Siddha Ayurveda

Siddha Ayurveda साध्य असाध्य कष्ट साध्य सभी प्रकार के रोगों का उपचार सफलतापूर्वक किया जाता है।

आयुर्वेदिक नवरात्रि  🙏🙏🌹🌹🙏🙏जानिए इन 9 औषधियों को जिन्हें नवदुर्गा कहा गया है -(1) प्रथम शैलपुत्री (हरड़) : कई प्रकार के ...
08/10/2021

आयुर्वेदिक नवरात्रि
🙏🙏🌹🌹🙏🙏
जानिए इन 9 औषधियों को जिन्हें नवदुर्गा कहा गया है -

(1) प्रथम शैलपुत्री (हरड़) : कई प्रकार के रोगों में काम आने वाली औषधि हरड़ हिमावती है जो देवी शैलपुत्री का ही एक रूप है.यह आयुर्वेद की प्रधान औषधि है यह पथया, हरीतिका, अमृता, हेमवती, कायस्थ, चेतकी और श्रेयसी सात प्रकार की होती है.

(2) ब्रह्मचारिणी (ब्राह्मी) : ब्राह्मी आयु व याददाश्त बढ़ाकर, रक्तविकारों को दूर कर स्वर को मधुर बनाती है.इसलिए इसे सरस्वती भी कहा जाता है.

(3) चंद्रघंटा (चंदुसूर) : यह एक ऎसा पौधा है जो धनिए के समान है. यह औषधि मोटापा दूर करने में लाभप्रद है इसलिए इसे चर्महंती भी कहते हैं.

(4) कूष्मांडा (पेठा) : इस औषधि से पेठा मिठाई बनती है.इसलिए इस रूप को पेठा कहते हैं. इसे कुम्हड़ा भी कहते हैं जो रक्त विकार दूर कर पेट को साफ करने में सहायक है. मानसिक

रोगों में यह अमृत समान है.

(5) स्कंदमाता (अलसी) : देवी स्कंदमाता औषधि के रूप में अलसी में विद्यमान हैं. यह वात, पित्त व कफ रोगों की नाशक औषधि है.

(6) कात्यायनी (मोइया) : देवी कात्यायनी को आयुर्वेद में कई नामों से जाना जाता है जैसे अम्बा, अम्बालिका व अम्बिका.इसके अलावा इन्हें मोइया भी कहते हैं.यह औषधि कफ, पित्त व गले के रोगों का नाश करती है.

(7) कालरात्रि (नागदौन) : यह देवी नागदौन औषधि के रूप में जानी जाती हैं.यह सभी प्रकार के रोगों में लाभकारी और मन एवं मस्तिष्क के विकारों को दूर करने वाली औषधि है.

(8) महागौरी (तुलसी) : तुलसी सात प्रकार की होती है सफेद तुलसी, काली तुलसी, मरूता, दवना, कुढेरक, अर्जक और षटपत्र. ये रक्त को साफ कर ह्वदय रोगों का नाश करती है.

(9) सिद्धिदात्री (शतावरी) : दुर्गा का नौवां रूप सिद्धिदात्री है जिसे नारायणी शतावरी कहते हैं. यह बल, बुद्धि एवं विवेक के लिए उपयोगी है.
🙏🏻 *जय माता जी की* 🙏🏻
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पापेन जायते व्याधि: पापेन जायते जरा।पापेन जायते दैन्यं दु:खं शोको भयंकर:।।तस्मात् पापं महावैरं दोषबीजममंग्डलम्।भारते संत...
08/10/2021

पापेन जायते व्याधि: पापेन जायते जरा।
पापेन जायते दैन्यं दु:खं शोको भयंकर:।।
तस्मात् पापं महावैरं दोषबीजममंग्डलम्।
भारते संततं सन्तो नाचरन्ति भयातुरा:।।
(ब्रह्मखंड १६/५१-५२)
जो अपने धर्म के आचरण में लगा हुआ है, भगवान के मंत्र की दीक्षा ले चुका है, श्रीहरि की समाराधना में संलग्न है,गुरु, देवता और अतिथियों का भक्त है तपस्या में आसक्त है, व्रत और उपवास में लगा रहता है और सदा तीर्थ सेवन करता है, ऐसे पुरुषों के पास जरा- अवस्था नहीं जाती है और न दुर्जय रोग समूह ही उसपर आक्रमण करते हैं।
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🔱 या देवी सर्वभूतेषु, शक्ति रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।🙏🚩🚩नवरात्रि के पावन पर्व पर हार्दिक शु...
07/10/2021

🔱 या देवी सर्वभूतेषु, शक्ति रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।🙏🚩🚩
नवरात्रि के पावन पर्व पर हार्दिक शुभकामनाएं।🚩🚩
शक्ति की देवी, जगतजननी माँ दुर्गा, सबके जीवन में सुख, शांति, सुरक्षा, ऊर्जा, स्वास्थ्य और समृद्धि लेकर आएं।*
🚩🙏 🚩जय माँ जगदम्बा! जय माँ दुर्गे।
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साध्य-असाध्य-कष्ट साध्य किसी भी प्रकार के रोगों के उपचार हेतु निशुल्क वैद्यकीय परामर्श से घर बैठे दवाईयां मंगवाएं।समय प्...
07/10/2021

साध्य-असाध्य-कष्ट साध्य किसी भी प्रकार के रोगों के उपचार हेतु निशुल्क वैद्यकीय परामर्श से घर बैठे दवाईयां मंगवाएं।समय प्रातः 11 से दोपहर 3 बजे तक संपर्क करें:- 9172534679
(नोट: दवाईयां न मंगवाने पर वैद्य जी से बात करने का 300 रुपए शुल्क लगेगा )
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औषधीय गुणों से युक्त है नारियल:-हमारे देश में पाए जाने वाले फलों में से नारियल अत्यंत उपयोगी फल है, जो भूख के साथ-साथ प्...
06/10/2021

औषधीय गुणों से युक्त है नारियल:-
हमारे देश में पाए जाने वाले फलों में से नारियल अत्यंत उपयोगी फल है, जो भूख के साथ-साथ प्यास भी बुझाता है। इसे शुभ फल तथा श्रीफल भी कहते हैं।'श्री' यानी लक्ष्मी जी का फल।
एक चीनी कहावत के अनुसार नारियल में इतने गुण हैं जितने कि वर्ष में दिन नारियल का एक पेड़ उड़ाने का मतलब है अपने परिवार के लिए खाना-पीना कपड़े मकान बर्तन इंधन आदि का इंतजाम कर लेना।
भारतीय लोक व्यवहार में नारियल का विशेष महत्व है यह मांगलिक फल माना जाता है इसकी गिरी,जल, तेल, फूल ,जड़ तथा छाल आदि सभी के औषधीय उपयोग हैं।
नारियल की गिरी
1. आयुर्वेद के अनुसार नारियल की गिरी शीतल ,पुष्टिकारक , बलदायक वात-पित्त और रक्त विकार नाशक होती है यह देर से हजम होने वाली तथा मूत्राशय शोधक मानी जाती है।
2. नारियल की सूखी गिरी मधुर पौष्टिक स्वादिष्ट स्निग्ध रुचि कारक बल वीर्य वर्धक तथा मलाव रोधक होती है। नारियल में उच्च कोटि का प्रोटीन रहता है
3. पकने पर नारियल की गिरी में चिकनाई तथा कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बढ़ जाती है।
4. नारियल की कच्ची गिरी में अनेक एंजाइम होते हैं जो पाचन क्रिया में मददगार होते हैं। बवासीर,मधुमेह,गैस्ट्रिक और पेप्टिक अल्सर में यह रामबाण औषधि है।चेहरे की झुर्रियां मिटाने में यह काफी सहायक है;क्योंकि इसमें चिकनाई एवं स्टार्च होता है। नारियल की गिरी का दूध कुपोषण के शिकार बच्चों के लिए बहुत उपयोगी है।
5.नारियल मूत्र साफ लाता है और पौरूष में वृद्धि करता है, मासिक धर्म खोलता है,शरीर को मोटा बनाता है तथा मस्तिष्क की दुर्बलता को दूर करता है।
6. मुंह में छाले हो जाने पर या पान खाने से जीभ कट जाने पर सूखे नारियल की गिरी तथा मिस्त्री मिलाकर खाने से लाभ होता है।
7. कच्चे नारियल की 25 ग्राम गिरी महीन पीसकर अरंडी के तेल के साथ खाने से पेट के कीड़े निकल जाते हैं।
8. प्रातः भूखे पेट नारियल खाने से नकसीर आनी बंद हो जाती है।
9. नारियल की गिरी बादाम, अखरोट,पोस्ता के दाने मिलाकर सेवन करने से स्मरणशक्ति तथा शरीर की शक्ति बढ़ती है।
10. नारियल की गिरी मिस्त्री के साथ खाने से प्रसव दर्द नहीं होता तथा संतान गौरव वर्ण एवं हष्ट पुष्ट होती है।
11. नारियल की गिरी और शक्कर मिलाकर खाने से आंखों के सामान्य रोगों में लाभ होता है।
12. पुराने नारियल की गिरी को पीसकर उसमें थोड़ी सी हल्दी मिलाकर उसे गर्म करके चोट मोच पर बांधने से आराम मिलता है नारियल की गिरी कब्ज दूर करने में सहायक होती है यह हाथ में चिकनाहट पैदा कर देती है।
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सर्दियां आ रही हैं जानिए गर्म पानी के लाभ:-
02/10/2021

सर्दियां आ रही हैं जानिए गर्म पानी के लाभ:-

*"दिमाग" से जुड़े ग़ज़ब के रोचक तथ्य.!*अगर 5 से 10 मिनट तक दिमाग में ऑक्सीजन की कमी हो जाए तो यह हमेशा के लिए डैमेज या क्...
02/10/2021

*"दिमाग" से जुड़े ग़ज़ब के रोचक तथ्य.!*

अगर 5 से 10 मिनट तक दिमाग में ऑक्सीजन की कमी हो जाए तो यह हमेशा के लिए डैमेज या क्षतिग्रस्त हो सकता हैं!

*दिमाग पूरे शरीर का केवल 2% होता हैं लेकिन यह पूरी बाॅडी का 20% खून और ऑक्सीजन अकेला इस्तेमाल कर लेता हैं!*

हमारा दिमाग़ 40 साल की उम्र तक बढ़ता रहता हैं!

*हमारे दिमाग के 60% हिस्से में चर्बी होती हैं इसलिए यह शरीर का सबसे अधिक चर्बी वाला अंग हैं!*

जो बच्चे पाँच साल का होने से पहले दो भाषाएँ सीखते है उनके दिमाग की संरचना थोड़ी सी बदल जाती हैं!

*बचपन के कुछ साल हमें याद नही रहते क्योंकि उस समय तक हिप्पोकैम्पस (HIPPOCAMPUS) डेवलप नही होता, यह किसी चीज को याद रखने के लिए जरूरी हैं!*

छोटे बच्चे इसलिए ज्यादा सोते हैं क्योंकि उनका दिमाग़ उनके शरीर द्वारा बनाया गया 50% ग्लूकोज इस्तेमाल करता हैं!

*2 साल की उम्र में किसी भी उम्र से ज्यादा ब्रेन सेल्स (Brain cells) होती हैं!*

अगर आपने पिछली रात शराब पीयी थी और अब आपको कुछ याद नही हैं तो इसका मतलब ये नही हैं कि आप ये सब भूल गए हो बल्कि ज्यादा शराब पीने के बाद आदमी को कुछ नया याद ही नही होता!

*एक दिन में हमारे दिमाग़ में 70,000 विचार आते हैं और इनमें से 70% विचार Negative (उल्टे) होते हैं!*

हमारे दिमाग की मेमोरी या याददाश्त अनलिमिटेड होती हैं यह कंप्यूटर की तरह कभी नही कहेगा कि मेमोरी फुल हो गई!

*अगर शरीर के आकार को ध्यान में रखा जाए तो मनुष्य का दिमाग़ सभी प्रणीयों से बड़ा हैं। हाथी के दिमाग का आकार उसके शरीर के मुकाबले सिर्फ 0.15% होता हैं बल्कि मनुष्य का 2%.*

जब हमें कोई इग्नोर या रिजेक्ट करता हैं तो हमारे दिमाग को बिल्कुल वैसा ही महसूस होता हैं जैसा चोट लगने पर!

*जिस घर में ज्यादा लड़ाई होती हैं उस घर के बच्चों के दिमाग पर बिल्कुल वैसा ही असर पड़ता हैं जैसा युद्ध का सैनिकों पर!*

टी.वी. देखने की प्रक्रिया में दिमाग़ बहुत कम इस्तेमाल होता है और इसलिए इससे बच्चों का दिमाग़ जल्दी विकसित नहीं होता! बच्चों का दिमाग़ कहानियां पढ़ने से और सुनने से ज्यादा विकसित होता है क्योंकि किताबों को पढ़ने से बच्चे ज्यादा कल्पना करते हैं!

*अगर आप खुद को मना लें कि हमने अच्छी नींद ली हैं तो हमारा मस्तिष्क भी इस बात को मान जाता हैं!*

एक ही बात को काफी देर तक टेंशन लेकर सोचने से हमारा दिमाग कुछ समय के लिए सोचने, समझने और निर्णय लेने की क्षमता को खो देता हैं।

*दिमाग तेज करने के लिए सिर में मेहंदी लगाए और दही खायें। क्योंकि दही में अमीनो ऐसिड होता हैं जिससे टेंशन दूर होती हैं और दिमाग़ की क्षमता बढ़ती हैं।*

*एक प्रश्न...*
दिमाग तेज करने का सबसे आसान उपाय ?
*उत्तर...*
दिमाग तेज करने का सबसे आसान उपाय हैं, जमकर पानी पाएँ। 1 गिलास पानी पीने से दिमाग 14% तेजी से काम करता हैं। जब तक प्यास शांत नही होती तब तक मनुष्य के दिमाग को ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होती हैं। औषधि में ब्रह्म रसायन हमे नित्य दूध के साथ लेना ही चाहिए बच्चों के लिए तो यह अमृत समान है,ब्राह्मी बूटी भी सर्वोत्तम दवा है।
*दिमाग़ को ठण्डा रखिये।*
सिद्धा आयुर्वेदा
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*पपीता : एक उत्तम टॉनिक*पका हुआ पपीता वायु व पित्त दोषनाशक, वीर्यवर्धक, ह्रदय के लिए हितकारी, मल-मूत्र साफ़ लानेवाला तथा ...
30/09/2021

*पपीता : एक उत्तम टॉनिक*

पका हुआ पपीता वायु व पित्त दोषनाशक, वीर्यवर्धक, ह्रदय के लिए हितकारी, मल-मूत्र साफ़ लानेवाला तथा यकृत व तिल्ली वृद्धि, मंदाग्नि, आँतो के कृमि एवं उच्च रक्तचाप आदि रोगों में लाभकारी हैं | छोटे बच्चों और दूध पिलानेवाली माताओं के लिए पपीता टॉनिक का काम करता हैं | यह पाचनशक्ति को सुधारता है | जिन्हें कब्ज की शिकायत हमेशा रहती है, उन्हें पका पपीता नियमित खाना चाहिए |

पपीते में विटामिन ‘ए’ प्रचुर मात्रा में होता हैं, जिससे नेत्रज्योति बढती है और रतौंधी रोग ठीक होता है | इसमें विद्यमान विविध एंजाइमों के कारण आँतों के कैंसर से रक्षा होती है | पपीते को शहद के साथ खाने से पोटैशियम तथा विटामिन ‘ए’, ‘बी’, ‘सी’ की कमी दूर होती है |

*👉🏻औषधीय प्रयोग*

*अजीर्ण एवं कब्ज :-* पके पपीते पर सेंधा नमक, जीरा और नींबू का रस डालकर कुछ दिन नियमित सेवन करने से मंदाग्नि, कब्ज, अजीर्ण तथा आँतों की सुजन, अपेंडिक्स में लाभ होता हैं |

*बवासीर :-* सुबह खाली पेट पपीता खाने से शौच साफ होता व बवासीर में आराम मिलेगा |

*बच्चों का विकास :-* रोज थोडा पपीता खिलाने से बच्चों का शरीर मजबूत एवं तंदुरस्त बनता है।

*दुधवृद्धि :-* पपीता खाने से दूध पिलाने वाली माताओं का दूध बढ़ जाता है |

*पेट में कीड़े :-* कच्चे पपीते का रस २० ग्राम सुबह पीने से पेट के कीड़े नष्ट होते हैं।

*👉🏻🔶सावधानियाँ :-*
1. ये सभी गुण प्राकृतिक रूप से पेड़ पर पके हुए देशी पपीतों के हैं, इंजेक्शन अथवा रसायन द्वारा पकाये गये या फुलाये गये पपीतों में ये गुण नहीं पाये जाते |

2. सगर्भावस्था में, मासिक स्त्राव अधिक आने पर, खुनी बवासीर व गर्मी से उत्पन्न बीमारियों में तथा गर्म तासीर एवं पित्त व रक्त विकार वाले पपीते का सेवन न करें |

3. कच्चा पपीता आँतों का संकोचन करने वाला तथा कफ, वायु व पित्त वर्धक होता है।
सिद्धा आयुर्वेदा
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*क्या आप जानते हैं कि माटी है अनमोल...**जानिये मिट्टी की अद्भुत शक्ति*मिट्टी के अंदर मौजूद 18 प्रकार के सूक्ष्म पोषक तत्...
30/09/2021

*क्या आप जानते हैं कि माटी है अनमोल...*
*जानिये मिट्टी की अद्भुत शक्ति*
मिट्टी के अंदर मौजूद 18 प्रकार के सूक्ष्म पोषक तत्व भोजन को स्वादिष्ट एवं पौष्टिक बनाती है।

हजारों वर्षों से हमारे यहाँ मिट्टी के बर्तनों का उपयोग होता आया है अभी कुछ वर्षों पूर्व तक गाँवों में वैवाहिक कार्यक्रमों में तो मिट्टी के बर्तन ही उपयोग में आते थे।
घरों में दाल पकाने, दूध गर्म करने, दही जमाने, चावल बनाने और अचार रखने के लिए मिट्टी के बर्तनों का उपयोग होता रहा है।
मिट्टी के बर्तन में जो भोजन पकता है उसमें सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी नहीं होती जबकि प्रेशर कुकर व अन्य बर्तनों में भोजन पकाने से सूक्ष्म पोषक तत्व कम हो जाते हैं जिससे हमारे भोजन की पौष्टिकता कम हो जाती है।
भोजन को धीरे-धीरे ही पकना चाहिये तभी वह पौष्टिक और स्वादिष्ट पकेगा और उसके सभी सूक्ष्म पोषक तत्व सुरक्षित रहेंगे।

महर्षि वागभट्ट जी के अनुसार भोजन को पकाते समय उसे सूर्य का प्रकाश और पवन का स्पर्श मिलना आवश्यक है जबकि प्रेशर कुकर में पकाते समय भोजन को ना तो सूर्य का प्रकाश और ना ही पवन का स्पर्श मिल पाता, जिससे उसके सारे पोषक तत्व क्षींण हो जाते हैं और प्रेशर कुकर एल्यूमीनियम का बना होता है जो कि भोजन पकाने के लिये सबसे घटिया धातु है क्योंकि एल्यूमीनियम भारी धातु होती है और यह हमारे शरीर से अपशिष्ट पदार्थ के रूप में बाहर नहीं निकल पाती है।
इसी कारण एल्यूमीनियम के बर्तनों का उपयोग करने से कर्इ प्रकार के गंभीर रोग होते हैं जैसे अस्थमा, वात रोग, टी.बी., मधुमेह (डायबिटीज), पक्षाघात (पेरेलिसिस), स्मरण शक्ति का कम होना आदि!
वैसे भी भाप के दबाव से भोजन उबल जाता है पकता नहीं है।

आयुर्वेद के अनुसार जो भोजन धीरे-धीरे पकता है वह भोजन सबसे अधिक पौष्टिक होता है। भोजन को शीघ्र पकाने के लिये अधिक तापमान का उपयोग करना सबसे हानिकारक है।
हमारे शरीर को प्रतिदिन 18 प्रकार के सूक्ष्म पोषक तत्व चाहिए जो मिट्टी से ही आते है जैसे-कैल्शियम, मैग्नेशियम, सल्फर, आयरन, सिलिकॉन, कोबाल्ट, जिप्सम आदि।
मिट्टी के इन्ही गुणों और पवित्रता के कारण हमारे यहाँ पुरी के मंदिरों (उड़ीसा) के अलावा कई मंदिरों में आज भी मिट्टी के बर्तनों में प्रसाद बनता है।
अधिक जानकारी के लिए पुरी के मंदिर की रसोईं देखें।

मिट्टी के बर्तनों का उपयोग आज के समय में क्यों है जरूरी, जानिए इस्तेमाल करने का तरीका।

आजकल हमारे पास कई तरह के नॉनस्टिक पैन या बर्तन हैं लेकिन मिट्टी के बर्तन में खाना पकाने के अपने फायदे हैं जिनके बारे में हम में से बहुत से लोगों को जानकारी नहीं है. मिट्टी के बर्तन में खाना पकाने से न केवल कई स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं बल्कि यह हमारे खाना पकाने की प्रक्रिया को भी आसान बनाता है और साथ ही हमें अधिक स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन देता है. इसके कई स्वास्थ्य लाभों के कारण, आयुर्वेद भी मिट्टी के बर्तन में भोजन पकाने का सुझाव देता है. इसके अलावा मिट्टी के बर्तन में खाना बनाना एक सामान्य बर्तन में पकाने से बहुत बेहतर है क्योंकि यह हमारे द्वारा खाए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता में सुधार करता है.

खाना पकाने के लिए हमें मिट्टी के बर्तनों का उपयोग क्यों करना चाहिए?
मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने की शुरुआत करने का सबसे ठोस कारण यह है कि यह आपके भोजन में हानिकारक धातुओं की कमी नहीं करता है. मिट्टी के बर्तन न केवल आपके और आपके भोजन के लिए बल्कि पर्यावरण के लिए भी अच्छे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि मिट्टी के बर्तन में खाना पकाने के स्वास्थ्य लाभ बहुत बड़े हैं. सबसे पहले, वे आपके भोजन में लोहा, कैल्शियम, फॉस्फोरस, सल्फर और मैग्नीशियम जैसे कई आवश्यक पोषक तत्व शामिल करते हैं जो शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं. मिट्टी के बर्तन में खाना पकाने के लिए भी तेल की आवश्यकता नहीं होती है और इसलिए, यह देखा गया है कि मिट्टी के बर्तनों में पकाया गया भोजन किसी अन्य बर्तन में तैयार भोजन की तुलना में वसा में कम होता है।

मिट्टी के बर्तन के फायदे
मिट्टी के बर्तन किफायती और आसानी से उपलब्ध होते हैं
कई दुकानें हैं जो मिट्टी के बर्तन बेचती हैं जिससे आपको इसे खरीदने में कोई परेशानी नहीं होगी. किसी भी अन्य प्रकार के खाना पकाने के बर्तन की तुलना में मिट्टी के बर्तन काफी सस्ते होते हैं. आप अपनी जेब बिना ढीले किये भी इन्हें आसानी से विभिन्न आकारों में खरीद सकते हैं.

यह भोजन के पोषण को बनाए रखते हैं
मिट्टी के बर्तन भोजन के पोषण को बनाए रखते हैं जो आमतौर पर अन्य प्रकार के बर्तनों में खो जाता है. मिट्टी के बर्तनों में थर्मल जड़ता मांस को लंबे समय तक कोमल और नरम रखने के विशेष गुण होते है जिससे वह जल्दी सख्त नहीं होता.

कम तेल का उपयोग
इसकी गर्मी प्रतिरोध और धीमी गति से खाना पकाने के कारण, भोजन अपने सभी तेलों और नमी को बरकरार रखता है; नतीजतन, आपको अपने भोजन को नमी प्रदान करने के लिए अतिरिक्त तेल और वसा की आवश्यकता नहीं होगी।

मिट्टी के बर्तन स्वादिष्ट भोजन सुनिश्चित करते हैं
मिट्टी के बर्तनों की धीमी गति से खाना पकाने और झरझरा प्रकृति के कारण, बर्तन में नमी और सुगंध बिना किसी पोषक तत्व को खोए रहती है, जिससे यह स्वादिष्ट होता है.इसके अलावा, इसमें खाना बनाने से मिट्टी का स्वाद आपके खाने को और स्वादिष्ट बनाता है जो कि आपको किसी अन्य बर्तन में नहीं मिल सकता है.

मिट्टी के बर्तनों का उपयोग कैसे करें
हर बार मिट्टी के बर्तनों का उपयोग करने से पहले आपको इसे पानी में भिगोने की ज़रूरत होती है (अगर बिना पका हुआ हो). कम से कम 10-15 मिनट के लिए इसको ठंडे पानी में डुबो दें. फिर यह खाने पकाने के लिए तैयार है. यह भी याद रखें कि मिट्टी के बर्तन तापमान परिवर्तन के प्रति संवेदनशील होते हैं और आसानी से टूट जाते है इसलिए इसे कभी भी अत्यधिक तापमान में न रखें।
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