभावना आधी हो जाती है यह निष्कर्ष 22000 पुरूष चिकित्सकों पर 12 साल के शोध पर आधारित है| यह पाया गया कि जो लोग सप्ताह में कम से कम एक बार फैटी मछली खातें हैं, उनकी हृदय सम्बन्धी समस्यायें 50 प्रतिशत कम हो जाती है| यह हालांकि मछली का उपयोग अचानक मृत्यु के जोखिम को कम करने में सहायक होता है, परन्तु ज्यादा मछली खाने से यह बहुत अधिक अंतर नहीं लाता| ओमेगा - 3 फैटी एसिड हृदय गति को बढ़ाकर रक्त के थक्के जमने से बचाता है और हृदय धमनियों में प्लाक बनने से रोकता है|

ब्लड प्रैशर को कम करने के लिए मछली लें|

कुछ रक्त चाप से पीड़ित लोगों में ओमेगा -3 पोलीअनसैचुरेटिड युक्त मछली खाने से ब्लड प्रैशर में गिरावट पायी गयी| जौन हैकिन्स मेडिकल स्कूल अमेरिका के चिकित्सकों के अनुसार 3 ग्राम या अधिक मछली का तेल हर रोज लेने से ब्लड प्रैशर में लगभग सिस्टोलिक 5.5 mm Hg. और डायस्टॉलिक प्रैशर में लगभग 3.5 mm Hg. की गिरावट पायी गयी| यह उच्च रक्त चाप वाले लोगों में अधिक प्रभावी नहीं|

कर्क रोग से बचने के लिए मछली लें|

वैज्ञानिक यह कह रहें हैं कि अपने आहार में मछ्ली लेने से कुछ प्रकार के कैंसर से बचा जा सकता है| मनुष्य में अभी प्रमाणित नहीं हुआ है, परन्तु पशुओं में अध्ययन के बाद पाया गया है कि ओमेगा – 3 फैटी एसिड समृद्धबसा कैंसर को कम करने में लाभदायक है| इसलिए अगली बार जब आप भोजन की योजना बनायें तो सप्ताह में कम-से-कम एक बार मछली लेना सुनिश्चित करें|

मछली हमारे लिए कितनी अच्छी हैं?

मछली गैर साकाहारियों के लिए सबसे लोकप्रिय खाद्य पदार्थों में से एक है| यह पोषक और स्वादिष्ट है| मछलियों का आहार बनावट, रंग, त्वचा, हड्डी और स्वाद में अलग-अलग होती है| यह एक विशिष्ट मांस है, जो फैटी एसिड में समृद्ध है| इनमें अनेक प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व होते हैं| मछली भारत और जापान के कई भागों में एक मुख्य भोजन है| मछली का स्वाद इसके मूल क्षेत्र पर निर्भर करता है कि वह खारे पानी की मछली है या ताजे पानी की| उसमें बसा कितनी मात्रा में है और उसे ताजा खाया जाये या प्रतिरक्षित करने के बाद| शायद ही कोई अन्य खाद्य पदार्थ इतने विविध तरीके से पकाया और खाया जाता है| ताज़ी मछली को स्टीम उबालकर, बेक करके, विभिन्न प्रकार की कढ़ी बनाकर, भूनकर, कटलेटस, आचार, चिप्पस, बिरयानी इत्यादि के रूप में सबसे अधिक पसंद किया जाता है, सुखाई हुई मछली तलके, चटनी बनाकर और पाउडर बनाकर भी ली जाती है|

मछलियों में आवश्यक अमाइनो एसिड की अधिकता होती है मछली प्रोटीन का एक अच्छा स्त्रोत है और मछली के शरीर का 17 से 20 प्रतिशत भाग प्रोटीन होती है| मछली की प्रोटीन सभी आवश्यक अमाइनो एसिड का अच्छा स्त्रोत है| मछली प्रोटीन लाइसीस और थ्रियोनियन (Lysine & Threonine) में समृद्ध होती है जो अनाज में पाए जाने वाले प्रोटीन के साथ एक पूरक आहार बनाती है| छोटी मछलियां यदि हड्डियों के साथ खाई जाए तो कैल्शियम की एक अच्छी स्त्रोत है| मछली के खारे भाग की ऊर्जा उसमें मौजूद वसा पर निर्भर करती है, जो कि मछली निर्माण करता है| प्रजनन के समय वसा में वृद्धि होती है और ऊर्जा को बढ़ाता है| अध्ययनों ने सिद्ध किया है कि मछली खाने से हृदय रोग में कमी होती है|

वैज्ञानिकों ने भी पता लगाया है कि ओमेगा – 3 फैटी एसिड आंखों और मस्तिष्क के विकास के लिए आवश्यक है| मछली मस्तिष्क के लिए भोजन है परन्तु यह कहना गलत होगा कि जो लोग मछली खाते हैं, वे शाकाहारी लोगों की अपेक्षा में मानसिक रूप से बेहतर हैं| मछली N-3 PUFA का एक अच्छा स्त्रोत है, बहुत सारे स्वास्थ्य लाभ देता है| जो लोग मछली को पसंद करते हैं, उन्हें सप्ताह में दो बार 100 से 200 ग्राम मछली लेनी चाहिए| मछली के तेल युक्त कैप्सूल जिनमें N-3 PUFA पाया जाता है वे Hypertrigly ceridaemia, thrombosis और सुजन वाली मछलियां जैसे कि मैकरल और ट्राउट चरम रोगों से राहत दिलाती है, और ऐसे मरीजों को नियमित रूप से मछली खानी चाहिए| यह प्रायः मछली में मौजूद ओमेगा – 3 फैटी एसिड या विटामिन – D के कारण होता है| खारे पानी की मछली आयोडीन, फास्फोरस और कैल्शियम में समृद्ध है| जो लोग नियमित तौर से खारे पानी की मछली खाते हैं उन्हें इन खनिजों की कमी नहीं होती| मछली में ताम्बा, विटामिन – A और D भी मौजूद होती है| शार्क, कॉड और हैलिवट मछलियों का लीवर तेल इन विटामिनों में बहुत समृद्ध है|

गर्भवती माताओं के लिए एक खोज:-

ब्रिस्टल महाविद्यालय के अनुसार मछली का प्रयोग गर्भावस्था के बाद के चरण में बच्चे के अंतर्निहित विकास में बहुत महत्वपूर्ण साबित हुआ है| शोध ने शाबित किया है कि मछलियों में ओमेगा – 3 फैटी एसिड की उपस्थिति बच्चे के स्नायुतन्त्र (मस्तिष्क) के विकास में सहायक है जिसके दौरान भ्रूण मात्री रक्त से अधिक पोषण प्राप्त करती है| इसका कारण यह है कि बढ़ा हुआ रक्त परिसंचरण (Blood circulation) प्लेसेन्टा में अधिक रक्त प्रभावित करता है और इसके फलस्वरूप भ्रूण मात्री रक्त से अधिक पोषण प्राप्त कर पाता है|

No Meat Only 🐟
12 हफ्ते तक अधिक वजन वाले महिला और पुरुष, जिनकी उम्र 45–70 वर्ष की थी| उन्हें दिन में एक बार 1.8 ग्राम DHA , डोकोसा हैक्सानोइक एसिड (ओमेगा-3 फैटी एसिड) दिया| सभी महिलाओं और पुरूषों का शरीर इन्सोलिन प्रतिक्रिया नहीं कर पाता था| यह पाया गया कि लगभग 70% प्रतिभागियों में इन्सोलिन से प्रतिरोधक क्षमता कम हुई और 50% लोगों में काफी अच्छे परिणाम पाये गये|

परन्तु कोई भी व्यक्ति जो मछली का तेल अधिक मात्रा में लेने पर विचार कर रहा है, उसे अपने चिकित्सक से सलाह अवश्य लेनी चाहिए, क्योंकि DHA रक्त को पतला करता है| इसके अतिरिक्त टाइप-2 डाईबीटीज से बचने के लिये नियमित व्यायाम और ग्लुकोफेज दवा भी सहायक होती है|

स्वास्थ्य और मस्तिष्क के लिये मछली लें :-

शोध के द्वारा पता चला है कि ट्राउट और अन्य तेल समृद्ध मछलियां हृदय रोग से होने वाली मृत्यु को रोकने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है| स्वास्थ्य विशेषज्ञों का सुझाव है कि सप्ताह में दो बार मछली लेनी चाहिए, जिसमें से एक बार ओमेगा-3 पोलीअनसेचुरेटीड फैटी एसिड समृद्ध होनी चाहिए | अनुसंधान इंगित करता है, कि इससे हार्ट अटैक का खतरा कम होता है, क्योंकि रक्त वसा तथा रक्त के थक्के जमना कम होता है| ट्राउट कम वसा, कम क्लोरीन (135 किलो कैलोरी प्रति 100 ग्राम) वाली मछली है| यह आयरन कैल्शियम सेलिनियम और विटामिन A,B1,B2,B6, और B12 का बहुत अच्छा स्त्रोत है| इसमें बहुमूल्य प्राकृतिक पाये जाते हैं, जो त्वचा और बालों की सही देखभाल करने में सहायता करते हैं| यह बेहद स्वादिष्ट और पकाने में सुविधाजनक होता है| एक स्वादिष्ट ट्राउट भोजन बनाने व खाने लिए 15 मिनट से भी कम समय लगता है| चिकित्सा अनुसंधान में पाया गया है कि शिशुओं में मस्तिष्क और रेटिना के विकास के लिए ओमेगा-3 अतिआवश्यक होता है| इसके अलावा गठिया में भी मछली का तेल सहायक होता है|

स्त्रोत :- ब्रिटिश न्यूट्रीशन फाऊंडेशन कॉन्फ्रेंस, 1 दिसम्बर, 1999

ट्राउट खाने से आप बुद्धिमान बन सकते हैं :-

ट्राउट ओमेगा–3 तेलों से भरपूर है और बैज्ञानिकों खाने का कहना है कि यह आपकी बुद्धि में सूधार कर सकती है| मस्तिष्क का 60% भाग वसा है जो कि एक विशेष प्रकार की वसा है| ट्राउट ओमेगा-3 तेलों में समृद्ध है जिसे “Good Fat” कहा जाता है क्योंकि यह मस्तिष्क की मुरम्मत और कोशिकाओं के पुनर्निर्माण में मदद करता है| आज कल हम ओमेगा-3 तेलों युक्त बहुत कम भोजन खाते हैं, परन्तु दिमाग को खुश रखने के लिए और सही तरह से चलाने के लिए ओमेगा-3 युक्त भोजन खाने की जरूरत होती है|

· ट्राउट प्रोटीन से भरा है जो आपको ऊर्जा देता है| (मांसपेशियों के निर्माण के लिए लाभकारी)

· ट्राउट में आवश्यक विटामिन और खनिज हैं|

· ट्राउट कैल्शियम में समृद्ध हैं| (स्वस्थ हड्डियों और दांतों के लिए)

· ट्राउट आयरन में समृद्ध है| (स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाओं के लिए)

· ट्राउट सेलिनियम में समृद्ध है| (स्वस्थ हृदय के लिए)

· ट्राउट विटामिन A का एक उत्तम स्त्रोत है| (स्वरूप त्वचा के लिए और संक्रमण से बचने के लिए)

· ट्राउट विटामिन D का एक उत्तम स्त्रोत है| (मजबूत दांतों और हड्डियों के लिए)

· ट्राउट में अनसैच्युरेटीड फैटी एसिड कम हैं|

· ट्राउट में ओमेगा-3 प्रचुर मात्रा में है|

ट्राउट / सालमानिड मछली खाने से महिलाओं में मधुमेह का इलाज :-शोधकर्ताओं ने पाया है कि मधुमेह रोग से ग्रसित महिलायें जो सप्ताह में पांच दिन मछली खाती है, उनमें हृदय रोग सम्बन्धी समस्याओं का ख़तरा 65% कम होता है|

मछली का तेल स्तन कैंसर के इलाज में सहायक :-

एक वैज्ञानिकों के समूह द्वारा किये गये अध्ययन के दौरान यह पाया गया कि ओमेगा -3 फैटी एसिड को चेतना शून्य कर देने वाली औषधी के साथ मिलाने से स्तन कैंसर के खिलाफ एक शक्तिशाली दवा तैयार की जा सकती है| यह दोनों तत्व कैंसर कोशिकाओं को बढ़ाने से रोकते हैं, और अन्य भागों में कैंसर का प्रसार भी रोकते हैं, डॉक्टर सारा रौलिग़ जो कि एक शोधकर्ता हैं, ने बताया कि दो प्रकार की ओमेगा -३ फैटी एसिड डी एच ए और ई पी ए को एनेस्थेटिक प्रोफेल में मिलाने से कैंसर का इलाज करने वाली दवाई बनाई जा सकती है| वर्तमान समय में यह कहना मुश्किल है कि यह दवाई कैंसर प्रभावित महिलाओं पर कितनी प्रभावी हो सकती है|

फैटी मछली का सेवन मानसिक गिरावट को कम कर सकता है :-

एक नये अध्ययन में पाया गया है कि मछली बसा का सेवन मध्य आयु में मस्तिष्क के कार्य प्रणाली में अहम भूमिका निभा सकता है| हैल्थ स्काउट (Health Scout) पत्रिका में एक रिपोर्ट के अनुसार नीदरलैंड में 1613 पुरूष एवं हिलायें, जिनकी आयु 45 से 70 वर्ष के बीच थी, का अध्ययन किया गया| ये आहार में अधिक मछली खातें हैं| जिस प्रकार की वसा को आहार में लिया जाता है उसका प्रभाव मनुष्य के मानसिक लचीलेपन, गति और समग्र कार्य पर होता है| उत्तरी यूरोपीय समुद्री तट रेखा पर बर्फीले पानी में पाई जाने वाली मैकरल (Meckerel), सालमन (Salmon), ट्राउट (Trout), हैरिंगस (Herrings), मछलियां फैटी मछलियां होती है| यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर युट्रेक्ट के शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग ओमेगा – 3 पोलीअन्सेच्युरेटिड फैटी एसिड युक्त आहार लेते हैं, और बसा युक्त मछली का सेवन करते हैं उनमें दुर्बल मस्तिष्क होने का खतरा कम होता है| एल्जाइमर रोग की शुरुआत से कई दशक पहले मानसिक कौशल में गिरावट

आ सकती है| अध्ययन कहते हैं कि मध्य आयु में मस्तिष्क के कार्यों की जांच करना मह्त्वपूर्ण है
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किडनी फेल, डेंगू के साथ, मेरठ से A case of kidney Fail with Dengue fever from meerut
02/12/2024

किडनी फेल, डेंगू के साथ, मेरठ से
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