
08/04/2024
जानिए विक्रम संवत, शक संवत एवं युगाब्ध में क्या अंतर है?
ऐतिहासिक प्रमाणों के अनुसार ‘विक्रम संवत' की शुरुआत राजा विक्रमादित्य ने 57 ई.पू में की थी। कहा जाता है कि राजा विक्रमादित्य ने अपनी सम्पूर्ण प्रजा का ऋण खुद चुकाकर इस संवत की शुरुआत की थी। विक्रम संवत में समय की पूरी गणना सूर्य और चाँद के आधार पर की गयी है यानि दिन, सप्ताह, मास और वर्ष की गणना पूरी तरह से वैज्ञानिक तरीके पर आधारित है। पौराणिक कथा के अनुसार चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना आरंभ की थी इसलिए हिन्दू इस तिथि को ‘नववर्ष का आरंभ’ मानते हैं। विक्रमादित्य ने भारत की इन तमाम कालगणना की सांस्कृतिक परम्पराओं को ध्यान में रखते हुए ही चैत्र शुक्ल प्रतिपदा की तिथि से ही अपने नवसंवत्सर संवत को चलाने की परम्परा शुरू की थी और तभी से समूचा भारत इस पुण्य तिथि का प्रतिवर्ष अभिवंदन करता है।
विक्रम संवत नेपाल और भारत में कई जगहों का सांस्कृतिक और आधिकारिक पंचांग है। भारत में यह अनेकों राज्यों में प्रचलित पारंपरिक पंचांग है। नेपाल के सरकारी संवत के रुप में विक्रम संवत ही चला आ रहा है। इसमें चन्द्र मास एवं सौर नक्षत्र वर्ष का उपयोग किया जाता है। इस संवत् का आरम्भ गुजरात में कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से और उत्तरी भारत में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से माना जाता है। बारह महीने का एक वर्ष और सात दिन का एक सप्ताह रखने का प्रचलन विक्रम संवत से ही शुरू हुआ। महीने का हिसाब सूर्य व चन्द्रमा की गति पर रखा जाता है। यह बारह राशियां बारह सौर मास हैं। जिस दिन सूर्य जिस राशि में प्रवेश करता है उसी दिन की संक्रान्ति होती है। पूर्णिमा के दिन, चन्द्रमा जिस नक्षत्र में होता है, उसी आधार पर महीनों का नामकरण हुआ है। चंद्र वर्ष, सौर वर्ष से 11 दिन 3 घटी 48 पल छोटा है, इसलिए प्रत्येक 3 वर्ष में इसमें 1 महीना जोड़ दिया जाता है।
‘शक संवत' भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है। ऐतिहासिक प्रमाणों के आधार पर शक संवत की शुरुआत 78 ई. पूर्व हुई थी। इस संवत का आरंभ कुषाण राजा ‘कनिष्क महान’ ने अपने राज्य आरोहण को उत्सव के रूप में मनाने और उस तिथि को यादगार बनाने के लिए किया था। कुषाण राजा कनिष्क को शक संवत का जनक माना जाता है। इस संवत की पहली तिथि चैत्र के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा है और इस तिथि पर कनिष्क ने राज्य सत्ता संभाली थी। यह संवत अन्य संवतों की तुलना में कहीं अधिक वैज्ञानिक और त्रुटिहीन है। शक संवत हर साल 22 मार्च को शुरू होता है। इस दिन सूर्य विषुवत रेखा के ऊपर होता है और इसी कारण दिन और रात बराबर के समय के होते हैं। शक संवत के दिन 365 होते हैं और इसका लीप ईयर भी अंग्रेजी ग्रेगोरियन कैलेंडर के साथ ही होता है। लीप ईयर होने पर शक संवत 23 मार्च को शुरू होता है और उसमें 366 दिन होते हैं। भारत में शक संवत का प्रयोग वराहमिरि द्वारा 500 ई. से किया जा रहा है।
कई लोग शक संवत और विक्रम संवत के अंतर में भेद नहीं कर पाते। ऐसे में इन दोनों के बीच अंतर करना आम इंसान के लिए मुश्किल हो जाता है। शक संवत और विक्रम संवत के महीनों के नाम एक ही हैं और दोनों ही संवतों में कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष हैं। इन दोनों संवतों में अंतर सिर्फ दोनों पक्षों के शुरू होने में है। विक्रम संवत में नया महीना पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष से होता है जबकि शक संवत में नया महीना अमावस्या के बाद शुक्ल पक्ष से शुरू होता है। इसी कारण इन संवतों के शुरू होने वाली तारीखों में भी अंतर आ जाता है। शक संवत में चैत्र के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा, उस महीने की पहली तारीख है जबकि विक्रम संवत में यह सोलहवीं तारीख है।
‘युगाब्ध' भी विक्रम संवत के साथ ही प्रारम्भ होता है इसी दिन 5124 वर्ष पहले धर्मराज युधिष्ठिर का राज्याभिषेक हुआ था
लेख साभार - राष्ट्रदेव