10/07/2019
🌹🌹🌹एलर्जी🌹🌹🌹
बदलते मौसम के सुबह शाम के तापमान के परिवर्तन,धूल-धुएं और खुशबू से शुरू हो जाने वाली छींके,नाक बहने, गले में छिलन का इलाज, एंटीबायोटिक दवाओं से, विक्स इन्हेलर जैसी चीजों को सूंघने से टेम्परेरी तौर पर हो तो जाता है,पर वही स्थिति अति शीघ्र फिर से बन जाती है।
🌷🌷यह सर्दी,जुकाम नहीं है,एलर्जी है,जो शारीरिक रोग प्रतिरोधक शक्ति कम होने का परिणाम है।🌷🌷
प्रतिरोधक शक्ति के लिए---
🍀शरीर से पसीना न निकलने देना।
🍀बाजार की चटपटी चीजें व पैकिंग वाली चीजें,जिनमें प्रिजर्वेटिव जैसे केमिकल होते ही हैं,खाना।
🍀विटामिन वाली प्राकृतिक चीजें,जैसे सभी मौसमी फल,सलाद,पत्ते वाली हरी सब्जियां इत्यादि न खाना।
🍀व्यायाम,योगासन,खेल कूद,की कमी,जिससे पसीना निकले।
🍀कूलर,AC का प्रयोग,जिनसे पसीना आये ही न,शरीर को ठंडा रखने के लिए,कोल्ड ड्रिंक,आइसक्रीम इत्यादि का प्रयोग करना।
🍀चटपटी,तेज मिर्च मसाले वाली चीजें जैसे---पिज्जा,बर्गर,चाउमीन,नूडल्स,मोमोज,गोलगप्पे,चाट वगैरह खाना।
🍀शारीरिक मालिश नहीं,धूप का सेवन नहीं।
🍀भारी कामों से बचना।
🍀आयुर्वेदानुसार सुझाये गए सोने,उठने,खाने,पीने के के नियम न मानना।
🍀बाजारी रेडीमेड चीजों----रसोई के मसाले, पैकेट बन्द,पकोड़े का पौडर,लहसुन(गार्लिक पेस्ट),डोसे का पैकेट,गुलाब जामुन रेडीमेड पैकेट,ठंडाई का पैकेट,वगैरह वगैरह का प्रयोग करना।
🍀माइक्रो वेव ओवन,एल्युमिनियम का कुकर,पानी का RO वाला फिल्टर,नॉन स्टिक बर्तन,एल्युमिनियम व प्लास्टिक के बर्तनों व डब्बों का प्रयोग।
🍀हर समय ठंडा पानी पीना।
🍀नहाने में गुनगुना पानी प्रयोग न करके ज्यादा गर्म पानी का प्रयोग करना।
🍀कॉस्मेटिक्स के रूप में प्राकृतिक वस्तुओं का प्रयोग न कर केमिकल वाली कॉसमटिक्स का प्रयोग।
🍀हवन,देसी घी का दीपक,धूप इत्यादि से घर का वातावरण शुद्ध न करना।
🍀कीड़ों,मकोड़ों,मख्खियों, मच्छरों,को मारने के प्राकृतिक साधनों को प्रयोग न कर केमिकल वाली वस्तुओं का प्रयोग।
🍀सर में तेल न लगाना,नाभि में तेल न लगाना।
🍀स्नेक्स के रूप में---भुने चने,सिकी मूंगफली,मुरमुरे, सत्तू,परमल, का प्रयोग न करना।
🍀चाय,कॉफी का ज्यादा प्रयोग करना।
🍀तली चीजें का ज्यादा प्रयोग करना।
🍀सिंथेटिक कपड़ों,पर्दों, प्लास्टिक फर्नीचर का घर में होना।
🍀घर में तुलसी न होना,All Out का प्रयोग।
🍀छोटे बच्चों को बचपन में कड़वी जन्म घुट्टी न देना।
🍀बच्चों को देसी घरेलू इलाज,दादी के नुस्खे, होम्योपेथी दवा न देकर सीधे एलोपैथिक डॉ का इलाज कराना।
🍀घर में TV का ज्यादा चलना,शंख ध्वनि न करना।
🍀घर में प्राकृतिक धूप,हवा,रोशनी की कमी।
🍀सुबह शाम घर में मधुर संगीत,भजन की ध्वनि न होना।
🍀सभी पारिवारिक सदस्यों का एक साथ भोजन न करना।
🍀🍀🍀🍀
"एलर्जी " एक आम शब्द , जिसका प्रयोग हम कभी किसी ख़ास व्यक्ति से "मुझे एलर्जी है" के रूप में करते हैं. ऐसे ही हमारा शरीर भी ख़ास रासायनिक उद्दीपकों के प्रति अपनी असहज प्रतिक्रया को ' एलर्जी ' के रूप में दर्शाता है.
बारिश के बाद आयी धूप तो ऐसे रोगियों क़ी स्थिति को और भी दूभर कर देती है. ऐसे लोगों को अक्सर अपने चेहरे पर रूमाल लगाए देखा जा सकता है. क्या करें छींक के मारे बुरा हाल जो हो जाता है.
हालांकि एलर्जी के कारणों को जानना कठिन होता है , परन्तु कुछ आयुर्वेदिक उपाय इसे दूर करने में कारगर हो सकते हैं. आप इन्हें अपनाएं और एलर्जी से निजात पाएं !
🌷 नीम चढी गिलोय के डंठल को छोटे टुकड़ों में काटकर इसका रस हरिद्रा खंड चूर्ण के साथ 1.5 से 3 ग्राम का नियमित प्रयोग पुरानी से पुरानी एलर्जी में रामबाण औषधि है।
🌷गुनगुने निम्बू पानी का प्रातःकाल नियमित प्रयोग शरीर सें विटामिन - सी की मात्रा की पूर्ति कर एलर्जी के कारण होने वाले नजला - जुखाम जैसे लक्षणों को दूर करता है।
🌷अदरक, काली मिर्च , तुलसी के चार पत्ते , लौंग एवं मिश्री को मिलाकर बनायी गयी ' हर्बल चाय ' एलर्जी से निजात दिलाती है,यह बनी बनाई पतंजलि स्टोर से ""दिव्य पेय"" के नाम से मिलती है।
🌷बरसात के मौसम में होनेवाले विषाणु ( वायरस ) संक्रमण के कारण ' फ्लू ' जनित लक्षणों को नियमित ताजे चार नीम के पत्तों को चबा कर दूर किया जा सकता है।
🌷आयुर्वेदिक दवाई "" सितोपलादि चूर्ण ""एलर्जी के रोगियों में चमत्कारिक प्रभाव दर्शाती है।
🌷नमक के पानी से ' कुंजल क्रिया ' एवं ' नेती क्रिया " कफ दोष को बाहर निकालकर पुरानी से पुरानी एलर्जी को दूर करने में मददगार होती है।
🌷पंचकर्म की प्रक्रिया ""नस्य"" का चिकित्सक के परामर्श से प्रयोग ' एलर्जी ' से बचाव ही नहीं इसकी सफल चिकित्सा है।
🌷प्राणायाम में ""कपालभाती"" नियमित करना, एलर्जी से मुक्ति का सरल उपाय है।
कुछ सावधानियां जिन्हें अपनाकर आप एलर्जी से खुद को दूर रख सकते हैं : -
• धूल , धुआं एवं फूलों के परागकण आदि के संपर्क से बचाव.
• अत्यधिक ठंडी एवं गर्म चीजों के सेवन स